Wednesday, July 8, 2026
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राजस्थान में मूंगफली की खरीद हुई प्रारम्भ

अब तक लगभग 1500 किसानों को 10 करोड़ 61लाख रुपये से अधिक राशि का ऑनलाईन भुगतान किया जा चुका है। 

जयपुर। भारत सरकार ने राज्य में मूंगफली की समर्थन मूल्य पर 11अक्टूबर से खरीद की अनुमति दे दी है। बीकानेर जिले के तीन खरीद केन्द्रों बीकानेर, नोखा एवं डूंगरगढ़ में मूंगफली की खरीद प्रारम्भ हो गई है। मूंगफली के खरीद केन्द्रों पर खरीद प्रारम्भ करने के लिए किसानों को दिनांकों का आवंटन किया जा रहा है।

यह जानकारी रजिस्ट्रार एवं प्रमुख शासन सचिव, सहकारिता अभय कुमार ने गुरूवार को राजफैड में समर्थन मूल्य पर की जा रही मूंग, उड़द,सोयाबीन एवं मूंगफली की खरीद की समीक्षा करते हुए दी।

कुमार ने बताया कि राज्य में पूर्व में 25अक्टूबर से मूंगफली की खरीद की जानी थी, लेकिन सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक ने राज्य में मूंगफली की फसल की आवक एवं किसानों द्वारा जल्दी खरीद प्रारम्भ करने की जा रही मांग के क्रम में शीघ्र खरीद प्रारम्भ करने के निर्देश दिए थे।

उन्होंने बताया कि सहकारिता मंत्री के निर्देशों की पालना में भारत सरकार से उच्च स्तरीय वार्ता कर खरीद को जल्दी प्रारम्भ करवाया गया है। प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि किसानों को उनकी उपज की राशि को उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 1500 किसानों को 10 करोड़ 61लाख रुपये से अधिक राशि का ऑनलाईन भुगतान किया जा चुका है। कुमार ने कहा कि राज्य में ऑनलाईन पंजीकरण कर खरीद की जा रही है।

अधिकारियों को चाहिए कि वे तकनीकी का प्रयोग कर समस्याओं के संबंध में तत्काल निर्णय लेवें, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हों। उन्होंने पंजीयन के संबंध में आ रही समस्याओं के तत्काल समाधान के लिए निर्देशित किया।

 राजफैड की प्रबंध निदेशक डॉ. वीना प्रधान ने बताया कि राज्य में अभी तक62795किसानों द्वारा ऑनलाईन पंजीयन करवाया गया है। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही सभी किसानों को उनकी उपज को खरीद केन्द्र पर लाने के लिए दिनांक आवंटित कर दी जाएंगी।

 डॉ. प्रधान ने बताया कि समर्थन मूल्य पर अभी तक लगभग 4 हजार किसानों से 31 करोड़ 59 लाख रुपये से अधिक की मूंग, उड़द एवं सोयाबीन की खरीद की जा चुकी है। जिन खरीद केन्द्रों पर ज्यादा किसानों के पंजीयन करवाया है, उन केन्द्रों पर तौल कांटों की संख्या बढ़ाई जा रही है।

त्योहारी ग्राहकी से सोना उच्चतम स्तर 30,830 पर पहुंचा

नई दिल्ली/कोटा। दिवाली और धनतेरस से पहले स्थानीय बाजार में ग्राहकी बनी हुई है। इस कारण सोना स्टैंडर्ड के दाम 80 रुपये बढ़कर 22 सितंबर के बाद के उच्चतम स्तर 30,830 रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गए। सोना बिटुर भी इतनी ही तेजी के साथ 30,680 रुपये प्रति दस ग्राम पर रहा।

आठ ग्राम वाली गिन्नी 24,700 रुपये प्रति दस ग्राम पर स्थिर रही। त्योहारों पर चांदी के सिक्के खरीदने की परंपरा के मद्देनजर सिक्का निर्माताओं की ओर से लगातार मांग मजबूत बनी हुई है। इससे सफेद धातु 235 की छलांग लगाकर 16 सितंबर के बाद के उच्चतम स्तर 41,300 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुँच गई

। चांदी वायदा भी 65 रुपये की मजबूती के साथ 40,330 रुपये प्रति किलोग्राम बोली गयी। हालांकि, सिक्कों के दाम आज स्थिर रहे, लेकिन आने वाले एक सप्ताह में इसमें जबर्दस्त तेजी देखी जा सकती है। सिक्का लिवाली 74 हजार रुपये और बिकवाली 75 हजार रुपये प्रति सैकड़ा के भाव बिके। 

