Monday, July 6, 2026
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सेको इंडिया देश में 60 लाख की घड़ी लॉन्च करेगा

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नई दिल्ली।  देश में अरबपतियों की बढ़ती आबादी के लिहाज से यहां का मार्केट भी तेजी से बदल रहा है। इसी क्रम में सेको होल्डिंग्स कॉर्प की सब्सिडियरी कंपनी सेको वॉच इंडिया इस साल के अंत तक देश में 50 से 60 लाख रुपये की घड़ी लाने जा रही है।

इस सेगमेंट में Tissot, Rao और TAG Heuer जैसी कंपनियां पहले से ही भारत में मौजूद हैं। सेको वॉच इंडिया के प्रेजिडेंट नीलाद्री मजुमदार ने कहा, ‘हमें साल के आखिर तक 50 से 60 लाख रुपये की प्राइस रेंज की घड़ियां मिलनेवाली हैं।’ उन्होंने बताया कि इसमें 8 दिनों का पावर रिजर्व है। कंपनी ने घड़िया बनाने से पहले 1,000 लोगों की राय ली थी।

मजूमदार ने कहा, ‘हमारे पास अभी कोई घड़ी नहीं है। इस साल और अगले साल की शुरुआत से 10 स्टोर्स और ज्यादा-से-ज्यादा छह बूटिक्स के साथ शुरुआत करने जा रहे हैं।

हम कम-से-कम 200 घड़ियां बेचने की कोशिश कर रहे हैं।’ सेको इंडिया के ग्राहकों में उद्योगपतियों के अलावा डॉक्टर्स और टॉप मैनेजमेंट लीडर्स शामिल हो सकते हैं जिन्होंने ग्रैंड सेको वॉच में दिलचस्पी दिखाई है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज चीफ मुकेश अंबानी भारतीय अरबपतियों की सूची में शीर्ष पर विराजमान हैं। वैसे भारत में अरबपतियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और फोर्ब्स की 2017 की लिस्ट के मुताबिक अरबपतियों की तादाद के लिहाज से दुनिया में भारत का चौथा स्थान है।

फोर्ब्स लिस्ट में दुनिया के 2,043 सबसे धनवान लोगों को शामिल किया गया है। इनकी कुल संपत्ति में पिछले साल के मुकाबले 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

जीडीपी में गिरावट: 2017-18 के उधारी लक्ष्य पर सरकार अडिग

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जुलाई 2017 से ही गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) की लॉन्चिंग के बाद आई आर्थिक मंदी ने केंद्र सरकार के राजस्व पर दबाव और उसकी चिंताओं में इजाफा कर दिया है

नई दिल्ली । सरकार ने कहा कि वो मार्च 2018 को खत्म होने वाले चालू वित्त वर्ष तक के लिए अपने बजटीय उधारी लक्ष्य पर अडिग है। हालांकि उन्होंने किसी भी नए खर्च के लिए अतिरिक्त बांड बेचने की संभावनाओं की ओर इशारा भी किया।
जुलाई 2017 से ही गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) की लॉन्चिंग के बाद आई आर्थिक मंदी ने केंद्र सरकार के राजस्व पर दबाव और उसकी चिंताओं में इजाफा कर दिया है। इस वजह से सरकार को राजकोषीय घाटे को कम स्तर पर लाने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। व

हीं इसके इतर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने गुरुवार को कहा था वह अक्टूबर दिसंबर तिमाही के दौरान सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेश सीमा को 80 बिलियन रुपए बढ़ाकर 2.5 ट्रिलियन रुपए कर देगा।

विदेशी निवेशकों की ओर से मजबूत खरीद के बीच वर्तमान कोटा लगभग पूरी तरह समाप्त हो जाने के बाद यह कदम उठाया गया है क्योंकि भारत विश्व स्तर पर कम ब्याज दर के साथ हायर यील्ड उपलब्ध करवाता है।

