Wednesday, July 8, 2026
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31 दिसंबर तक मान्य रहेंगे SBI सहयोगी बैंकों के चेक

नई दिल्ली । सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अपने ग्राहकों को बड़ी राहत दी है। बैंक ने पांच पूर्व सहयोगी बैंक और भारतीय महिला बैंक की चेकबुक को अब 31 दिसंबर तक के लिए मान्य कर दिया है।

मसलन, जो चेकबुक एक अक्टूबर से अमान्य होने जा रही थीं, वे अब 31 दिसंबर, 2017 के बाद अमान्य कर दी जाएंगी। यह जानकारी भारतीय स्टेट बैंक ने अपने आधिकारिक ट्विटर एकाउंट के माध्यम से दी है। अब ग्राहक नई चेक बुक के लिए आवेदन 31 दिसंबर तक कर सकते हैं।

इस अवधि के बाद पुराने बैंक के चेक और IFS कोड वैध नहीं होंगे। एसबीआई ने ग्राहकों से कहा है कि नई चेक बुक के लिए इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, एटीएम या फिर शाखा में जाकर तुरंत आवेदन कर लें।

अनुपम खेर होंगे एफटीआईआई के नए चेयरमैन

नई दिल्ली। फिल्म एंड टीवी इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के नए चेयरमैन बॉलीवुड के जाने माने अभिनेता अनुपम खेर होंगे। बुधवार को अनुपम खेर की नियुक्ति की घोषणा की गई। ज्ञातव्य है कि अनुपम खेर एफटीआईआई में गजेन्द्र चौहान की जगह लेंगे।

 गजेन्द्र चौहान को एनडीए सरकार ने 9 जून 2015 को एफटीआईआई का चेयरमैन बनाया था। उस समय गजेन्द्र चौहान की नियुक्ति का छात्रों ने काफी विरोध किया था। छात्रों ने करीब 139 दिनों तक प्रदर्शन किया था।

अब गजेन्द्र चौहान की जगह अनुपम खेर एफटीआईआई के चेयरमैन होंगे। अनुपम खेर को पिछले वर्ष 2016 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। इससे पहले उन्हें 2004 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

खत्म हो चुका है गजेंद्र का कार्यकाल :
ज्ञातव्य है कि गजेन्द्र चौहान का कार्यकाल इस साल मार्च महीने में खत्म होना था। इसी कारण एफटीआईआई के लिए नए चेयरमैन की तलाश हो रही थी। गजेन्द्र के कार्यकाल के दौरान कई बडे बदलाव किए गए जो कि विवाद का कारण भी बने।

सोने में तेजी थमी, 15 रुपये गिरा, चांदी 41,000 पार

नयी दिल्ली/कोटा । कमजोर वैश्विक रुख के साथ मौजूदा स्तर पर कारोबारियों की सुस्त मांग से स्थानीय सर्राफा बाजार में आज सोने में चार सत्रों से जारी तेजी थम गई और इसकी कीमत 15 रुपये घटकर 30,750 रुपये प्रति दस ग्राम रह गयी।

हालांकि, औद्योगिक इकाइयों और सिक्का निर्माताओं के उठान बढ़ने से चांदी में तेजी जारी रही और यह 75 रुपये बढ़कर 41,000 रुपये के स्तर से पर निकलकर 41,065 रुपये प्रति किलोग्राम हो गयी।

सर्राफा कारोबारियों ने कहा कि मौजूदा उच्च स्तर पर घरेलू हाजिर बाजार में आभूषण और फुटकर विक्रेताओं की मांग में गिरावट और विदेशों में कमजोरी के रुख से सोने की कीमतों में गिरावट आई है।

वैश्विक स्तर पर सिंगापुर में, सोना 0.02 प्रतिशत घटकर 1,287.10 डॉलर प्रति औंस रह गया। इसके अलावा निवेशकों को ब्याज दर में वृद्धि के संकेत को लेकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सितंबर की बैठक के ब्यौरे का इंतजार दिखा।

