Thursday, July 9, 2026
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देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बनने का रास्ता साफ

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नई दिल्ली। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर के प्रस्तावित विलय को मंजूरी दे दी है। वोडाफोन का नई कंपनी में 45.1 फीसदी हिस्सा होगा। जबकि आइडिया की 26 फीसदी हिस्सेदारी होगी। वहीं, 28.9 फीसदी हिस्सेदारी अन्य शेयरधारकों के पास होगी।

इस विलय से देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बनेगी। इसकी ग्राहक संख्या 40.71 करोड़ और 34.48 फीसदी की बाजार हिस्सेदारी होगी। इस विलय से जहां वोडाफोन इंडिया की बाजार में पकड़ मजबूत होगी। वहीं आइडिया की मेट्रो शहरों में पहुंच बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि 23 अरब डॉलर का यह विलय भारत में विलय-अधिग्रहण का सबसे बड़ा लेनदेन होगा। इंडिया रेटिंग्स के मुताबिक मर्जर से बनने वाली कंपनी का रेवेन्यू 77,500 करोड़ से 80,000 करोड़ रुपए होगा। इस डील पर काम करने वाली लॉ फर्म शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी के वकीलों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रतिस्पर्धा नियामक ने बिना किसी शर्त के इस विलय को मंजूरी दी है। उसे डील की व्यापक समीक्षा में ऐसा कुछ ऐसा नहीं मिला जिससे टेलीकॉम बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती हो।

दूरसंचार नियामक ट्राई के 31 मई तक आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल 21.09 करोड़ ग्राहक संख्या (17.86% बाजार हिस्सेदारी) के साथ वोडाफोन देश की दूसरी और 19.62 करोड़ ग्राहक संख्या (16.62% बाजार हिस्सेदारी) के साथ आइडिया देश की तीसरी बड़ी टेलीकॉम कंपनी है।

जबकि 27.84 करोड़ ग्राहक संख्या (23.59% बाजार हिस्सेदारी) के साथ भारती एयरटेल देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है। विलय की इस डील का ऐलान इस साल मार्च में हुआ था। इस पर शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी ने वोडाफोन इंडिया और वोडाफोन मोबाइल सर्विसेस को सलाह दी थी। 

 

सेब से भी महंगे टमाटर, 100 से 130 रुपए किलो के भावों पर

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बीकानेर। ‘भईया कैसे दिए टमाटर। 40 रुपए पाव। क्या। 40 रुपए पाव। किलो के 130 रुपए लगा देंगे। काहे मजाक कर रहे हो भईया। नहीं बहनजी मजाक नहीं कर रहा। यही भाव है। हे राम। इत्ते महंगे। रहने ही दो भईया’। सब्जी मंडी में दुकानदार और ग्राहकों के बीच यह वार्तालाप आम है।

ज्यादातर मामलों में बात मोलभाव से आगे बढ़ नहीं पाती ओर बस टमाटर लिए बगैर सब्जी की खरीददारी पूरी हो रही है। वजह कुछ समय पहले दस रुपए किलो बिकने वाले टमाटर के भाव इन दिनों आसमान जो छू रहे है। खुदरा बाजार में 100 से 130 रुपए किलो बिक रहा टमाटर खरीददारी से कहीं ज्यादा चर्चा का विषय बन गया है।

हालात ये है कि सब्जियों का सिरमौर बना टमाटर लगभग सभी सब्जियों से तो महंगा है ही साथ ही इन दिनों टमाटर ने फलों को भी भावों के लिहाज से पछाड़ दिया है। कोटगेट, फड़बाजार, बड़ा बाजार आदि सब्जी बाजार में टमाटर के बढ़े भावों के कारण टमाटर की बिक्री कम हो गई है।

व्यापारी भी बढ़े भावों के कारण टमाटर की खरीद में रूचि नहीं दिखा रहे। व्यापारी बताते है बरसात के कारण बीकानेर में टमाटर कम रहे है और जो रहे है वो भी बढ़े भावों और खराब क्वालिटी के कारण नुकसान का सौदा साबित हो रहे है।
बीकानेर सब्जी मंडी में इन दिनों हिमाचल के सोलन से टमाटरों की आवक हो रही है।