फरवरी महीने में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बॉन्ड बिक्री के माध्यम से 2017-18 में 5.8 ट्रिलियन रुपए जुटाने का अनुमान लगाया था ताकि जीडीपी के मुकाबले 3.2 फीसद राजकोषीय घाटे के गैप को कम किया जा सके।

हालांकि, घाटे ने पूरे वर्ष के लक्ष्य का 92 फीसद हिस्सा पहले ही पार कर लिया है। जुलाई के मुकाबले अगस्त महीने के दौरान जीएसटी कलेक्शन में आई 3.6 फीसद की गिरावट ने भी चिंताएं बढ़ा दी हैं।

ई-कार बनाने के लिए महिंद्रा, टाटा मोटर्स और निसान ने लगाई बोली

  • ईईएसएल ने 10,000 इलेक्ट्रिक कारों की खरीद के लिए जारी की निविदा

  • अगले 12 माह में दो चरणों में की जाएगी वाहनों की खरीद

  • सरकारी विभागों और कार्यालयों को पट्टे पर ई-कार देगी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ईईएसएल

नई दिल्ली । अगर सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों की सड़क पर तेजी से बढ़ रही है तो कार कंपनियां भी पीछे नहीं हैं। देश में इलेक्ट्रिक कारों के लिए हाल ही में निकाली गई पहली निविदा के जवाब में महिंद्रा ऐंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स और जापानी कंपनी निसान ने बोलियां लगाई हैं।

निविदा के तहत 10,000 कार खरीदी जानी हैं। इनकी आपूर्ति 12 महीनों के दौरान 2 चरणों में की जाएगी। खरीद की प्रक्रिया अगले वर्ष के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है। पहले चरण में तीन माह के दौरान 500 इलेक्ट्रिक कार खरीदी जाएंगी और बाकी 9,500 कार बाद के 9 महीनों में खरीदी जाएंगी।

कंपनियां इन कारों को एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) के हाथों थोक में बेचेंगी, जिस कारण उन्हें कारों को बाजार में उतारने या उनके विज्ञापन अथवा प्रचार पर एक पाई भी खर्च नहीं करनी पड़ेगी। यही वजह है कि निविदा के लिए कंपनियों ने काफी कम कीमत पर बोली लगाई है।

ईईएसएल के प्रबंध निदेशक सौरभ कुमार ने कहा, ‘तीन कंपनियों से बोली मिलना हमारे लिए खुशी की बात है। हमें लग रहा था कि निविदा के जवाब में कम से कम दो बोलियां तो जरूर आएंगी।’ इस निविदा के लिए बोलियों से पहले अगस्त के अंतिम हफ्ते में एक बैठक हुई थी, जिसमें टाटा मोटर्स, महिंद्रा, हुंडई, निसान और रेनो के नुमाइंदों ने हिस्सा लिया था।

चार सरकारी कंपनियों-एनटीपीसी, पावरग्रिड, पीएफसी और आरईसी की संयुक्त उपक्रम ईईएसएल ने 10,000 इलेक्ट्रिक कारों की खरीद के लिए 15 अगस्त को निविदा जारी की थी। उसकी योजना इन्हें खरीदकर सरकारी विभागों और कार्यालयों को पट्टे पर मुहैया कराने की है।

आरंभ में बिजली मंत्रालय और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सार्वजनिक बिजली इकाइयों के कार्यालयों को ये गाडिय़ां दी जाएंगी। हालांकि यह पता नहीं चल पाया है कि तीनों कंपनियों ने कितनी-कितनी कारों के लिए बोली लगाई हैं और इन कारों की कीमत क्या होगी।

 पिछले कुछ समय से इलेक्ट्रिक कार बना रही महिंद्रा ने सबसे ज्यादा कारों के लिए बोली लगाई होगी। कंपनी के पास फिलहाल दो इलेक्ट्रिक वाहन – ई2ओ (हैचबैक) और वेरिटो (सिडैन) हैं, लेकिन उनकी बिक्री 2,000 से भी कम रही है। महिंद्रा के ई-वाहनों की कीमत करीब 8 से 11 लाख रुपये के बीच है।

रेल मंत्रालय 700 ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने की तैयारी में

