Sunday, July 5, 2026
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1.25 करोड़ नए आयकरदाताओं को टैक्स बेस में जोड़ेगा आयकर विभाग

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डेटा के मुताबिक 10 जून तक वित्त वर्ष 2016-17 में 1.26 करोड़ नए टैक्सपेयर्स को भी टैक्स बेस में जोड़ा गया है।

नई दिल्ली। देश के आयकर दायरे को बढ़ाने के लिए सरकार ने इनकम टैक्स विभाग को 1.25 करोड़ नए आयकरदाताओं को जोड़ने का टास्क दिया है।

आयकर विभाग के लिए नीति निर्धारण करने वाली संस्था सीबीडीटी (सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज) ने आयकर विभाग को वित्त वर्ष 2017-18 में टैक्स बेस बढ़ाने के लिए ‘फोकस्ड कोशिशें’ करने का निर्देश दिया है।

सीबीडीटी ने इनकम टैक्स विभाग को 1.25 करोड़ नए आईटी रिटर्न फाइल करने वालों को जोड़ने का टारगेट दिया है। नए आईटी रिटर्न फाइलर उनको कहा जाएगा जिन्होंने अभी तक इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किया है, लेकिन नए कानून के तहत वे टैक्स दाखिल करने के दायरे में आते हैं।

टैक्स अधिकारी ऐसे लोगों को टैक्स के दायरे में लाएंगे और उनसे टैक्स फाइल करवाएंगे। हैदराबाद और पुणे रीजन के अधिकारियों को सबसे अधिक टारगेट दिया गया है। टारगेट को पूरा करने के लिए हैदराबाद रीजन को 12.8 लाख और पुणे रीजन को 11.8 लाख नए आईटीआर फाइलर्स जोड़ने होंगे।

इसके बाद नंबर है चेन्नई का जिसे 10.47 लाख और चंडीगढ़ को 10.41 लाख नए फाइलर्स जोड़ने हैं। देश के टैक्स बेस का दायर बढ़ाने के प्लान पर नई दिल्ली में हुए ‘राजस्व ज्ञानसंगम’ कॉन्फ्रेंस में चर्चा की गई और प्लान फाइनल भी किया गया।

कॉन्फ्रेंस के दौरान सीबीडीटी ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा, ‘टैक्स बेस का दायरा बढ़ाने के लिए रणनीति पर काफी चर्चा की गई जिसमें नोटबंदी के दौरान वेरिफाई किए गए डेटा को ध्यान में रखा गया साथ ही स्टेटमेंट ऑफ फाइनैंशल ट्रांजैक्शंस (SFT) पर भी फोकस रखा गया।’

सीबीडीटी ने कहा, ‘इस वित्त वर्ष में सीबीडीटी ने टैक्सपेयर्स की संख्या बढ़ाने का टारगेट रखा है। यह भी निर्देश दिया गया कि ऑपरेशन क्लीन मनी को भी पॉपुलर किया जाए जिससे टैक्स चोरी को खत्म किया जा सके।’

आधिकारिक डेटा के मुताबिक, वित्त वर्ष 2016-17 में फाइल किए गए कुल रिटर्न (इलेक्ट्रॉनिक+पेपर) की संख्या 5.43 करोड़ थी जो 2015-16 में फाइल किए गए रिटर्न से 17.3 प्रतिशत ज्यादा थी। इसी प्रकार 10 जून तक वित्त वर्ष 2016-17 में 1.26 करोड़ नए टैक्सपेयर्स को भी टैक्स बेस में जोड़ा गया है।

उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध – वर्मा

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खाद्य सुरक्षा योजना से अपात्र  लोगों के नाम पृथक कर पात्र व्यक्तियों के नाम उपखण्ड अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर जुडवायेंं

जयपुर । खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोकता मामले विभाग मंत्री बाबू लाल वर्मा ने कहा कि उपभोक्ताओं के हितो की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है, सभी पात्र व्यक्ति्यों को समयबद्ध रूप से राशन उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। 

