Wednesday, June 24, 2026
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JEE (अडवांस) : सर्वेश टॉपर , कोटा के सूरज को पांचवीं रैंक

नई दिल्ली/ कोटा । जेईई अडवांस्ड 2017 के नतीजे रविवार को जारी हो गए हैं। इस बार चंडीगढ़ के सर्वेश मेहतानी परीक्षा के टॉपर बने हैं।  इस परीक्षा में दूसरा स्थान मिला है पुणे के अक्षत चुग को, जबकि तीसरे स्थान पर हैं दिल्ली के अनन्य अग्रवाल। कोटा के सूरज आईआईटी जेईई टाॅपर्स में शुमार है। सूरज के जेईई की मेरिट लिस्ट में पांचवीं रैंक आई है। स्टूडेंट JEE अडवांस की आधिकारिक वेबसाइट (https://results.jeeadv.ac.in/) पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं।

जेईई अडवांस्ड में टॉप करने वाले सर्वेश ने रुड़की जोन से परीक्षा दी थी और उन्हें 366 में से 339 अंक प्राप्त हुए हैं। जेईई मेन एंट्रेंस एग्जाम में वह 55वें स्थान पर थे। वहीं दूसरा स्थान प्राप्त करने वाले अक्षय को मेन्स में 7वां स्थान मिला था।इस बार 21 मई को JEE अडवांस की परीक्षा का आयोजन किया गया था।यह परीक्षा देशभर के सभी आईआईटी में विभिन्न स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है।

21 मई को आयोजित हुई परीक्षा में इस बार 1.7 लाख से अधिक स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया था। देशभर के 23 आईआईटी की 11000 से अधिक सीटों पर एडमिशन होना है। जेईई अडवांस्ड में दो पेपर होते हैं। इस बार जेईई अडवांस्ड परीक्षा में 81 फीसदी मेल और 19 फीसदी फीमेल कैंडिडेट्स ने हिस्सा लिया था। इस परीक्षा में 500 विदेशी कैंडिडेट्स ने भी भाग लिया था। 

 किस स्टूडेंट कौनसी रैंक मिली…

  • कोटा के सूरज आईआईटी जेईई टाॅपर्स में शुमार है। सूरज के जेईई की मेरिट लिस्ट में पांचवीं रैंक आई है। कोटा के ही सौरभ यादव ने छठी रैंक हासिल की है।
  • कोटा के स्टूडेंट्स के ही 9 और 10 वीं रैंक लक्ष्य शर्मा, 12 वीं रैंक यतिश, 37 वीं रैंक पीयूष टिपरिवाल, 42 वीं रैंक सात्विक और मयंक दूबे के 66 वीं रैंक आई है।
  • दिल्ली के अन्ययन ने ऑल इंडिया में तीसरी रैंक हासिल की है।
  •  उदयपुर के कल्पित वीरवाल जिन्होंने मेन्स में फर्स्ट रैंक हासिल की थी, उनके ऑल इंडिया मेरिट लिस्ट में 109 स्थान आया है। कल्पित ने एससी में टाॅप किया है।
  • जयपुर के अमन कंसल ने ऑल इंडिया मेन्स में 15 रैंक हासिल की ह

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बदल सकते हैं गुड्स और सर्विसेज के रेट आज

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नई दिल्ली। सरकार 1 जुलाई से जीएसटी लागू करने के अपने दावे को पूरा करने के लिए काफी तेजी से लगी हुई है। रविवार को वित्त मंत्री की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की अहम बैठक होगी। इस बैठक में कुछ प्रॉडक्ट्स के रेट को रिव्यू किया जाएगा। काउंसिल की पिछली बैठक में कुछ वस्तु और सेवाओं के टैक्स स्लैब को लेकर सवाल उठे थे। रविवार को काउंसिल ऐसे ही रेट्स को रिव्यू करेगा।

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, ‘मीटिंग का मुख्य अजेंडा, 3 जून को काउंसिल की 15वीं मीटिंग में हुए फैसलों की पुष्टि करना है। साथ ही ड्राफ्ट जीएसटी रूल्स में संशोधनों को अनुमोदित करना है। इसके अलावा विभिन्न ट्रेड और इंडस्ट्री असोसिएशन द्वारा सिफारिश किए गए रेट में बदलावों पर भी अजस्ट किया जाएगा।’