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रेलमंत्री ने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से टाइम टेबल करने में वक्त लगेगा, इसलिए यह एक महीने लेट यानी 1 नवंबर से लागू होगा

नई दिल्ली। रेलवे का टाइम टेबल इस बार नए तरीके से बनाया जा रहा है, जिससे ट्रेनों को ज्यादा रफ्तार से चलाया जा सकेगा। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने दावा किया नया टाइम टेबल लागू होने के बाद 700 ट्रेनों की स्पीड बढ़ जाएगी, जिससे यात्रा में समय कम लगेगा।

इसके अलावा, 48 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की स्पीड बढ़ाकर उन्हें सुपरफास्ट की श्रेणी में लाया जाएगा। रेलमंत्री ने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से टाइम टेबल करने में वक्त लगेगा, इसलिए यह एक महीने लेट यानी 1 नवंबर से लागू होगा।

जिससे कई ट्रेन के यात्रा समय में कमी आयेगी।  रेल मंत्री ने राजधानी, शताब्दी और दुरंतों ट्रेनों में पिछले साल लागू किए गए फ्लेक्सी फेयर सिस्टम में बदलाव के भी संकेत दिए। इस सिस्टम में डिमांड के मुताबिक किराया बढ़ता जाता है। इसका विरोध होता रहा है।

इस दौरान, रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि फिलहाल रेलवे का किराया बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। गोयल ने कहा कि रेलवे का पूरा फोकस ट्रेनों की सेफ्टी पर रहेगा।

नोटबंदी: बैंकों में जमा बिना हिसाब वाले 3 लाख करोड़ पर वसूल होगा टैक्स

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अगर 3 लाख करोड़ के ऐसे डिपॉजिट का पता लग पाता है तो डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन बढ़ेगा, जिससे सुस्त इकॉनमी वाले इस दौर में सरकार को राहत मिलेगी

मुंबई। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) के चीफ ने अधिकारियों से कहा है कि नोटबंदी के बाद 3 लाख करोड़ रुपये के जिन डिपॉजिट के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने का शक है, वे उस पर टैक्स वसूल करें।

सीबीडीटी के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने हाल में एक विडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के सीनियर अधिकारियों को यह मेसेज दिया। इस मीटिंग में शामिल रहे दो सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

अगर 3 लाख करोड़ के ऐसे डिपॉजिट का पता लग पाता है तो डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन बढ़ेगा, जिससे सुस्त इकॉनमी वाले इस दौर में सरकार को राहत मिलेगी।

केंद्र इसके जरिये नोटबंदी के सफल होने का भी दावा कर सकता है, जिसे विपक्षी दल आर्थिक विकास दर में गिरावट के लिए कसूरवार ठहरा रहे हैं।

जो लोग नोटबंदी के बाद बैंकों में जमा कराई गई रकम के स्रोत के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए थे, टैक्स अधिकारी उनके साथ सख्ती कर सकते हैं।

वे उस रकम पर 60 पर्सेंट टैक्स और पेनल्टी 60लगा सकते हैं। हालांकि, यह काम केस टु केस बेसिस पर करना होगा, जिसमें काफी समय लग सकता है।

एक सूत्र ने बताया कि 3 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े तक सीबीडीटी किस तरह पहुंचा है। अगर मान लेते हैं कि यह सही डेटा है, तो भी डिपार्टमेंट को डिपॉजिट के लिए दिए गए जवाब को वेरिफाई करने में दो साल का समय लगेगा।’

उन्होंने कहा, ‘अगले दो महीने में सितंबर 2015 में भेजे गए नोटिस का असेसमेंट करना है। यह काम दिसंबर 2017 तक पूरा हो जाना चाहिए। ये नोटिस वित्त वर्ष 2014-15 के लिए भेजे गए थे।’

उन्होंने कहा कि इसके बाद 2015-16 के नोटिस से संबंधित कामकाज दिसंबर 2018 तक पूरा करना होगा। इसके बाद ही डिपार्टमेंट नोटबंदी के बाद जमा कराए गए कैश वाले मामले देख पाएगा। सूत्र ने सवाल किया कि हमारे पास इस काम के लिए लोग कहां हैं?

