Wednesday, June 24, 2026
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24 कैरट गहनों के निर्यात पर पाबंदी, राउंड-ट्रिपिंग पर लगाम की तैयारी

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  •  राउंड ट्रिपिंग के लिए 125 टन आयातित सोने के इस्तेमाल का अनुमान, जिस पर प्रतिबंध से लग जाएगी लगाम
  •  निर्यात में बढ़े हुए आंकड़े को लेकर रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद ने भी जताई है चिंता

मुंबई ।  सोने की राउंड-ट्रिपिंग पर लगाम कसने और बैंकों की रकम का निर्यात के लिए दुरुपयोग रोकने के इरादे से सरकार 24 कैरट आभूषणों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का विचार कर रही है। जब सोने को एक निश्चित कीमत पर किसी को बेचा जाता है और बाद में उससे उसी कीमत पर उसे वापस खरीद लिया जाता है तो इसे राउंड ट्रिपिंग कहते हैं।

हालांकि भारत में 24 कैरट के आभूषण नहीं बनते, इतने शुद्घ सोने का इस्तेमाल सिक्कों और छड़ों में ही किया जाता है। दुनिया भर में चीन के अलावा कहीं और 24 कैरट के आभूषण नहीं चलते। कुछ खास निर्यात कंपनियां ही इनका निर्यात करती हैं और इनमें रिफाइनिंग तथा गढ़ाई के अलावा कोई भी मूल्यवर्धन नहीं किया जाता है। 

इस तरह से तैयार किए गए गहनों को खाड़ी देशों में भेजा जाता है और वहां से सोने की शक्ल में वापस आयात कर लिया जाता है। ऐसी हरकत करने वाली कंपनियां मुट्ठी भर ही हैं। वे अपने निर्यात के आंकड़े बढ़ाने के लिए ऐसा करती हैं और निर्यात के लिए मिलने वाले सस्ते कर्ज का इस्तेमाल कर लेती हैं। इससे उनके दो मकसद पूरे हो जाते हैं।

अधिक निर्यात दिखाने से उनका निर्यातक का दर्जा बरकरार रहता है और निर्यात के लिए मिलने वाले सस्ते कर्ज का वे कहीं भी इस्तेमाल कर लेती हैं। किसी समय देश में सालाना 100 टन सोने की राउंड ट्रिपिंग का अनुमान लगाया जाता था। लेकिन वित्त मंत्रालय का ध्यान अब इस पर है और वह सख्ती बरत रहा है क्योंकि कंपनियां निर्यात के लिए मिले सस्ते कर्ज का इस्तेमाल दूसरे कामों में ही करती हैं।

जीएफएमएस थॉमसन रॉयटर्स द्वारा सोने को लेकर कराए गए एक सर्वेक्षण में कहा गया है, ‘वर्ष 2016 में शुल्क मुक्त सोने का आयात 15 प्रतिशत तक घटकर 167.3 टन रह गया, जबकि 2015 में यह 196.2 टन पर था। हमारे खयाल से 2016 में इसमें से 125 टन का इस्तेमाल राउंड ट्रिपिंग के लिए हुआ था।’ उद्योग की एक कंपनी ने कहा, ‘राउंड ट्रिपिंग में ज्यादातर 24 कैरट गहने आदि इस्तेमाल हुए क्योंकि उन्हें पिघलाना और गढ़ना आसान है।’ 

उद्योग सूत्रों का कहना है, ‘ऐसे सोने में मूल्यवर्धन बहुत कम होता है और उसकी खपत करने वाले देश भारत से आयात ही नहीं करते।’ उन्होंने कहा कि सरकार अगर प्रतिबंध लगाने का फैसला करती है तो असली निर्यातकों को किसी तरह की तकलीफ नहीं होगी। परिषद ने इसे लेकर चिंता जताई है कि निर्यात का आंकड़ा अनावश्यक रूप से बढ़ाकर दिखाया गया है

पहली बार दु‌न‌िया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में शामिल दिल्ली और मुंबई IIT