वर्मा की अध्यक्षता में गुरूवार को सर्किट हाउस में खाद्य विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। उन्होंने योजनावार समीक्षा कर जिला रसद अधिकारी को निर्देश दिये कि उपभोक्ताओं को किसी भी स्तर पर असुविधा न हो इसके लिए व्यवस्थाऎ सुनिश्चित करे।

उन्होंने निर्देश दिये कि खाद्य सुरक्षा योजना से अपात्र  लोगों के नाम पृथक कर पात्र व्यक्तियों के नाम उपखण्ड अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर जुडवायेंं।

उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा योजना से सम्बधित परिवेदनाओं के निस्तारण के लिए विभाग के कार्यालय में प्रमिमाह दूसरे और चौथे गुरूवार को शिविर का आयोजन करेंं। 

खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री ने बताया कि सरकार खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जोडने की प्रकिया का सरलीकरण कर रही है, जिसके  दिशा निर्देश शीघ्र जारी कर दिये जायेेगे।

उन्होेंने उज्जवला योजना की समीक्षा कर निर्देश दिये कि शेष रहे सभी पात्र परिवारों को गैस कनेक्शन दिलवाना सुनिश्चित करें तथा अन्नपूर्णा भण्डारों के सभी संचालको की बैठक आयोजित कर नवीनतम विभागीय निर्देशों की जानकारी दिलाना सुनिश्चित करें।

मंत्री ने कहा कि जिले में गेहू के उठाव और वितरण की समीक्षा कर उठाव के पश्चात गेहूं का शत् प्रतिशत वितरण कर कराना सुनिश्चित करें। 

नई सोयाबीन की आवक बढ़कर 10 हजार बोरी हुई

महेश खंडेलवाल
कोटा। भामाशाह अनाज मंडी शुक्रवार को माल की आवक 35 हजार बोरी की रही । लहसुन की आवक 5000 हजार कट्टे की रही । लहसुन मीडियम 200 रुपए क्विंटल तेज रहा । नई सोयाबीन की लगभग 10 हजार बोरी की रहीं।

गेहूं मिल 1500से 1531 लोकवान 1600से 1700 पीडी 1650 से 1700 टुकडी 1600से 1700 रुपए क्विंटल । धान सुगंधा 2000 से 2200पूसा 1 2000 से 2200 पूसा4 (1121) 2000 से 2400 धान (1509) 2000 से 220 रुपए क्विंटल।

सोयाबीन 2500 से 2850 नई सोयाबीन 2400 से 2850 सरसो 3200 से 3451 तिल्ली 5000 से 7200 मैथी 2000 से 2500 धनिया बादामी 3400 से 3900 ईगल 3800 से 4000 रंगदार 4500 से 5000 रुपए क्विंटल।

मूंग 3500 से 4100 उडद नया 3000 से 4000 उडद पुराने 3600 से 3600 चना 5000से 5500 चना काबुली 7000 से 10500 चना पेप्सी 4800 से 5800 चना मौसमी 4800 से 5800 मसूर 3500 से 4000 रुपए क्विंटल।

ग्वार 2500से 3450 मक्का 1200 से 1300 जौ 1100 से 1200 ज्वार 1300 से 2000 । लहसुन 800 से 4000 रुपए क्विंटल।

उद्योग और निर्यातकों ने वित्त मंत्री को बताई जीएसटी की दिक्क्तें

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नई दिल्‍ली।  वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ उद्योग मंडलों और निर्यातकों की आज यहां बैठक हुई। बैठक में वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से संबंधित मुद्दों को रखा गया।

निर्यातकों का शीर्ष संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) के अध्यक्ष गणेश गुप्ता ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि मंत्री ने हमारी बातों को सहानुभूतिपूर्वक सुना और हर संभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने हमारी सभी बातों को सकारात्मक रूप से लिया।

फियो ने वस्तु निर्यातकों को जीएसटी से छूट देने और कर वापसी (रिफंड) प्रक्रिया तत्काल शुरू करने की मांग की। साथ ही एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) तथा केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) के भुगतान के लिए निर्यात लाभ पावती पत्र (स्क्रिप) के उपयोग की अनुमति देने को कहा।

