SOPA के मुताबिक कम आवक की वजह से मार्च के दौरान सॉल्वेंट इकाइयों की तरफ से सोयाबीन की क्रशिंग भी 6 महीने के निचले स्तर पर रही है, मार्च में सिर्फ 6.5 लाख टन सोयाबीन की क्रशिंग हो पायी है।
सोयाबीन की आवक 6 महीने के निचले स्तर पर, सॉल्वेंट इकाइयों की क्रशिंग भी घटी
SOPA के मुताबिक कम आवक की वजह से मार्च के दौरान सॉल्वेंट इकाइयों की तरफ से सोयाबीन की क्रशिंग भी 6 महीने के निचले स्तर पर रही है, मार्च में सिर्फ 6.5 लाख टन सोयाबीन की क्रशिंग हो पायी है।
30,500 किसानों ने मूल्य जोखिम के खिलाफ हेज करने के लिए एनसीडीईएक्स का उपयोग किया
• एक्सचेंज में पंजीकृत 165,000 से अधिक किसान।
• मार्च 31, 2017 तक वायदा सेगमेंट में ओपन इंटरेस्ट 9.18% से अधिक बढ़ गया।
• मार्च 2017 के महीने के लिए औसत कुल कारोबार 2785.98 करोड़ रुपये था।
गेल इंडिया के हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लेंडिंग
तकनीकी खराबी के कारण नया नोहरा के पास खेत में की इमरजेंसी लेंडिंग
कोटा। गेल इंडिया लिमिटेड के हेलीकॉप्टर की तकनीकी खराबी के चलते खेत में इमरजेंसी लेंडिंग करनी पडी। इमरजेंसी लेंडिंग बारां रोड पर सेमकोर फेक्ट्री के पीछे खेत में की गयी। हेलीकॉप्टर गेल की पाइपलाइनों की रूटीन पेट्रोलिंग पर था
हेलीकॉप्टर में सवार गेल इंडिया लिमिटेड के तीन कर्मचारी सकुशल है। यह विजयपुर से छबडा अटरू बोरडी हाते हुए गढेपान की पेट्रोलिंग पर था तभी तकनीकी खराबी आ जाने से नया नोहरा के पास खेत में इमरजेंसी लेंडिंग करनी पडी। सुचना पर बोरखेडा थाने के सीआई लोकेन्द्र पालीवाल भी मौके पर पहुंचे।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने नई कंपनियों को एक दिन में जारी किया पैन
विद्युत उत्पादन निगम को निजी हाथों में सौंपा तो जनता को मिलेगी महंगी बिजली
वार्ता : आरवीयूएन संयुक्त संघर्ष समिति की कोर टीम मंगलवार को उर्जा राज्य मंत्री एवं सीएमडी से मिली। आंकडें देकर बताया कि सभी पावर प्लांट लाभ में चल रहे, फिर विनिवेश की जल्दबाजी क्यों!
कोटा। राज्य विद्युत उत्पादन निगम लि. (आरवीयूएनएल) के निजी क्षेत्र में विनिवेश का विरोध कर रही संयुक्त संघर्ष समिति के 11 सदस्यीय प्रतिनिधीमंडल ने मंगलवार को उर्जा राज्य मंत्री पुष्पेंद्र सिंह एवं सीएमडी एनके कोठारी से वार्ता की। समिति के संरक्षक जीएस भदौरिया ने बताया कि राज्य के सभी पावर प्लांटों पर अधिकारी, इंजीनियर्स एवं कर्मचारी उत्पादन निगम के बिजलीघरों को निजी हाथों में सौंपने के निर्णय का जनांदोलन कर कड़ा विरोध कर रहे हैं।
समिति ने सामूहिक निर्णय से 11 अप्रैल को जयपुर में विद्युत भवन पर राज्य स्तरीय धरने का निर्णय लिया था। इसकी सूचना 20 दिन पूर्व प्रशासन को देकर अनुमति ले ली गई थी। इसके बावजूद निगम प्रशासन ने दमनकारी रवैया अपनाते हुए सभी इंजीनियर्स, अधिकारियों व कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का हनन किया। प्रशासन ने एक दिन पूर्व आदेश जारी कर 11 अप्रैल को अवकाश की अनुमति नहीं दी। इससे सूरतगढ, झालावाड, छबडा, कोटा, धौलपुर, गिरल, बांसवाड़ा सहित सभी पॉवर प्लांटों में इंजीनियर्स एवं कर्मचारियों ने वर्क-टू-रूल पर अमल करते हुए आदेश की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया।