नई द‌िल्ली। पहली बार आईआईटी दिल्ली और आईआईटी मुंबई का नाम दुनिया के सर्वश्रेष्ठ दो सौ उच्च शिक्षण संस्थानों की सूची में शामिल हो गया है। लंदन में बृहस्पतिवार सुबह पांच बजे जारी होने वाली क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भारत के 20 उच्च शिक्षण संस्थानों ने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में अपनी जगह बनायी है।

जबकि आईआईएससी बंगलूरू भी टॉप दो सौ में शामिल हैं। खास बात यह है कि क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2018 में आईआईटी दिल्ली ने आईआईएससी (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बंगलूरू) को पछाड़ा है। जबकि आईआईटी कानपुर की रैंकिंग में सुधार तो आईआईटी रुड़की की रैंकिंग में गिरावट है।

क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, 2018 की रैंकिंग तैयार करने में 75015 अकेडमिक और 40,455 कर्मियों ने अपना योगदान दिया है। रैंकिंग को बनाने के दौरान 12.3 मिलियन पेपर और 75.1 मिलियन साइटेशन का विश्लेषण किया गया है। क्यूएस वल्र्ड यूनिवर्स‌िटी रैंकिंग 2018 में एमआईटी पहले, स्टेंनफोर्ड यूनिवर्सिटी दूसरे और हावर्ड यूनिवर्सिटी तीसरे स्थान पर है।

जबकि कैलिर्फोनिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी पांचवें से चौथे स्थान पर पहुंच गयी है। वहीं, कैब्रिज यूनिवर्सिटी चौथे से पांचवें स्थान पर पहुंच गयी है। आईआईटी दिल्ली को 172, आईआईटी मुंबई को 179 व आईआईएससी को 190 रैंक हासिल हुआ है।

शिक्षण संस्थान             वर्ष 2017(रैंक)               वर्ष 2018 (रैंक)
आईआईटी मद्रास               249                             264     
आईआईटी कानपुर            302                             293          
आईआईटी खड्गपुर          313                              308      
आईआईटी रुड़की             399                             431-440      
दिल्ली यूनिवर्सिटी               501-550                     481-490      
आईआईटी गुवहाटी           481-490                     501-550      
जादवपुर यूनिवर्सिटी           कोई रैंक नहीं था          601-650      
हैदराबाद यूनिवर्सिटी           कोई रैंक नहीं था         601-650      
अन्ना यूनिवर्सिटी               कोई रैंक नहीं था            651-700      
मनिपाल यूनिवर्सिटी            कोई रैंक नहीं था         701-750      
कोलकात्ता यूनिवर्सिटी        651-700                   751-800

पहली बार एएमयू टॉप 800 प्लस में शामिल तो बीएचयू  व पंजाब यूनि. की रैकिंग में गिरावट

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए खुशी की खबर है कि क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में जगह मिल गयी है। एएमयू को 801-1000 श्रेणी के बीच स्थान मिला है। जबकि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की रैंकिंग में गिरावट दर्ज है, पहले 701 प्लस की श्रेणी में था, जोकि अब 800 से 1000 के बीच पहुंच गया है। इसी प्रकार पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ का नाम 701 प्लस की श्रेणी से खिसकर 800 से 1000 की श्रेणी में पहुंच गया है।

तीन साल के दौरान FDI में रेकॉर्ड उछाल: मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एफडीआई, जीएसटी और इकनॉमिक ग्रोथ को अपने तीन साल के कार्यकाल की उपलब्धियां बताई हैं। उन्होंने प्रफेशनल्स की सोशल मीडिया वेबसाइट लिंक्डइन पर एक आलेख में तीन साल के दौरान उनकी सरकार द्वारा किए गए कार्यों पर रोशनी डाली है।

उन्होंने कहा कि 2013 से एफडीआई में बड़ी उछाल आई है। 2013 में एफडीआई 34,487 बिलियन डॉलर यानी करीब 22 लाख अरब रुपये थी जो रेकॉर्ड उछाल के साथ अब 61,724 बिलियन डॉलर यानी करीब 40 लाख अरब रुपये है।