इससे विदेशी बाजारों में कमजोरी का रुख दिखाई दिया जिससे यहां सोने की कीमतों में गिरावट आई। राष्ट्रीय राजधानी में 99.9 और 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव 15 .. 15 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 30,750 रुपये और 30,600 रुपये प्रति दस ग्राम रह गया।

विगत चार दिनों में इस कीमती धातु की कीमत में 390 रुपये की तेजी देखने को मिली। दूसरी ओर चांदी तैयार 75 रुपये मजबूत होकर 41,065 रुपये प्रति किलोग्राम और साप्ताहिक डिलीवरी भी इतनी ही तेजी के साथ 40,265 रुपये प्रति किलोग्राम हो गयी।

कोटा सर्राफा
चांदी टंच 40400 रुपये प्रति किलोग्राम
सोना केटबरी 30600 रुपये प्रति दस, ग्राम 35700 रुपये प्रति तोला।
सोना शुद्ध 30750 रुपये प्रति दस ग्राम, 35870 रुपये प्रति तोला।

मुनाफा वसूली से गिरकर बंद हुआ बाजार, निफ्टी 10,000 से नीचे

मुंबई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नैशनल स्टॉक एक्सचेंज के संवेदी सूचकांक बुधवार को उछाल के साथ खुले लेकिन बाजार इस उछाल को बरकरार नहीं रख पाए। सेसेंक्स 90.42 की गिरावट के साथ 31,833.99 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 32.15 अंकों की गिरावट के साथ 10,000 के स्तर से नीचे चला गया।

निफ्टी 9,984.80 पर बंद हुआ। सेंसेक्स जहां 0.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ वहीं निफ्टी 0.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। अर्निंग सीजन से पहले निवेशकों के प्रॉफिट चुनने से यह गिरावट दर्ज की गई।

सुबह बाजार बढ़त के साथ खुले। घरेलू निवेशकों द्वारा खरीदारी पर जोर देने से एक समय सेंसेक्स 32,000 के स्तर को पार कर गया, लेकिन आखिर में गिरावट के साथ बंद हुआ। दिन भर के कारोबार में निफ्टी 10,067.25 से लेकर 9,955.80 के बीच झूलता रहा।

बीएसई में रिएलिटी के शेयरों में जहां 1.99 प्रतिशत की कमी आई वहीं मेटल के शेयरों में भी 1.49 प्रतिशत की कमी रिकॉर्ड की गई। इंडस्ट्रियल और बैंक इंडेक्स में भी गिरावट दर्ज की गई। बैंकों के ओवरऑल शेयरों में 0.95 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

आईएमएफ ने मंगलवार को 2017 के लिए भारत के विकास दर के अनुमान को घटाकर 6.7 कर दिया था। लेकिन ट्रेडर्स के मुताबिक निवेशक इससे बेअसर हैं।

कालेधन पर गठित विशेष जांच दल आरटीआई कानून के दायरे में : सीआईसी

नई दिल्‍ली। उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद कालेधन पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई कानून) के तहत जवाबदेह है। केंद्रीय सूचना आयोग ने यह व्यवस्था दी है।

सूचना आयुक्त बिमल जुल्का ने एसआईटी को आरटीआई कानून के दायरे में लाते हुए कहा कि सरकार का हर कदम जनता की बेहतरी और लोकहित में होना चाहिए। उच्चतम न्यायालय के आदेश पर एक सरकारी अधिसूचना के जरिये 2014 में कालेधन पर एसआईटी का गठन किया गया।

इसका मकसद अर्थव्यवस्था में कालेधन का आकलन करना और उसके सृजन पर अंकुश के लिए उपाय सुझाने के लिए किया गया। उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एमबी शाह की अध्यक्षता में कालेधन पर एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी विदेशों में रखे गए कालेधन के मामलों की जांच कर रही है।

इस मामले में वह भारतीय रिजर्व बैंक, खुफिया ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो तथा वित्तीय आसूचना इकाई और शोध एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ के अलावा डीआरआई जैसी विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय बिठाते हुए काम रही है।

