Wednesday, July 8, 2026
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‘डेयरी स्टाफ पार्टी करता रहा, टैंक से बह गया दस हजार लीटर दूध’

अध्यक्ष गुंजल से कहा वह मामले की जांच करवाए और यदि एमडी वर्मा जांच कराने में असक्षम हैं, तो एमडी से 10 हजार लीटर दूध की कीमत 5 लाख रुपए डेयरी फंड में जमा कराएं

कोटा। कोटा जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के संचालक मंडल की बुधवार को वार्षिक आमसभा की बैठक हुए है। उसमें संचालक मंडल के सदस्य जयकिशन मीणा ने सरस डेयरी प्रशासन की बड़ी लापरवाही को उजागर किया है।
उनका कहना है कि 12 अगस्त की रात को डेयरी प्लांट के टैंक से 10 हजार लीटर दूध नाले में बह गया।

जिसकी कीमत 5 लाख रुपए है। जिस वक्त वॉल्व खुला रहने से टैंक से दूध डेयरी के नाले में बह रहा था। उस समय स्टाफ रात में दाल बाटी की पार्टी कर रहा था। यहां तक की चेयरमैन श्रीलाल गुंजल एमडी श्याम बाबू वर्मा तक को इस बारे में पता नहीं लगा।

वाट्स अप के जरिए मीणा को मामले का पता लगा, तो जिम्मेदारों की शिकायत की। 8 सितंबर को संचालक मंडल की मीटिंग हुई। मामले को चेयरमैन और एमडी के सामने रखा गया। अध्यक्ष ने एमडी को कमेटी गठित कर दोषियों का पता लगाने के निर्देश दिए।

कमेटी में एमडी समेत तीन अधिकारी और दो संचालक मंडल के सदस्य शामिल किए गए। मीणा भी कमेटी के सदस्य है।
कमेटी को जांच करने के साथ दोषी व्यक्ति से दूध का हर्जाना वसूल करना था। मीणा ने बताया कि एक माह और तीन दिन निकल जाने के बाद भी, एमडी मामले की जांच नहीं कर पाए।

उन्होंने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। मंच से मीणा ने अध्यक्ष गुंजल से कहा वह मामले की जांच करवाए और यदि एमडी वर्मा जांच कराने में असक्षम हैं, तो एमडी से 10 हजार लीटर दूध की कीमत 5 लाख रुपए डेयरी फंड में जमा कराएं।

एमडी ने कहा कि वह जल्द जांच कराकर दोषियों से हर्जाना वसूलेंगे। अध्यक्ष गुंजल ने भी उन्हें तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मीणा ने बताया कि सरस डेयरी प्लांट में लगे ज्यादातर कैमरे बंद पड़े है। दूध बहने की इतनी बड़ी घटना हो गई। डेयरी प्रशासन का उसका पता तक नहीं लगा। मीणा ने मांग की प्लांट में जो भी कैमरे खराब पड़े है डेयरी प्रशासन उन्हें ठीक करवाए।

60 हजार में मिलने वाला मार्का 3.50 लाख में खरीदा
रोझडी समिति के अध्यक्ष महावीर गुर्जर ने आमसभा में आईएसओ मार्का खरीदने में प्राइवेट कंपनी के साथ मिलीभगत करके डेयरी को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का मामला उठाया। महावीर ने कहा डेयरी को भारत सरकार की संस्था बीएसआई से 60 हजार रुपए में तीन साल के लिए मार्का मिलता है। डेयरी प्रशासन ने वहीं मार्का एक प्राइवेट कंपनी से एक साल के लिए 3.50 लाख रुपए में खरीदा है।

इस पर एमडी ने सफाई देते हुए बीएसआई का मार्का अप्लाई करने के बाद भी देरी से मिलने और मार्का के खत्म होने की बात कही। एमडी के जवाब से असंतुष्ट होते हुए आमसभा की अध्यक्षता से कर रहे चेयरमैन गुंजल ने कहा डेयरी प्रशासन को प्राइवेट कंपनी से मार्का खरीदने की कहा जरूरत पड़ गई थी। 6 माह पहले बीएसआई संस्था को आवेदन किया जाता। मार्का की अवधि खत्म होने के बाद भी एक साल में मार्का मान्य का नियम है। 