रविवार को होने वाली मीटिंग काउंसिल की संभवत आखिरी मीटिंग होगी। इसके बाद सरकार की कोशिश होगी कि 1 जुलाई से जीएसटी को पूरी तरह से लागू किया जा सके। काफी सेक्टर्स की असोसिएशन्स ने जीएसटी में रेट रिव्यू की सिफारिश की है। ऑटो इंडस्ट्री हाइब्रिड कारों पर लगने जा रहे 43 प्रतिशत टैक्स को रिव्यू करने वाली है। अभी इन कारों पर 30 प्रतिशत टैक्स लगता है।

जीएसटी की पिछली बैठक में टेलिकॉम सेक्टर को 18 प्रतिशत के टैक्स स्लैब में रखा गया था। इंडस्ट्री चाहती है कि इसे 18 प्रतिशत से कम किया जाए। वहीं, आईटी हार्डवेअर फर्म्स प्रॉडक्ट्स पर 18 प्रतिशत टैक्स रेट लगाना चाहती हैं। जीएसटी में इन पर 28 प्रतिशत टैक्स के स्लैब में रखा गया है।

जीएसटी काउंसिल ने लगभग सभी गुड्स ऐंड सर्विसेज को 5,12,18 और 28 के टैक्स स्लैब में बांट लिया है। बहुमूल्य धातुओं जैसे सोने के सिक्के, जूलरी आदि को 3 प्रतिशत के टैक्स स्लैब में रखा गया है। वहीं, दिल्ली के बड़े बाजारों के ट्रेडर्स ने नए सिस्टम में स्पष्टता को लेकर चिंता जाहिर की है।

मंदी से घबराएं नहीं, दीपावली बाद फिर से होगा बाजार गुलजार- भाटिया

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कृषि जिसों में लगातार पिछले कुछ महीनों से मंदी का माहौल बना हुआ है।  इससे व्यापारियों और किसानों में घबराहट बनी हुई है।  Len-den News ने इसका कारण जानने के लिए कोटा के जाने- माने कमोडिटी एक्सपर्ट मुकेश भाटिया से वार्ता की। उनका कहना है मंदी से घबराएं नहीं, दीपावली बाद बाज़ार  फिर से रफ़्तार पकड़ेगा। प्रस्तुत है यह भेंट वार्ता ——–

धनिया में मंदी का कारण 

धनिया क्या पूरे मार्केट का परिदृश्य ही मंदी की चपेट में आया हुआ है. इस वर्ष धनिया की पैदावार करीब एक करोड़ बोरी के आसपास रही है। पुराना  स्टॉक 40 लाख बोरी है। भारत की खपत एक्सपोर्ट सहित एक करोड़ बोरी है। फिर 40 लाख बोरी कैरी फॉरवर्ड होगा।

दिसम्बर 2016 में हमने एक मोटा अनुमान सर्वे करके बाजार को दिया था कि इस वर्ष धनिया नया सीजन में 4000 रुपए प्रति क्विंटल मंडियां तथा 5200से 5500 रुपये क्विंटल  एनसीडेक्स होना चाहिए था,लेकिन सटोरिया गतिविधियों के कारण धनिया बाजार एनसीडेक्स 6500 से 7500 रुपये क्विंटल तक ले जाया गया, जो बाजार के लिए काफी घातक साबित हुआ।

गलत तेजी डबल मंदी

क्योंकि कहते हैं एक गलत तेजी डबल मंदी लाती है और एक गलत मंदी डबल तेजी लाती  है। यानी हम सब गलत तेजी का नुकसान उठा रहे हैं।वर्तमान में जो धनिया 4500 से 4700  रुपये क्विंटल एनसीडेक्स पर चल रहा है , इसमें कोई बड़ी मंदी आना संभव नहीं है।

लेकिन अभी कम से कम जीएसटी लागू होने के बाद 15 जुलाई तक बाजार पांच रुपये की तेजी मंदी पर ही घूमते रहेंगे। जीएसटी लागू होने के बाद धीरे-धीरे बाजार यूनिफार्म शेप ले लेगा , तब जाकर धनिया में तेजी की बात करना ठीक रहेगा। हाँ सम्भवत: कोई छोटी तेजी इन आगामी तीन माह में मिल सकती है।