उन्होंने कहा, खासकर छोटे निर्यातक जीएसटी से प्रभावित हुए हैं क्योंकि उन्हें जीएसटी के भुगतान के लिए कर्ज लेना पड़ा। कर्ज की लागत से उन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। सरकार को निर्यातकों के लिए ई-वॉलेट पेश करने पर विचार करना चाहिए।

व्यापारी खासकर लघु एवं मध्‍यम उद्यम रिटर्न फाइल करने में समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इससे उन पर अनुपालन बोझ बढ़ रहा है। रत्‍न एवं आभूषण निर्यात संवर्द्धन परिषद के चेयरमैन प्रवीण शंकर पांड्या ने कहा कि क्षेत्र समस्याओं का सामना कर रहा है क्योंकि निर्यात घट रहा है।

वे आभूषण तैयार करने और निर्यात मकसद से नामित एजेंसियों से मूल्यवान धातु की खरीद पर आईजीएसटी से छूट की भी मांग कर रहे हैं। पांड्या ने कहा कि छोटी कंपनियां ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। कुछ ने अपना उत्पादन भी घटाया है। हमने अनुपालन का मुद्दा उठाया है।

हमें मंत्री से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। वे हमारी मांगों को जीएसटी परिषद के समक्ष रखेंगे। इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज आफ इंडिया (आईसीएसआई) काउसिंल के सदस्य सतविन्दर सिंह ने कहा कि रिवर्स शुल्क व्यवस्था तथा कर वापसी के मुद्दे को बैठक में उठाया गया।

बैठक में केपीएमजी, सीआईआई, फिक्की, रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्द्धन परिषद, लघु उद्योग भारती, जीएसटी सर्विस प्रदाता, आईसीएसआई, भारतीय सनदी लेखाकर संस्थान और एमेजॉन के प्रतिनिधि मौजूद थे।

भारत के पहले स्पॉट गोल्ड एक्सचेंज के लिए पैनल गठित होगा

भारत में इस तरह के एक्सचेंज की जरूरत पर जोर बीते साल गोल्ड मोनेटाइजेशन और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम जारी करने के बाद दिया गया है, इनका प्रमुख उद्देश्य देश के सोने के भंडार को एक जगह एकत्रित करना था

नई दिल्ली । द वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) अगले 12 से 18 महीने के भीतर भारत के पहले स्पॉट गोल्ड एक्सचेंज की स्थापना करने में मदद करने के लिए जल्द ही एक समिति बनाने की योजना बना रहा है।

उद्योग संगठन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को यह जानकारी दी है। फिजिकल गोल्ड के लिए एक डेडिकेटेड एक्सचेंज होने से उस बाजार में पारदर्शिता लाने के अलावा जहां बड़े लेन देन की संभावनाएं हैं, भारत में सोने के मानक मूल्य निर्धारण की शुरुआत होगी।

डब्ल्यूजीसी में भारतीय परिचालन के प्रबंध निदेशक सोमसुंदरम पीआर ने बताया, “हम समिति के गठन का नेतृत्व करेंगे, जिसमें सभी हितधारक (स्टेकहोल्डर्स) शामिल होंगे।”

देश में एक स्पाट गोल्ड एक्सचेंज की जरूरत पर प्रकाश डालने वाली डब्ल्यूजीसी रिपोर्ट को जारी करते हुए उन्होंने बताया कि समिति जिसके दिसंबर तिमाही में गठित होने की संभावना है, वो एक्सचेंज का गठन नहीं करेगी, बल्कि वह इसकी स्थापना में एक मार्गदर्शक का काम करेगी।

साल 2015 में ही भारत सरकार ने एक राष्ट्रीय गोल्ड एकसचेंज का प्रस्ताव सामने रखा था। भारत में इस तरह के एक्सचेंज की जरूरत पर जोर बीते साल गोल्ड मोनेटाइजेशन और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम जारी करने के बाद दिया गया है। इनका प्रमुख उद्देश्य देश के सोने के भंडार को एक जगह एकत्रित करना था।