इसका मतलब यह है कि अगर टैक्स ऑफिस नोटबंदी वाले मामले के लिए अलग से अधिकारी तैनात नहीं करता है तो इस साल इससे टैक्स कलेक्शन नहीं बढ़ने जा रहा।

नोटबंदी के बाद अमान्य हुए 15 लाख करोड़ रुपये में से 99 पर्सेंट बैंकों में वापस आ गया था। ऐसा शक है कि जिन लोगों ने कैश अपने पास रखा था, उन्होंने बड़े पैमाने पर बैंकों के जरिये पिछले साल नवंबर और दिसंबर में लॉन्ड्रिंग की।

सीबीडीटी के प्रवक्ता ने कहा, ‘चेयरमैन ने अधिकारियों को 2017-18 के टैक्स कलेक्शन के बजट एस्टिमेट को पूरा करने के लिए काम करने का निर्देश दिया है। यह सालभर पहले से 15.3 पर्सेंट अधिक टैक्स कलेक्शन है।’

सेंसेक्स 100 अंक मजबूत हुआ , निफ्टी 9800 के पार

नई दिल्ली। शुक्रवार को शेयर बाजार की सितंबर के आखिरी सत्र की शुरुआत पॉजिटिव नोट के साथ हुई और निफ्टी 9800 का आंकड़ा पार कर गया। 30 शेयरों का बीएसई सेंसेक्स 97.09 अंक चढ़कर 31,379.57 पर जबकि 50 शेयरों का निफ्टी 39.30 अंक चढ़कर 9,808.25 पर खुला।

शुरुआती कारोबार में गेल के शेयर 6 प्रतिशत मजबूत हो गए। इसकी वजह पेट्रोलियम ऐंड नैचरल गैस रेग्युलेटरी बोर्ड ऑफ इंडिया का वह कंसल्टेशन पेपर है जिसमें कंपनी की पाइपलाइंस के लिए डब्ल्यूआरटी यूनिफाइड टैरिफ 57 रुपये प्रति एमएमबीटीयू का प्रस्ताव है।

इधर, भारतीय एयरटेल, एचयूएल, एनटीपीसी और टेक महिंद्रा के शेयरों में थोड़ी देखी गई। वहीं, निफ्टी मिडकैप में 0.7 प्रतिशत का उछाल आया। लवेबल लिंजरी के शेयरों ने तो 13 प्रतिशत की मजबूती हासिल कर ली।

जीएसपीएल, ली इलेक्ट्रिकल्स, इंडियाबुल्स रीयल, डीएचएफएल, आईएफसीआई, साउथ इंडिया बैंक, एचसीसी और विजया बैंक के शयेरों में भी 2 से 10 प्रतिशत की उछाल देखी गई। हालांकि रिलायंस होम फाइनैंस 5 प्रतिशत टूट गया।

कोटा दशहरा मेले में रावण दहन कल शाम

  • मुहूर्त : कल शाम 7.21 से 7.41 बजे के बीच होगा रावण दहन

  • गर्दन घुमाते हुए अट्‌टहास करेगा रावण

  • रावण 72 फीट, कुंभकर्ण मेघनाद के पुतले 40-40 फीट के होंगे

कोटा । राष्ट्रीय दशहरा मेले में रावण दहन इस बार 30 सितम्बर को मुहूर्त के हिसाब से शाम 7.21 बजे से 7.41 बजे के बीच होगा। शुक्रवार को रावण, मेघनाद कुंभकर्ण के पुतलों को मैदान में खड़ा करने के लिए गुरूवार को देर रात तक लकड़ी का पेड़ा बांधने की कार्रवाई की जाती रही।