उन्होंने कहा कि भारत को अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में चमकता सितारा के रूप में देखा जा रहा है। भारत में व्यापार करने को आसान बनाया गया है। टैक्स व्यवस्था को काफी स्थिर और सुचारू बनाया गया है। उन्होंने कहा कि जीएसटी से भी बड़ा फायदा होने जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘जब हमने मई 2014 में कार्यभार संभाला था, उस समय देश कई चुनौतियों का सामना कर रहा था। सरकार और सरकारी संस्थानों में से लोगों का विश्वास खत्म हो चुका था। भारत में निवेश करने की कोई संभावना नहीं दिख रही थी। भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और अथॉरिटीज की मनमानी चरम पर थी।’

उन्होंने कहा, ‘हमारी पहली प्राथमिकता इस माहौल को बदलना थी, जिसे हमने पिछले तीन सालों में अंजाम दिया है।’ उन्होंने कहा कि सरकार के सकारात्मक रिजल्ट्स दृष्टिगोचर हैं। पीएम मोदी ने अंत में लिखा है, ‘हमारा लक्ष्य नया भारत है जिसकी शक्ति हमारे युवाओं का कौशल और प्रतिभा होगी।

प्रीमियम ट्रेनों के कोचों का इंटीरियर हवाई जहाज जैसा

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नई दिल्ली। जल्द ही प्रीमियम ट्रेनों के कोचों का इंटीरियर आपको हवाई जहाज जैसा नजर आएगा।  इसके लिए रेलवे ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।  इस बदलाव के लिए नई दिल्ली से चलनेवाली राजधानी और शताब्दी ट्रेनों की लिस्ट बनाई जा रही है। इन्हीं गाड़ियों के कोच में सबसे पहले बदलाव किया जाएगा।

नॉदर्न रेलवे के दिल्ली डिविजन के एक अधिकारी ने बताया कि यूं तो हमारी राजधानी और शताब्दी ट्रेनों को डिब्बे पहले से ही अच्छे हैं। लेकिन, अब इनके टॉइलट्स, खिड़कियों, पर्दों, सीट कवर और खराब सीटों को सही करना और एसी डक्ट को बेहतर बनाने का टारगेट है। सबसे बड़ा काम टॉइलट्स और पर्दों पर किया जाएगा। इसके लिए बोर्ड की ओर से ‘स्वर्ण’ प्रॉजेक्ट के तहत प्रति रैक 50 लाख रुपये दिए जा रहे हैं।

रेलवे का मकसद यह है कि जब यात्री डिब्बे के अंदर आएं तो उन्हें भले ही कोच पूरी तरह हवाई जहाज के इंटीरियर जैसे ने लगे, लेकिन उससे कम भी न नजर आए। हर डिब्बे को खुशबूदार बनाने का भी इंतजाम किया जाएगा। यह काम उसी तर्ज पर किया जा रहा है, जैसे चीन का जापान की ट्रेनों के कोच होते हैं। हर कोच को अच्छी तरह से चमकाया जाएगा, ताकि उनमें कहीं भी धूल-मिट्टी नजर नहीं आए।

अधिकारी ने बताया कि जल्द ही यात्रियों को नई दिल्ली चलनेवाली इन ट्रेनों में बदलाव महसूस होने लगेंगे। ट्रेन के अंदर बैठने पर किसी भी तरह की बदबू नहीं आएगी, इस बात के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। राजधानी और शताब्दी के बाद बाकी ट्रेनों के डिब्बों की भी हालत सुधारी जाएगी। सबसे पहले राजधानी और शताब्दी ट्रेनों को नया लुक दिया जाएगा।

Rajasthan Board : आज शाम तक आएगा 10वीं का रिजल्ट

अजमेर। माध्यमिक शिक्षा परिषद, राजस्थान (राजस्थान बोर्ड) गुरुवार को 10वीं परीक्षा के रिजल्ट घोषित कर सकता है। यह रिजल्ट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.rajeduboard.rajasthan.gov.in पर जारी किए जाएंगे। राजस्थान बोर्ड के अध्यक्ष ने LEN-DEN NEWS को बताया 10वीं के रिजल्ट 8 जून को शाम चार बजे तक जारी कर दिए जाएंगे।