10 रुपए फैट में खरीदा जाए गाय का दूध
आम सभा में ज्यादातर दुग्ध समितियों के अध्यक्षों ने कहा डेयरी गाय का 10 रुपए फेट में खरीदे। तो डेयरी प्रशासन को सर्दी के साथ गर्मियों में भी दूध की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। चेयरमैन ने कहा गाय के दूध को ज्यादा से ज्यादा रेट में खरीदने की व्यवस्था पर विचार किया जाएगा।

18 राज्यों से ज्यादा महंगा है राजस्थान में पेट्रोल, डीजल

अगर राजस्थान सरकार पेट्रोल-डीजल पर वैट 5% भी कम करे तो कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर तक की कमी हो सकती है। जयपुर में पेट्रोल 70.98 रुपए डीजल 60.88 रुपए लीटर बिक रहा है।

जयपुर/कोटा । राजस्थान में पेट्रोल पर 30% डीजल पर 22 प्रतिशत वैट लागू है। इसके अलावा यहां पेट्रोल पर डेढ़ रुपए डीजल पर एक रुपए 75 पैसे रोड सेस भी लागू है। ऐसे में पेट्रोल पर कुल टैक्स 32.95% डीजल पर 25.75% होता है। यह 18 राज्यों से ज्यादा है।

केंद्र सरकार ने पिछले सप्ताह पेट्रोल-डीजल पर दो-दो रुपए एक्साइज ड्यूटी घटाई थी। इसके बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर पेट्रोल-डीजल से 5% तक वैट कम करने के लिए कहा था। कुछ राज्यों ने पहल भी की। गुजरात ने पेट्रोल-डीजल पर 4 प्रतिशत वैट कम किया।

महाराष्ट्र ने पेट्रोल पर दो और डीजल पर एक रुपए दाम घटाया। हिमाचल ने एक फीसदी वैट कम किया। अगर राजस्थान सरकार पेट्रोल-डीजल पर वैट 5% भी कम करे तो कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर तक की कमी हो सकती है। जयपुर में पेट्रोल 70.98 रुपए डीजल 60.88 रुपए लीटर बिक रहा है।

उधर, पड़ोसी राज्य हरियाणा गुजरात में राजस्थान के मुकाबले डीजल पर टैक्स कम है। प्रदेश में मौजूदा समय में सालाना 500 करोड़ लीटर डीजल 60 करोड़ लीटर पेट्रोल की खपत हो रही है। राज्यसरकार यदि 5% टैक्स कम करती है तो पेट्रोल डीजल की कीमतें करीब 3 रु. लीटर तक घट सकती हैं।

अगर सरकार सिर्फ सेस ही हटा ले तो पेट्रोल 69.48 रु. डीजल 59.13 रु. लीटर मिल सकता है। यानी 2 रु. लीटर तक की कमी संभव है। सेस भी कम करे तो 2 रुपए प्रति लीटर तक की राहत मिलना तय है। हालांकि वित्त विभाग के अफसरों का कहना है कि प्रदेश में पेट्रोल डीजल पर टैक्स में कटौती की गुंजाइश कम है। 

सालाना 9300 करोड़ रुपए से ज्यादा कमा रही है सरकार
2014 में पेट्रोल और डीजल के पेटे सरकार को करीब 8 हजार करोड़ रुपए का राजस्व मिल रहा था जो अब बढ़कर लगभग 9300 करोड़ रुपए हो गया है।

वहीं कच्चे तेल की कीमतें जब 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा पहुंच गई थीं तब प्रदेश में इससे मिलने वाली रॉयल्टी 6 हजार करोड़ रुपए को पार कर गई थी। लेकिन अब कच्चे तेल से मिलने वाली रॉयल्टी लगभग ढाई हजार करोड़ रुपए है। इसके अलावा सेस के पेटे सरकार सालाना करीब 1500 करोड़ रुपए कमा रही है। 

राज्यवार पेट्रोल- डीजल पर लगने वाले टैक्स
अरुणाचल  20% 12.50%
असम 32.66% 23.66%
बिहार 26% 19%
छत्तीसगढ़ 28.93% 27.14%
दिल्ली 27% 17.38%
गोवा 17% 19%
गुजरात 26.96% 24.96%
हिमाचल 26% 15%
जेएंडके 29.60 18.04%
झारखंड 31.50% 24.62%
कर्नाटक 30% 19%
एमपी 38.90 30.24%
महाराष्ट्र 43.94% 24.41%
पंजाब 36.11% 17.34%
यूपी 31.90% 20.19% 