एसआईटी के आरटीआई कानून में दायरे में आने के संबंध में आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक ने वित्त मंत्रालय से जानकारी मांगी थी। इसमें उन्होंने सात बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी जिसमें एचएसबीसी बैंक की जिनेवा शाखा के पूर्व कर्मचारी हर्वे फाल्सिनी द्वारा एसआईटी चेयरमैन को भेजे गए पत्र और उसकी प्रतिलिपी मांगी थी।

वित्त मंत्रालय और आयकर विभाग ने आरटीआई के तहत मांगी गई कुछ जानकारी देने से यह कहते हुए इनकार किया कि यह किसी के विश्वास का मामला है और इसमें जांच चल रही है। यह भी कहा गया कि इसमें कुछ जानकारी एसआईटी के सदस्य सचिव के पास उपलब्ध होगी। इसके बाद नायक ने सूचना आयोग का रुख किया और आयोग से इस संबंध में एसआईटी को उपयुक्त आदेश देने का आग्रह किया।

हड़ताल की तो होगी कार्रवाई, पंप मालिकों को चेतावनी

नई दिल्ली । यदि पेट्रोलियम डीलर 13 अक्टूबर को घोषित राष्ट्रव्यापी हड़ताल से पीछे नहीं हटे तो पेट्रोलियम कंपनियां उन पर सख्त कार्रवाई करेगी। यह बात मंगलवार को पेट्रोलियम कंपनियों अधिकारियों ने एक संवाददाता सम्मेलन में कही।

मुंबई में बुलाए गए संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम एवं इंडियन ऑयल के विपणन निदेशकों ने कहा कि कुछ माह पहले ही डीलरों की कई समस्याएं सुलझाई जा चुकी हैं।

इसके बावजूद फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया पेट्रोलियम ट्रेडर्स, द ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन एवं कंसोर्टियम ऑफ इंडियन पेट्रोलियम डीलर्स ने 13 अक्टूबर को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल एवं इसके बाद 27 अक्टूबर से अनिश्चित कालीन हड़ताल का आह्वान किया है।

हालांकि कई डीलर्स ने पेट्रोलियम कंपनियों से संपर्क कर कहा है कि वे हड़ताल में शामिल नहीं होंगे। इन्होंने हड़ताल की योजना इसलिए बनाई है ताकि व्यापार विसंगतियों में सुधार समेत अपनी अन्य मांगों को मनवाने के लिए सरकार पर दबाव बनाया जा सके।

पेट्रोलियम डीलर्स का कहना है कि विपणन अनुशासन दिशानिर्देश (एमडीजी) में हालिया संशोधन 2 लाख तक के डीलरों को दंडित करने के लिए मनमाना और अनुचित है।

ट्रकों की हड़ताल समाप्त
ट्रक मालिकों की दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल मंगलवार को समाप्त हो गई। हड़ताल का नेतृत्व करने वाले संगठन एआइएमटीसी ने कहा है कि सरकार ने अगर मांगें नहीं मानी तो दिवाली के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।

GST रिटर्न न भरने वालों के खिलाफ होगी कानूनी कार्रवाई

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सरकार जीएसटी रिटर्न दाखिल न करने वाले कई लाख व्यापारियों की राज्यवार सूची तैयार कर रही है, इसके बाद केंद्र और राज्यों के अधिकारी उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे

नई दिल्ली । जानबूझकर जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं करने वाले कारोबारियों को अब टैक्स अधिकारियों के सवालों का सामना करना पड़ेगा। सरकार जीएसटी रिटर्न दाखिल न करने वाले कई लाख व्यापारियों की राज्यवार सूची तैयार कर रही है। नॉन फाइलर्स व्यापारियों की सूची सभी राज्यों को भेजी जाएगी। इसके बाद केंद्र और राज्यों के अधिकारी उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।