रिजल्ट का ऐलान राज्य के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी करेंगे। रिजल्ट जारी होने की घोषणा होते ही छात्र अपना रिजल्ट www.rajeduboard.rajasthan.gov.in पर चेक कर सकते हैं। बोर्ड ने 8वीं परीक्षा के नतीजे भी जारी कर दिए हैं। 8वीं में सभी उम्मीदवार पास हैं। 10वीं की परीक्षा में इस साल परीक्षा में 1098921 उम्मीदवारों ने भाग लिया था, जिसमें 6 लाख 30 हजार 342 छात्र और 4 लाख 68 हजार 479 छात्राएं शामिल हैं।

परीक्षा का आयोजन 9 मार्च से 21 मार्च के बीच किया गया था। इससे पहले खबरें आ रही थीं कि बोर्ड 10वीं का रिजल्ट 10 जून तक जारी कर देगा लेकिन अब यह नतीजे आठ जून को ही आ रहे हैं। 2016 की बोर्ड परीक्षा में 10 लाख 81 हजार उम्मीदवारों ने भाग लिया था, जिसमें 75.80 फीसदी विद्यार्थी पास हुए थे।

पास होने वाले उम्मीदवारों में छात्रों का पास प्रतिशत 76.02 जबकि छात्राओं का पास प्रतिशत 75.70 रहा था। पिछले साल तनिषा विजय ने प्रथम स्थान हासिल किया है। बोर्ड ने हाल ही में 12वीं परीक्षा के नतीजे जारी किए थे, जिसमें वाणिज्य और कला के एक साथ जबकि साइंस के नतीजे अलग से घोषित किए गए थे।

राजस्थान बोर्ड हाईस्कूल 2017 का रिजल्ट, क्लिक कर देखें

कोटा के मेस में छात्रों को घटिया खाना, शिकायत पर खाद्य विभाग का छापा

कोटा। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने बुधवार को महावीर नगर क्षेत्र के मेस पर छापा मारकर खाने के सेंपल भरे। अचानक हुई कार्रवाई से पूरे शहर के मैस में हड़कंप मचा रहा। मुंबई से एक व्यक्ति ने सीएमएचओ डॉ. अनिल कौशिक को मेस पर खराब और कम गुणवत्ता वाले खाना देने की शिकायत की। जिसके बाद यह करवाई हुई।

शिकायतकर्ता ने बताया कि उनकी बेटी महावीर नगर स्थित एक हॉस्टल में रहती है, वहां मेस में अच्छा खाना नहीं दिया जाता है। इस पर सीएमएचओ ने एक चिकित्सक और दो खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम को जांच के लिए भेजा। इस टीम को वह मेस नहीं मिला है, लेकिन टीम ने महावीर नगर तृतीय स्थित श्रीनिवास मैस पर छापा मारा है। यहां से जांच के लिए दही और आटे के नमूने लिए है।

इसके बाद गर्ल्स हॉस्टल मूंदड़ा रेजीडेंसी और सिल्वर स्पून मेस पर छापा मारा, लेकिन दोनों जगहों पर समय पूरा होने से खाना खत्म हो गया था और मेस खाली मिले। एेसे में टीम नमूने नहीं ले पाई। हालांकि दोनों जगहों पर गंदगी में खाना बनाने पर मेस संचालकों को चेतावनी दी। गौरतलब है कि पहले भी कोचिंग इलाकों में चल रहे मेस में छापे के दौरान घटिया खाना देने की बात सामने आ चुकी है।