पुराना माल होल्ड करें

बाजार में मोटी तेजी तो दीपावली बाद ही देखने को मिलेगी। इस परिदृश्य में मेरी सभी ट्रेडर्स को सलाह है कि पुराना माल रखा है तो होल्ड करें या इन भावों में और माल ले सकते हैं। नए निवेशकों को मेरी सलाह है कि लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट करें। आँख  बंद  कर इन भावों  में स्टॉक   कर सकते   हैं। नोटबंदी का असर जीएसटी लागू होने के बाद धीरे -धीरे कम हो जायेगा। वहीँ बाजार भी यूनिफार्म की शक्ल ले लेगा। धनिया ही नहीं सभी जिंसों के अच्छे दिन आ जायेंगे।

पूरे बाज़ार के परिदृश्य को समझना आवश्यक 
नंबर 1 भारत सरकार ने 15 लाख करोड़ रुपये की नोटबंदी की, उसके सामने ११ लाख करोड़ रुपये के नोट ही वापस जारी किये। इस कारण बाजार की तरलता खत्म हो गई। इसलिए पूरा बाजार मंदी की चपेट में आ गया।

नंबर 2 आये दिन सर्कार द्वारा प्रॉपर्टी रेगुलेटरी कानून या जीएसटी पर बयान बाजी से व्यापारी भर्मित हैं  नबर 3 रही सही कसर मीडिया से आ रही अफवाहों के कारण बाजार रसातल में चले गए। नबर चार नोटबंदी के बाद जीडीपी 8 % से 6% पर आए गिरी। आशंकित व्यापारी समाज की दिलचस्पी किसी भी नए प्रोजेक्ट से खत्म हो गई है।

यह एक संक्रमण काल है। हम कैश से ही डिजिटल भुगतान की तरफ अग्रसर हैं। अत: यह स्वाभाविक प्रक्रिया है की, “हर विकास कीमत मांगता है। ” अत: मेरा मानना है कि जीएसटी आने के बाद जल्दी ही बाजार यूनिफार्म शक्ल में आ जायेगा तथा दीपावली बाद सभी जिसों में तेजी आने की संभावना है। 

27 रुपये प्रति साल के प्रीमियम पर 6 लाख का बीमा

जयपुर। राजस्थान के जयपुर में को-ऑपरेटिव बैंक से ऋण लेने वाले करीब 7 लाख किसानों को महज 27 रुपये प्रति साल के प्रीमियम पर 6 लाख रुपये का बीमा कवर दिया जाएगा। राजस्थान सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में बीमा की राशि एक लाख रुपये बढ़ा दी है। 

पिछले साल बीमा की रकम 5 लाख रुपये थी और 23.31 लाख किसानों को इसके अंतर्गत बीमा की सुविधा दी गई थी। को-ऑपरेटिव मंत्री अजय सिंह किलाक ने कहा, ‘राजस्थान पहला राज्य है जो नाममात्र के प्रीमियम पर उच्च बीमा उपलब्ध करा रहा है।

हमारा लक्ष्य इस वित्तीय वर्ष में इसके अंतर्गत 25 लाख किसानों को लाना है।’प्रीमियम के रूप में 27 रुपये किसान देंगे जबकि सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक और राजस्थान स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक 13.5-13.5 रुपये प्रीमियम के रूप में देंगे। 

GST : छोटी कंपनियों को भरने होंगे 37 आईटी रिटर्न

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नई दिल्ली।जीएसटी लागू होने पर छोटे पैमाने पर कारोबार करने वाली एक ही राज्य तक मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को कम से कम 37 रिटर्न भरने पड़ सकते हैं। फिलहाल इसके कैटिगिरी के कारोबारियों को 13 रिटर्न ही भरने होते हैं। इससे अकाउंटेंट्स और बैंकिंग इंडस्ट्री के काम में इजाफा हो जाएगा।

जीएसटी लागू होने की डेडलाइन में अब एक महीने से भी कम का वक्त बचा है, लेकिन फाइनैंस प्रफेशनल्स, बैंकों और इंडस्ट्री की इस चुनौती से निपटने की तैयारियां पर्याप्त नहीं दिख रहीं। हालांकि पूरे देश में एक टैक्स की व्यवस्था पर 13 वर्षों से काम चल रहा है। जीएसटी को लेकर भले ही कहा जा रहा हो कि इससे कारोबारियों को तमाम तरह के टैक्सों से मुक्ति मिल जाएगी, लेकिन इंडियास्पेंड के विश्लेषण के मुताबिक ऐसा नहीं होगा। 

इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के पूर्व प्रेजिडेंट के. रघु का कहना है कि जीएसटी को स्वीकार करने के लिए पूरे ईकोसिस्टम में ही बदलाव किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि तैयारियों को देखते हुए जीएसटी लागू करने की तारीख 1 सितंबर होनी चाहिए भारतीय बैंक असोसिएशन ने संसदीय पैनल को इस बारे में बताया है कि जीएसटी लागू करने को लेकर उसके सदस्य अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हैं।

अब हर चीज ऑनलाइन होगी और सबकुछ नियमित अपडेट करना होगा। हर राज्य में एक कारोबारी को सालाना 37 रिटर्न (हर महीने 3 रिटर्न और एक सालाना रिटर्न) भरने होंगे। यही नहीं यदि कंपनी एक से अधिक राज्य में कारोबार करती है तो रिटर्न्स की संख्या और अधिक हो सकती है। तीन राज्यों में दफ्तर संचालित करने वाली कंपनी को साल में 111 रिटर्न तक भरने पड़ सकते हैं।’

 

एक जुलाई से नया पैन बनाने के लिये आधार जरूरी: सीबीडीटी

नयी दिल्ली। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आज स्पष्ट किया है कि आगामी एक जुलाई से आयकर रिटर्न दाखिल करने अथवा नया स्थायी खाता संख्या (पैन)  हासिल करने के लिये आधार नंबर का उल्लेख करना जरूरी होगा।

आयकर विभाग की इस नीति निर्माता संस्था सीबीडीटी ने आज एक वक्तव्य जारी कर यह स्पष्ट किया है कि उच्चतम न्यायालय ने कल अपने फैसले में केवल उन लोगों को आंशिक राहत दी है जिनके पास आधार नंबर नहीं है अथवा जिन्होंने आधार में पंजीकरण नहीं कराया है, ऐसे में कर अधिकारी उन लोगों के पैन को निरस्त नहीं करेंगे।

सीबीडीटी ने उच्चतम न्यायालय के फैसले के बारे में तीन बिंदुओं का स्पष्टीकरण जारी किया है। एक जुलाई 2017 से प्रत्येक व्यक्ति जो कि आधार पाने के लिये पात्र है उसके लिये आयकर रिटर्न दाखिल करने या फिर पैन आवेदन के लिये अपने आधार नंबर का उल्लेख अथवा आधार पंजीकरण संबंधी आईडी नंबर का उल्लेख करना अनिवार्य होगा।

विभाग ने इस बारे में भी स्पष्टीकरण दिया है कि यदि किसी व्यक्ति के पास आधार नंबर नहीं है अथवा आधार नंबर का उल्लेख नहीं किया जाता है तो उसका क्या होगा। इस मामले में विभाग ने कहा है, इस मामले में शीर्ष अदालत ने केवल आंशिक राहत ही दी है। यह राहत उन लोगों को दी गई है जिनके पास आधार नहीं है या जो फिलहाल आधार नहीं लेना चाह रहे हैं।

स्मार्ट सिटी व कोटा-बूंदी के गांवों में घर-घर डिजिटल होगा मेडिकल रिकॉर्ड

 

दादाबाड़ी डिस्पेंसरी में हुई डिजिटल मेडिकल प्रोफाइल बनाने की शुरुआत , डिस्पेंसरी को मिली वाई-फाई सुविधा

 *अरविन्द कोटा*

सांसद ओम बिरला ने कहा कि केंद्र सरकार ने नई स्वास्थ्य नीति में रोगियों के रिकॉर्ड्स को डिजिटलाइज़ करने पर जोर दिया है, ताकि मरीज को अपने नए-पुराने पर्चे व जांच रिपोर्ट्स लेकर डॉक्टर्स के पास बार-बार भटकना न पडे़।

इस योजना पर अमल करते हुए अगले तीन माह में स्मार्ट सिटी में मेडकॉर्ड्स के माध्यम से हर घर के रोगियों के मेडिकल रिकॉर्ड्स निःशुल्क डिजिटल किए जाएंगे। ताकि वे एक क्लिक पर अपनी मेडिकल हिस्ट्री खुद के मोबाइल पर देख सकें एवं किसी भी विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श भी ले सकें।