सरकार यह कदम ऐसे समय उठा रही है जब बार-बार रिटर्न दाखिल करने की सीमा बढ़ाए जाने के बावजूद छह लाख से अधिक व्यापारियों ने जुलाई के लिए जीएसटीआर-3बी जमा नहीं किया है जबकि जीएसटीआर-1 रिटर्न दाखिल न करने वालों की संख्या इससे भी अधिक है।

यही वजह है कि अपेक्षानुरूप रिटर्न दाखिल न होने के कारण केंद्र और राज्य दोनों चिंतित हैं। बिहार के उपमुख्यमंत्री और जीएसटी नेटवर्क पर बने मंत्रिसमूह के प्रमुख सुशील कुमार मोदी ने ‘दैनिक जागरण’ को बताया कि जिन व्यापारियों ने जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं किया है ऐसे ‘नॉन फाइलर्स’ की राज्यवार सूची तैयार की जा रही है।

आखिर कौन से ऐसे कारोबारी हैं जो रिटर्न फाइल नहीं कर रहे हैं, इसका ब्यौरा तैयार किया जाएगा। ऐसे कारोबारियों से रिटर्न फाइल न करने की वजह पूछी जाएगी। मोदी ने कहा कि शुरू में जीएसटी आइटी सिस्टम की व्यस्तता के चलते कारोबारी रिटर्न फाइल नहीं कर पा रहे थे लेकिन अब सिस्टम बेहतर ढंग से काम कर रहा है।

हर घंटे एक लाख रिटर्न फाइल किए जा सकते हैं। अगर जीएसटी नेटवर्क में कोई तकनीकी दिक्कत होती तो 53 लाख कारोबारी जीएसटीआर-3बी रिटर्न दाखिल नहीं कर पाते। उल्लेखनीय है कि जुलाई का जीएसटी रिटर्न (जीएसटीआर-1) फाइल करने की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर थी और सरकार ने कारोबारियों से रिटर्न जमा करने का आग्रह किया। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि अब रिटर्न भरने की अंतिम तिथि को नहीं बढ़ाई जाएगी।

जुलाई के लिए 59.57 लाख कारोबारियों को रिटर्न दाखिल करना है जिसमें से 10 अक्टूबर शाम छह बजे तक करीब 44 लाख कारोबारियों ने ही जीएसटीआर-1 फाइल किया। ऐसे में माना जा रहा है कि जितने लोगों ने जुलाई में जीएसटीआर-3बी दाखिल किया था उसके मुकाबले करीब आठ लाख कारोबारी ऐसे होंगे जो अपना जीएसटीआर-1 निर्धारित समयावधि में दाखिल नहीं कर पाए हैं।

खास बात यह है कि जुलाई में छह लाख से अधिक व्यापारियों ने जीएसटीआर-3बी दाखिल नहीं किया था। रिटर्न फाइल कम रहने पर जीएसटी काउंसिल की छह अक्टूबर को हुई 22वीं बैठक में भी चर्चा हुई थी। इसके अलावा राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने भी अधिकारियों को रिटर्न दाखिल न करने वाले 200-200 व्यापारियों की पहचान कर उनसे यह सवाल करने को कहा है कि आखिर उन्होंने जीएसटी रिटर्न क्यों नहीं दाखिल किया।

मोदी सरकार का 44 इकनॉमिक कॉरिडोर बनाने का प्लान

कॉरिडोर में हैदराबाद-पणजी, संबलपुर-रांची, मुंबई-कोच्चि-कन्याकुमारी और बेंगुलुरु-मेंगलुरु शामिल हैं

नई दिल्ली। सड़क परिवहन मंत्रालय ने 5 लाख करोड़ के खर्च से 44 इकनॉमिक कॉरिडोर बनाने का प्लान तैयार किया है।

इसे जल्द कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है। इसके तहत 24,000 किलोमीटर हाइवे बनाने की बात है। इसमें सड़कों के साथ फीडर रूट भी बनाए जाएंगे।

इसका मकसद माल ढुलाई की रफ्तार को तेज करना है। अहम कमर्शल सेंटरों के आसपास मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब और पार्क भी बनाए जाएंगे। सड़क परिवहन मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने बताया, ‘हमने प्रस्ताव को कैबिनेट के पास मंजूरी के लिए भेजा है।’

