Thursday, July 9, 2026
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अब खाने की जगह एवं तरीका तय करेगा रेस्टोरेंट का बिल

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नई दिल्ली । देशभर में एक जुलाई से वस्तु एवं सेवा कर लागू हो गया है। इसके बाद से अब अगर आप किसी मिठाई वाले के यहां से मिठाई खाते हो तो आपको पांच फीसद तक जीएसटी देना पड़ेगा। वहीं, अगर आप किसी एसी रेस्त्रां में मिठाई खाते हो तो आपको 18 फीसद की दर से जीएसटी का भुगतान करना होगा।

यदि आप काउंटर पर ऑर्डर करते हैं तो 12 फीसद की दर से जीएसटी लगेगा, वहीं, अगर आप वहां बैठ कर खाते हैं तो 18 फीसद की दर से जीएसटी देना होगा। कुछ लोगों में इसको लेकर असमंजस बरकरार है।

जैसे सेंट्रल दिल्ली में एक दुकान है जहां बैठकर खाने का प्रावधान नहीं है। यहां टेबल लगाई हुईं है ताकि लोग खड़े होकर खा सकते हैं। यहां पर ग्राहकों से पांच फीसद की दर से जीएसटी लिया जा रहा है।

एक दुकानदार ने, नाम न बताने की शर्त पर, कहा है कि जीएसटी की ऊंची दर तब लगाई जाएगी अगर दुकान में बैठकर खाने का प्रबंध होगा। हमारे पास पर्याप्त जगह नहीं है।

इस तरह के डिफ्रेंशियल टैक्स रेट के बारे में कई ग्राहक अनजान है। इस कारण बिल देखने के बाद लोगों को टैक्स की दरें समझ नहीं आती।

टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी की दरों के बारे में लोगों को जागरुक करने की आवश्यकता है। जीएसटी की दरों में इस तरह के अंतर के चलते कई लोगों को बड़ी दुकान के बजाए छोटी दुकान पर खड़े होकर अपने पसंदीदा स्नैक्स खाने पड़ सकते है।

GST के बाद खड़े हैं सड़कों पर लाखों ट्रक

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मुंबई। जीएसटी लागू होने के बाद से राज्यों के बीच टैक्स चुकाए बिना और कम मात्रा की रिपोर्ट के साथ भेजे जाने वाले गुड्स में कमी आने से देश के लगभग 60 लाख ट्रकों में से एक-चौथाई से अधिक बेकार खड़े हैं। इससे रीटेल फ्रेट चार्जेज में कमी आई है और ट्रांसपोर्ट और ट्रक मेकिंग बिजनेस पर बुरा असर पड़ रहा है।

इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग के सीनियर फेलों एस. पी. सिंह ने बताया कि राज्यों के बीच फ्रेट चार्जेज 40-50 पर्सेंट कम हो गए हैं, जो तीन दशक से अधिक में सबसे अधिक गिरावट है।

ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि फ्रेट रेट में इस तरह की कमी 1984, 1988, 2008 और 2016 में डीमॉनेटाइजेशन के तुरंत बाद देखी गई थी।

हालांकि, जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों की सीमा पर चेक पोस्ट हटने से ट्रक अब पहले से कम समय में अपनी मंजिल पर पहुंच रहे हैं और इसका फायदा ट्रांसपोर्टर्स को मिला है। देश में मौजूद लगभग 60 लाख ट्रकों की रेंज 5 से 49 टन के बीच है।

इनमें से 13 लाख ट्रकों के पास नैशनल परमिट और 12 लाख ट्रकों के पास अपने गृह राज्य और पड़ोसी राज्यों के लिए परमिट हैं। सिंह ने बताया कि इनमें से 40-45 पर्सेंट ट्रक अभी नहीं चल रहे हैं। अपने गृह राज्यों के लिए परमिट रखने वाले बाकी के 35 लाख ट्रकों में से करीब एक चौथाई बेकार खड़े हैं।

हालांकि, जीएसटी के कारण लंबी अवधि में इकनॉमिक ऐक्टिविटीज बढ़ने की उम्मीद है और इससे ट्रकों की डिमांड में वृद्धि होगी। इसका एक बड़ा फायदा कमर्शल वीइकल मार्केट को मिलेगा। अभी होलसेल और डिस्ट्रिब्यूशन से जुड़े कारोबारी बिना टैक्स वाले गुड्स को भेजने से कतरा रहे हैं।

