Soybean: सोयाबीन की बुआई में देरी से खाद्य तेलों में तेजी के आसार

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मुम्बई। Soybean sowing: मौसम तथा मानसून की हालत सही नहीं होने के कारण इस बार सोयाबीन की बिजाई में देर हो रही है और इसका क्षेत्रफल गत वर्ष से काफी पीछे चल रहा है। फसल की बिजाई में जितनी देर होगी। कटाई भी उतनी ही लेट से शुरू होगी।

इससे घरेलू प्रभाग में खाद्य तेलों की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल होने तथा कीमतों में कुछ हद तक तेजी का माहौल बनने की आशंका रहेगी। पश्चिम एशिया में भी संकट बरकरार है।

सोयाबीन की बिजाई की गति बहुत धीमी है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात एवं तेलंगाना जैसे शीर्ष उत्पादक प्रांतों में बिजाई करीब 12-15 दिन लेट हो गई। स्वदेशी उद्योग को भय है कि अल नीनो के कारण आगे भी बिजाई के लिए खतरा बढ़ सकता है जिससे खाद्य तेल का दाम मजबूत बना रहेगा। मूंगफली की बिजाई भी पीछे है।

ईरान-अमरीका युद्ध शुरू होने के बाद से खाद्य तेलों के दाम में अब तक करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। प्रमुख उत्पादक इलाकों में मानसून की वर्षा का अभाव देखा जा रहा है।

सोपा के अनुसार पिछले साल देश में 110.20 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ। इस वर्ष कुल बारिश के साथ-साथ इसके वितरण पर भी नजर रखना आवश्यक है।