Thursday, July 9, 2026
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आपूर्ति में कमी से शक़्कर की कीमतों में तेजी

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सरकार ने 5 लाख टन शुल्क मुक्त कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर कमी को दूर किया जा सके।

मुंबई। प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में बंपर उत्पादन और पिछले साल का भारी स्टॉक बचा होने के बावजूद देश के लगभग आधे राज्यों को चीनी की आपूर्ति की किल्लत से जूझना पड़ रहा है।

इस साल अब तक मॉनसूनी बारिश कम रहने से चीनी के उत्पादन में लगातार दूसरे साल सुधार की उम्मीद नहीं दिख रही है। यही वजह है कि पिछले कुछ हफ्तों में चीनी की कीमतें चढ़कर तीन माह के उच्च स्तर पर पहुंच गई है।
 
उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पिछले साल कम उत्पादन की वजह से इस बार चीनी की काफी कम आपूर्ति हो रही है।

इन राज्यों में ज्यादा खपत करने वाले पश्चिम बंगाल, राजस्थान और बिहार आदि शामिल हैं। खपत में इजाफा होने के बावजूद इनमें से कई राज्यों में चीनी का उत्पादन नहीं होता है।

सरकार ने इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि मिलें चीनी की कीमतें न बढ़ाएं और कीमतों को काबू में रखें क्योंकि पहले ही चीनी के दाम तीन माह के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं।

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा लिखे गए पत्र पर इस्मा की अध्यक्ष सरिता रेड्डी ने कहा, ‘हमने सभी सदस्य मिलों को कीमतों को काबू में रखने के लिए पत्र लिखा है। हम भी चाहते हैं कि कीमतें नियंत्रण में रहें और इसमें गैर-वाजिव इजाफा न हो।’ 
 
सरकार ने 5 लाख टन शुल्क मुक्त कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर कमी को दूर किया जा सके। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी कम मात्रा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

महाराष्ट्र राज्य सहकारी चीनी फैक्टरीज फेडरेशन के प्रबंध निदेशक संजीव बाबर ने कहा, ‘वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से करीब पंद्रह दिन पहले से ही कारोबारियों और स्टॉकिस्टों ने चीनी का भंडारण बंद कर दिया था।

इससे चीनी का कारोबार थम सा गया था। जुलई के पहले हफ्ते में कारोबारियों को ई-बिल जेनरेट करने की समस्या का सामना करना पड़ा। इससे भी आपूर्ति बाधित हुई। लेकिन दूसरे हफ्ते से अचानक मांग आने से कीमतें चढ़ गईं।’

भारत के मध्य, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों को अतिरेक चीनी या आयात के माध्यम से करीब 54 लाख टन चीनी की जरूरत है क्योंकि यहां चीनी की फिलहाल काफी कमी है।
 
उत्तर प्रदेश में 2016-17 के दौरान 87 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ जबकि यहां खपत 37 लाख टन थी। इसी तरह महाराष्ट्र में 42 लाख टन उत्पादन हुआ जबकि खपत 33 लाख टन रही। ऐसे में चीनी की किल्लत वाले राज्यों में यहां से चीनी की आपूर्ति की जरूरत है, ताकि कीमतें काबू में रह सकें।

उधर, मुख्य गन्ना उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है। कर्नाटक में भी 12 जुलाई को खत्म सप्ताह में सामान्य से कम बारिश हुई है। इससे इन इलाकों में गन्ने की पैदावार घटने की आशंका है। हालांकि मौसम विभाग का अनुमान है आने वाले हफ्तों में अच्छी बारिश होगी, जिससे गन्ने की फसल को फायदा होगा

इस बीच, रेटिंग एजेंसी इक्रा ने अपने हालिया अनुमान में कहरा है कि भारत में चीनी की कीमतों में तेजी आ सकती है क्योंकि सरकार ने चीनी के आयात शुल्क मौजूदा 40 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया है। 

आयकर रिटर्न में गलती का भुगतना पड़ेगा खामियाजा

नोटिस का जवाब न देने पर आयकर विभाग करदाता पर हर नोटिस के लिए 10,000 रुपए की पेनल्टी लगा सकता है।

