कोटा में गांडीव मैराथन के लिए एक्सपो, 21, 10 और 3 किमी की दौड़ में दिखेगा जोश
कोटा। भारतीय सेना के गांडीव डिवीजन के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में कोटा में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के तहत नयापुरा स्थित उम्मेद क्लब में सैन्य उपकरणों की विशेष प्रदर्शनी लगाई गई है। प्रदर्शनी में रूस, इजराईल, भारत, स्वीडन आदि देशो में निर्मित हथियार शामिल हैं।
आधुनिक सैन्य तकनीक, निगरानी प्रणालियों और विभिन्न श्रेणियों के रक्षा उपकरणों को प्रदर्शित किया गया है। आमजन के लिए यह प्रदर्शनी इसलिए भी खास है कि उन्हें सेना की तकनीकी क्षमता और उपकरणों को नजदीक से देखने-समझने का अवसर मिल रहा है।

श्री उम्मेद क्लब के सचिव लोकेंद्र सिंह राजावत ने बताया कि गांडीव डिवीजन की स्वर्ण जयंती को शहरवासियों के साथ साझा करने के उद्देश्य से यह आयोजन किया गया है। प्रदर्शनी में सीमा सुरक्षा और सैन्य अभियानों में उपयोग होने वाली आधुनिक तकनीक की जानकारी भी दी जा रही है। सिंदूर एवं कारगिल के युद्ध में उपयोग में आए हथियारों की श्रेणी के हथियार एक्पो रखे गए 24 व 25 सितम्बर यह एक्सो सुबह 9 से 5 बजे तक जारी रहेगा।
स्वर्ण जयंती समारोह की अगली प्रमुख कड़ी के रूप में 27 सितंबर को गांडीव मैराथन आयोजित होगी। इसमें 21 किलोमीटर, 10 किलोमीटर और 3 किलोमीटर की दौड़ प्रस्तावित है। आयोजन का उद्देश्य फिटनेस के साथ सेना और नागरिकों के बीच संवाद एवं सहभागिता को बढ़ावा देना है।
इंटरनेशनल धावक शक्ति सिंह हाड़ा ने बताया कि मैराथन के लिए पंजीकरण हो चुके हैं और हाड़ौती क्षेत्र से बड़ी संख्या में धावकों के शामिल होने की उम्मीद है। 21 और 10 किलोमीटर की दौड़ पुरुष एवं महिला वर्गों के लिए होगी, जबकि 3 किलोमीटर की फन रन में विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागी हिस्सा ले सकेंगे।
मैराथन का रूट उम्मेद स्टेडियम से शुरू होकर अर्जुन गेट और हल्दीघाटी गेट, माला फाटक, आर्मी स्कूल से होते हुए वापस उम्मेद स्टेडियम पहुंचेगा। आयोजन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
गांडीव डिवीजन के स्वर्ण जयंती समारोह के तहत 27 सितंबर को होने वाली कोटा गांडीव मैराथन 1.0 से पहले बुधवार को श्री उम्मेद क्लब में आयोजित एक्सपो में सेना के आधुनिक हथियारों और सैन्य उपकरणों की प्रदर्शनी ने सभी का ध्यान खींचा।
इस प्रदर्शनी में 10 मीटर से लेकर 20 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाले हथियार और उपकरण प्रदर्शित किए गए, इसी प्रकार के कई उपकरण कारगिल युद्ध से लेकर हाल ही के ऑपरेशन सिंदूर तक इस्तेमाल हो चुके हैं।
प्रदर्शनी के प्रमुख आकर्षण
- प्रदर्शनी में इस्राइल निर्मित बीएफएसआर (एसआर)-2129 राडार प्रणाली भी रखी गई, जो घुसपैठियों, वाहनों और हेलीकॉप्टरों तक की गतिविधि 18 किलोमीटर की दूरी से भांप सकती है। इसके साथ इस्राइली हैंड हेल्ड थर्मल इमेजर भी प्रदर्शित किया गया, जो रात्रि में भी 3 किलोमीटर दूर तक वाहनों की पहचान कर सकता है।
- भारत में निर्मित लेजर रेंज फाइंडर की सहायता से 80 मीटर से 20 किलोमीटर तक की दूरी मापी जा सकती है, जो तोपखाने और अन्य हथियार प्रणालियों के लिए सटीक लक्ष्य निर्धारण में मददगार है।
- इस प्रर्दशनी में साको टीआरजी-42 स्नाइपर राइफल, जो फिनलैंड में निर्मित है, दूर से सटीक निशाना साधने की क्षमता के लिए जानी जाती है। इसकी प्रभावी रेंज 1200 मीटर तक और मारक गति 900 मीटर प्रति सेकंड है।
- 9 एमएम पिस्टल 1ए, भारत में निर्मित यह हथियार सैनिकों की निजी सुरक्षा के लिए अहम है, जिसकी प्रभावी रेंज 15 मीटर तक है।
- एके-203 असॉल्ट राइफल प्रदर्शनी की सबसे आधुनिक राइफलों में शामिल रही। रूस में निर्मित इस 7.62 एमएम कैलिबर की राइफल का वजन खाली मैगजीन सहित 3.6 किलोग्राम है और इसकी अचूक निशाना क्षमता 800 मीटर तक है।
- टैंकभेदी हथियारों में फैगॉट लॉन्चर व कोनकुर्स मिसाइल प्रणाली प्रमुख रही, जो सेमी-ऑटोमैटिक कमांड टू लाइन ऑफ साइट (सैक्लोस) सिद्धांत पर काम करती है और इसकी अधिकतम रेंज 4000 मीटर तथा प्रहार क्षमता 600 मिमी कवच भेदन तक है।
- स्वीडन निर्मित 84 एमएम रॉकेट लॉन्चर एमके-III भी प्रदर्शनी का हिस्सा रहा, जिसकी विभिन्न प्रकार के गोलों (हीट, एचई, स्मोक) से रेंज 500 से 2100 मीटर तक जाती है।
- रूस में निर्मित ऑटोमेटिक ग्रेनेड सिस्टम-30 की मारक क्षमता 1700 मीटर तक है, जो सामान्य दर पर 50 और साइक्लिक दर पर 400 ग्रेनेड प्रति मिनट तक फायर कर सकता है। वहीं भारत निर्मित 81 एमएम मोर्टार की अधिकतम रेंज 5200 मीटर है।