पड़ोसी राज्यों में टैक्स कम होने से प्रदेश में राजस्व का नुकसान 
पड़ोसी राज्यों में दाम कम होने से सिरोही उदयपुर के उद्योगपति गुजरात, अलवर भिवाड़ी का बड़ा भाग हरियाणा तथा श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ के लोग पंजाब से पेट्रोल-डीजल खरीदते हैं।

पेट्रोलियम संगठनों का दावा है कि प्रदेश में वैट 4% घटे और सेस 1 रु. हो जाए तो डीजल की बिक्री 30% तक बढ़ेगी सरकार को 1600 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा।

इन 18 राज्यों में कम है टैक्स
डीजल :अरुणाचलप्रदेश, असम, बिहार, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, हिमाचल, जेएंडके, झारखंड, कर्नाटक, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओड़िशा, सिक्किम, त्रिपुरा, यूपी, प. बंगाल में राजस्थान से कम टैक्स है।

पेट्रोल : अरुणाचलप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल, जेएंडके, झारखंड, कर्नाटक, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओड़िशा, सिक्किम, प. बंगाल में पेट्रोल पर लगने वाला टैक्स राजस्थान से कम है।
(स्रोत:पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालाइसिस सेल)

राज्य अध्यापक पात्रता परीक्षा (रीट) की अधिसूचना जारी, आवेदन 6 नवम्बर से

अजमेर। राज्य अध्यापक पात्रता परीक्षा (REET) की अधिसूचना जारी कर दी गई है। परीक्षा 11 फरवरी को पूरे प्रदेश में एक साथ होगी। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 6 नवम्बर से प्रारम्भ होगी और आवेदन की अंतिम तिथि 30 नवम्बर तय की गई है। पात्रता के लिए परीक्षा में न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक लाना जरूरी होगा।

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की सचिव और REET समन्वयक मेघना चौधरी ने बताया कि परीक्षा दो स्तर के लिए होगी। छह से आठवीं कक्षा तक के अध्यापकों की द्वितीय स्तर की परीक्षा पहली पारी में सुबह 10 से दोपहर 12.30 बजे तक होगी, जबकि कक्षा 1 से 5 तक के अध्यापकों के लिए प्रथम स्तर की पात्रता परीक्षा दूसरी पारी में दोपहर 2.30 बजे से शाम 5 बजे तक होगी। दोनों परीक्षाएं एक ही दिन 11 फरवरी को होंगी।

तीन वर्ष का सर्टिफिकेट
REET में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को अध्यापक पात्रता के लिए तीन वर्ष के लिए प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा। पूर्व में आरटेट और रीट दे चुके अभ्यर्थी अपने परिणाम उन्नयन के लिए भी फिर से रीट परीक्षा में बैठ सकते हैं। इसके लिए उन्हें आवेदन करना होगा।

60 प्रतिशत अंक जरूरी
अध्यापक पात्रता के लिए रीट में न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य है। राज्य सरकार के गजट नोटिफिकेशन के तहत अनुसूचित क्षेत्रों के अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए यह कट ऑफ 36 प्रतिशत है। इसके अलावा किसी भी वर्ग को न्यूनतम अंक प्रतिशत में रियायत नहीं मिलेगी।

एक स्तर के लिए 550 रुपए
REET के लिए ऑनलाइन Apply करते समय एक स्तर की परीक्षा के लिए 550 रुपए शुल्क चुकाना होगा। दोनों स्तर की परीक्षा के लिए परीक्षा शुल्क 750 रुपए रखा गया है।

40 हजार पद के लिए होगी परीक्षा
राज्य सरकार ने फिलहाल राज्य में 25 हजार अध्यापकों की भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है, लेकिन परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ होने से पूर्व पद की संख्या 40 हजार तक जा सकती है। राज्य के विभिन्न जिलों में अध्यापकों के खाली पद एवं भविष्य की जरूरत के मुताबिक राज्य सरकार पदों में बढ़ोतरी कर सकती है।

डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 3.86 लाख करोड़ रुपये रहा

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नई दिल्ली । सितंबर, 2017 तक प्रत्यक्ष कर संग्रह के आखिरी आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान नेट कलेक्शन 3.86 लाख करोड़ रुपए का रहा है, जो कि बीते वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 15.8 फीसद ज्यादा है।