नई दिल्ली। आयकर विभाग की तमाम धाराएं करदाता पर पेनल्टी लगाने के प्रावधान से जुड़ी हैं।

अगर आप आयकर विभाग से जुड़े किसी भी कानून का उल्लंघन करते हैं तो इन्हीं धाराओं के अंतर्गत विभाग आप पर पेनल्टी लगाता है।

अधिकांशत: करदाताओं को इसकी जानकारी कम होती है, इसीलिए वो मुश्किल में फंस जाते हैं।

टैक्स एक्सपर्ट अनिल काला ने बताया कि कई बार करदाता जानकारी के अभाव में तमाम ऐसी छोटी-छोटी गलतियां करते हैं, जिनकी वजह से उनकों दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आयकर विभाग इसको कानून का उल्लंघन मान करदाता पर प्रावधान के अनुसार पेनल्टी लगा देते हैं। इनसे बचने के लिए करदाता को इन गलतियों के बचने की जरूरत है।

पेनल्टी से बचने के लिए इन बातों का रखें ख्याल:
1- नोटिस का जबाव न देने पर: इंकम टैक्स डिपार्टमेंट से कोई भी नोटिस आने पर इसका जवाब जरूर दें। भ्रम की स्थिती में विभाग की ओर से करदाता को कई बार वर्तमान या पिछले आयकर रिटर्न से जुड़ी जानकारी मांगने के लिए सेक्शन 142(1), 143(2), 142(2A) के अंतर्गत नोटिस भेजे जाते हैं।

करदाता की ओर से इन नोटिस का जवाब न देने पर विभाग करदाता पर हर नोटिस के लिए 10,000 रुपए की पेनल्टी लगा सकता है। यह पेनल्टी सेक्शन 271(1)(b) के अंतर्गत विभाग की ओर से लगाई जाती है।

2- आय छुपाने पर: मकान से मिलने वाला किराया, बचत खाते पर मिलने वाला ब्याज, सलाहकार के रूप में जुड़कर किसी संस्थान से कमाई गई आय समेत तमाम ऐसी इनकम होती हैं जिनको करदाता रिटर्न फाइल करते समय दिखाना भूल जाता है।

कानून की दृष्टि से आय छुपाने के जुर्म में विभाग सेक्शन 271(1)(C) के अंतर्गत करदाता पर 300 फीसदी तक की पेनल्टी लगा सकता है। इस स्थिति में कम से कम लगने वाली पेनल्टी भी 100% की होती है।

3- इंकम टैक्स रिटर्न फाइल न करने पर: टैक्सेबल इंकम होने की स्थिति में अगर करदाता रिटर्न फाइल नहीं करता है तो सेक्शन 271F के अंतर्गत विभाग 10,000 रुपए तक की पेनल्टी लगा सकता है। वित्त वर्ष 2015-16 के रिटर्न करदाता 31 मार्च 2017 तक फाइल कर सकता है।

 

दवाओं के भ्रामक विज्ञापन टीवी पर दिखाए तो कार्रवाई

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने टीवी चैनलों को आयुर्वेदिक, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथिक उत्पादों तथा दवाओं के भ्रामक या झूठे दावे करने वाले विज्ञापनों को न दिखाने की चेतावनी दी है।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के निदेशक (प्रसारण) अमित कटोच ने इस संबंध में परामर्श जारी किया है। इसमें कहा गया है कि चैनलों को केवल उन उत्पादों और दवाओं का विज्ञापन करना चाहिए जिनके पास वैध लाइसेंस हों।

ऐसा नहीं होने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आयुष मंत्रालय ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय से कहा था कि कुछ चैनल इस तरह की दवाओं के बढ़ा-चढ़ाकर या अनुचित दावे वाले विज्ञापन दिखा रहे हैं।

इसके बाद सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने यह परामर्श जारी किया है। परामर्श में कहा गया है कि इस तरह के विज्ञापन उपभोक्ताओं को गुमराह कर रहे हैं और खुद ही दवा लेने के चलन के साथ स्वास्थ्य संबंधी खतरे पैदा कर रहे हैं।