शनिवार को दादाबाडी स्वास्थ्य केंद्र पर मेडकॉर्ड्स सुविधा का शुभारंभ करते हुए उन्होंने कहा कि अगले एक वर्ष में प्लान बनाकर कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र के प्रत्येक गांव में अंतिम छोर तक रोगियों को यह सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य है। जिससे गरीब रोगियों को समय पर इलाज कराने में बहुत राहत मिलेगी।

हर नागरिक की मेडिकल प्रोफाइल तैयार होने से शहरों के सुपरस्पेशलिस्ट भी गांव के मरीजों का सही डायग्नोसिस कर सकेंगे। शहर के दो युवा आईटी विशेषज्ञ श्रेयांस मेहता व निखिल बाहेती ने मेडिकल क्षेत्र में नए परिवर्तन की शुरूआत की है। इससे कोटा लोकसभा क्षेत्र में जनता के मेडिकल रिकॉर्ड्स को डिजिटल करने की मुहिम एक मिसाल बनेगी।

विधायक संदीप शर्मा ने कहा कि दादाबाड़ी डिस्पेंसरी में इस नवाचार की शुरुआत से आसपास के रोगियों को दूरगामी लाभ होंगे। हर व्यक्ति को एक क्लिक पर मेडिकल हिस्ट्री मिलना सचमुच अल्ट्रा मॉडर्न टेक्नोलॉजी का नमूना है, जो अब तक विकसित देशों तक सीमित रहा। इस मौके पर रिलायंस जियो के गोविंद ओझा ने दादाबाड़ी डिस्पेंसरी को वाई-फाई से जोड़ने की शुरूआत की।

सांसद की घोषणा पर मेडकॉर्ड्स के को-फाउंडर निखिल बाहेती ने कहा कि उनकी टीम अगले 6 माह में सुदूर गांवों तक यह सुविधा पहुंचाने का प्रयास करेगी। इससे डॉक्टर, रोगी, लैबोरेट्री व केमिस्ट के बीच डिजिटल सेतु बन जाएगा, जिससे किसी को इलाज के लिए तरसना नहीं पडे़गा।

अस्पताल प्रभारी डॉ. राजेंद्र शर्मा ने बताया कि मेडकॉर्ड्स से डॉक्टर्स के पर्चे व जांच रिपोर्ट डिजिटल होने से क्षेत्र के 7 हजार से अधिक रोगियों को राहत मिलेगी। समारोह में सीएमएचओ डॉ.अनिल कौशिक, भाजपा देहात जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह, पार्षद प्रकाश सैनी, नरेंद्र सिंह हाड़ा, रमेश आहूजा, देवेंद्र चौधरी ‘मामा’, विनोद नायक, रेखा जैन व महक गौतम सहित डॉक्टर्स एवं गणमान्य नागरिक मौजूद थे ।

पर्सनल हैल्थ असिस्टेंट है मेडकॉर्ड्स

मेडकॉर्ड्स के को-फाउंडर निखिल बाहेती ने कहा कि डिजिटल होने से हर रोगी को मेडिकल हिस्ट्री एक पेज पर मिल जाएगी, जिसे मोबाइल से वह देश-विदेश में कहीं भी भेजकर इलाज करवा सकता है। हमारी व्यस्त दिनचर्या में यह पर्सनल हैल्थ असिस्टेंट की भूमिका निभाएगा।

डाटा व रिपोर्ट सिक्योरिटी, एक्सेसिंग व शेअरिंग तीन ऐसे पहलू हैं, जिससे हर रोगी को निशुल्क फायदा मिलेगा। इसमें सारा डाटा नवीनतम तकनीक एएएस-256 से सुरक्षित रखा जाएगा। क्लाउड सर्विसेस से रिकॉर्ड 100 प्रतिशत उपलब्ध हो सकेगा।

श्रेयांश मेहता
निखिल बाहेती

श्रेयांस मेहता ने बताया कि कोटा में प्रतिवर्ष 70 लाख रोगी इलाज के लिए आते हैं, हमारा सपना है कि यह सुविधा हर घर तक पहुंचे।