वहां से प्रतिदिन 150 से 200 कैरेट टमाटर रहे है। व्यापारी संजय रूपेला ने बताया कि इन दिनों मंडी में 68 से 75 रुपए के होलसेल भाव है। जो बाजार तक आते आते 100 से 130 रुपए तक हो जाते है। पिछले वर्ष इसी सीजन में टमाटर के होलसेल भाव 15 से 20 रुपए किलो के थे।

दशहरे तक होंगे भाव कम
सब्जी व्यापारी सुनील कुमार, धनराज और भागीरथ बताते है तीन चार साल पहले टमाटर के भावों में इतनी तेजी आई थी। नोट बंदी के दौरान अच्छी क्वालिटी के टमाटर 10 रुपए किलो के भाव से बिका था। बरसात का सीजन खत्म होते ही दशहरे के आसपास हनुमानगढ़, पीलीबंगा, बैंगलोर ओर नासिक के टमाटर की आवक होगी तब ही भावों में कमी आने की संभावना बनेगी।

बरसात से आवक कम होने से बढ़े भाव
बीकानेरमें हिमाचल, बैंगलोर, शमला, नासिक, आबू रोड और रतलाम के साथ ही हनुमानगढ़ और पीलीबंगा से टमाटर आते है। जून, जुलाई से दशहरे तक बीकानेर में हिमाचल क्षेत्र से टमाटर की आवक होती है। इन क्षेत्रों में इन दिनों बरसात के कारण टमाटर की आवक कम हो रही है।

जिससे भावों में बेतहाशा तेजी हो गई है। मंडी में 75 से 80 रुपए किलो आने वाला टमाटर बाजार तक पहुंचते-पहुंचते गाड़ी भाड़ा सहित 100 से 120 रुपए से ऊपर तक के भाव छू जाता है

जीएसटी से जुलाई-सितंबर के लिये व्यावसायिक विकास में 13 प्रतिशत गिरावट

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नयी दिल्ली। देश में माल एवं सेवाकर जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद इसमें आने वाले शुरुआती परेशानियों को देखते हुये जुलाई से सितंबर तिमाही के दौरान व्यावसायिक विकास में 13 प्रतिशत तक गिरावट आई है। एक अध्ययन रिपोर्ट में यह निष्कर्ष सामने आया है।

डन एण्ड ब्राडस्ट्रीट के संयुक्त व्यावसायिक आशावाद सूचकांक जुलाई- सितंबर 2017 के लिये 72.1 अंक रहा है जो कि पिछले साल इसी अवधि के सूचकांक से 13.3 प्रतिशत कम है।

डन एण्ड ब्राडस्ट्रीट के प्रबंध निदेशक मनीष सिन्हा ने कहा, बड़े पैमाने पर हुये बदलाव को देखते हुये अध्ययन में भाग लेने वाली कंपनियों ने नई व्यवस्था में आने वाले शुरुआती परेशानियों को देखा है, नई व्यवस्था की जटिलता को समझा रहे हैं, जीएसटी प्रणाली में इनपुट क्रेडिट और लाजिस्टिक्स के साथ समन्वय बिठा रहे हैं।

इसमें कहा गया है कि बड़ी कंपनियां हालांकि बदलाव के लिये तैयार दिखतीं हैं, लेकिन लघु एवं मझाौली कंपनियां के मामले में ऐसा नहीं कहा जा सकता है।

एक साल पहले की इसी अवधि के मुकाबले आशावाद सूचकांक के छह विभिन्न वर्गों में से चार में गिरावट दर्ज की गईहै। जुलाई-सितंबर 2017 अवधि के लिये बिक्री कारोबार, शुद्ध लाभ, नये आर्ड और बिक्री मूल्य के मामले में सूचकांक कम हुआ है।

 

 

 

आधार नम्बर और जीएसटी बिना माल नहीं बेचेंगे डिस्ट्रीब्यूटर्स

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नई दिल्ली। चन्दौसी में डिस्ट्रीब्यूटर्स वेलफेयर एसोसिएशन की बैठक जीएसटी के प्रावधानों पर चर्चा हुई, बैठक में डिस्ट्रीब्यूटर्स की सर्वाधिक चिंता व्यापारियों द्वारा नगद में माल की बिक्री को लेकर जताई गई।