ऐसे विज्ञापनों या कार्यक्रमों में स्वयंभू डॉक्टर, गुरु और वैद्य सभी तरह की स्वास्थ्य समस्याओं के चमत्कारिक समाधान सुझाते हैं। परामर्श के अनुसार इन उत्पादों और दवाओं के गुमराह करने वाले विज्ञापन दवा और जादुई उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) कानून 1954 और ड्रग्स और कॉस्मेटिक कानून 1940 का उल्लंघन करने वाले हैं।

सुगम पोर्टल समस्या समाधान के बजाय टालने का जरिया बन गया

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कई उदाहरण हैं जो सुगम पोर्टल की पोल खोलते हैं कि कैसे अधिकारी और कर्मचारी कागजों में ही समस्या का समाधान कर रहे हैं।

कोटा। राजस्थान में सरकारी विभागों में आम आदमी की शिकायतों की सुनवाई नहीं होने पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने सुगम पोर्टल की व्यवस्था की, ताकि उच्च अधिकारी समस्याओं को गंभीरता से लें और समाधान करवाएं। खुद सीएम इसकी मॉनिटरिंग करती हैं। इसके बावजूद आम लोगों की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।

सुगम पोर्टल पर की गई शिकायतों में अधिकांश का जवाब मिलता है कि समस्या का समाधान कर दिया गया है, जबकि हकीकत में समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। समस्या वहीं की वहीं है, लेकिन पोर्टल पर उसका निराकरण बताकर रिकॉर्ड सुधारा जा रहा है।

ऐसे कई उदाहरण हैं जो सुगम पोर्टल की पोल खोलते हैं कि कैसे अधिकारी और कर्मचारी कागजों में ही समस्या का समाधान कर रहे हैं। वल्लभबाड़ी सेवन वंडर रोड पर ईंट बेचने वालों ने सड़क किनारे अतिक्रमण कर रखा है। जगह-जगह ईंटों के ढेर लग रहे हैं।

सड़क पर ही वाहन खड़े रहते हैं और ईंटों का लदान होता रहता है। इससे लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। वहीं रहने वाले घनश्याम रघुवंशी ने इसकी शिकायत 1 वर्ष पूर्व सुगम पोर्टल पर की थी। उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो सीएम को शिकायत की।

सीएमओ से कार्रवाई के लिए कलेक्टर के यहां शिकायत आई। इसके बाद एक पटवारी आया और मौके पर शिकायतकर्ता को बुलाकर अतिक्रमियों से रूबरू करवा दिया। उसका असर ये रहा कि अतिक्रमण तो हटे नहीं, अतिक्रमी रघुवंशी से झगड़ा करने लगे।

पोर्टल से जवाब आया कि शिकायत का समाधान हो गया। उसके बाद से अब तक 4 बार शिकायत कर दी। चौथी शिकायत का शनिवार को ही जवाब आया समस्या दूर कर दी। जबकि, रविवार को भी वहां ईंट की दुकानें लगी थीं।
लापरवाही

1 समस्या वहीं, शिकायतकर्ता काट रहा चक्कर
चंद्रेसल में बीएसएनएल टावर के पास नाले पर लोगों ने अतिक्रमण कर लिया। इसकी शिकायत परमेंद्र नागर ने 16 जुलाई 2016 को सुगम पोर्टल पर दी थी। वहां से जवाब आया कि ये कृषि भूमि रूपांतरित क्षेत्र नहीं है।

फिर शिकायत की तो जवाब आया कि अभी बजट नहीं है, बजट आते ही कार्रवाई की जाएगी। तीसरी बार शिकायत की तो जवाब मिला समस्या का समाधान कर दिया गया है। शिकायतकर्ता नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई जवाब तक नहीं दे रहा।

2 नोटशीट जारी कर दी कि समस्या दूर हो गई
वल्लभबाड़ी में मकान नंबर 162 से लेकर 176 तक के पीछे से निकल रहे नाले की सफाई लंबे समय से नहीं हुई। इस नाले पर अतिक्रमण भी हो रहा है। नाले का पानी घरों में भर रहा है। इसकी शिकायत डॉ. संजय भार्गव ने सुगम पोर्टल पर 1 जून 2016 को दी थी। कोई कार्रवाई नहीं होने पर 2 जुलाई को फिर रिमाइंडर डाला।

