Wednesday, July 1, 2026
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BSE सेंसेक्स 31 अंक बढ़ा, निफ्टी 1.20 पॉइंट गिरकर बंद

मुंबई। शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 30.68 अंक की बढ़त के साथ 32,272.61 तथा एनएसई निफ्टी 1.20 अंक की मामूली गिरावट के साथ 10,085.40 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी में गिरावट की वजह इसकी लिस्टेड दवा कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट भी रही। निफ्टी फार्मा के शेयर 11.05 बजे 1.13% कमजोरी के साथ 9,275 पर कारोबार कर रहे थे।

इस दौरान कडीला हेल्थकेयर 1.80, सन फार्मा 1.45, पीरामल एंटरप्राइजेज 1.40, ग्लेनमार्क फार्मा 1.17, डॉ. रेड्डीज लैबरेटरीज 1.15 जबकि सिप्ला के शेयर 1.15% कमजोर हो गए। इधर, एनसीएलटी द्वारा बोर्ड रेजुलेशन पर रोक लगाने से इनकार करने के बाद रेलिगेयर एंटरटेनमेंट के शेयर भी 3% गिर गए।

आरकॉम-एयरसेल के विलय पर आशंका जतानेवाली खबरों के बीच रिलायंस कम्यूनिकेशंज के शेयरों की कीमत 7% घट गई। रेलिगेयर सिक्यॉरिटीज के प्रेजिडेंट (रेलिगेयर डिस्ट्रीब्यूशन) जयंत मांगलिक ने मार्केट के मौजूदा हालात के मद्देनजर निवेशकों को इंतजार करने की सलाह दी है।

उन्होंने कहा, ‘नॉर्थ कोरिया द्वारा एक और मिसाइल टेस्ट किए जाने की खबरों से बाजार की धीमी शुरुआत हुई। वैश्विक संकेतकों का हमारे बाजार पर जबर्दस्त असर हो रहा है और बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव की वजह से पैदा हालात में ट्रेड करना मुश्किल है। हमारा सुझाव है कि अभी हेज पॉजिशन में बने रहें। ट्रेडर्स के लिए सलाह है कि वे प्राइवेट बैंकिंग, ऑटो, मेटल और एनबीएफसी के शेयरों पर ध्यान दें।’

इनकम टैक्स छापे से नासिक मंडी में 35 पर्सेंट घटे प्याज के दाम

  • लासलगांव में 7 बड़े प्याज कारोबारियों के दफ्तरों, गोदामों और घरों में की गई छापेमारी

  • मंडी में आई बड़ी गिरावट के बाद किसानों ने लासलगांव में नीलामी रोक दी

नासिक। देश की सबसे बड़ी होलसेल प्याज मंडी लासलगांव में प्याज की कीमतों में 35 पर्सेंट की गिरावट आ गई है। नासिक जिले में गुरुवार को आयकर विभाग के अधिकारियों की ओर से 7 बड़े प्याज कारोबारियों के दफ्तरों, गोदामों और घरों में की गई छापेमारी के बाद लासलगांव ऐग्रिकल्चर प्रड्यूस मार्केट कमिटी (एपीएसी) में यह गिरावट दिखी।

मंडी में आई बड़ी गिरावट के बाद किसानों ने लासलगांव में नीलामी रोक दी है और अपने उत्पादों की बिक्री नहीं कर रहे। छापेमारी के बाद प्याज के दाम 35 फीसदी की गिरावट के साथ 900 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि इससे पहले बुधवार को एक क्विंटल प्याज 1400 रुपये तक में बिक रहा था।

प्याज की न्यूनतम और अधिकतम कीमत क्रमश: 500 और 1,331 रुपये थी। लासलगांव एपीएमसी के चेयरमैन जयदत्त होल्कर ने बताया कि जिन 7 कारोबारियों पर छापेमारी की गई है, उनमें से 2 लासलगांव के ही हैं। उन्होंने बताया, ‘इन कारोबारियों के पास बाजार में आने वाले कुल माल का 30 फीसदी हिस्सा खरीदने की क्षमता है।

आयकर विभाग की ओर से की गई कार्रवाई के बाद बाजार में पैनिक की स्थिति है। इसके चलते होलसेल मार्केट में प्याज की कीमतों में तेज गिरावट आई है।’होल्कर ने बताया कि मार्केट में आई अचानक गिरावट से हैरान तमाम किसानों ने अपने उत्पादों को इतनी कम कीमत पर बेचने से मना कर दिया है।