अतिरिक्त मेला अधिकारी एसी प्रेमशंकर शर्मा ने बताया कि 30 सितम्बर की शाम को मुहूर्त के हिसाब से रावण दहन होगा। दहन से पहले गढ़ पैलेस से भगवान लक्ष्मीनारायण की सवारी शाम 6 बजकर 11 मिनट पर रवाना होगी। रावण दहन के दिन सुरक्षा की दृष्टि से निगम प्रशासन ने रावण चौक के आसपास पुख्ता बंदोबस्त किए हैं।

दहन के दौरान दर्शकों को किसी तरह से कोई व्यवधान पहुंचे इसके लिए रावण कुनबे के आसपास बैरिकेड्स लगेंगे सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त रहेंगे। मेलाध्यक्ष राममोहन मित्रा बाबला ने बताया कि इस बार रावण के पुतले की ड्रेस में बदलाव किया है। साथ ही वो तलवार चलाएगा, आंखें मटकाएगा, गर्दन घुमाएगा और अट्‌टहास करेगा। कुंभकर्ण मेघनाद भी तलवार घुमाते नजर आएंगे।

जीएसटी के बाद देर से आ रहा केंद्र से पैसा, टैक्स भी कम

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महीने की पहली तारीख को मिलता था केंद्रीय करों के बदले हिस्सा , मिलेगा 1100 करोड़ का मुआवजा

जयपुर। जीएसटीसे राज्य सरकार का सिर्फ टैक्स कम हुआ है बल्कि इसकी वजह से राज्य सरकार को केंद्रीय करों में हिस्से के तौर पर मिलने वाली रकम भी अब देरी से मिल रही है। केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के तौर पर राज्य सरकार को हर महीने करीब ढाई हजार करोड़ रुपए मिलते हैं।

अब तक यह रकम उसे हर महीने की एक तारीख को मिल जाती थी जिससे कर्मचारियों की तनख्वाह निकल जाती थी। लेकिन अब यह पैसा उसे महीने की 15 तारीख को मिल रहा है। दरअसल केंद्र सरकार ने जीएसटी में रिटर्न के लिए 20 तारीख तय कर रखी है।

इसके चलते ही राज्यों को केंद्रीय करों में मिलने वाले पैसे में देरी हो रही है। वित्त विभाग का कहना है कि हाल में आरबीआई के साथ हुई बैठक में उन्हाेंने यह मुद्दा उठाया भी था। केंद्र से पैसा देरी से मिलने के चलते प्रदेश की खर्च पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है।

वित्त विभाग का कहना है कि केंद्र से पैसा देरी से मिलने की वजह से राज्य सरकार की ओर से दी जा रही सभी तरह की ग्रांट्स और सहायता में भी उतनी ही देरी हो रही है।  जीएसटी लागू होने से पहले राज्य सरकार को वैट से हर सप्ताह राजस्व मिल रहा था।

राज्य सरकार को अगस्त में कुल 2364 करोड़ रुपए का टैक्स मिला है। इसमें एसजीएसटी से 803 करोड़, अाईजीएसटी से 404 करोड़ और वैट से 1157 करोड़ रुपए मिले हैं। जीएसटी लागू होने से पहले अप्रेल में राज्य सरकार को लगभग 2460 करोड़ रुपए टैक्स मिला था।

इस लिहाज से जीएसटी से सरकार का टैक्स करीब 100 करोड़ रुपए कम रहा है। जीएसटी से अगस्त और सितंबर में मिलाकर राज्य सरकार को 3716 करोड़ रुपए का टैक्स मिला तय हुआ है। इस लिहाज से हर माह का लक्ष्य करीब 1800 करोड़ रुपए हैं।

लेकिन लक्ष्य के अनुरूप टैक्स नहीं आने से कम टैक्स रहने पर बची हुई रकम केंद्र सरकार मुआवजे के रूप में राज्य सरकार को देगी। इसके लिए 4 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल की बैठक होने जा रही है। अनुमान के मुताबिक राज्य सरकार को जीएसटी के पेटे करीब 1100 करोड़ रुपए का मुआवजा मिल सकता है। 

त्योहार पर जयपुर से उड़ान भरेंगी कई शहरों के लिए ‘स्पेशल फ्लाइट्स’