भविष्य में आयकर विभाग और जीएसटी विभाग की परेशानियों से बचने के लिए डिस्ट्रीब्यूटर्स ने निर्णय लिया कि बिना जीएसटी नम्बर अथवा व्यापारी के आधार नम्बर के कोई भी बिक्री नहीं की जाएगी। इतना ही नहीं डिस्ट्रीब्यूटर्स अधिक से अधिक चैक से भुगतान लेंगे और भविष्य में होने वाली परेशानियों से बचेंगे।

सभी डिस्ट्रीब्यूटर्स साफ सुथरा व्यापार करेंगे। राष्ट्र के विकास में योगदान देंगे। बाहर की मंडियों से अवैध रुप से लाए जा रहे माल पर चिंता व्यक्त की गई। डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना था कि यह सीधे सीधे उनके हितों को नुकसान पहुंचता है। इसलिए बाहर से अवैध रुप से लाए जा रहे मालों की सूचना जीएसटी विभाग के सचल दस्ते को देने का निर्णय भी लिया गया।

बैठक की अध्यक्षता राजीव वाष्र्णेय तथा संचालन मंत्री दीपक अग्रवाल ने किया। इस दौरान प्रेम ग्रोवर, विपिन मल्होत्रा, पलाश मित्तल, अमित मित्तल, दीपक गर्ग, रवि वाष्र्णेय, सुरेश अग्रवाल, दीपक अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

‘संसद मंदिर और लोगों की सेवा अभिलाषा’, प्रणब दा का अंतिम संबोधन

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नई दिल्ली । समाज में विषमता और बढ़ते विद्वेष को लेकर बार बार आगाह करते रहे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी देश के नाम अपने आखिरी संबोधन में भी याद दिलाना नहीं भूले कि भारत की आत्मा बहुलवाद और सहिष्णुता है।

उन्होंने अपील की अहिंसा की शक्ति को मजबूत कर हमें मजबूत समाज का निर्माण करना चाहिए। अपने संक्षिप्त भाषण में लगभग एक तिहाई समय वह इन मुद्दों पर भी बोले। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पिता तुल्य करार दिया।

मंगलवार को रामनाथ कोविंद नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे।
सोमवार की शाम प्रणब खुद भी यह कहने से नहीं चूके कि अब वह एक सामान्य नागरिक होंगे। लेकिन इतना संतोष है कि पांच साल के कार्यकाल में उन्होंने संविधान को संरक्षित करने की कोशिश की है। इसी क्रम में उन्होंने समाज में बिखराव पर चिंता जाहिर की।

उन्होंने कहा- ‘हर दिन हम हिंसा का बढ़ता हुआ रूप देख रहे हैं.. इसके केंद्र में भय और आपसी अविश्वास है।’ उन्होंने आगाह किया कि भारत एक भौगोलिक क्षेत्र भर नहीं बल्कि विभिन्न सोच, विचारधारा और दर्शन का मिलन है। विभिन्न संस्कृति, धर्म, विश्वास और भाषा ने भारत को खास बनाया है।

सारथी ऐप से एक साथ बुक हो जाएंगे ट्रेन और फ्लाइट टिकट

नई दिल्ली। आप चाहे ट्रेन से यात्रा करना चाहते हों या फिर फ्लाइट से, टिकट बुक कराने के लिए अब आपको अलग-अलग ऐप की मदद नहीं लेनी होगी। रेलवे ने एक नई सारथी ऐप लॉन्च कर दी है जिससे यात्री फ्लाइट और ट्रेन दोनों के लिए टिकट बुक करवा सकेंगे। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने शुक्रवार को यह ऐप लॉन्च की है।

ऐप के जरिए यात्री एक ही प्लेटफॉर्म से , ट्रेन में सफाई, फ्लाइट टिकट बुक और खाना ऑर्डर जैसे सभी काम कर पाएंगे। इस नए ऐप में महिला सुरक्षा, शिकायत सुविधा और सुधार के लिए सुझाव जैसे फीचर्स भी शामिल किए गए हैं।