टैक्स अधिकारियों को चकमा देने वाली बिना टैक्स वाली इनवॉयस फ्रेट मार्केट्स से लगभग गायब हो गई हैं। हालांकि, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में इस तरह की गड़बड़ी अभी भी हो रही है।

फ्रेट बिजनेस घटने से ट्रांसपोर्टर्स नए ट्रक की खरीदारी टाल रहे हैं और उन्हें ट्रकों के लिए बकाया किस्तों को चुकाने में भी मुश्किल हो रही है। इस वजह से नॉन-बैंकिंग फाइनैंस कंपनियां ट्रकों के लिए फंडिंग को रोक सकती हैं।

ट्रक खरीदने के लिए भी कर्ज पर इंट्रेस्ट रेट बढ़ सकते हैं। जून क्वॉर्टर में मीडियम और हेवी ट्रक सेगमेंट में बिक्री 32 पर्सेंट गिरकर 48,993 यूनिट्स की रही थी। जीएसटी को लेकर अनिश्चितता के कारण इससे पिछले क्वॉर्टर में बहुत से ट्रांसपोर्टर्स ने समय से पहले ट्रक खरीदे थे।

एक्सिस बैंक 400 करोड़ में खरीद सकता है फ्रीचार्ज को

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नई दिल्ली । देश का दिग्गज बैंक एक्सिस बैंक ई-कॉमर्स वेबसाइट स्नैपडील से फ्रीचार्ज को खरीद सकता है। यह सौदा 300-400 करोड़ रुपये में होना है। माना जा रहा है कि सौदा तकरीबन पक्का हो गया है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। इस संबंध में अगले कुछ दिनों के भीतर एलान होने की संभावना है।

सूत्रों के मुताबिक, ‘फ्रीचार्ज की सेल को लेकर औपचारिक घोषणा गुरुवार तक होने की संभावना है।’ साथ ही बुधवार को भारतीय ऑनलाइन बाजार की प्रमुख कंपनी स्नैपडील ने फ्लिपकार्ट की ओर से पेश किए गए 900 से 950 मिलियन डॉलर पेशकश पर हामी भर दी है।

अब स्नैपडील के शेयरधारकों की ओर से इस डील को मंजूरी दिया जाना बाकी है। स्नैपडील ने फ्रिचार्ज का अधिग्रहण अप्रैल 2015 में 400 मिलियन डॉलर में किया था। उस समय यह डील भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए सबसे बड़ी डील थी। इससे पहले पेटीएम की और से फ्रिचार्ज की खरीद की बातें सामने आ रही थी।

एक्सिस बैंक की ओर से फ्रिचार्ज की बिक्री डील होती है तो एक्सिस बैंक के पास फ्रिचार्ज के पांच करोड़ मोबाइल वॉलेट यूजर्स और 150 से 200 प्रोफेशनल्स तक का एक्सेस मिल जाएगा। देश में बीते वर्ष आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से नोटबंदी लागू की गई थी। इसके बाद से डिजिटल पेमेंट के इस्तेमाल में तेजी देखने को मिली

पेटीएम मॉल ने लॉजिस्टिक से खत्म की पार्टनरशिप

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नई दिल्ली । पेटीएम मॉल के जरिये खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए कंपनी प्रबंधन ने बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने 50 फीसद के पार्टनर लॉजिस्टिक से पार्टनरशिप खत्म कर दी है। कंपनी ने पेटीएम मॉल के ग्राहकों को बेहतर सुविधा देने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है। इससे पेटीएम मॉल पर खरीदारी करने वाले ग्राहकों का सामान सही समय पर सुरक्षित उन तक पहुंचाया जा सके।

पेटीएम मॉल के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर अमित सिन्हा ने बताया कि वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) लागू होने के बाद कंपनी केवल ब्रांड ऑथराइजेशन सेलर्स और रेपोटेड शॉप कीपर्स के साथ काम कर रही है। ऐसे में 85 हजार विक्रेताओं को पेटीएम मॉल से पिछले दिनों हटाया गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी ने 26,000 में से उन 9,000 से भी ज्यादा पिनकोड्स में डिलिवरी सेवाओं को बंद कर दिया गया है जहां रिटर्न्स व रिप्लेसमेंट की गारंटेड सहायता को सुनिश्चित नहीं किया जा रहा था।

