चीन में नए जीरे की आवक शुरू, भाव तेज रहने की संभावना कम

0
5

नई दिल्ली। वर्तमान में जीरे के भाव न्यूनतम स्तर पर चल रहे हैं। इन भावों पर हाल फिलहाल अधिक मंदे की संभावना नहीं है। आगामी दिनों में बाजार 3 से 5 रुपए मंदा-तेजी के बीच बने रहेंगे।

हालांकि उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर जीरे की आवक सीमित रह गई है। मगर लोकल एवं निर्यात व्यापार कम होने के कारण भाव दबे हुए हैं। क्योंकि अभी हाल-फिलहाल निर्यात मांग बढ़ने की कोई संभावना भी नहीं है।

क्योंकि चीन में नए जीरे की आवक शुरू हो गई है और इस वर्ष चीन में जीरा उत्पादन गत वर्ष की तुलना में 5 से 10 प्रतिशत अधिक होने के समाचार मिल रहे हैं। जबकि चालू माह में टर्की एवं सीरिया में नए जीरे की आवक शुरू हो जाएगी। जिस कारण से भारतीय जीरे का निर्यात कम ही रहेगा।

चालू सीजन के दौरान देश में जीरे का उत्पादन गत वर्ष की तुलना में कम रहा। हालांकि राजस्थान में उत्पादन गत वर्ष की तुलना में अधिक रहा लेकिन गुजरात में जीरा उत्पादन गत वर्ष की तुलना में कम होने के समाचार मिल रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार गत वर्ष गुजरात में जीरे का उत्पादन 44 से 45 लाख बोरी का रहा था जोकि इस वर्ष घटकर 32 से 37 लाख बोरी का रह गया। जबकि राजस्थान में इस वर्ष उत्पादन 57 से 58 लाख बोरी होने के व्यापरिक अनुमान लगाए गए हैं गत वर्ष राजस्थान में उत्पादन 51 से 52 लाख बोरी का माना गया था।

वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर जीरे की आवक सामान्य स्तर पर आ गई है। गुजरात के प्रमुख मंडी ऊंझा में आवक 10/11 हजार बोरी की हो रही है जबकि राजकोट एवं गोंडल में आवक 800 से 1000 बोरी की चल रही है। राजस्थान की मेडता मंडी में आवक 2500 से 3000 बोरी एवं नागौर में 1500/2000 बोरी की चल रही है। जोधपुर में आवक 1200 से 1500 बोरी की रह गई है।

सूत्रों का कहना है कि गुजरात की मंडियों में कुल उत्पादन का लगभग 80 से 85 प्रतिशत माल मंडियों में आ चुका है जबकि राजस्थान में 50 से 60 प्रतिशत माल मंडियों में आने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि गुजरात की मंडियों में अभी तक लगभग 30/32 लाख बोरी जीरे की आवक हो चुकी है। जबकि राजस्थान की मंडियों में 25 से 26 लाख बोरी जीरे आने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।

जानकार सूत्रों का कहना है कि जीरे की वर्तमान कीमतों में मंदे की संभावना नहीं है। क्योंकि एक ओर जहां मंडियों में आवक घट गई है वहीं दूसरी तरफ आगामी दिनों में लोकल मांग में सुधार होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।

छिटपुट मात्रा में निर्यात भी जारी रहेगा। वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर जीरे के भाव 185 से 210 रुपए प्रति किलो चल रहे हैं। इन भावों में अभी 3 से 5 रुपए प्रति किलो का मंदा-तेजी चलता रहेगा। लेकिन अगस्त-सितम्बर माह में भाव बढ़ने की संभावना है।

जानकार व्यापारियों का कहना है कि उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य न मिलने के कारण आगामी सीजन के लिए जीरे की बिजाई प्रभावित हो सकती है। क्योंकि उत्पादकों को धनिया, सोयाबीन आदि के भाव अधिक मिल रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि चालू सीजन के लिए उत्पादक केन्द्रों पर जीरे की कुल बिजाई 11.18 लाख हेक्टेयर पर की गई थी। राजस्थान में बिजाई का क्षेत्रफल 7.44 लाख हेक्टेयर एवं गुजरात 3.74 लाख हेक्टेयर का रहा था।

वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के दौरान एक ओर जहां मात्रात्मक रूप में जीरे का निर्यात 14 प्रतिशत घटा है वहीं निर्यात भाव कम मिलने के कारण निर्यात से प्राप्त आय में 25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 के दौरान जीरे का निर्यात 196800 टन का रहा और निर्यात से प्राप्त आय 4611.15 करोड़ की रही। जबकि वर्ष 2024-25 के दौरान जीरा का निर्यात 229881 टन का रहा था और निर्यात से प्राप्त आय 6178.86 करोड़ की रही थी।