अगले चरण में रामपुरा सेटेलाइट, एमबीएस, जेके लोन व न्यू मेडिकल कॉलेज में इसे प्रारंभ करने की योजना है। पिछले 1 माह में 175 गांवों के मरीज इससे जुडे़ हैं।

एनसीडीईएक्स ने तिलहन उत्पाद समूह को मजबूत किया , डीगम सोया तेल का वायदा शुरू

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मुंबई।  नेशनल कमोडिटी एण्ड डेरीवेटिवज एक्सचेंज (NCDEX) ने,शनिवार को  डीगम सोया तेल के वायदे में व्यापार के प्रारंभ की घोषणा की है . तिलहन उत्पाद समूह को पूरा करते हुए इस वायदे के आरम्भ से,मूल्य श्रृंखला सहभागियों को उनके मूल्य की जोखिम का प्रबंधन करने का और पारदर्शी तथा उचित मूल्य के संकेत प्राप्त करने का एक साधन उपलब्ध होगा.

एनसीडीईएक्स के प्रबंध निदेशक तथा सीईओ समीर शाह ने कहा कि  एक मजबूत, व्यापक आधार पर उत्पाद उपलब्ध कराने का हमारा निरंतर प्रयास रहा है, जो कृषि व्यवसायों को आर्थिक मूल्य जोड़ता है. उत्पाद समूहों में डीगम सोया तेल की संविदा को जोड़ने का उद्देश्य बाजार को एक संपूर्ण और मजबूत जोखिम प्रबंधन प्रस्तुत करना है. हम उद्यमों के निरंतर सहयोग से प्रोत्साहित हुए है और इस संविदा के सफलतापुर्वक आरंभ होने की आशा करते हैं.”

ऐसे 80% खाद्य तेलों को कच्चे रूप में आयात किया जा रहा है, जिनमें सुगन्धित सोया तेल (आधार केंद्र –कांडला )की वायदा संविदा होती है,जो आयातित सोया तेल के लिए एक संदर्भ प्रदान करने में मदद करेगा.भारत विश्व में सोयाबीन का पांचवां सबसे बड़ा आयातक होने के कारण, राष्ट्रीय बेंचमार्क मूल्य की उपलब्धता से पूरी सोया मूल्य श्रृंखला को मदद मिलेगी.

शाह ने कहा कि  सोया तेल का आयात बढ़ रहा है (पिछले पांच वर्षों से चार गुना बढ़कर वर्ष 2015 -16 में 42 लाख टन हो गया है.)और अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल की कीमतों में उच्च अस्थिरता को देखते हुए, घरेलू प्रतिभागियों को मार्जिन की भेद्यता का सामना करना पड़ता है. डीगम सोया तेल वायदे की शुरुआत यह सुनिश्चित करती है कि सोया व्यापार में अधिकतम हेजिंग का पूरा समाधान होता है.

डीगम सोया तेल यह एक इरादा मिलान संविदा है जिसमें प्रति लाख व्यापार पर रु. 0.10 का व्यवहार प्रभार होता है और कोई जोखिम प्रबंधन शुल्क नही होता है.यह कमोडिटीज की “ सूची – क” में शामिल है. डीगम सोया तेल (प्रतिक : SYODEGUM,आधार : कांडला )की जुलाई,अगस्त, सितम्बर,अक्टूबर,नवम्बर,दिसम्बर 2017 और जनवरी 2018 के माह में समाप्त होनेवाली संविदा विक्रय हेतु 12 जून 2017 से उपलब्ध होगी संविदा की विशेषताएं www.ncdex.com पर उपलब्ध है.

आधार बिना 30 जून के बाद नहीं मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ

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सरकार आधार कार्ड लागू  करने पर अड़ी, सुप्रीम कोर्ट की भी नहीं मानी  

नई दिल्ली। इनकम टैक्स रिटर्न के लिए पैन से आधार को लिंक करने के मुद्दे पर भले ही सुप्रीम कोर्ट ने फौरी राहत दे दी हो, लेकिन केंद्र सरकार आधार की अनिवार्यता से पीछे हटने के मूड में नहीं है। सरकार की ओर से स्पष्ट कहा गया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए UID अनिवार्य है। 30 जून के बाद ऐसे लोग कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाएंगे, जिनके पास आधार नंबर नहीं है।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने कहा है कि जहां आधार कार्ड बनवाने की सुविधा नहीं है, वहां राहत दी गई है, लेकिन जिन क्षेत्रों में लोगों को आधार कार्ड बनवाने का पर्याप्त मौका और सुविधाएं दी गईं, वहां यूआईडी के बगैर सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठाया जा सकेगा।सुप्रीम कोर्ट में पेश हलफनामे में कहा गया है कि 30 जून 2017 तक अनिवार्य रूप से आधार के लिए पंजीयन कराने की अधिसूचना जारी की गई है।  