वित्त वर्ष 2017-18 के लिए प्रत्यक्ष कर के बजट अनुमान में से नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन की हिस्सेदारी 39.4 फीसद की है। धनवापसी के समायोजन से पहले अप्रैल से सितंबर 2017 की अवधि के दौरान कुल कलेक्शन 10.3 फीसद बढ़कर 4.66 लाख करोड़ रुपए का रहा है।

अप्रैल से सितंबर 2017 के दौरान 79,660 करोड़ रुपये की रिफंड धनराशि जारी की गई है। 30 सितंबर 2017 तक एडवांस टैक्स के रूप में 1.77 लाख करोड़ रुपए की राशि प्राप्त की जा चुकी है, जो कि बीते वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले एडवांस टैक्स पेमेंट के मामले में 11.5 फीसद के इजाफे को दिखाती है।

वहीं कार्पोरेट इनकम टैक्स (सीआईटी) में एडवांस टैक्स की ग्रोथ 8.1 फीसद रही, जबकि पर्सनल इनकम टैक्स के रूप में एडवांस टैक्स की ग्रोथ 30.1 फीसद की रही है।

लिवाली निकलने से धनिया 200 रुपए प्रति क्विंटल तेज

कोटा। भामाशाह अनाज मंडी में बुधवार को गेहूं मिल 1500से 1531 लोकवान 1600से 1700पी डी 1650 से 1700 टुकडी 1600से 1700 रुपए प्रति क्विंटल। लिवाली निकलने से धनिया 200 तेज, कमजोर उठाव से उडद 200 एवं चना 200 मंदा रहा। लहसुन की आवक 20000 हजार कट्टे की रही । माल की कुल आवक 75 हजार बोरी की रहीं ।

धान सुगंधा 2000 से 2350 पूसा 1 2000 से 2300 पूसा4 (1121) 2000 से 2400 धान (1509) 2000 से 2400 रुपए प्रति क्विंटल। सोयाबीन 2200 से 2731 सरसो 3200 से 3421 तिल्ली 5000 से 6500  रुपए प्रति क्विंटल। मैथी 2000 से 2400 धनिया बादामी 3400 से 3800 ईगल 3600 से 3900 रंगदार 4000 से 5000 रुपए प्रति क्विंटल।

मूंग 3500 से 4100 उडद नया 2400 से 3600 चना 4500से 4800 चना काबुली 7000 से 10500 चना पेपसी 4800 से 5800चना मौसमी 4800 से 5800 मसूर 3500 से 4000 रुपए प्रति क्विंटल।

ग्वार 2500से 3050 मक्का नई 800 से 1100 जौ 1100 से 1200 ज्वार 1300 से 2000 रुपए प्रति क्विंटल। लहसुन 800 से 4500 रुपए प्रति क्विंटल। 

परवन डेम परियोजना को लेकर प्रमोद भाया की पदयात्रा

  • परवन बांध के निर्माण पर सरकार की नीयत ठीक नहीं

  • पूर्व मंत्री प्रमोद भाया ने शुरू की 11वीं पदयात्रा

  • चार साल में परियोजना लागत बढकर 7800 करोड़

कोटा। कांग्रेस सरकार द्वारा स्वीकृत परवन वृहद सिंचाई परियोजना के निर्माण कार्य को प्रांरभ करवाने की मांग को लेकर प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया ने बुधवार को 11वें चरण की पदयात्रा बारां के ग्राम बड़ां से प्रारंभ कर ग्राम बमूलिया जागीर, चैनपुरिया, खेडली जागीर से होते हुए ग्राम बोहत पहुंचकर सम्पन्न की।

जन जागरण पदयात्रा में जिलाध्यक्ष पानाचंद मेघवाल सहित सैकड़ों कांग्रेसजनों, किसानों और क्षेत्रवासियों ने भाग लिया।पदयात्रा में भाया ने कहा कि 4 साल का लम्बा समय निकल जाने के बावजूद ‘परवन वृहद सिंचाई परियोजना’ पर सरकार की ‘नीयत’ साफ नहीं है।

उन्होनें कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार को 4 वर्ष में इस परियोजना को पूर्ण कराने की लिखित में अण्डरटेकिंग दी थी। लेकिन राज्य की भाजपा सरकार ने द्वेषतावश 4 वर्ष में इस परियोजना को पूर्ण कराना तो दूर रहा अब तक मौके पर कार्य भी चालू नही करवाया।