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  • दीवाली के लिए 2 एयरलाइंस कंपनियों ने ही फ्लाइट्स शुरू करने की घोषणा की है।

  • जयपुर एयरपोर्ट से एक एयरलाइन कंपनी जम्मू के लिए जाने और आने की सीधी फ्लाइट शुरू करने जा रही है।

जयपुर । एक तरफ यह आमजन के लिए सुविधा है। तो वहीं एयरलाइंस कंपनियों के लिए मौका भुनाने की पॉलिसी भी है। हालांकि इन सभी के बीच अच्छी बात यह है कि अब लोगों को त्यौहारी सीजन में सफर करने के लिए एक्स्ट्रा फ्लाइट्स मिल सकेंगी। त्यौहारी सीजन में एयरलाइंस कंपनियां कई शहरों के लिए स्पेशल फ्लाइट्स शुरू कर रही हैं।

यह फ्लाइट्स दीपावली के भी एक सप्ताह बाद तक संचालित की जाएंगी। हालांकि इसमें भी अच्छी बात यह है कि कंपनियां उन्हीं रूट्स पर फ्लाइट शुरू कर रही हैं, जहां पर पहले से या तो फ्लाइट्स नहीं हैं, या हैं तो उनकी संख्या कम हैं। जयपुर से रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु वैष्णो देवी के लिए यात्रा करते हैं।

अभी जयपुर से जम्मू जाने और वापिस जम्मू से जयपुर आने के लिए कोई सीधी फ्लाइट नहीं है। लेकिन अगर आप दिवाली से पहले मां वैष्णों देवी के दर्शनों के लिए जाना चाहते हैं। तो अब आप जा सकते हैं। क्योंकि जयपुर एयरपोर्ट से एक एयरलाइन कंपनी जम्मू के लिए जाने और आने की सीधी फ्लाइट शुरू करने जा रही है।

इससे केवल श्रद्धालुओं के लिए सफर में सुविधा होगी। बल्कि ट्रेनों में चल रही भीड़ भी कम हो सकेगी। अभी दीवाली पर जम्मूतवी पूजा एक्सप्रेस में 100 से ज्यादा वेटिंग चल रही है।  यात्रियों के लिए सीट मिल पाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में जो यात्री हवाई किराए को अफोर्ड कर सकते हैं। वे अब फ्लाइट से भी यात्रा कर सकेंगे।

सिर्फ जम्मू ही नहीं, बल्कि देश के कई शहरों के लिए एयरलाइंस नवरात्रि से दीवाली के बीच में अतिरिक्त फ्लाइट शुरू करने जा रही हैं। इंडिगो एयरलाइन इस अवधि में 2 नई फ्लाइट शुरू कर रही है।

दीवाली के लिए 2 एयरलाइंस कंपनियों ने ही फ्लाइट्स शुरू करने की घोषणा की है। एक-दो एयरलाइंस कंपनियां भी जल्दी ही फ्लाइट्स शुरू कर सकती हैं। गो एयर प्रबंधन से जुड़े सूत्रों के अनुसार एयरलाइन दीवाली पर 1 सप्ताह के लिए मुम्बई-जयपुर-मुम्बई की फ्लाइट शुरू कर सकती है।

यह फ्लाइट मध्यरात्रि में जयपुर आकर रात में ही मुम्बई लौट जाएगी। गो एयर दिल्ली-जयपुर के बीच भी फ्लाइट संचालित कर सकती है। एयर एशिया के भी फ्लाइट शुरू करने की संभावना है।

ये हैं फेस्टिव स्पेशल फ्लाइट
चेन्नई, उदयपुर, दिल्ली शहरों के लिए भी फ्लाइट्स{ बढ़ते हुए यात्रीभार को भुनाने के लिए कवायद शुरु, वैष्णोदेवी के श्रद्धालुओं को मिलेगी सुविधा

