सोशल मीडिया और एआई के जरिए किसानों तक पहुँचेगी जानकारी: कृषि आयुक्त
कोटा। राजस्थान के कृषि आयुक्त (एग्रीकल्चर कमिश्नर) नरेश गोयल ने मीडिया से बात करते हुए कृषि विभाग की नई प्राथमिकताओं और फसल बीमा नीतियों में किए गए क्रांतिकारी बदलावों की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार राजस्थान को जैविक कृषि का मॉडल राज्य बनाने और किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अब कृषि विभाग सूचनाओं के त्वरित प्रसार के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेगा।
कृषि आयुक्त ने बताया कि विभाग ने हर जिले के कृषि अधिकारी को अपना आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि कृषि से जुड़ी योजनाएं और जानकारियां किसानों तक तेजी से पहुँच सकें।
इसके साथ ही, प्रचार-प्रसार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करने को कहा गया है। किसानों को जैविक उत्पादों की प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और सर्टिफिकेशन की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। गोयल ने कहा कि जब किसानों को जैविक सर्टिफिकेट घर बैठे मिलने लगेगा, तब इस क्षेत्र में बहुत बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आएगा। इसके अलावा, ऑर्गेनिक उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए किसानों को उचित स्थान भी उपलब्ध कराया जाएगा।
बीमा कंपनियों को सख्त चेतावनी
फसल बीमा नीति में किए गए बड़े बदलावों को साझा करते हुए कृषि आयुक्त ने कहा कि नई नीति में प्रीमियम राशि में भारी कटौती की गई है। उन्होंने बीमा कंपनियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि साल 2018 से बकाया फसल बीमा की राशि किसानों को ब्याज सहित दिलाई जाएगी। नई बीमा पॉलिसी के तहत यदि कंपनियां समय पर सर्वे नहीं करती हैं, तो उन पर भारी पेनल्टी लगाई जाएगी। कई डिफॉल्टर कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई चल रही है। जो कंपनियां पुराने पेमेंट जमा नहीं कराएंगी, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई होगी। अब हर जिले में बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों का बैठना अनिवार्य कर दिया गया है।
रासायनिक खाद पर नियंत्रण और ‘खेत बचाओ अभियान’
नरेश गोयल ने कहा कि रासायनिक खादों को नियंत्रित करना अब बेहद जरूरी हो गया है। सरकारी अभियानों और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से प्राकृतिक खेती के चिंतन का बीज बोया जा चुका है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जैविक पर हो रहे कृषि रिसर्च को क्यूवैज्ञानिक तथ्यों के साथ सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाएँ। अंत में, उन्होंने ‘खेत बचाओ अभियान’ की समीक्षा करते हुए सभी उपस्थित अधिकारियों और किसानों को जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने का संकल्प दिलाया।