जबकि इस परियोजना की क्रियान्विती में लगातार हो रही देरी के चलते एक तरफ यहां की कृषि आधारित क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को करोड़ों रूपये का नुकसान हो गया। दूसरी ओर नोटबंदी एवं जीएसटी के चलते परियोजना लागत लगभग 231.92 प्रतिशत बढ़ कर करीब 7800 करोड़ रूपये हो गयी है।

भाजपा मंत्रियों द्वारा बताया गया कि मुख्यमंत्री परवन परियोजना को स्प्रिकंलर पद्वति से जोड़कर राष्ट्रीय परियोजना में शामिल कराने के लिए प्रयासरत है। भाया ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो किसान भाईयों को फ्लो इरीगेशन के स्थान पर विद्युत मोटरें लगाकर स्प्रिकंलर पाईपों से खेतों में पानी देना होगा जिससे किसान भाईयों पर प्रतिमाह बिजली बिल के भुगतान के साथ बिजली उपलब्ध होने का इंतजार करना पडेगा।

स्प्रिंकलर पाइप खेतों में लगाने के लिए किसानों को हजारों, लाखों रुपये प्रथम बार में ही खर्च करने पडेंगे। स्प्रिकंलर पाइप भी सर्दी, गर्मी एवं बरसात के कारण पांच वर्ष से ज्यादा नहीं चल पाते है, जिससे किसानों को हर पांच वर्ष में इनकी मरम्मत, रख-रखाव या नए पाइप खरीदने पड़ेंगे, जिन पर लाखों रुपये की राशि खर्च होगी।

फ्लो इरीगेशन पद्वति में किसानों का सिंचाई पर कोई खर्चा नही होता है, बिजली कटौैती से इसका कोई संबंध नहीं है। भाया ने कहा कि भाजपा सरकार परवन परियोजना को स्प्रिकंलर पद्वति की नही करें तथा कांग्रेस शासन के दौरान बनाई गई डीपीआर अनुसार ही काम को होने दें। उन्होनें कहा कि किसानो का शोषण, उनका आर्थिक नुकसान कतई सहन नहीं करेंगे।

उन्होनें कहा कि सरकार परवन परियोजना के सिंचित क्षेत्र का रकबा बढ़ाना चाहती है तो डेम की ऊंचाई कांग्र्रेस समय की डीपीआर डिजाइन में है, उसकी ऊंचाई को ओर बढावे, जिससे रकबा बढ़ जायेगा तथा किसानों पर स्प्रिंकलर पद्वति का भार नही पडेगा।

10 फीसदी काम के लिए 4 साल निकाल दिये
भाया ने कहा कि राजे सरकार ने संबंधी पत्रावली पर नई कार्यवाही जोडी है, लेकिन केवल इसके लिए परियोजना कार्य 4 साल रोकना पडा। इस सरकार का कार्य 10 फीसदी हिस्सेदारी का है, जबकि 90 फीसदी कार्य काॅग्रेस शासन के दौरान ही पूर्ण कर दिया गया था।

चूंकि परियोजना राजस्थान में राणा प्रताप सागर, माही एवं बीसलपुर के बाद चैथी वृहद परियोजना है। इसके चलते जब तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं होगा, तब तक किसी न किसी रूप में ‘औपचारिक कार्यवाही’ चलती ही रहेगी।

भाया ने संकल्प दोहराते हुए कहा कि परवन वृहद सिंचाई परियोजना निर्माण के लिए उनकी पदयात्राएं संवेदक कंपनी को कार्यादेश जारी होने एवं संवेदक कम्पनी द्वारा मौके पर निर्माण कार्य प्रारंभ होने तक निरंतर जारी रहेगी।

जिलाध्यक्ष पानाचंद मेघवाल ने कहा कि सरकार की मुखिया से लेकर क्षेत्रीय सांसद महोदय एवं कृषि मंत्री सहित भाजपा नेता परवन पर अलग-अलग बयान दे रहे हैं, लेकिन हकीक़त में रिजल्ट सामने नजर नहीं आ रहा। इस मुद्दे पर वर्तमान सरकार के सिंचाई मंत्री ने विधानसभा प्रश्न के जवाब में उन तथ्यों की पुष्टि कर दी।