कंपनी ने पूर्ण रिटर्न व रिप्लेसमेंट प्रस्तुत करने के लिए डिलिवरी को 17,000 पिन कोड्स तक सीमित कर दिया है। कंपनी का उद्देश्य डिलिवरी व रिप्लेसमेंट की समय सीमा में बेहतरीन पारदर्शिता लाकर विश्वसनीय लॉजिस्टिक इकोसिस्टम की स्थापना करना है।

दाल खरीद के लिए 500 करोड़ का अतिरिक्त अनुदान आवंटित

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नई दिल्ली । किसानों से दाल खरीदने के लिए सरकार ने 500 करोड़ रुपये के अतिरिक्त अनुदान का आवंटन किया है। सरकार ने यह धनराशि चालू वित्त वर्ष के लिए अनुदान की पूरक मांगों के रूप में दी है। खास बात यह है कि अनुदान की पूरक मांगों में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के प्रचार, भीम एप और ग्रामीण डिजिटल साक्षरता के लिए भी धनराशि आवंटित की गयी है।

सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए 11,166.18 करोड़ रुपये की अनुदान की पूरक मांगे लोकसभा में पेश कीं। सरकार ने यह अतिरिक्त धनराशि वस्तु एवं सेवा कर के प्रचार तथा पेट्रोलियम और गैस मंत्रालय के लिए मांगी है।

वित्त मंत्री अरुण अरुण जेटली ने लोकसभा में वित्त वर्ष 2017-18 के लिए अनुदान की मांगों के साथ-साथ 2014-15 के लिए अतिरिक्त मांगें भी रखीं। चालू वित्त वर्ष की अनुदान की पूरक मांगों में 61 अनुदान और तीन विनियोग शामिल हैं।

वैसे अनुदान की पूरक मांगों से सरकार के राजकोषीय घाटे की स्थिति पर असर नहीं पड़ेगा। दरअसल अनुदान की पूरक मांगों की सकल राशि 11,166.18 करोड़ रुपये जबकि शुद्ध राशि 10,647.45 करोड़ रुपये है। इसमें 517.72 करोड़ रुपये विभिन्न मंत्रालय की बचत के रूप में दिखाए गए हैं। इसलिए माना जा रहा है कि सरकार राजकोषीय घाटे को काबू रखने में कामयाब रहेगी।

सरकार ने अनुदान की पूरक मांगों में से 7,000 करोड़ रुपये की मांग पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के लिए की गयी है। इस राशि का इस्तेमाल राज्य सरकारों को रॉयल्टी के भुगतान के लिए किया जाएगा। साथ ही 386 करोड़ रुपये वस्तु एवं सेवा कर के प्रचार-प्रसार पर खर्च किए जाएंगे।

इसमें से 250 करोड़ रुपये का आवंटन जीएसटी के बारे में जागरूकता लाने तथा 99.34 करोड़ रुपये जीएसटी नेटवर्क को भुगतान के लिए किया गया है। जीएसटी पोर्टल के लिए 37.09 करोड़ रुपये के लिए खर्च किये जाएंगे।

इसके अलावा अनुदान की पूरक मांगों में प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता के लिए 50 करोड़ रुपये तथा भीम एप के लिए 50 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। साथ ही 500 करोड़ रुपये की धनराशि दालें खरीदने के लिए अतिरिक्त दी गयी है। यह धनराशि मूल्य स्थिरता कोष के माध्यम से दी गयी है।

गोल्ड बांड में निवेश की सीमा अब बढ़ाकर आठ गुना

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गोल्ड बांड स्कीम की तरफ आम निवेशकों को लुभाने की एक और कोशिश की है। कैबिनेट ने सरकार की इस स्कीम के तहत सालाना 500 ग्राम सोने के मूल्य के बराबर बांडस खरीदने की सीमा को बढ़ाकर आठ गुना करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

अब निवेशक चार किलो तक सोने के बराबर मूल्य के बांड खरीद सकेंगे। वित्त मंत्रालय ने इसके साथ ही कुछ और सुझाव भी दिए थे जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। नवंबर, 2015 में घोषित इस स्कीम के तहत अभी तक महज 4800 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है जो सरकार की उम्मीदों से काफी कम है।

सरकार की तरफ से दी गई सूचना के मुताबिक व्यक्तिगत स्तर पर और हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) को अब सालाना चार किलो के बराबर मूल्य की राशि गोल्ड बांड में निवेश करने की इजाजत होगी। जबकि न्यासों को सालाना 20 किलो तक निवेश की इजाजत दी गई है।