सुरेश प्रभु ने कहा, “यात्रियों को बेहतर अनुभव देने के लिए सभी सर्विसेज को एक ही ऐप में लाना जरूरी था। अब यात्री एक ही विंडो से सभी सर्विस को यूज कर पाएंगे”। इसके साथ ही सुरेश प्रभु ने देश की पहली सौर उर्जा से चलने वाली ट्रेन डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) का डेमो भी दिया। इस पोस्ट में हम आपको सारथी एप और सौर ट्रेन से जुड़ी बड़ी बातें बताने जा रहे हैं।

  1. सारथी एप और सौर ट्रेन से जुड़ी बड़ी बातें:
     यात्रियों को अलग-अलग एप्स को डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं होगी। यह ऐप यात्रियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर सभी सर्विस उपलब्ध कराएगी।
  2.  यात्री इस एप के जरिए फ्लाइट टिकट भी बुक कर पाएंगे। सुरेश प्रभु ने थर्ड एसी कोच में दिव्यांगों के लिए आरक्षण की सुविधा भी शुरू की है। इसके अलावा विदेशियों के लिए एडवांस बुकिंग की सुविधा को 120 दिनों से बढ़ाकर 365 दिन किया गया है।
  3. थर्ड एसी कोच में लोअर बर्थ दिव्यांगों के लिए आरक्षित होंगी। साथ ही मिडिल बर्थ दिव्यांग के साथ सफर कर रहे यात्री के लिए रिजर्व होंगी। लेकिन आपको बता दें कि थर्ड एसी कोच में केवल एक ही लोअर बर्थ दिव्यागों के लिए उपलब्ध होगी। 
  4. कोटा प्रावधान जो कि पहले स्लीपर क्लास तक सीमित था उसे अब थर्ड एसी तक बढ़ा दिया गया है।
    इस ऐप से टिकट बुक करते समय यात्री अपना फीडबैक भी शेयर कर पाएंगे।
  5.  क्लीनर ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सुरेश प्रभु ने पहली सौर उर्जा से चलने वाली ट्रेन लॉन्च की है। उन्होंने कहा, “भारतीय रेल ऊर्जा के नॉन-कंवेंशनल सोर्सेस के उपयोग को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है”।
  6.  मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, 6 ट्रेलर-कोच के साथ सौर ऊर्जा से चलने वाली ट्रेन में 21,000 लीटर डीजल बचाने की क्षमता है। और इस प्रकार प्रति वर्ष 12 लाख रुपये की लागत बचत होती है।कोच की छत पर लगाए गए सौर पैनलों से
  7. बनने वाली बिजली से ही ट्रेन की बिजली की जरूरतें पूरी की जाएंगी। भविष्य में सौर उर्जा से चलने वाली और अधिक गाड़ियों को लॉन्च किया जाएगा।

शेयर बाजार ने तोड़ा रिकॉर्ड, सेंसेक्स 32,245 अंक की ऊंचाई पर बंद

मुंबई। सेंसेक्स में एक बार फिर रिकॉर्ड तोड़ तेजी दिखी। वहीं निफ्टी भी अपने नये शिखर पर पहुंचता दिखा। जहां 30 शेयरों वाला बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 216.98 अंक बढ़कर 32,245.87 पर हुआ बंद, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी अपनी रिकॉर्ड तोड़ ऊंचाई के साथ 51.15 अंक के साथ 9,966.40 बंद हुआ।

सोमवार को सुबह से ही बाजार में तेजी दिख रही थी। सुबह की कारोबार का नया रिकॉर्ड बनाया है। सेंसेक्स ने कारोबार के खुलने के साथ ही बेहतरीन शुरूआत करते हुए 32,135.91 अंकों को छू लिया। इससे पहले सेंसेक्स इस उंचाई तक कभी नहीं पहुंचा था।

सेंसेक्स के अलावा निफ्टी ने भी नई उंचाई को छुआ। निफ्टी कारोबार की शुरुआत में 9,939.30 अंकों तक पहुंच गया।बीएसई ने कारोबार की शुरुआत करते हुए शुक्रवार की तेजी बनाए रखी। शुक्रवार को सेंसेक्स 32029 पर बंद हुआ था और आज के कारोबार की शुरुआत में ही सेंसेक्स सौ से अधिक अंकों तक चढ़ गया।