जिनका जिक्र काॅग्रेस लम्बे समय से कर रही है, कि ‘परवन वृहद सिंचाई परियोजना’ की स्वीकृति के लिए आवश्यक सैद्धांतिक, प्रशासनिक, वित्तीय तथा तकनीकी स्वीकृति कांग्रेस सरकार के समय पूरी कर दी गई थी।

 

कोटा स्टोन पर जीएसटी 5 या 18 प्रतिशत, स्पष्ट नहीं होने से कारोबार प्रभावित

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कोटा। अभी तक भी केंद्र सरकार यह तय नहीं कर पाई की कोटा स्टोन पर कितना टैक्स वसूला जाना है। कोटा स्टोन के टैक्स को लेकर अभी भी अधिकारियों में संशय है। हालांकि हाल ही में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में पॉलिश कोटा स्टोन को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 फीसदी की श्रेणी में डाल दिया, लेकिन अधिकारी अभी तक भी यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि कोटा स्टोन के कौन से उत्पाद पर 18 फीसदी और कौन से उत्पाद पर 5 फीसदी टैक्स लगना है।

स्लैब पर संशय
इसी शंका के समाधान को लेकर कोटा स्टोन स्माल स्केल इण्डस्ट्रीज एसो. के पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल केन्द्रीय उत्पाद एवं सेवा शुल्क विभाग के उपायुक्त नरेश बुंदेल से मिला। उन्होंने टैक्स स्लेब स्पष्ट करने का अनुरोध किया, लेकिन वे संशोधित नोटिफिकेशन हाथ में आने के बाद ही कुछ कहने की स्थिति में नजर आए।

इस बारे में वाणिज्यिक कर विभाग के उपायुक्त से जानकारी लेनी चाही तो वे भी संतोषप्रद जवाब नहीं दे पाए। केएसएसएसआईए के अध्यक्ष जगदीश शक्तावत, उपाध्यक्ष दिनेश डपकरा, सचिव अखलेश मेड़तवाल ने बुंदेला को 26 दिसम्बर 1990 का सर्कुलर दिखाया। जिसमें स्पष्ट था कि कोटा स्टोन रफ व पॉलिश एक श्रेणी में है। व्यापारियों का कहना था कि वैट में भी कोटा स्टोन पॉलिश व रफ को एक ही कर की श्रेणी में रखा गया था, लेकिन जीएसटी में इसकी श्रेणी स्पष्ट नहीं।

नहीं कर पा रहे कारोबार
लघु उद्योग भारती के पूर्व जिलाध्यक्ष राजेंद्र जैन का कहना है कि जीएसटी में जो एचएसएन कोड है उसमें 6802 कोड में 28 प्रतिशत टाइल्स को माना गया है। एचएसएन कोड 2515 व 2516 में इसी पत्थर को 5 प्रतिशत कर श्रेणी में रखा है। वर्तमान में कोटा स्टोन की कर श्रेणी का सीधा जिक्र नहीं होने के कारण व्यापारी 5 प्रतिशत कर श्रेणी में बिल काट रहे हैं।

कुछ व्यापारी 18 प्रतिशत में बिल बना रहे हैं। जो खुलकर व्यापार नहीं कर पा रहे हैं। 750 कोटा स्टोन की खदानें, 5000 औद्योगिक इकाइयां, 150000 लोगों को मिल रहा है प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार , 1000 करोड़ का सालाना कारोबार, 100 करोड़ के कोटा स्टोन का निर्यात

वाणिज्यिक कर विभाग उपायुक्त एन.के. गुप्ता का कहना है कि कोटा स्टोन पर जीएसटी स्लेब क्या रहेगी। इस बारे में अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता। इसके टैक्स के बारे में अभी संशय है। जो अभी क्लियर नहीं हुआ है। केंद्रीय उत्पाद एवं सेवा शुल्क विभाग के अतिरिक्त आयुक्त नरेश बुंदेला ने कहा कि टाइल्स को 28 फीसदी की स्लेब में रखा गया था।

वहीं पॉलिश कोटा स्टोन भी 28 फीसदी की स्लेब में था। नॉन पॉलिश कोटा स्टोन 5 फीसदी की स्लेब में था, लेकिन हाल ही में जीएसटी काउंसिल की बैठक में वित्त मंत्री ने टाइल्स की स्लेब 28 से घटाकर 18 की है। उसमें कोटा स्टोन को कौनसी स्लेब में रखा है। यह तो संशोधित नोटिफिकेशन आने के बाद ही बताया जा सकता है।