वह अपने उत्पादों के साथ ही वापस लौट गए। कमजोर आपूर्ति के चलते मई से अगस्त के दौरान प्याज की कीमतों में 5 गुना तक का इजाफा हुआ है। 31 मई को प्याज की होलसेल कीमत 450 रुपये प्रति क्विंटल थी, लेकिन 10 अगस्त तक यह आंकड़ा बढ़कर 2,450 रुपये प्रति क्विंटल हो गया।

जीएसटीएन की तकनीकी दिक्कतों पर चर्चा शनिवार को

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  • शनिवार को बेंगलूरु में जीएसटी परिषद की बैठक में जीएसटीएन पोर्टल पर आ रही तकनीकी दिक्कतों पर चर्चा
  • पहली बार सूचना तकनीक से संबंधित चुनौतियों की समीक्षा करेगी परिषद
  • परिषद को तकनीकी पहलुओं पर दिया जाएगा प्रस्तुतीकरण

नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) पोर्टल को लेकर तकनीकी समस्याओं पर विचार करने के लिए मंत्रिस्तरीय समिति की बैठक शनिवार को बेंंगलूरु में होगी। यह पहला मौका है जब एक समान कर के दौर में सूचना तकनीक से जुड़ी चुनौतियों को लेकर समीक्षा और समस्याओं को समाधान को लेकर बैठक होने जा रही है।

जीएसटी परिषद की हैदराबाद में हुई बैठक में किए फैसले के मुताबिक बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी की अध्यक्षता में बनी समिति इस सप्ताह की शुरुआत में थी, जो आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी तकनीकी और परिचालन संबंधी समस्याओं को देखेगी। 

जीएसटीएन अब तक किए गए कार्यों के बारे में राज्यों के वित्त मंत्रियों को जानकारी देगा और बताएगा कि क्या क्या चुनौतियां हैं और उसके लिए आगे के लिए क्या रणनीति बनाई गई है। इस बैठक मेंं इन्फोसिस और जीएसटीएन के अधिकारी शामिल होंगे।

पांच सदस्योंं वाले मंत्रियों के समूह में शामिल एक राज्य के वित्त मंत्री ने कहा, ‘हम आईटी इन्फ्रा संबंधी मसले को हर पहलू से समझने की कोशिश करेंगे। हम कारोबारियों को हो रही समस्याओं की समीक्षा करेंगे। साथ ही जीएसटीएन के मोर्चे पर आ रही चुनौतियों पर भी विचार होगा। बैठक के बाद इस पर रणनीति तैयार की जाएगी।’ 

जीएसटीएन के नए चेयरमैन एबी पांडेय इस बैठक में सीईओ प्रकाश कुमार के साथ हिस्सा लेंगे। कारोबारियों की ओर से जीएसटी नेटवर्क में आ रही दिक्कतों की शिकायत पर हैदराबाद में हुई परिषद की बैठक में विचार के के बाद समिति का गठन किया गया था। इसी के साथ रिटर्न दाखिल करने की अवधि भी बढ़ा दी गई थी।

सरकार द्वारा आयकर दाखिल करने की अंतिम तिथि के दो दिन पहले 8 सितंबर को तकनीकी व्यवस्था ध्वस्त हो गई थी क्योंकि इनवाइस अपलोड करने वालोंं की संख्या अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। 10 सितंबर को रिटर्न दाखिल करने की तिथि बढ़ाए जाने के एक दिन पहले 9 सितंबर को करीब 7.5 लाख रिटर्न दाखिल किए गए।

सरकारी अधिकारियों का तर्क है कि कारोबारियों द्वारा रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तिथि तक मामले को टालने की प्रवृत्ति भी अफरातफरी की बड़ी वजह है। अधिकारी ने कहा, ‘अंतिम तिथि में विस्तार की घोषणा के बाद से बमुश्किल ही कोई रिटर्न दाखिल किया गया। अब लोगों ने आना बंद कर दिया है।

इस मानसिकता को बदलने की जरूरत है।’ व्यवस्था संबंधी इस मसले को जानने वाले वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘एक बार जब आप बड़ी व्यवस्था को चालू करते हैं तो कुछ मसले आते हैं। फॉर्म को पिछले सप्ताह अंतिम रूप दिया गया और उसके बाद उसमें संशोधन भी हुए।