इसके बाद 7 जुलाई को नगर निगम की तरफ से जवाब मिला कि समाधान कर दिया गया है, जबकि हकीकत में समस्या वहीं है। निगम पहुंचे तो कर्मचारियों ने नोटशीट की फोटो कॉपी दे दी कि ये देखो कार्रवाई हो गई।

 

प्रणब मुखर्जी की राष्ट्रपति पद से विदाई , समारोह में याद आया संसद का पहला दिन

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नई दिल्ली । निवर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अब सोमवार से पूर्व राष्ट्रपति हो जाएंगे। ससंद भवन में रविवार को प्रणब मुखर्जी का विदाई समारोह संपन्न हो गया। प्रणब मुखर्जी ने बीते पांच साल में पक्ष और विपक्ष की सीमाओं से भी बढ़कर काम किया। जिस शान से यूपीए सरकार के दौरान प्रणब दा राष्ट्रपति चुने गए थे उसी शान से एनडीए सरकार में उनकी विदाई भी हुई।

प्रणब दा ने राष्ट्रपति के तौर पर अपने आखिरी संबोधन में कहा, यदि मैं कहूं कि मैंने इस संसद का निर्माण किया है तो मेरे साथ शालीनतापूर्ण व्यवहार नहीं किया जाएगा। मुखर्जी ने कहा कि मैंने अपने जीवन में बहुत कुछ सीखा है। मेरे करियर को इंदिरा गांधी ने दिशा दी। मुझे इस लोकतंत्र के मंदिर ने तैयार किया है। देश की एकता संविधान का आधार है।

उन्होंने कहा कि देश में जीएसटी बिल का पास होना परिपक्व लोकतंत्र की निशानी है। संसद में बिना बहस के पास हुआ बिल जनता के साथ धोखा है। संसद में व्यवधान सरकार से ज्यादा विपक्ष के लिए नुकसानदायक है।

शानदार कार्यक्रम के लिए उन्होंने सभी काे शुक्रिया कहा। इस अवसर पर लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने प्रणब मुखर्जी को एक पुस्तक भेंट की जिसमें कि उनके द्वारा राष्ट्रापति को दिए गए भाषण का संकलन है जिस पर सांसदों के हस्तांक्षर किए गए हैं।

विदाई समारोह में बोले उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के विदाई समारोह सम्मान में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि प्रणब दा विश्व के सर्वश्रेष्ठ विदेश मंत्री रहे और पद्म विभूषण का सम्मान भी प्राप्त किया।

एचपीसीएल के अधिग्रहण के बाद ओएनजीसी को खुली पेशकश की जरूरत नहीं

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हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लि. में सरकार की पूरी 51.11 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की सैद्धांतिक मंजूरी

नयी दिल्ली। ओएनजीसी को एचपीसीएल में सरकार की 51.11 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के बाद अल्पांश शेयरधारकों के लिये खुली पेशकश की आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि सौदे से अधिग्रहण संबंधी नियम लागू नहीं होगा जैसा कि 2002 में आईओसी-आईबीपी विलय में हुआ था।

पिछले सप्ताह मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने पिछले सप्ताह तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) को खुदरा ईंधन और विपणन कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लि. में सरकार की पूरी 51.11 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। एचपीसीएल अलग सूचीबद्ध कंपनी बनी रहेगी।

ओएनजीसी को एचपीसीएल के अल्पांश शेयरधारकों को खुली पेशकश नहीं करना होगा क्योंकि सरकार की हिस्सेदारी सार्वजनकि क्षेत्र की दूसरी कंपनी को हस्तांतरित की जा रही है और वास्तव में मालिकाना हक में बदलाव नहीं हो रहा है।अधिकारी ने कहा, खुली पेशकश की जरूरत नहीं है क्योंकि प्रबंधन के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं होगा। यह संबद्ध पक्ष के बीच लेन-देन है।

सेबी की अधिग्रहण संहिता के तहत अगर कोई कंपनी किसी सूचीबद्ध कंपनी में 25 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी खरीदती है तो उसे अल्पांश शेयरधारकों के लिये खुली पेशकश करनी होगी ताकि लक्षित कंपनी में कम-से-कम 26 प्रतिशत और हिस्सेदारी खरीद सके।