सेंसेक्स में तेजी देखने के बाद निवेशकों के चेहरे खिल गए। वहीं, निफ्टी भी सेंसेक्स की तरह नई उंचाई पर पहुंच चुका है। निफ्टी शुक्रवार को 9915 पर बंद हुआ था, पर सोमवार को कारोबार की शुरुआत में लगभग 25 अंकों

बैंकिंग रेग्युलेशन बिल लोकसभा में पेश, आरबीआई को मिलेगी पावर

नई दिल्ली । स्ट्रेस्ड एसेट्स की समस्या को हल करने के लिए आरबीआई को बैंकिंग कंपनियों को निर्देशित करने का अधिकार देने वाला बिल सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में पेश किया।

बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2017 जो कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 में संशोधन करता है और यह बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अध्यादेश, 2017 की जगह, जिसे इस साल मई में लागू किया गया था। यह उपाय भारतीय रिजर्व बैंक को अनुमति देता है कि वो स्ट्रेस्ड एसेट्स से जुड़े विशेष मामलों में दिवालियापन प्रक्रिया शुरू कर सके।

क्या था अध्यादेश
इस अध्यादेश के तहत रिजर्व बैंक को डूबे कर्जों के मामले में एक्शन करने के लिए और ज्यादा ताकत दी गई थी। इसके तहत आरबीआई बैंकों को कर्ज नहीं चुकाने वाली कंपनियों के खिलाफ बैंकरप्सी प्रक्रिया शुरू करने का आदेश देने का अधिकार मिल गया था। इसी अधिकार के तहत आरबीआई ने 12 बड़े कर्जों के मामले में बैंकों को एक्शन लेने के लिए कहा है।

साथ ही आरबीआई को यह अधिकार भी दिए गए हैं कि वो रिजोल्यूशन के लिए दिशा निर्देश जारी कर सके और प्राधिकरण और कमेटी की नियुक्ति या नियुक्ति को अनुमोदित कर सके जो कि स्ट्रेस्ड एसेट्स के मामले से निपटने के लिए बैंकिंग कंपनियों को सलाह देंगी।

जेटली ने सदन में यह बिल ऐसे माहौल में पेश किया है जब सरकार देशभर में गौरक्षकों की ओर से की गईं लिंचिंग की घटनाओं पर विपक्ष के विरोध का सामना कर रही है।

फर्जी कंपनियों की मदद करने वाले 26 चार्टर्ड अकाउंटेंट जांच के घेरे में

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नई दिल्ली। मुखौटा (शेल) कंपनियों की कथित रूप से मदद करने को लेकर कम-से-कम 26 चार्टर्ड अकाउंटेंट इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (ICAI) की जांच के घेरे में हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह कहा।

आईसीएआई चार्टर्ड अकाउंटेंट की रेग्युलेटरी बॉडी है और गड़बड़ी करने वाले सदस्यों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है। आईसीएआई के प्रेजिडेंट निलेश शिवजी विकमसे ने कहा, ‘मुखौटा कंपनियों से कथित संबंध के संदर्भ में 26 चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका की आईसीएआई जांच कर रहा है।’

सरकार कालाधन की समस्या से निपटने के तहत मुखौटा कंपनियों के खिलाफ लगातार कदम उठा रही है। इस क्रम में कई इकाइयां विभिन्न एजेंसियों की जांच के घेरे में आई हैं, इसमें गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) शामिल हैं। बता दें कि बीते दिनों पीएम मोदी ने भी आईसीएआई के कार्यक्रम में इस बात का शक जताया था कि नोटबंदी के दौरान कुछ सीए ने फर्जी कंपनियों की मदद की थी।

अनुशासनात्मक कार्रवाई
विकमसे ने कहा कि एसएफआईओ की तरफ से  के नाम आएं हैं और उनके बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। आईसीएआई नियमों के उल्लंघन को लेकर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है।

इसमें निलंबन तथा पंजीकरण तक रद्द किया जाना शामिल हैं। मुखौटा कंपनियां संदिग्ध्य इकाइयां होती हैं जिनका उपयोग अवैध कोष को सफेद बनाने में किया जाता है।

पहले भी हुईं हैं जांच
गौरतलब है कि सरकार की कई एजेंसियां एक साथ चार्टर्ड अकाउंटेंट पर शिकंजा कसने की तैयारी में हैं। सरकार ने 37,000 शेल कंपनियों की पहचान की है, इनके खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आईसीएआई द्वारा की जा रही जांच इसी की कड़ी है?