इसे ध्यान में रखते हुए जीएसटीएन एक स्थायी व्यवस्था है, लेकिन दुर्भाग्य से 8 सितंबर को सिस्टम सही से काम नहीं कर पाया।’ अधिकारी का तर्क है कि जीएसटीआर 3बी जैसे कई फॉर्म आखिरी वक्त में पेश किए गए। उन्होंने कहा, ‘जीएसटीएन कोशिश कर रहा है कि एक ही साथ कई काम किए जाएं।

अधिकारी 4 बजे सबेरे से काम कर रहे हैं, जिससे समस्या का समाधान हो सके।’ इसके पहले तय की गई अंतिम तिथि 10 सितंबर तक करीब 28 लाख जीएसटीआर 1 या विस्तृत बिक्री रिटर्न दाखिल किए गए और अब यह रुक गया है। जुलाई के लिए जितने रिटर्न दाखिल होने थे,

उसका करीब आधा ही दाखिल हो सका है। शनिवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा रिटर्न दाखिल करने की तिथि बनाए जाने की घोषणा के एक घंटे के भीतर जीएसटी नेटवर्क पोर्टल पर आने वाले लोगों की संख्या अचानक 80,000 से घटकर 17,000 रह गई थी। 

ब्लू व्हेल गेम पर बैन को लेकर केंद्र को नोटिस, सुप्रीम कोर्ट ने 3 हफ्ते में मांगा जवाब

याचिका लगाने वाले एडवोकेट पोन्नियम का कहना है कि इसे तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित करना चाहिए, क्योंकि युवा वर्ग इसके जरिये खुदकशी जैसा कदम उठा रहा है

नई दिल्ली। देश में अब तक कई बच्चों की मौत का कारण बने ब्लू व्हेल गेम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। साथ ही अदालत ने 3 हफ्ते में इसका जवाब भी मांगा।

सर्वोच्च न्यायलय ने यह नोटिस एक 73 वर्षीय वृद्ध द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया है। याचिका लगाने वाले एडवोकेट पोन्नियम का कहना है कि इसे तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित करना चाहिए, क्योंकि युवा वर्ग इसके जरिये खुदकशी जैसा कदम उठा रहा है।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्र, जस्टिस एएम खानविलकर व जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की पीठ ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकृत कर दिया था जिसके बाद शुक्रवार को कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि ब्लू व्हेल के खिलाफ लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाए।

इसमें कहा गया कि पांच सितंबर तक ही इसकी वजह से दे सौ युवा आत्महत्या कर चुके हैं। इनमें से ज्यादातर 13, 14 व 15 साल की उम्र के थे। ऑनलाइन खेल के दौरान इन्होंने आत्मघाती कदम उठाया।

वृद्ध का कहना है कि मदुरै पुलिस ने माना है कि एक युवा ने आत्महत्या से पहले 150 दोस्तों को इसे फारवर्ड कर दिया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने 22 अगस्त को गुगल व याहू से इस पर जवाब तलब किया था।

सिगरेट की बिक्री पर जीएसटी सेस की मार, जुलाई-अगस्त में 9% कमी

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सबसे तगड़ा झटका एंट्री और प्रीमियम सेगमेंट की सिगरेट्स को लगा है जिन पर टैक्स में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की गई है।

कोलकाता। इंडिया में कानूनी तौर पर होने वाली सिगरेट की बिक्री जुलाई और अगस्त में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 8-9 फीसदी घटी है। गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के तहत सिगरेट पर सेस में ज्यादा इजाफे के चलते ऐसा हुआ है।

तीन एनालिस्ट्स के मुताबिक, सेल्स में गिरावट सभी सेगमेंट्स में है, लेकिन इसका सबसे तगड़ा झटका एंट्री और प्रीमियम सेगमेंट की सिगरेट्स को लगा है जिन पर टैक्स में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की गई है। यह गिरावट हालिया महीनों में सबसे ज्यादा है।

मैक्वायरी की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी डिस्ट्रीब्यूटर्स में उसके चैनल चेक से पता चला है कि सिगरेट वॉल्यूम्स पर भारी प्रेशर है। इसमें किंग साइज फिल्टर (84 एमएम) और रेगुलर साइज फिल्टर (69 एमएम) में ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है।