लेकिन यह भी कहा गया है कि अपने क्षेत्र में सुविधाओं के अभाव में लोग ऐसा नहीं कर पा रहे हैं तो वे नजदीकी अधिकारी के पास आधार का पंजीयन कराने का अनुरोध कर सकते हैं। उन्हें अपना नाम और मोबाइल नंबर बताना होता ताकि जब भी सुविधाओं जुटें, उनका आधार बनवाया जा सके। ऐसे लोगों को सरकारी योजनाओें का लाभ मिलता रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि वह सरकार को 30 जून तक आधार अनिवार्य करने दिशा में बढ़ने दे, क्योंकि 95 फीसदी लोग आधार कार्ड बनवा चुके हैं और सामाजिक कल्याण की योजनाओं से आधार को लिंक करवाकर सरकार पिछले ढाई साल में 49,560 करोड़ रुपए की बचत कर चुकी है।

जीएसटी में उपलब्ध स्टॉक पर इनपुट क्रेडिट मिलेगा

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नई दिल्ली। उपलब्ध स्टॉक पर इनपुट क्रेडिट प्रदान किया जाएगा, मगर इसके लिए व्यवसायों को निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा। आप इनपुट क्रेडिट केवल उसी स्थिति में पा सकते हैं, यदि आप नियमित करदाता हैं। कंपोजीशन लेवी का विकल्प चुनने वाले करदाता इनपुट क्रेडिट का लाभ नही ले पाएंगे।वस्तु एवं सेवा कर के अंतर्गत एचएसएन कोड की अहम भूमिका होगी।

जीएसटी काउंसिल की श्रीनगर बैठक से पहले वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़े चार विषय सबसे ज्यादा चर्चित रहे। ये अब काफी हद तक स्पष्ट हो चुके हैं। इनमें एडवांस टैक्स, उपलब्ध स्टॉक पर इनपुट क्रेडिट, एचएसएन कोड और गैरपंजीकृत करदाता से लेन -देन शामिल हैं। ये ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें समझना हर जीएसटी पंजीकृत करदाता के लिए जरूरी है।

जीएसटी में हर प्रोडक्ट के लिए कोड

जीएसटी में हर प्रोडक्ट के लिए यह कोड निर्धारित रहेगा। एचएसएन कोड का मतलब है “हार्मोनाइज्ड सिस्टम ऑफ नॉमेनक्लेचर।” जीएसटी व्यवस्था के तहत बेची जा रही हर वस्तु के सही वर्गीकरण और उन पर लागू होने वाली टैक्स की दर को निश्चित करने के लिए एचएसएनकोड बनाए गए हैं। डेढ़ करोड़ से पांच करोड़ रुपये तक का टर्नओवर करने वाले व्यवसायों को दो अंकों का एचएसएन कोड दिया जाएगा। पांच करोड़ से ऊपर के टर्नओवर वाले व्यवसायों को चार अंकों का एचएसन कोड प्रदान किया जाएगा। 

लेन -देन की जटिलता

जीएसटी के लागू होने के साथ ही पंजीकृत और गैरपंजीकृत व्यवसायों के बीच होने वाले लेन -देन की जटिलताओं का सामना करना होगा। जीएसटी के तहत अगर गैर पंजीकृत करदाता से किसी पंजीकृत करदाता को आपूर्ति की जाती है तो यह कर योग्य होगी। दो गैरपंजीकृत करदाताओं के बीच होने वाला लेनदेन कराधान के अंतर्गत नहीं माना जाएगा। यदि आप पंजीकृत व्यवसायी हैं और किसी पंजीकृत व्यापारी से खरीद करते हैं तो वह जीएसटी प्राप्त करने और जमा करने के लिए जिम्मेदार होगा। लेकिन यदि आप एक गैरपंजीकृत व्यक्ति से खरीद करते हैं को जीएसटी देने का दायित्व भी आपका होगा।