उल्लेखनीय है कि फरवरी 2002 में सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन आयल कारपोरेशन (आईओसी) ने 33.58 प्रतिशत हिस्सेदारी खुदरा ईंधन कंपनी में 33.58 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण 1,153.68 करोड़ रुपये में किया था और उसे अतिरिक्त शेयर के लिये खुली पेशकश करनी पड़ी थी।

इस बारे में अधिकारी ने कहा, आईओसी और आईबीपी का विलय बोली मार्ग के जरिये हुआ। रिलायंस इंडस्ट्रीज भी बोलीदाता में शामिल थी। उस समय आईबीपी को पूरी तरह बेचने की पेशकश की गयी, इसीलिए जब प्रबंधन बोली के जरिये बेचने का फैसला किया, खुली पेशकश का मामला आया।

 

 

 

नोटबंदी : आयकर विभाग ने 5,400 करोड़ की अघोषित आय का पता लगाया

नई दिल्ली । आयकर विभाग ने 8 नवंबर के बाद से एक हजार से अधिक सर्च ऑपरेशन के जरिए 5,400 करोड़ रुपए की अघोषित आय का पता लगाया है। यह जानकारी बीते शुक्रवार संसद में दी गई।

आपको बता दें कि नोटबंदी के बाद देश में 9 नवंबर से ही 500 और 1000 रुपए के नोटों को अमान्य कर दिया गया था। वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के जरिए बताया, “9 नवंबर 2016 से लेकर 10 जनवरी 2017 तक आयकर विभाग की ओर से करीब 1,100 सर्च ऑपरेशन और सर्वे किए गए।

इसके अलावा संदिग्ध लेन-देन के 5,100 मामलों में वेरिफिकेशन नोटिस भी जारी किए गए थे।”उन्होंने आगे बताया, “इस तरह की कार्यवाई में 610 करोड़ रुपए की बहुमूल्य चीजों की जब्ती की गई जिसमें से 513 करोड़ रुपए की नकदी भी शामिल है। वहीं नई करेंसी में जब्त की गई रकम करीब 110 करोड़ रुपए थी।

इस तरह की कार्यवाही में 5,400 करोड़ रुपए की अघोषित आय का भी पता लगा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक 1,57,818 की संख्या में फेक इंडियन करेंसी नोट पाए गए जिनकी कुल कीमत 11,24,04,980 रुपए रही।

ये आंकडे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से प्रदान किए गए जो कि 9 नवंबर 2016 से 14 जुलाई 2017 के बीच के हैं।” बीते हफ्ते आयकर विभाग ने 5.56 लाख खाताधारकों को चिन्हित किया है जिनसे नोटबंदी के बाद बड़े स्तर पर जमा की गई उस नकदी के बारे में जानकारी मांगी जाएगी जो कि उनके टैक्स प्रोफाइल से मेल नहीं खाती है।

नीट के पेपर अगले साल से सभी भाषाओं में एक जैसे होंगे

कोलकाता। केंद्रीय मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्री प्रकाश जावडेकर ने मेडिकल कोर्सों में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा NEET (नीट) को लेकर बड़ा ऐलान किया है।

उन्होंने कहा है कि अगले साल से देश भर में नीट के पेपर एक जैसे होंगे। अलग-अलग क्षेत्रीय भाषाओं के लिए नीट के क्वेस्चन सेट अलग-अलग नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि अन्य भाषाओं में नीट के क्वेस्चन पेपर्स सिर्फ इंग्लिश वाले पेपर का अनुवाद होगा।

गौरतलब है कि इस साल छात्रों ने शिकायत था कि इस साल नीट के क्वेस्चन पेपर्स अलग-अलग थे। कुछ छात्रों की शिकायत थी कि बंगाली में जो नीट का पेपर था, वह इंग्लिश और हिंदी वाले पेपरों के मुकाबले ज्यादा कठिन था।

इस साल अलग-अलग भाषाओं में क्वेस्चन पेपर में असमानता क्यों थी, इसका भी उन्होंने जवाब दिया। इस साल बड़ी संख्या में छात्रों की संख्या को देखते हुए यह फैसला लिया गया था क्योंकि अनुवाद में काफी समय लगता और सुरक्षा से संबंधित समस्या भी पैदा हो सकती थी।