ऐसा इसलिए ताकि देश में सोने के आयात को कम किया जा सके, जो कि व्यापार घाटे पर असर डालता है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) और नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) वर्तमान में भारत में सोने के वायदा अनुबंध को पेश करते हैं, लेकिन गोल्ड के फिजिकल ट्रेड के लिए अब तक कोई मंच नहीं है।

गिरावट थमी, सेंसेक्स और निफ्टी ऊपर चढ़कर बंद

नई दिल्ली। साल की सबसे लंबी गिरावट के बाद गुरुवार को बाजार थोड़ा मजबूत स्थिति में बंद हुआ। बाजार की सुस्त शुरुआत के बाद सेंसेक्स 31,081 तक गिर गया और निफ्टी 9,867 अंकों तक लुढ़का।

हालांकि बाजार बंद होने तक सेंसेक्स और निफ्टी ने रिकवरी कर ली। सेंसेक्स 31,250 पर बंद हुआ वहीं निफ्टी 9,770 पर बंद हुआ। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी जोरदार रिकवरी देखने को मिली।

गुरुवार को मार्केट में गिरावट का असर निफ्टी की मिडकैप कंपनियों के शेयरों पर देखा गया और यह 0.14 प्रतिशत टूट गया। शुरुआती कारोबार में ओएनजीसी, ऑरबिंदो फार्मा, भारती इन्फ्राटेल और डॉ. रेड्डीज लैब्स के शेयर कमजोर पड़े थे जबकि टेक महिंद्रा, विप्रो, टीसीएस, एचसीएल टेक्नॉलजीज और ऐक्सिस बैंक के शेयरों ने थोड़ी तेजी पकड़ी।

सरकार ऑनलाइन पेट्रोल-डीजल बेचने की तैयारी में

नई दिल्ली। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के फायदा उठाने की कोशिश में सरकार सारे पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स को ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म पर लाने की तैयारी में हैं। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।

प्रगति मैदान में आयोजित तीन दिवसीय मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस को संबोधित करते हुए प्रधान ने कहा, ‘क्या हम आईटी और टेलिकम्यूनिकेशंस को ऑइल से जोड़ सकते हैं? हम सभी पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स को ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म पर लाने की योजना बना रहे हैं।’

पेट्रोलियम मंत्री ने बताया कि चार करोड़ कन्ज्यूमर्स के लिए पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स के महज एक लाख रिटेल आउटलेट्स ही हैं। उन्होंने कहा, ‘अभी-अभी हमने तय किया और हमने संबंधित विभागों से अनुमति ले ली है, हम सारे पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स को ई-कॉमर्स के प्लैटफॉर्म पर रखेंगे।’

नोटबंदी से बैंकों को 3,800 करोड़ का घाटा

कैशलेस सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए खरीदी गई PoS मशीनों की ही बात करें तो यह पिछले साल जनवरी में 13.8 लाख थीं और इस साल जुलाई तक इनकी संख्या 28 लाख हो चुकी हैं-एसबीआई

मुंबई। बैंकों के पेमेंट सिस्टम में नोटबंदी के बाद किए गए बदलावों से बैंकों को 3,800 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। नोटबंदी के बाद कैशलेस सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए खरीदी गई PoS मशीनों की ही बात करें तो यह पिछले साल जनवरी में 13.8 लाख थीं और इस साल जुलाई तक इनकी संख्या 28 लाख हो चुकी हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में यह सामने आया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही डेबिट और क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शंस बढ़े हों लेकिन कम एमडीआर, कार्ड का कम इस्तेमाल, कमजोर टेलिकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे कारणों से बैंकों को भारी घाटा हुआ है।