कोटा सर्राफा
चांदी  40700 रुपए प्रति किलोग्राम।
सोना केटबरी  30650 रुपए प्रति दस ग्राम,  सोना 35750 रुपए प्रति तोला।
सोना  शुद्ध  30800 रुपए प्रति दस ग्राम, सोना 35920 रुपए प्रति तोला।

MSME ग्राहकों को रियायती दर पर कर्ज देगा एसबीआई

मुंबई। देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई)  ने आज कहा कि उसने अपने सूक्ष्म, लघु एवं मझाोले (एमएसएमई)  ग्राहकों को अल्पकालिक कार्यशील पूंजी मांग ऋण प्रदान करने के लिये एक नया उत्पाद पेश किया है।

नए उत्पाद को एसएमई असिस्ट नाम दिया गया है, इसके तहत एमएसएमई ग्राहकों को माल एवं सेवा कर के तहत फंसे इनपुट क्रेडिट दावों के आधार पर ऋण दिया जाएगा। बैंक ने बयान में कहा कि ग्राहकों को ऋण रियायती ब्याज दर पर मिलेगा।

बैंक के मुख्य महाप्रबंधक एसएमई वी रामलिंग ने आज यहां अपने बयान में कहा, यह उत्पाद सूक्ष्म, लघु एवं मझाोले उद्योगों को इनपुट क्रेडिट प्राप्त होने तक उनकी कार्यशील पूंजी की आवश्यकता का प्रबंधन करने में मदद करेगा। इससे एसएमई उद्योगों को बिना किसी रुकावट के परिचालन करने में मदद मिलेगी।

इस योजना के तहत ण प्रसंस्करण शुल्क 2,000 रुपये है। ऋण आवेदन के लिये कंपनियों को चार्टर्ड अकाउंटेंट से इनपुट क्रेडिट दावों की पुष्टि वाला प्रमाण पत्र देना होगा।बैंक ने कहा कि इस योजना के तहत एसएमई ण लेने वालों को तीन महीने की अवधि की स्थगन अवधि दी जायेगी।

स्थगन अवधि बीत जाने के बाद एसएमई ग्राहकों को एक साथ या अगले 6 महीनों में 6 किस्तों में पूरी राशि का भुगतान करना होगा। बैंक के एसएमई ग्राहक 31, मार्च 2018 तक ऋण ले सकते हैं।

सेंसेक्स 348 अंक उछल कर 32,182.22 पर बंद

मुंबई।देश के शेयर बाजारों में गुरुवार को तेजी का माहौल रहा। सेंसेक्स 348.23 अंकों की बढ़त के साथ 32,182.22 पर बंद हुआ। सेसेंक्स में यह 1.09 प्रतिशत की उछाल थी।

इसी तरह 50 शेयरों का एनएसई निफ्टी 111.6 अंक यानी 1.12 प्रतिशत की उछाल के साथ 10,096.40 पर बंद हुआ। शेयर बाजारों का पिछले 3 सप्ताह का सर्वोच्च स्तर था।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। इसके अलावा हिंडाल्को, भारती इन्फ्राटेल, सन फार्मा और टीसीएस ने भी बढ़त दर्ज की। तकरीबन सभी क्षेत्रों का कारोबार सकारात्मक रहा।

बीएसई मेटल और एनर्जी में 2 प्रतिशत से ज्यादा बढ़त दर्ज की गई वहीं एफएमसीजी, फाइनैंस, हेल्थकेरयर और इंडस्ट्री के शेयरों में भी 1 प्रतिशत से ज्यादा उछाल आया।

बुधवार को गिरावट के साथ बंद होने के बाद गुरुवार को बॉम्बे शेयर बाजार के इक्विटी बेंचमार्क्स थोड़ी मजबूती के साथ खुले।

30 शेयरों का बीएसई सेंसेक्स 60.51 पॉइंट चढ़कर 31,894.50 जबकि 50 शेयरों का एनएसई निफ्टी 29 मजबूत होकर 10,013.80 अंक पर खुला।

तेल उत्खनन को जीएसटी दरों में राहत

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सरकार के इस फैसले से ओएनजीसी, रिलायंस, केयर्न एनर्जी जैसी कंपनियों को फायदा होगा क्योंकि ये रिग्स विदेशों से लाने पड़ते हैं और अब इनकी लागत कम हो जाएगी। 