यह होल्डिंग किसी बैंक या अन्य वित्तीय संस्थान में बंधक के तौर पर रखे गये स्वर्ण के अतिरिक्त मानी जाएगी और इनकी गणना वित्तीय वर्ष के आधार पर होगी। सरकार ने यह भी कहा है कि स्वर्ण बांड के विनिमय को आसान बनाने के लिए आगे और कदम उठाये जाएंगे। सरकारी बैंकों व सार्वजनिक उपक्रमों की तरफ से कदम उठाए जाएंगे।

इसके कारोबार को बढ़ावा देने के लिए एजेंटों को ज्यादा कमीशन देने का आश्वासन भी सरकार की तरफ से दिया गया है। वर्ष 2015 में लांच स्वर्ण बांड्स स्कीम के तहत 15 हजार करोड़ रुपये जुटाने और इसके बाद के वित्त वर्ष में 10 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन अभी तक सिर्फ 4970 हजार करोड़ रुपये ही जुटाये गये हैं।

जम्मू-कश्मीर में जीएसटी लागू करने का रास्ता साफ
कैबिनेट जम्मू व कश्मीर में जीएसटी लागू करने के लिए संविधान में संशोधन के लिए मंजूरी दे दी। सरकारी बयान के अनुसार कंस्टीट्यूशन (एप्लीकेशन टू जेएंडके) एमेंडमेंट ऑर्डर 2017 के जरिये कंस्टीट्यूशन (एप्लीकेशन टू जेएंडके) ऑर्डर 1954 में संशोधन के लिए मंजूरी दे दी गई। इस प्रावधान के बाद जम्मू व कश्मीर में जीएसटी लागू किया जा सकेगा।

वेतन संहिता विधेयक को हरी झंडी
केंद्रीय कैबिनेट ने नये वेतन संहिता विधेयक को मंजूरी दे दी। इससे सभी सेक्टरों में चार संबंधित श्रम कानूनों के तहत न्यूनतम वेतन वितरण सुनिश्चित होगा। कर्मचारी वेतन संहिता विधेयक में न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948, पेमेंट ऑफ वेजेज एक्ट 1936, पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 1965 और इक्वल रेम्यूनरेशन एक्ट 1976 को शामिल किया जाएगा। विधेयक के अनुसार केंद्र को सभी सेक्टरों के लिए न्यूनतम वेतन निर्धारण का अधिकार होगा और सभी राज्यों को इसे मानना होगा।

 

भवनहीन कोटा ट्रिपल आईटी को अब मिला डिग्री जारी करने का अधिकार

कोटा। सालों के इंतजार के बाद भी कोटा ट्रिपल आईटी को भवन तो नहीं मिला, लेकिन पीपीपी मोड पर ही राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा जरूर मिल गया। कोटा ट्रिपल आईटी जयपुर एमएनआईटी में संचालित है। इसमें दो ब्रांच में 60 सीटें हैं।

2013 में पीपीपी मोड पर तीन औद्योगिक घरानों का साथ लेकर इसे शुरू किया था और पहले बैच में 30 को प्रवेश दिया गया था। इसके बाद सीटें बढ़ाकर 60 कर दी गई। पीपीपी मोड पर होने से इसे संवैधानिक मान्यता नहीं मिल पाई और इस वर्ष पासआउट होने जा रहे पहले बैच की डिग्री का संकट खड़ा हो गया।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 10 अप्रैल को  भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (पब्लिक-प्राइवेट भागीदारी) विधेयक, 2017′ बिल लोकसभा में रखा था, जो 19 जुलाई को पास कर दिया गया है। यह बिल पारित होने के बाद अब पीपीपी मोड पर चल रही कोटा सहित 15 ट्रिपल आईटी को संवैधानिक मान्यता मिल गई है और ये संस्थान डिग्री जारी कर सकेंगे।

कोटा में आवंटित है 100 एकड़ जमीन
कोटा ट्रिपल आईटी का पहला बैच ही निकलने जा रहा है, लेकिन संस्थान के स्टूडेंट्स ने कोटा देखा भी नहीं। कोटा ट्रिपल आईटी के लिए रानपुर में 100 एकड़ जमीन आरक्षित है, लेकिन निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। इस ट्रिपल आईटी में केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकार और केयर्न इंडिया, वक्रांगी, जेनपेक्ट इंडिया नेशनल इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज भी पार्टनर हैं।