इस रिपोर्ट को तैयार करने वालीं, एसबीआई ग्रुप की चीफ इकॉनमिक अडवाइजर सौम्या कांति घोष ने कहा, ‘हमारा मानना है कि बैंकों द्वारा डिवेलप किए गए पॉइंट ऑफ सेल (PoS) इन्फ्रास्ट्रक्चर को पूरे मन से सपॉर्ट करना होगा।’ पीओएस मशीन का इस्तेमाल डेबिट या क्रेडिट कार्ड से पैसे काटने के लिए किया जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘सरकार ने PoS इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं और बैंकों ने भी अधिक से अधिक पीओएस मशीनों को इन्स्टाल किया है। लेकिन लंबे समय की बात करें तो उद्देश्य तभी पूरा होगा जब PoS से होने वाले ट्रांजैक्शंस एटीएम को पीछे छोड़ देंगे। जो अभी मुश्किल लगता है।’

एसबीआई के अनुमानों के मुताबिक, इंटर बैंक ट्रांजैक्शंस से पीओएस टर्मिनल्स पर 4,700 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। इसमें से अगर एक ही बैंक में किए गए पीओएस ट्रांजैक्शंस को घटा दें तो यह कुल घाटा 3,800 करोड़ रुपये हुआ।

1 अक्टूबर से होंगे पांच बदलाव, जो आपको जानना जरूरी

नई दिल्ली। 1 अक्टूबर से केवल साल का एक महीना ही नहीं बदल रहा बल्कि और भी कई जरूरी चीजें बदलने जा रही हैं। यह चीजें सीधे तौर पर आम आदमी को प्रभावित करेंगी और अगर आपको इसकी जानकारी नहीं है तो फिर जान लें क्योंकि इससे आपको फायदा मिलने वाला है।

बदल जाएगी सामान की एमआरपी
जीएसटी लागू होने के बाद अब 1 अक्टूबर से बाजार में पुरानी एमआरपी वाला समान नहीं बेचा जा सकेगा। सरकार के आदेश अनुसार सभी प्रोडक्ट्स पर नई एमआरपी लिखकर बेचना होगा और इसमें जीएसटी अलग से नहीं लगाया जा सकेगा। अगर कोई पुरानी एमआरपी पर सामान बेचता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सेविंग अकाउंट बैलेंस में कटौती
1 अक्टूबर से एसबीआई के ग्राहकों के लिए कुछ बदलाव लागू होने वाले हैं इनमें सेविंग बैंक अकाउंट के बैलेंसे अलावा और भी चीजे हैं। 1 अक्टूबर से बैंक ने सेविंग अकाउंट में मिनिमम बैलेंस की राशि 5000 से घटाकर 3000 रुपए करने का फैसला किया है। इससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

नहीं चलेंगे इन 6 बैंकों के चेक
इसके अलावा एसबीआई के ही 6 सहयोगी बैंकों के चेक 30 सितंबर के बाद बेकार हो जाएंगे। इसलिए अगर आप भी इन 6 बैंकों स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर (एसबीबीजे), स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद (एसबीएच), स्टेट बैंक ऑफ मैसूर (एसबीएम), स्टेट बैंक ऑफ पटियाला (एसबीपी), स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर (एसबीटी) और भारतीय महिला बैंक (बीएमबी) के चेक बेकार हो जाएंगे और ग्रहकों को नई चेक बुक जारी करवानी होगी।

अकाउंट बंद करने पर नहीं देना होगा चार्ज
इसके अलावा एसबीआई के ही ग्रहकों को बैंक ने सेविंग अकाउंट बंद करते समय लगने वाले चार्जेस में भी राहत दी है। इसके तहत अगर आप अपना सेविंग अकाउंट बंद करवाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको 1 अक्टूबर के बाद कोई चार्ज नहीं लगेगा।

हालांकि यह सविधा खाता खोलने के 14 दिन और 1 साल बांद बंद करने पर मिलेगी। इसके बाद अगर कोई खाता बंद करता है उसे 500 रुपए चार्ज प्लस जीएसटी देना होगा।

कम हो सकती है कॉल रेट्स
मोबाइल फोन यूजर्स को 1 अक्टूबर से ही कॉल रेट कम होने की सुविधा मिल सकती है। ट्राई ने 1 अक्टूबर से ही इंटरकनेक्शन चार्ज घटाने की घोषणा की है जिसके बाद कॉल रेट्स कम हो सकते हैं।