इन दोनों सेगमेंट्स में कीमतें गुजरे नौ महीनों में क्रमश: 20 फीसदी और 23 फीसदी बढ़ी हैं। मैक्वायरी ने कहा है कि चूंकि एंट्री लेवल सिगरेट्स का एक बड़ा हिस्सा 64 एमएम लंबाई का है और इसकी कीमत अब 5 रुपये प्रति सिगरेट से ज्यादा है, लिहाजा इस सेगमेंट से भी वॉल्यूम पर भारी प्रेशर बन रहा है।

साथ ही, कंज्यूमर्स भी 69 एमएम सिगरेट से 64 एमएम लंबाई वाली सिगरेट की ओर शिफ्ट हो रहे हैं जिसकी कीमत तकरीबन आधी है। इडलवाइज सिक्यॉरिटीज के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट अबनीश रॉय ने कहा, ‘सबसे ज्यादा बुरा असर 64 एमएम सेगमेंट पर पड़ा है ।

क्योंकि कंज्यूमर्स अवैध और स्मगल की हुई सिगरेट्स की ओर शिफ्ट हो गए हैं, जो 2 रुपये से 4 रुपये प्रति सिगरेट की दर पर बिकती हैं। आमतौर पर सिगरेट कंपनियां इस सेगमेंट में कीमतें बढ़ाने से बचती हैं क्योंकि यह सेगमेंट कीमतों को लेकर काफी सेंसिटिव होता है,लेकिन कंपनियों को टैक्स में इजाफे के चलते कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं। इसकी वजह से वॉल्यूम में बड़ी गिरावट आई है।’

संशोधित अनुमानों से पता चल रहा है कि मार्केट लीडर आईटीसी का मौजूदा फिस्कल के लिए सिगरेट सेल्स वॉल्यूम 4-5 फीसदी गिरेगा, जबकि इससे पहले अनुमान लगाया गया था कि उसकी सिगरेट सेल्स फ्लैट रहेगी। इंडिया में कानूनी तौर पर बिकने वाली हर चार सिगरेट्स में से तीन आईटीसी की होती हैं।

जनवरी से मार्च की अवधि में सिगरेट सेल्स वॉल्यूम फ्लैट रहा, जबकि अप्रैल से जून के दौरान इसमें 1-2 फीसदी की मामूली गिरावट आई। मैक्वायरी ने कहा है कि फिस्कल ईयर 2013-14 से 2015-16 के दौरान सिगरेट की कीमतों में हुई तेज बढ़ोतरी की वजह से सेल्स वॉल्यूम में बड़ी गिरावट आई है।

लेकिन इस दफा सेल्स वॉल्यूम में ज्यादा बड़ी गिरावट का अनुमान नहीं था क्योंकि कीमतों में इजाफा चरणबद्ध तरीके से हुआ और डिमांड एनवायरनमेंट में भी सुधार दिखाई दिया। जीएसटी के चलते आईटीसी ने जुलाई में सिगरेट की कीमतें 4-8 फीसदी बढ़ा दीं।

आईटीसी के सीईओ और एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर संजीव पुरी ने कहा कि टोबैको रेगुलेशन में सिगरेट इंडस्ट्री से भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिगरेट पर टैक्स ‘पिछले कुछ वर्षों में 200 पर्सेंट से ज्यादा बढ़ा है’ जिससे सिगरेट और दूसरे तंबाकू उत्पादों की तस्करी बढ़ गई है।

देशभर में पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स पर एक समान टैक्स, सस्ता होगा डीजल-पेट्रोल

राज्य नैचरल गैस पर वैल्यू ऐडेड टैक्स रेट 5% तक रखने और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इनपुट के रूप में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल, डीजल जैसे दूसरे ईंधनों पर वैट रेट घटाने पर राजी हो गए हैं

नई दिल्ली। पेट्रोलियम गुड्स की पूरे देश में एकसमान कीमत रखने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। राज्य नेचुरल गैस पर वैल्यू ऐडेड टैक्स रेट 5% तक रखने और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इनपुट के रूप में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल, डीजल जैसे दूसरे ईंधनों पर वैट रेट घटाने पर राजी हो गए हैं।

राज्यों में इसकी रूपरेखा बन जाने के बाद जीएसटी काउंसिल इस स्कीम पर विचार करेगी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘काउंसिल इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय करेगी।

आधिकारिक स्तर पर केंद्र और राज्यों के बीच चर्चा हुई है।’ इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुछ कमी आएगी। खासतौर पर उन राज्यों में यह कमी आएगी, जहां ज्यादा टैक्स वसूला जाता है।