समिति ने उर्जा राज्य मंत्री को बताया कि लाभ में चल रहे पॉवर प्लांटों का निजी हाथों में विनिवेश करने से जनता पर महंगी बिजली का भार पडे़गा। इसलिए जनहित में इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए। अगले एक वर्ष में सभी बिजलीघर पहले से अधिक एवं सस्ती बिजली उत्पादन करने में सक्षम हैं। उर्जा राज्य मंत्री ने भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे पर आम जनता के हित में सकारात्मक रूख अपनाएंगे। संयुक्त संघर्ष समिति ने वार्ता के बाद विद्युत भवन के घेराव को अगले 15 दिन के लिए स्थगित किया। इस दौरान सरकार से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला तो 26 अप्रैल को विनिवेश के विरोध में विद्युत भवन पर विशाल धरना एवं प्रदर्शन किया जाएगा।
टैक्स के सभी आंकड़े होंगे सुरक्षित : जीएसटी नेटवर्क ने उद्योग जगत को किया आश्वस्त
रिश्तेदार को मकान का किराया देते हैं, तो टैक्स छूट के लिए देना होगा सबूत
अब पटरियों पर अपनी निजी मालगाड़ी दौडाएंगी प्राइवेट कंपनियां
सरकार के इस कदम से भारतीय रेल की एकाग्रिता कम होगी। रेलवे के अधिकारी के अनुसार सीमेंट,स्टील,ऑटो,लोजिस्टिक जैसी कंपनियों ने अपनी रेल चलाने की इजाजत मांगी है।निजी क्षेत्र के इस मैदान में कूदने से 20 से 25 मिलियन टन की भार क्षमता में बढ़ोतरी होगी। अधिकारी ने बताया की ये प्रयोग सफल होने पर यात्री गाड़ियों को भी निजी ऑपरेटरों द्वारा चलाया जा सकता है।जामताड़ा में आलू-प्याज से भी सस्ते बिकते हैं काजू
सुप्रीम कोर्ट का झटका: टाटा और अदानी नहीं बढ़ा सकेंगे बिजली के दाम
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट से मंगलवार को टाटा पावर लिमिटेड और अदानी पावर लिमिटेड को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को रद्द करते हुए इन दोनों बिजली समूह की बिजली की दरें बढ़ाने से इनकार कर दिया है। न्यायाधीश पिनकी चंद्र घोष और रोहिंटन एफ नरीमन की पीठ में इलेक्ट्रीसिटी ट्रिब्यूनल के 2016 के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल की गई।
ट्रिब्यूनल ने फैसले में कहा था कि कोयले की कीमत में अप्रत्याशित वृद्धि होना बिजली कंपनियों और वितरकों के बीच बिजली उत्पादन समझौते की एक अहम कड़ी है। टाटा और अदानी ने सुप्रीम कोर्ट में 2010 के इंडोनेशिया रेगुलेशन में बदलाव का हवाला भी दिया। दोनों कंपनियों ने कहा कि वह अपने इलेक्ट्रीसिटी प्लांट के लिए कोयला उसी देश से मंगाते है जिसके कारण बिजली के दामों में बढ़ोतरी होनी चाहिए।
कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि हम केवल वही लाभ दे सकते हैं जो भारतीय कानून से संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से टाटा पावर को 15 रुपये प्रति शेयर तक का झटका लग सकता है, जबकि अदानी पावर को 23 रुपये प्रति शेयर का नुकसान संभव है। टाटा पावर ने वित्त वर्ष 2013-16 के लिए 3300 करोड़ रुपये के राहत की मांग की थी। वहीं अदानी पावर ने वित्त वर्ष 2013-16 के लिए 3000 करोड़ रुपये के राहत की मांग की थी।