  • जयपुर-उदयपुर-जयपुर
    13 से 28 अक्टूबर तक चलेगी फ्लाइट
    फ्लाइट SG-2791 जयपुर से शाम 6:35 बजे उदयपुर जाएगी
    फ्लाइट SG-2972 उदयपुर से शाम 8:05 बजे चलेगी, 8:55 आएगी जयपुर
  • जयपुर-चेन्नई-जयपुर
    20 सितंबर से 28 अक्टूबर तक चलेगी फ्लाइट। फ्लाइट 6E-736 जयपुर से रात 10:30 बजे चेन्नई जाएगी
    फ्लाइट 6E-526 चेन्नई से रात 11:45 बजे चलेगी, रात 2:15 बजे आएगी जयपुर
  • जयपुर-जम्मू-जयपुर {3 से 28 अक्टूबर तक संचालित होगी फ्लाइट
    फ्लाइट SG-2941 जयपुर से हर रविवार सुबह 8:05 बजे जम्मू जाएगी
    फ्लाइट SG-2942 जम्मू से रोज शाम 4:25 बजे चलेगी, 6:05 बजे आएगी जयपुर
  • जयपुर-दिल्ली-जयपुर {1 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक चलेगी फ्लाइट
    फ्लाइट 6E-203 जयपुर से सुबह 11:20 बजे जाएगी दिल्ली
    फ्लाइट 6E-962 दिल्ली से सुबह 9:35 बजे चलेगी, 10:45 बजे आएगी जयपुर

दशहरा मेले के दुकानदारों पर जीएसटी की मार

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  • दुकानों के किराए पर लग रहा 300 से 25 हजार रुपए तक अतिरिक्त चार्ज

  • 224 बीघा में फैला है दशहरा मैदान, 300 से ज्यादा छोटी दुकानें 235 कच्ची दुकानें होंगी

  • 750 बड़ीदुकानें लग रही हैं मेले में

कोटा।  इस बार जीएसटी का असर दशहरे मेले में भी देखने को मिल रहा है। सरकार द्वारा मनोरंजन मेलों पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाई है। इसी आधार पर नगर निगम ने दशहरे मेले को भी इसी श्रेणी में मानते हुए मेले में आने वाली दुकानों से जीएसटी ली जा रही है।

बड़ी पक्की दुकानों पर तो जीएसटी ली ही जा रही है साथ ही निगम ने उन कच्ची दुकानों पर भी जीएसटी लगा दी जो जमीन पर बैठकर खिलौने अन्य छोटा-मोटा सामान बेचते हैं। इनसे भी जीएसटी के तौर पर 396 रुपए प्रति दुकानदार ली जा रही है।

मेले में पिछले साल जमीन पर 10 गुणा 10 वर्गफीट की जगह पर कपड़ा बिछाकर छोटी-मोटी दुकानदारी करने वालों को इस बार 2596 रुपए में जगह दी गई। पिछले साल ये जगह 2200 रुपए में दी गई थी। इसी प्रकार फूड कोर्ट में दुकान लगाने वाले दुकानदारों पर 1000 रुपए से लेकर 25 हजार रुपए तक अतिरिक्त शुल्क देना पड़ रहा है।

झूला मार्केट में भी 500 रुपए से लेकर 10 हजार रुपए तक जीएसटी लग रही है। दुकानदारों में इस बात को लेकर काफी रोष भी है, लेकिन मेले में दुकान लगाना है, इसलिए विरोध भी नहीं कर पा रहे हैं।

दुकानदारों का कहना है कि रोज कमाने-खाने वाले छोटे दुकानदारों को इससे छूट देनी चाहिए। पहले तो मेले में दुकान लेने के लिए भटक रहे हैं और ऊपर से महंगी दुकानें मिल रही है।

मनोरंजन पर 18 प्रतिशत जीएसटी
मनोरंजन पर 18 प्रतिशत जीएसटी लग चुकी है, इसलिए हम भी जीएसटी जोड़कर कर रही रसीद बना रहे हैं। इसमें छोटे दुकानदारों के लिए अभी तक कोई रियायत नहीं आई है, इसलिए उन पर भी लगा रहे हैं।
-रिंकल गुप्ता, राजस्व अधिकारी