स्कीम बनाते वक्त लीगल प्रावधान नहीं देखा
वर्ष 2010 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने एक स्कीम के तहत पीपीपी मोड पर 20 ट्रिपल आईटी खोलने की मंजूरी दी थी। लेकिन यह प्रावधान नहीं किया गया था कि इन संस्थानों को डिग्री देने की शक्तियां कैसे दी जाएंगी।

सभी में पहला अंडर ग्रेजुएट का बैच 2013-14 में एनरोल हुआ था, जो इसी साल पासआउट होने जा रहा है। 15 मार्च को पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में उक्त बिल को सदन में रखने को मंजूरी दी थी। अब ये संस्थान बीटेक, एमटेक पीएचडी की डिग्री जारी कर सकेंगे।

14 अन्य ट्रिपल आईटी भी पीपीपी मोड पर 
लखनऊ,नागपुर पुणे, सोनीपत, वड़ोदरा, हिमाचल के ऊना, झारखंड के रांची, असम के गुवाहाटी, आंध्रप्रदेश के चितूर, कर्नाटक के धारवाड़, पश्चिम बंगाल के कल्याणी, तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली, मणिपुर के सेनापति तथा केरल के कोट्टायम की ट्रिपल आईटी पीपीपी मोड पर हैं।

 

कोटा ग्रेन एण्ड सीड्स मर्चेंट एसोसिएशन के चुनाव में राठी पुनः अध्यक्ष

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कोटा। भामाशाह कृषि उपज मंडी में  कोटा ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट एसोसिएशन के बुधवार को हुए चुनाव में अविनाश राठी दूसरी बार अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी शिव कुमार जैन को 129 वोटों से हराया। चुनाव में अविनाश राठी का पूरा पैनल विजयी रहा।

वहीं उपाध्यक्ष पद पर नरेंद्र शर्मा, सचिव पद पर महेंद्र कुमार जैन, कोषाध्यक्ष पद पर विशाल गर्ग निर्वाचित हुए। एसोसिएशन के 383 सदस्यों ने मतदान किया। 

चुनाव अधिकारी एडवोकेट वीरेंद्र साहू ने बताया कि अध्यक्ष पद पर अविनाश राठी को 256 वोट मिले, जबकि शिवकुमार जैन को 127 ही वोट मिल पाए। शिव कुमार जैन अविनाश राठी पिछले साल भी चुनाव लड़े थे, जिसमें भी राठी ने जैन को हराया था। 

किसको कितने वोट मिले
अध्यक्ष पद पर 
अविनाशराठी 256 , 
शिवकुमार जैन 127 उपाध्यक्ष पद पर नरेंद्रशर्मा  264, प्रमोद कुमार शर्मा 108, दीपक गौतम 8 सचिव पद पर महेंद्र कुमार जैन 257, धर्मचंद जैन 125 कोषाध्यक्ष पद पर विशालगर्ग 209, पुरुषोत्तम बल्दवा को 174 वोट मिले। 

कार्यकारिणी सदस्य : कैलाश पोकरा -293 ,जगदीश चित्तौड़ा-260, मनोज कुमार कटारिया-251,दीपक कुमार जैन- 242, हरीश खंडेलवाल-233, गिर्राज झाला-229, सुनील गंभीर-227, सुनील विजय- 218 कार्यकारिणी सदस्य चुने गए।

 

सेबी ने छह फर्मों पर 12.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया

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नयी दिल्ली। बाजार नियामक सेबी ने उसकी आनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली स्कोर्स को तय समय में पंजीकरण कराने में विफल रहने पर छह फर्मों पर कुल 12.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

इसके तहत सेबी ने अविनाश इन्फोर्मेशन टेक्नोलोजीज, मार्डयिा कापर प्राडक्टस, रिलायबल फिनस्टाक सर्वसिेज पर 1.5 लाख रुपये प्रत्येक का जुर्माना लगाया है। वहीं जेन्युअन फार्मास्युटिकल्स पर दो लाख रुपये व सारिका पेंट्स तथा शुकुन कंस्ट्रक्शन पर तीन तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इन कंपनियों पर आरोप है कि एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होने के बावजूद ये फर्में स्कोर्स प्रमाणन तय समय में हासिल करने में विफल रहीं।