उनके मुताबिक 80 फीसदी काम सरकारी फंडिंग वाले इंजिनियरिंग प्रोक्योरमेंट ऐंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) प्रॉजेक्ट्स होंगे। बाकी हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल के तहत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत किए जाएंगे।

सरकार अगले 5 साल में प्रॉजेक्ट पर खुद 4 लाख करोड़ से ज्यादा खर्च करेगी। एक इंटरव्यू में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि उनका मंत्रालय बजट आवंजन से अलग फंड जुटाने पर भी काम कर सकता है।

मसलन- लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन, प्रविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन और बाकी इंस्टिट्यूशनल इनवेस्टर्स से फंड जुटाकर बड़े हाइवे प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा सकता है। एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी की अगुवाई वाले पब्लिक इनवेस्टमेंट बोर्ड ने इकनॉमिक कॉरिडोर प्रॉजेक्ट को हाल में हरी झंडी दी थी।

इसके बाद ड्राफ्ट कैबिनेट नोट पेश किया गया था। अधिकारी ने बताया, ‘प्रॉजेक्ट के पहले चरण की शुरुआत अगले साल की शुरुआत में होगी। हमारा इरादा पहले इन प्रॉजेक्ट्स पर काम करना है, ताकि दो साल में इसे पूरा किया जा सके।’

ग्लोबल कंसल्टेंसी फर्म एटी कियर्नी इकनॉमिक कॉरिडोर के लिए प्रॉजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर रही है। कॉरिडोर में हैदराबाद-पणजी, संबलपुर-रांची, मुंबई-कोच्चि-कन्याकुमारी और बेंगुलुरु-मेंगलुरु शामिल हैं। सड़क परिवहन मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, ‘हमने जिन रूट्स की पहचान की है, वे फिलहाल नेशनल हाइवे नहीं हैं।

ये वैसे रूट्स हैं, जहां 2,00,000 से ज्यादा गाड़ियों का ट्रैफिक होता है और वे टू लेन हाइवे हुआ करते थे। इन रूट्स को अब 200 से ज्यादा बड़े शहरों की जरूरतें पूरी करने के लिए डिवेलप किया जाएगा।’

मुद्रा कोष के विकास दर अनुमान घटाने का शेयर बाजार पर असर नहीं

मुंबई। भले ही आईएमएफ ने भारत की इकॉनमिक ग्रोथ के अनुमान में 0.5 पर्सेंट की कमी कर दी है, लेकिन शेयर बाजार पर इसका कोई असर नहीं दिखा है।

बुधवार को सेंसेक्स 100 अंकों की उछाल के साथ 32,021 के स्तर पर खुला, वहीं निफ्टी भी 10,050 के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब पहुंच गया। हालांकि रुपये में डॉलर के मुकाबले 10 पैसे की गिरावट दिखी है और फिलहाल यह 65.26 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

आईएमएफ के अनुमानों के बाद भी बाजार में यह तेजी उत्साहजनक संकेत कही जा सकती है। हालांकि यह फेस्टिव सीजन के चलते भी हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार का अनुमान वित्त वर्ष 2018 में 6.7 प्रतिशत रखा है, यह पहले 7.2 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2019 में भी भारत की जीडीपी का अनुमान 7.7 प्रतिशत से घटाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया है।

एमसीएक्स का सोने में ऑप्शन धनतेरस तक

एनसीडीईएक्स को सेबी से ग्वार में ऑप्शन कारोबार शुरू करने की मंजूरी

मुंबई। जिंसों में ऑप्शन कारोबार संभवतया अगले सप्ताह धनतेरस तक हकीकत बन सकता है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने में ऑप्शन कारोबार शुरू होने के आसार हैं। एमसीएक्स जिंसों में ऑप्शन शुरू करने वाला देश का पहला एक्सचेंज है। इसे सोना (1 किलोग्राम) वायदा पर आधारित गोल्ड ऑप्शन सौदे शुरू करने के लिए सेबी की मंजूरी मिल गई है। 
 