एमएसएमई पखवाड़े में हजारों युवा व उद्यमी लाभांवित -उद्योग मंत्री

जयपुर । उद्योग व राजकीय उपक्रम मंत्री राजपाल सिंह ने बताया है कि एमएसएमई पखवाड़े के दौरान राज्य में लगभग 150 औद्योगिक प्रोत्साहन शिविरों का आयोजन कर हजारों नागरिकों को राज्य सरकार की औद्योगिक योजनाओं की जानकारी देकर शिविरों में ही लाभाविन्त किया गया है।

उन्होंने बताया कि एमएसएमई पखवाड़े का बड़ा लाभ युवाओं और कृषि भूमि पर उद्योग लगाने वाले ग्रामीणों को मिला है। भामाशाह रोजगार सृजन योजना में 4 % के ब्याज अनुदान को दो गुणा करते हुए 8 प्रतिशत ब्याज अनुदान देने के आदेश जारी कर सीधा युवा नए उद्यमियों को लाभ पहुंचाने का निर्णय किया वहीं प्रधानमंत्री रोजगार गांरटी योजना के ऋण वितरण को ढ़ाई गुणा तक बढ़ा दिया।

उन्होंने बताया कि खातेदारों को एक एकड़ कृषि भूमि तक सूक्ष्म, लघु उद्योग इकाई या कजावा (अस्थाई ईंट भट्टा) आदि लगाने के लिए स्वतः भूमि उपयोग संपरिवर्तन प्रमाण पत्र के आधार पर वित्तदायी संस्थाओं से ऋण सुविधा के आदेश जारी कर बडी राहत दी है।
 
उद्योग मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 17 सितंबर को एमएसएमई दिवस पर इस वर्ष को एमएसएमई वर्ष घोषित करते हुए 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक एमएसएमई पखवाड़ा आयोजित करने की घोषणा की थी।

उन्होंने बताया कि औद्योगिक प्रोत्साहन शिविरों से रीको, राजस्थान वित निगम, खादी बोर्ड, औद्योगिक संघों, जिले की वित्तदायी संस्थाआें, आर्टिजनों और युवाओं को जोड़ते हुए उन्हें केन्द्र व राज्य सरकार की उद्योग संवद्र्धन योजनाओं की जानकारी देने के साथी ही शिविर में ही योजनाओं का लाभ दिलाने के प्रयास किए गए।

उन्होंने बताया कि शिविरों में युवाओं को रोजगार के लिए प्रधानमंत्री रोजगार गारंटी योजना, भामाशाह रोजगार सृजन कार्यक्रम की जानकारी देते हुए ऋण आवेदन तैयार कराने के साथ ही बैंकों से ऋण स्वीकृति भी करवाई गई। इसी तरह से शिविरों में आर्टिजन कार्ड, केन्द्र सरकार की जीरो इफेक्ट-जीरो डिफेक्ट व जेम पोर्टल में पंजीयन के लिए प्रोत्साहित किया गया।
 
उद्योग आयुक्त कुंजी लाल मीणा ने बताया कि पखवाड़े के दौरान जयपुर में आरएसडीसी व अब उद्योग प्रोत्साहन संस्थान और अजमेर, बीकानेर सहित कई स्थानों पर जिला उद्योग केन्द्रों द्वारा हस्तशिल्प प्रदर्शनियों का आयोजन कर शिल्पियों, बुनकरों व दस्तकारों को सीधा बाजार उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने बताया कि पखवाडे़ के दौरान पीएमईजीपी व बीआरएसवाई योजनाओं में 2300 से अधिक युवाओं के आवेदन तैयार कराकर 648 युवाओं के बैंकों से ऋण भी स्वीकृत कराए जा चुके हैं।
 
मीणा ने बताया कि पखवाड़े के दौरान जयपुर सहित कई जिला उद्योग केन्द्रों ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन, टूल किट का वितरण आदि कार्य किए हैं। उन्होंने बताया कि जिला उद्योग केन्द्रों द्वार स्वच्छता अभियान व नवाचार कार्यक्रमों को भी अपनाया गया है।