सेबी ने इसके साथ ही एक पति-पत्नी पर खुली पेशकश लाने में असफल रहने और नियामक के निर्देश का पालन नहीं करने पर 54.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। नियामक ने स्काई इंडस्ट्रीज में उनकी शेयरधारिता को लेकर उन्हें निर्देश दिया था जिसका पालन करने में वह असफल रहे।

विजय जमनादास वोरा और उनकी पत्नी हीना शेयरधारकों को खुली पेशकश लाने में असफल रहे। यह खुली पेशकश उन्हें 2007 के अंत में लाने को कहा गया जबकि उनकी शेयरधारिता 15 प्रतिशत के पार चली गई। इसके अलावा स्काई इंडस्ट्रीज में उनकी शेयरधारिता दिसंबर 2008 में 20 प्रतिशत से अधिक हो गई।

 

 

वेज बिल को कैबिनेट की मंजूरी, 4 करोड़ श्रमिकों को होगा फायदा

न्यूनतम वेतन से जुड़े प्रावधान हर महीने 18,000 रुपए तक सैलरी पाने वालों पर लागू होते हैं, लेकिन अब ये प्रावधान ज्यादा सैलरी वालों के लिए भी होंगे।

नई दिल्ली। कैबिनेट ने कर्मचारियों की सैलरी से जुड़े वेज बिल को कैबिनेट की मंजूरी, 4 करोड़ श्रमिकों को होगा फायदा वेतन से जुड़े चार पुराने कानूनों को शामिल किया गया है। इसे मानसून सत्र में ही पेश किए जाने की उम्मीद है। यह सत्र 11 अगस्त तक चलेगा।

सूत्रों ने बताया कि नए कानून से केंद्र सरकार को पूरे देश में न्यूनतम वेतन तय करने का अधिकार मिल जाएगा। अभी न्यूनतम वेतन से जुड़े प्रावधान हर महीने 18,000 रुपए तक सैलरी पाने वालों पर लागू होते हैं, लेकिन अब ये प्रावधान ज्यादा सैलरी वालों के लिए भी होंगे।

इससे पहले दोपहर में राज्यसभा में श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने बताया था कि राष्ट्रीय श्रम आयोग ने सभी श्रम कानूनों को मिलाकर चार या पांच कानून बनाने की सिफारिश की है। विशेषज्ञों के अनुसार अभी अलग-अलग कानूनों में ‘वेतन’ की अलग परिभाषाएं हैं। एक परिभाषा होने से कंपनियों को आसानी होगी। इससे जुड़े रिटर्न की संख्या भी घटकर एक रह जाएगी।

केंद्र द्वारा तय न्यूनतम वेतन को बढ़ा सकते हैं राज्य
केंद्र को न्यूनतम वेतन तय करने का अधिकार होगा। राज्य उसे मानने को बाध्य होंगे। राज्य ज्यादा वेतन भी तय कर सकते हैं। हर दो साल में इसमें संशोधन होगा। न्यूनतम वेतन में डीए भी शामिल है तो संशोधन 5 साल में हो सकता है। यह इंडस्ट्री के हर श्रेणी के कर्मचारियों के लिए होगा। अभी न्यूनतम वेतन का नियम 51 शिड्यूल्ड इंडस्ट्री पर लागू होता है।

वेबसाइट पर बतानी पड़ेगी पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट की एक्सपायरी डेट
ईकॉमर्स कंपनियों को वेबसाइट पर पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट की एमआरपी और एक्सपायरी डेट बतानी होगी। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने पैकेज्ड कमोडिटी रूल्स 2011 में संशोधन किया है। अभी वेबसाइट पर यह जानकारी नहीं होती है।

मंत्रालय को शिकायत मिली थी कि कंपनियां नजदीक एक्सपायरी डेट वाले पैकेट की सप्लाई कर रही हैं। हाल के दिनों में फूड प्रोडक्ट की ऑनलाइन बिक्री काफी बढ़ी है। लेकिन बहुत से मामलों में देखा जाता है कि ग्राहक को जिस प्रोडक्ट की डिलीवरी होती है, उसकी एक्सपायरी में दो से चार हफ्ते ही बचे होते हैं।

इससे ग्राहक उसका पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। एक सर्वे में 96% लोगों ने कहा था कि ईकॉमर्स साइट पर मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी की तारीख होनी चाहिए।