नई दिल्ली। घरेलू स्तर पर तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने जीएसटी दरों में बड़े बदलाव का एलान किया है। ऑयल ड्रिलिंग रिग्स (तेल उत्खनन में इस्तेमाल होने वाले उपकरण) को जीएसटी दर से पूरी तरह से मुक्त कर दिया गया है। केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) ने इस संबंध में जीएसटी काउंसिल की बैठक में हुए फैसले का विवरण देते हुए बयान जारी किया।

सरकार के इस फैसले से ओएनजीसी, रिलायंस, केयर्न एनर्जी जैसी कंपनियों को फायदा होगा क्योंकि ये रिग्स विदेशों से लाने पड़ते हैं और अब इनकी लागत कम हो जाएगी। इससे ये कंपनियां अब ज्यादा मात्रा में रिग्स आयात कर सकेंगी और तेल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

गहरे समुद्र में इस्तेमाल होने वाले सभी रिग्स आयातित होते हैं जबकि समुद्री तट के करीबी इलाकों में भी इस्तेमाल होने वाले अधिकांश रिग्स विदेशों से मंगाये जाते हैं। वैसे सरकार की तरफ हाइड्रोकार्बन सेक्टर को कुछ और रियायत दी गई है लेकिन पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को अभी भी जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है।

सनद रहे कि पिछले सोमवार को दुनिया की दिग्गज तेल कंपनियों के प्रमुखों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक में यह मुद्दा उठा था। विदेशी तेल कंपनियों के साथ ही घरेलू तेल कंपनियां भी चाहती हैं कि उक्त तीनों उत्पाद जीएसटी के दायरे में आयें ताकि इन पर लागू दरों को लेकर एक समानता आ जाये।

असलियत में कई विदेशी कंपनियां भारत के पेट्रोलियम रिटेल सेक्टर में उतरना चाहते हैं लेकिन इसके लिए वे जीएसटी में इन्हें शामिल करने की मांग रख रही हैं। पीएम मोदी ने आश्वासन दिया है कि वह इस मुद्दे पर राज्यों से बात करेंगे।

1000 के पार खुला निफ्टी, सेंसेक्स में भी तेजी

नई दिल्ली। बुधवार को गिरावट के साथ बंद होने के बाद गुरुवार को बॉम्बे शेयर बाजार के इक्विटी बेंचमार्क्स थोड़ी मजबूती के साथ खुले। 30 शेयरों का बीएसई सेंसेक्स 60.51 पॉइंट चढ़कर 31,894.50 जबकि 50 शेयरों का एनएसई निफ्टी 29 मजबूत होकर 10,013.80 अंक पर खुला।

गुरुवार को शुरुआती कारोबार में भारती इन्फ्राटेल, गेल, सन फार्मा, वेदांता, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एलऐंडटी, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, आईओसी, बीपीसीएल, ल्युपिन, टीसीएस और एचपीसीएल के शेयरों की तेज खरीदारी हुई जबकि कोल इंडिया, भारती एयरटेल, सिप्ला, आईसीआईसीआई बैंक और एशियन पेंट्स के शेयरों को नुकसान हुआ।

ब्रॉडर मार्केट्स ने ओपनिंग में बेंचमार्क्स से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 0.6 प्रतिशत मजबूत होकर 100 पॉइंट चढ़ गया। इंडसबुल रियल एस्टेट, एमएमटीसी, स्टेट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन, जीएम ब्रूअरीज, एफएसीटी, एलटी फूड्स और कावेरी सीड्स के शेयर 2 से 10 प्रतिशत तक मजबूत हुए जबकि दूसरी तिमाही में बड़ी गिरावट की वजह से लक्ष्मी विलास बैंक के शेयरों में 5 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई।

पशु चारा बिजनेस में उतरी पतंजलि, अमूल से मिला बड़ा ऑर्डर

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नई दिल्ली। प्रोसेस्ड फूड्स और कॉस्मेटिक्स सेगमेंट में कॉम्पिटिशन तेज करने के बाद योग गुरु रामदेव की कंपनी बड़े पैमाने पर चारा बिजनस में उतर रही है। उसे डेयरी ब्रांड अमूल से बड़े पैमाने पर ऑर्डर मिला है।

पतंजलि आयुर्वेद की इकाई पतंजलि फोराज के हेड यशपाल आर्य ने ईटी को बताया कि मक्के की फसल से हरा चारा तैयार करने के लिए कंपनी की तरफ से अमेरिका से एक टेक्नॉलजी लाई गई है।