सरकार ने सबसे पहले फरवरी 2015 में जिंसों में ऑप्शन को मंजूरी दी थी। दो साल पहले जिंस नियामक के सेबी में विलय से ऑप्शन कारोबार को अमलीजामा पहचाने का रास्ता साफ हो गया था। जिंसों में ऑप्शन को मंजूरी मिले करीब दो साल हो गए हैं और अब जल्द ही यह हकीकत बनने जा रहा है।

एक अन्य एक्सचेंज एनसीडीईएक्स को सेबी से ग्वार में ऑप्शन कारोबार शुरू करने की मंजूरी मिली है। ग्वार एनसीडीईएक्स पर सबसे ज्यादा कारोबार वाली जिंसों में से एक है। सूत्रों के मुताबिक एनसीडीईएक्स जोखिम प्रबंधन प्रणाली और अन्य मसलों का परीक्षण कर रहा है। 
 
एमसीएक्स ने एक परिपत्र में कहा कि तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी, लेकिन कारोबारियों का अनुमान है कि एक्सचेंज दीवाली से पहले कारोबार शुरू कर देगा। एमसीएक्स 1 किलोग्राम सोना वायदा पर आधारित ऑप्शन को मंजूरी दे रहा है। इसका मतलब है कि गोल्ड मिनी जैसे अन्य वैरिएंट में ऑप्शन कारोबार की मंजूरी नहीं होगी।

दो प्रकार यानी कॉल एवं पुट ऑप्शन उपलब्ध होंगे। कॉल ऑप्शन को खरीदने का मतलब है कि खरीदार को कीमतों में बढ़ोतरी के आसार नजर आ रहे हैं और पुट ऑप्शन खरीदने का मतलब है कि खरीदार को कीमतों में गिरावट के आसार दिखाई दे रहे हैं। दोनों ही मामलों में कीमत हलचल के अनुमान सही साबित होते हैं तो ऑप्शन का प्रीमियम और खरीदार का लाभ बढ़ेगा। 
 
सेलिंग ऑप्शन में इसके ठीक विपरीत होता है। भारत में बाजार नियामक सेबी ने यूरोपीय शैली के ऑप्शन को मंजूरी दी है, जिसका मतलब है कि परिपक्वता की एक निश्चित अवधि होगी और जिंसों में ऑप्शन उन वायदा अनुबंधों में शुरू किए जाएंगे, जो कारोबार के लिए शुरू किए गए हैं।

हालांकि ऑप्शन के निपटान का तीरका इक्विटी से अलग होगा। इक्विटी में ऑप्शन का निपटान नकद में होता है, लेकिन जिंसों में भौतिक डिलिवरी में भी निपटान की मंजूरी होने के कारण ऑप्शन में यह विकल्प भी होगा। इसलिए अगर निश्चित समयावधि में स्कवेयर ऑफ न करने पर सभी ऑप्शन परिवक्वता पर ïवायदा अनुबंध बन जाएंगे। 
 
इसके वायदा अनुबंध बनने के बाद इस पर वायदा के सभी नियम लागू होंगे और तब डिलिवरी भी दी जा सकेगी। एमसीएक्स के परिपत्र में विस्तार से बताया गया है कि ऑप्शन का कारोबार और निपटान कैसे होगा।

जब कोई व्यक्ति ऑप्शन खरीदता है तो वह बोला जा रहा प्रीमियम चुकाता है और अगर रुझान पलट जाता है तो उसे अधिक से अधिक चुकाए गए प्रीमियम का ही नुकसान होता है, जबकि ऑप्शन का विक्रेता बाजार आधारित प्रीमियम नुकसान का असीमित जोखिम उठाता है।

आयातक बैंक एवं एजेंसियां और कारोबारी एवं सराफ अपने कीमत जोखिमों की हेजिंग के लिए ऑप्शन खरीदते हैं। इसमें अहम यह होगा कि कौन ऑप्शन बेचता है।