काउंसिल ने इससे पहले इस मुद्दे पर विचार किया था और तय किया गया था कि राज्य इस बारे में एक स्कीम बनाएं। एक अन्य सरकारी अधिकारी ने कहा कि मामला अब राज्यों के पाले में है और उन्हें ही स्कीम बनाकर काउंसिल के सामने रखना है।

केंद्र पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स को जीएसटी के दायरे में लाना चाहता था, लेकिन इस सेक्टर से राजस्व का बड़ा हिस्सा हासिल करने वाले राज्यों ने इस कदम का समर्थन नहीं किया था।

अगर राज्यों ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी तो यह इन पेट्रो प्रॉडक्ट्स पर एक समान टैक्स रेट तय करने की दिशा में अहम कदम होगा।

पेट्रोलियम मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान ने पेट्रो प्रॉडक्ट्स को जीएसटी के दायरे में लाने की वकालत बुधवार को की थी। उन्होंने कहा था, ‘जीएसटी काउंसिल को पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार करना चाहिए।’

आधिकारिक स्तर पर हुई चर्चा में नैचरल गैस पर वैट रेट को 5% तक रखने और पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स पर इसे घटाकर वाजिब लेवल पर लाने की सहमति बनी थी ताकि फर्टिलाइजर और स्टील सेक्टरों की इंडस्ट्रियल यूनिट्स की कारोबारी सेहत पर बुरा असर न पड़े।

पहले प्रस्ताव दिया गया था कि सेंट्रल सेल्स टैक्स में बदलाव कर यह पक्का किया जाए कि जीएसटी के दायरे में ली गईं वस्तुओं की उत्पादन लागत बहुत ज्यादा न बढ़े।

अब जिसे सी फॉर्म के नाम से जाना जाता है, उसके तहत मैन्युफैक्चरर्स सुविधा नहीं ले सकते हैं। इस फॉर्म के तहत वे किसी दूसरे राज्य से पेट्रो प्रॉडक्ट्स लेते थे, तो उस पर वहां लगने वाला वैट चुकाने के बजाय 2 पर्सेंट सेंट्रल सेल्स टैक्स देते थे।

 

अब उन्हें वैट चुकाकर पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स खरीदना होगा, जिसकी दरें 15 पर्सेंट से 30 पर्सेंट के बीच हैं। यह मैन्युफैक्चरर्स पर एक तरह से दोहरी मार है क्योंकि उन्हें न केवल ज्यादा टैक्स देना होगा, बल्कि वे पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स पर चुकाए गए इन करों पर जीएसटी सिस्टम के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट भी क्लेम नहीं कर सकेंगे। इतना ही नहीं, कुछ राज्यों ने अपने यहां लाए जाने वाले पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स पर एंट्री टैक्स भी लगा दिया है। राज्य नहीं चाहते हैं कि मैन्युफैक्चरर्स 2% की रियायती दर पर पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स इंपोर्ट करें क्योंकि इससे राजस्व का नुकसान होगा। राज्यों को डर है कि ऐसे में तो सभी मैन्युफैक्चरर्स दूसरे राज्यों से पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स खरीदने लगेंगे और लोकल वैट नहीं देंगे।

नॉर्थ कोरिया के मिसाइल परीक्षण से सूचकांक लुढ़का

मुंबई। शेयर बाजार की शुक्रवार को शुरुआत सुस्ती के साथ हुई। सेंसेक्स 30 अंकों की मामूली गिरावट के साथ 32,211 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी भी करीब 15 अंकों की गिरावट के साथ 10,072 के स्तर पर खुला। वहीं, रुपया 13 पैसे की बढ़त के साथ डॉलर के मुकाबले 64.13 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

हालांकि सुस्ती के बाद भी सेंसेक्स का 32,000 के स्तर से ऊपर कारोबार करना उत्साहजनक ही कहा जाएगा। जानकारों का कहना है कि नॉर्थ कोरिया की ओर से जापान के ऊपर से एक बार फिर मिसाइल दागे जाने के चलते बाजार में अभी और गिरावट देखने को मिल सकती है।