सरकार से बातचीत के बाद पेट्रोल पंप डीलरों ने वापस ली हड़ताल

नई दिल्ली। पेट्रोल पंप डीलरों ने देशव्यापी हड़ताल वापस ले ली। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से बातचीत के बाद पेट्रोल पंप डीलरों ने हड़ताल वापस लेने का फैसला किया। बता दें कि देशभर के पेट्रोल डीलरों  ने आगामी 13 अक्टूबर से हड़ताल पर जाने का एलान किया था।

देश भर में करीब 54 हजार पेट्रोलियम डीलरों ने 13 अक्तूबर को देशव्यापी हड़ताल करने का एलान किया था। यूनाइटेड पेट्रोलियम फ्रंट (यूपीएफ) ने बेहतर लाभ (मार्जिन) समेत विभिन्न मांगों और पेट्रोलियम पदार्थों को भी के दायरे में लाए जाने के लिए इस हड़ताल का एलान किया था। 

फ्रंट ने मांग की है कि चार नवंबर, 2016 को तेल मार्केटिंग कंपनियों के साथ किए गए करार को लागू किया जाए। यह फैसला काफी समय से लंबित है। अन्य मांगों में डीलर मार्जिन की हर छह माह में समीक्षा, निवेश पर रिटर्न के लिए बेहतर नियम, कर्मचारियों के मुद्दों का समाधान, नुकसान से निपटने के लिए नए अध्ययन और एथेनॉल मिलाने व ट्रांसपोर्टेशन से संबंधित मुद्दे शामिल हैं।

तेल क्षेत्र में 300 बिलियन डॉलर के निवेश का मौका देगा भारत

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नई दिल्ली। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अगले 10 वर्षों में भारत हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में 300 अरब डॉलर के निवेश के अवसरों की पेशकश करेगा, ताकि देश की ऊर्जा मांग के साथ तालमेल बिठाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा से संबंधित मुद्दों पर सरकार को सलाह देने के लिए विशेषज्ञों का एक समूह स्थापित किया जा रहा है।

इसके अलावा उन्होंने कहा, बाजार संचालित कीमतों के लिए एक गैस मंच के लिए एक कैबिनेट प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जा रहा है। केरावीक की ओर से आयोजित इंडिया एनर्जी फोरम के एक इंटरेक्शन कार्यक्रम के दौरान कहा, “हमारी भविष्य की मांग पर विचार करते हुए अगले 10 सालों में भारत 300 अरब डालर (हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में) की परियोजना की पेशकश कर रहा है।”

आने वाले पांच वर्षों में तेल क्षेत्र में 1 खरब डॉलर के निवेश और साउदी अरामको की ओर से किए जाने वाले 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश के बारे में नीती आयोग के सीईओ अमिताभ कांत की टिप्पणी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह एक गलत बयानी है और अरामको ने अपने वैश्विक बुनियादी ढांचे में 300 अरब डालर के निवेश करने की योजना बनाई है।

CNG ग्राहकों के लिए सरकार पेश करेगी IGL स्मार्ट कार्ड
पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बुधवार को प्रीपेड आईजीएल स्मार्ट कार्ड लॉन्च करने जा रहे हैं। इससे सीएनजी वाहन चालकों को निश्चित तौर पर बड़ी राहत मिलेगी। कार्ड की मदद से ग्राहकों को सीएनजी गैस स्टेशन पर लंबी लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा। प्रधान इस कार्ड को दिल्ली में पेश करने वाले हैं।

कैसे मददगार होगा यह स्मार्ट कार्ड
आईजीएल स्मार्ट कार्ड की लॉन्चिंग के दौरान साइंस एंड टेक्नोलॉजी मंत्री समेत दिल्ली के सभी सात लोकसभा सांसद भी मौजूद रहेंगे। इसे सीएनडी स्टेशन पर रिटेल ग्राहकों की तरफ से भुगतान के लिए डिजायन किया गया है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि इसकी मदद से सीएनजी स्टेशन पर भुगतान के दौरान हड़बड़ी नहीं होगी।

साथ ही लेनदेन पारदर्शी और सुविधाजनक बनेगा। सीएनजी ग्राहक आईजीएल स्मार्ट कार्ड को पिन से सुरक्षित रख सकेंगे और इसे नेट बैंकिंग, क्रेडिट या डेबिट कार्ड के जरिए स्टेशनों पर रिचार्ज किया जा सकेगा। इस कार्ड को ग्राहक सीएनजी स्टेशन से खरीद सकेंगे।