कोटा के रानपुर में बनेगी नॉलेज और टैलेंट सिटी, 700 करोड़ रुपए होंगे खर्च

कोटा । स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के पहले चरण में रानपुर में 395 एकड़ जमीन को ग्रीन फील्ड के रूप में विकसित किया जाना था, अब उसे बैंगलुरु की साइंस सिटी की तर्ज पर नॉलेज एवं टैलेंट सिटी के रूप में डवलप किया जाएगा। इसके लिए 700 करोड़ रुपए खर्च होंगे। ये बात बुधवार को कोटा स्मार्ट सिटी लिमिटेड निदेशक मंडल की बैठक में अध्यक्ष एवं प्रमुख शासन सचिव डॉ. मंजीत सिंह ने कही।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना की फायनेंशियल डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जाए। उन्होंने यूआईटी अधिकारियों को कहा कि इस जमीन को नगर निगम को ट्रांसफर की जाए। वहां पर स्कूल, कालेज, यूनिवर्सिटी, स्किल डवलपमेंट संस्थान, होटल, हॉस्टल आदि डवलप किए जाए।नगर निगम के स्मार्ट सिटी कार्यालय में आयोजित बैठक में उन्होंने अब तक चल रहे कार्यों पर संतोष जताया।

साथ ही कहा कि समय और क्वालिटी का विशेष ध्यान रखा जाए। बैठक में महापौर महेश विजय, स्मार्ट सिटी के सीईओ एवं जिला कलेक्टर रोहित गुप्ता, निदेशक मंडल के सदस्य आयुक्त नगर निगम डॉ. विक्रम जिंदल, सचिव यूआईटी सियाराम मीणा, एसई प्रदीप गर्ग, वित्त सलाहकार डॉ. विधि शर्मा, एसई प्रेमशंकर आदि सदस्य उपस्थित रहे।

सिर्फ बी.टेक से नहीं मिलेगी आईटी क्षेत्र में नौकरी

हैदराबाद। भविष्य में आईटी सेक्टर में उन युवाओं के लिए नौकरी हासिल करना मुश्किल होगा जो सिर्फ बी. टेक डिग्री लेकर आ रहे हैं ।आईटी उद्योग के दिग्गज का कहना है कि आने वाले समय में कंपनियां पोस्ट ग्रेजुएट खासकर विशेज्ञता हासिल करने वाले युवाओं को वरीयता देंगी।

इंसोसिस के पूर्व चीफ फाइनेंशियल ऑफीसर मोहनदास पई ने कहा है कि अच्छी नौकरी पाने के लिए बी. टेक की डिग्री पर्याप्त नहीं होगी। युवाओं को एम. टेक की डिग्री लेनी चाहिए और किसी क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल भी लेनी चाहिए। उन्हें अतिरिक्त क्लासेज लेकर खुद कोडिंग करना सीखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कंपनियां बिना पर्याप्त कुशलता के नौकरी नहीं देंगी। वे छह महीने ट्रेनिंग देने के साथ वेतन देना पसंद नहीं करेंगी। वे नौकरी देते समय ही कोडिंग की कुशलता जांचेंगी। अच्छी कोडिंग जानने वालों को ही नौकरी देंगी। भविष्य में नौकरी पाने के लिए एम. टेक की डिग्र्री जरूरी होगी। इस डिग्री के साथ कोडिंग स्किल एक स्तर की होनी चाहिए।

आईटी उद्योग में पिछले दो दशक से नये कर्मचारियों का वेतन न बढ़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी त्रासदी है। चूंकि उद्योग की विकास दर बहुत तेज नहीं है, इसी वजह से यह हो रहा है।इस समय मणिपाल ग्लोबल एजूकेशन के चेयरमैन का पद संभाल रहे पई ने कहा कि आइटी इंजीनियरों की उपलब्धता ज्यादा है जबकि उद्योग मांग कम है।

इंफोसिस रेवेन्यू ग्रोथ के गाइडेंस पर कायमआईटी कंपनी इंफोसिस ने कहा है कि इस साल अपने राजस्व में 6.5-8.6 फीसद की बढ़ोतरी के गाइडेंस के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हालांकि उसके कुछ ग्र्राहक प्रोजेक्टों के लिए कीमत 30-40 फीसद तक कम करने की मांग कर रहे हैं। कंपनी के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफीसर यू. बी. प्रवीण राव ने मॉर्गन स्टेनली के 19वें इंडिया समिट में कहा कि कंपनियों का आइटी बजट पिछले स्तर पर ही है।