इसके जवाब में आईसीएआई के पूर्व प्रेजिडेंट उत्तम अग्रवाल कहते हैं, ‘आईसीएआई एक इंडिपेंडेंट बॉडी है, जिसे संसद ने ताकत दी है कि वह इन्फॉर्मेशन केस हो या कंप्लेन केस, प्रॉसिडिंग करती है और सुओमोटो प्रॉसेस में डॉक्यूमेंटल एविडेंस होने पर दोषी पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी करती है।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। हमनें सत्यम मामले से लेकर कई अन्य मामलों में में दोषी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स पर ऐक्शन लिया। हालांकि उसके बाद वे कोर्ट में गए।’

देश के हजारों चार्टर्ड अकाउंटेंट्स पर शेल कंपनियों के कालेधन को सफेद करने का आरोप है और जैसा कि कहा जा रहा है 11 सालों में सिर्फ 25 चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को ही सजा मिली है।

एेसा कैसे संभव होता है? इसके जवाब में सीए भावना दोशी कहती हैं, ‘यह आंकड़ा सही नहीं है और दूसरी बात यह है कि शेल कंपनियों की ऑडिट सीए ने की है तो वह सिर्फ इसलिए दोषी करार नहीं दिया जा सकता।

अगर किसी सीए ने शेल कंपनी इनकॉरपोरेट की है और अकाउंट फाइल नहीं हुए हैं तो वह दोषी हो सकता है। आईसीएआई ने पूरे जूडिशल प्रॉसेस के हिसाब से हमेशा से कार्य किया है और दोषियों को बख्शा नहीं है।’

जीएसटी के बाद कारखानों में थमा उत्पादन

नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का कारखानों में उत्पादन पर नकारात्मक असर देखा जा रहा है। कारोबारियों की अधूरी तैयारी व जीएसटी अपनाने में आ रही परेशानियों के चलते बाजारों में उत्पादों की बिक्री बहुत कम हो रही है। इससे उद्यमियों ने कारखानों में उत्पादन घटा दिया है।

दिल्ली-एनसीआर के औद्योगिक क्षेत्रों में इस माह उत्पादन 60 फीसदी तक घट सकता है। दिल्ली फैक्टरी ओनर्स फेडरेशन के अध्यक्ष प्रदीप मुल्तानी कहते हैं कि जीएसटी के चलते पिछले माह लोगों ने नई खरीद के बजाय स्टॉक निकालने पर जोर दिया था, जिससे पिछले माह भी उत्पादन में कटौती की गई थी। इस माह 1 जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद अब भी खरीदार-कारोबारी जीएसटी को पूरी तरह समझ नहीं पाए है।

इसलिए वे नए ऑर्डर नहीं दे रहे हैं। ऐसे में निर्माताओं ने कारखानों में उत्पादन काफी घटा दिया है। सुस्त बिक्री के चलते इस माह कारखानों में उत्पादन 60 फीसदी तक घट सकता है।

इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन नोएडा चैप्टर के पूर्व अध्यक्ष एन के खरबंदा ने कहा कि जीएसटी आधी-अधूरी तैयारियों के साथ लागू हुआ है। ऐसे में उद्यमी इसे अपनाने की प्रक्रिया में व्यस्त हैं और इसका असर कारखानों के उत्पादन पर पड़ा है। खरबंदा का अभी तक जीएसटी पंजीयन नहीं हो पाया है।

वह कहते हैं कि जीएसटी पंजीयन के लिए प्रशासन ने फर्म के पैन की जगह मेरा खुद का पैन भेज दिया, जिससे पंजीयन अटक गया। खरबंदा ने कहा ऐसे में वह किसी को माल नहीं बेच सकते तो उत्पादन करने का क्या फायदा? पटपडग़ंज औद्योगिक क्षेत्र संघ के अध्यक्ष संजय गौड़ ने बताया कि कारखानों में सामान्य दिनों के मुकाबले 50 फीसदी कम उत्पादन किया जा रहा है।