शुरुआती कारोबार में भारत हेवी इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और श्री सीमेंट के शेयरों में 3 पर्सेंट की कमी आई है। इससे पहले उत्तर कोरिया ने जब अमेरिका के इलेक्ट्रिक ग्रिड पर हमला करने की धमकी दी थी, तब भी समूचे एशियाई बाजार में गिरावट का दौर देखने को मिला था। इसका असर भारत पर भी पड़ा था।

इस साल अक्टूबर से होगी मूंग एवं मूंगफली की सरकारी खरीद

किसानों के हित में राज्य सरकार ने प्रदेश में बाढ़ एवं सूखे की स्थिति को देखते हुए मण्डी शुल्क भी माफ कर दिया है।

जयपुर । प्रदेश में इस साल मूंग एवं मूंगफली की खरीद अक्टूबर से की जायेगी। किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्हें दलहन एवं तिलहन फसलों का उचित मूल्य दिलवाने के लिए राज्य सरकार ने यह फैसला लिया है। सरकार ने किसानों से अधिकाधिक खरीद करने के भी निर्देश दिये हैं।

मूंग की खरीद के लिए शुरूआत में प्रदेश में 76 केन्द्र खोले जाएंगे। इसी प्रकार उड़द के लिए 28, मूंगफली के लिए 29 तथा सोयाबीन के लिए 25 केन्द्र खोले जायेंगे। किसानों के हितों को देखते हुए एवं जनप्रतिनिधियों की मांग पर और भी खरीद केन्द्र खोले जा सकेंगेे।

खरीद में आने वाली समस्याओं को ध्यान में रखते हुए किसानों को ई-मित्र केन्द्रों द्वारा ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा भी प्रदान की गई है। भामाशाह कार्ड से लिंक करते हुए भुगतान सीधे किसानों के खाते में होगा। यह खरीद पी.एस.एस. योजना के तहत होगी जिसका नोडल विभाग सहकारिता विभाग एवं एजेन्सी राजफैड होगी।

राजफैड को कार्यशील पूंजी समय-समय पर उपलब्ध करवाई जायेगी। भण्डारण के लिए किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न नहीं हो, इसके लिए राजस्थान राज्य भण्डार व्यवस्था निगम एवं केन्द्रीय भण्डार व्यवस्था निगम के द्वारा उचित व्यवस्था की जायेगी।

बारदाने की समस्या नहीं हो इसके लिए नेफैड द्वारा बारदाना उपलब्ध कराया जायेगा। इस संबंध में राजफैड द्वारा नेफैड को पत्र लिखा जा चुका है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने इस वर्ष मूंग का समर्थन मूल्य 5 हजार 575 रूपये प्रति क्विंटल घोषित किया है, जिसमें 200 रुपये बोनस भी शामिल है।

उड़द का समर्थन मूल्य 5 हजार 400 रुपये (200 रुपये बोनस सहित), मूूंगफली का 4 हजार 450 रूपये (200 रुपये बोनस सहित) तथा सोयाबीन का समर्थन मूल्य 3 हजार 50 रुपये प्रति क्विंटल बोनस सहित घोषित किया है। किसानों के हित में राज्य सरकार ने प्रदेश में बाढ़ एवं सूखे की स्थिति को देखते हुए मण्डी शुल्क भी माफ कर दिया है। 

पोर्ट ब्लेयर में पेट्रोल सबसे सस्ता, मुंबई में सबसे महंगा

  • देश में ही पेट्रोल की कीमतों में राज्यों के बीच 20 रुपये प्रति लीटर का अंतर है

  • पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और सीएनजी के अलग-अलग दाम की वजह राज्यों के कर हैं 

नई दिल्ली। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 80 रुपये प्रति लीटर होने पर मचे बवाल के बीच एक शहर में अभी भी पेट्रोल 60 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। पोर्ट ब्लेयर (अंडमान निकोबार) में पेट्रोल की कीमत 60.80 रुपये है। देश में ही पेट्रोल की कीमतों में राज्यों के बीच 20 रुपये प्रति लीटर का अंतर है।

पोर्ट ब्लेयर में डीजल का दाम भी सबसे कम है। यहां डीजल 55.29 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है जबकि कई राज्यों में कीमत 65 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। इसी तरह एलपीजी सिलेंडर के दाम में भी करीब 12 रुपये का अंतर है। पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और सीएनजी के अलग-अलग दाम की वजह राज्यों के कर हैं क्योंकि हर राज्य में कर अलग है।