ग्राहक  तीन से पांच साल के प्रोजेक्ट रिन्यूअल में कीमत 30-40 फीसद कम करने के लिए कह रहे हैं। हालांकि हम कीमत को लेकर कोई दबाव महसूस नहीं कर रहे हैं।ग्राहक कीमत घटाकर यह पैसा कहीं और लगाना चाहते हैं। वजह यही है कि आइटी का बजट नहीं बढ़ा है। राव ने कहा कि आईटी सेक्टर की रफ्तार अगले 18 महीनों तक धीमी रह सकती है।

अब EPFO में 30 जून तक जमा कराएं अपना आधार नंबर 

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने चार करोड़ से अधिक सदस्यों के लिए आधार संख्या जमा कराने की अंतिम तिथि को 30 जून तक बढ़ा दिया है। हालांकि, पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए यह अंतिम तिथि 30 सितंबर 2017 है। 

ईपीएफओ ने एक परिपत्र में कहा है कि सभी फील्ड कार्यालयों को निर्देश दिया जाता है कि कर्मचारी पेंशन योजना-1995 को अपनाने वाले सभी नए सदस्यों की आधार संख्या नियोक्ता एक जुलाई 2017 से पहले जमा कराएं और पूर्वोत्तर के राज्यों में यह कार्य एक अक्तूबर 2017 से पहले पूरा किया जाना है।   ईपीएफओ ने जनवरी में अपने सभी सदस्यों के लिए आधार संख्या जमा कराना अनिवार्य कर दिया था।

EPFO इस साल एक्‍सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में 20,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगा। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने हाल में इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा था कि EPFO ने ETF में निवेश की सीमा बढ़ाने का फैसला किया। दत्तात्रेय ने कहा कि ETF में निवेश की सीमा को निवेश योग्य जमा का 10 से बढ़ाकर 15 फीसदी करने के बारे में

 

RBI ने यथावत रखी ब्याज दरें, रेपो रेट 6.25 प्रतिशत पर बरकरार

नई दिल्ली। रिजर्व बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (एमपीसी) ने फिर से नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद कमिटी ने 6.25 प्रतिशत का रीपो रेट ही बरकरार रखा। इसके अलावा, रिवर्स रीपो रेट को 6% और सीआरआर को 4% पर ही बरकरार रखा गया है।

हालांकि, स्टैचुटअरी लिक्विडिटी रेशो (एसएलआर) को 20.50 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया। नई दर 24 जून से लागू होगी। कमिटी ने एमएसएफ दर और बैंक दर को भी 6.5 प्रतिशत पर ही बरकरा रखा है।महंगाई को लेकर आरबीआई का कहना है कि मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में यह 2 प्रतिशत से 3.5 प्रतिशत तक रहा सकती है जबकि दूसरी छमाही में महंगाई दर 3.5-4.5 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है।

गौरतलब है कि एमपीसी के 5 सदस्य मौजूदा ब्याज दरों में बदलाव के पक्ष में नहीं हैं और उन्होंने इसे बरकरार रखने के पक्ष में मत दिया। एमपीसी ने जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में 0.1 प्रतिशत की कटौती करते हुए इसे 7.4 प्रतिशत से 7.3 प्रतिशत कर दिया है। 21 जून को एमपीसी मिनट्स जारी होंगे और एमपीसी की अगली बैठक 1-2 अगस्त को होगी।

अगली समीक्षा में रेट कट की संभावना

2017-18 में अप्रैल से सितंबर के बीच आरबीआई ने महंगाई दर का अनुमान 4.5 प्रतिशत रखा है। वहीं, दूसरी छमाही में उसे इसके 5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। रिटेल इन्फ्लेशन अप्रैल में 2.99 प्रतिशत के रेकॉर्ड लो लेवल पर आ गई थी, जबकि मार्च में यह 3.89 प्रतिशत के साथ पांच महीने के पीक पर थी। बेस इफेक्ट और फूड प्रॉडक्ट्स के दाम कम होने से महंगाई काबू में है। इसके साथ ही, देश में 1 जुलाई से गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) लागू होने जा रहा है। मॉनसून सीजन में बारिश का भी महंगाई पर असर पड़ेगा। वहीं, पिछले कुछ महीनों से क्रूड ऑइल के दाम में गिरावट आ रही है, जो भारत के हक में है।