महाराष्ट्र में पेट्रोल पर सबसे ज्यादा वैट है। यह राज्य पेट्रोल पर 47.64 फीसदी कर वसूल करता है जबकि डीजल के मामले में आंध्र प्रदेश सबसे आगे है। यहां डीजल पर 30.82 फीसदी कर लगता है। सबसे कम कर वाले राज्य की बात की जाए तो केंद्र शासित अंडमान निकोबार में पेट्रोल और डीजल पर सबसे कम कर है।

यहां पेट्रोल-डीजल पर सिर्फ छह फीसदी कर है। यही वजह है कि यहां पेट्रोल व डीजल के दाम पूरे देश में सबसे कम है। इसके बाद मिजोरम का नंबर है। दिलचस्प बात यह है कि मैदानी इलाकों के राज्यों के मुकाबले पूर्वोत्तर के राज्यों में पेट्रोल और डीजल पर कर कम है।

अरुणाचल में पेट्रोल पर 20 फीसदी व डीजल पर 12.5 फीसदी कर है। त्रिपुरा में पेट्रोल पर 20 तो डीजल पर 13.5 फीसदी कर है। मेघालय, नगालैंड और मिजोरम में भी कर की दरें काफी कम हैं। इसलिए इन राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें दूसरे राज्यों के मुकाबले कम हैं।

जीएसटी से 30% बढ़ गया घर का खर्च

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एक सर्वे में लोगों ने कहा कि दुकानदार कैश लेते हैं और जीएसटी बिल नहीं देते

नई दिल्ली। ज्यादातर लोगों को लगता है कि जीएसटी में निर्माताओं और व्यापारियों को जो फायदा हुआ है, उसका लाभ उन्होंने ग्राहकों को नहीं दिया है। इसलिए नई टैक्स व्यवस्था में उनका महीने का खर्च बढ़ गया है।

इस बीच हरियाणा सरकार ने कहा है कि वह दो सदस्यों की समिति बनाएगी, जो यह देखेगी कि टैक्स में कमी का फायदा ग्राहकों को मिला या नहीं। जीएसटी कानून की धारा 171 में लिखा गया है कि टैक्स रेट में कमी का फायदा सप्लायर के लिए ग्राहकों को देना जरूरी है।

ऑनलाइन सिटिजन प्लेटफॉर्म लोकलसर्किल्स के सर्वे में शामिल 54% लोगों ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद उनका घर खर्च 30% बढ़ गया है। 20% लोगों को लगता है कि उनके खर्च पर नए टैक्स का कोई असर नहीं हुआ है। बाकी 26% खर्च का हिसाब नहीं रखते।

रसोई खर्च के मामले में 51% ने कहा कि बढ़ा है, 7% का घटा है और 26% का पहले के बराबर है। मेडिकल खर्च 47% का बढ़ा जबकि 5% का कम हुआ है। 29% ने कहा कोई फर्क नहीं पड़ा।

39% लोगों ने कहा कि दुकानदार कैश की डिमांड करते हैं और जीएसटी लगाकर बिल भी नहीं देते। 28% के मुताबिक दुकानदार डिजिटल पेमेंट तो लेते हैं, लेकिन जीएसटी का बिल नहीं देते।

मुनाफाखोरी रोकने के लिए हरियाणा में कमेटी
हरियाणा सरकार ने सेंट्रल एक्साइज कमिश्नर और हरियाणा एडिशनल एक्साइज टैक्सेशन कमिश्नर की एक कमेटी बनाने का फैसला किया है। यह कमेटी देखेगी कि टैक्स में कमी का फायदा ग्राहकों को मिला या नहीं।

एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (एक्साइज एवं टैक्सेशन) संजीव कौशल ने बताया कि रोजाना इस्तेमाल होने वाली 89 वस्तुओं पर टैक्स घटा है।

कंपनियों ने बढ़ाने शुरू किए कारों के दाम
जीएसटीमें सेस बढ़ने के बाद होंडा कार्स ने अपनी गाड़ियों के दाम 89 हजार रुपए तक बढ़ा दिए हैं। नई कीमत सोमवार 11 सितंबर से ही लागू हो गई हैं। सरकार ने उसी दिन बढ़े हुए सेस को नोटिफाई किया था। मझोली कारों पर 2%, बड़ी कारों पर 5% और एसयूवी पर 7% बढ़ाया गया है। टोयोटा किर्लोस्कर ने भी अपने मॉडल्स के दाम बढ़ाए हैं।