यह चारा गायों में दूध बढ़ाने में उपयोगी माना जाता है। उनके मुताबिक, कंपनी के प्लान के तहत किसानों को भी मक्का उगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा और इससे किसानों की संपत्ति में भी इजाफा होगा।

पतंजलि के साथ पहला परचेज ऑर्डर साइन करने वाली इकाई साबरकांठा डेयरी है, जो गुजरात मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) की 19 मिल्क यूनियनों में सबसे बड़ी है।

यह अमूल ब्रांड के तहत अपने प्रॉडक्ट्स बेचती है। साबरकांठा डेयरी के डिप्टी जनरल मैनेजर आर एस पटेल ने बताया, ‘इस टेक्नॉलजी से प्रॉडक्टिविटी बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे आखिरकार प्रॉडक्ट की क्वॉलिटी में सुधार होगा।’

अमूल खरीदेगी 10,000 मीट्रिक टन चारा
अमूल पतंजलि के गुजरात स्थित हिम्मतनगर प्लांट से 10,000 मीट्रिक टन चारा खरीदेगी। पटेल ने बताया कि इस बारे में शुरुआती ऑर्डर 6 करोड़ रुपये का है और हाल में इस सिलसिले में दोनों पक्षों के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं। यह प्लांट साबरकांठा डेयरी की तरफ से मुहैया कराई जमीन पर बनाया गया है।

जीसीएमएमएफ के चेयरमैन जेठा पटेल ने बताया, ‘हम अपने किसानों को पतंजलि द्वारा तैयार चारे की सप्लाई करेंगे। इससे न सिर्फ दूध की मात्रा में बढ़ोतरी होगी, बल्कि इसकी क्वॉलिटी भी बेहतर होगी। साथ ही, उन सीमांत किसानों को भी आत्मनिर्भर होने में मदद मिलेगी, जिनके पास दो या तीन गायें होती हैं।

रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाने की तैयारी : जेटली

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भारत में रियल एस्टेट एक ऐसा क्षेत्र है जहां सबसे ज्यादा कर चोरी और नकदी पैदा होती है और वह अब भी जीएसटी के दायरे से बाहर है

वॉशिंगटन। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि रियल एस्टेट एक ऐसा क्षेत्र है जहां सबसे ज्यादा कर चोरी होती है इसलिए इसे जीएसटी के दायरे में लाने का मजबूत आधार है।

जेटली ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में व्याख्यान देते हुए कहा कि इस मामले पर गुवाहाटी में 9 नवंबर को होने वाली जीएसटी की अगली बैठक में चर्चा की जाएगी।

जेटली ने भारत में कर सुधारों पर वार्षिक महिंद्रा व्याख्यान में कहा, भारत में रियल एस्टेट एक ऐसा क्षेत्र है जहां सबसे ज्यादा कर चोरी और नकदी पैदा होती है और वह अब भी जीएसटी के दायरे से बाहर है।

कुछ राज्य इस पर जोर दे रहे हैं। मेरा व्यक्तिगत तौर पर मानना है कि जीएसटी को रियल एस्टेट के दायरे में लाने का मजबूत आधार है।

किशनगढ़ एयरपोर्ट का शुभारम्भ, दिल्ली के लिए फ्लाइट जल्द

जयपुर। प्रदेश के विकास में सुनहरा अध्याय जोड़ते हुए मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे और केन्द्रीय नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री जयन्त सिन्हा ने बुधवार को किशनगढ़ एयरपोर्ट का शुभारम्भ किया। 

इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए श्रीमती राजे ने कहा कि आज का यह दिन ऎतिहासिक है और किशनगढ़ व अजमेर के साथ-साथ पूरे प्रदेशवासियों का पांच दशकों पुराना सपना साकार हुआ है। यह सपना मैंने अपने पिछले कार्यकाल में देखा था और आज यह हकीकत में बदल गया है।

अजमेर जिले के लोगों का 57 साल लम्बा इन्तजार खत्म हुआ है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और श्री जयन्त सिन्हा की शुक्रगुजार हूं। उन्होंने कहा कि इस एयरपोर्ट के शुरू होने से किशनगढ़ के विश्वविख्यात मार्बल उद्योग को गति मिलेगी। साथ ही देश-विदेश से धार्मिक नगरी पुष्कर और ख्वाजा साहब की दरगाह आने वाले श्रद्धालुओं को आसानी होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं उन्होंने 2013 में चुनाव से पहले सिर्फ पत्थर लगाने का काम किया लेकिन इसके बाद कोई काम नहीं हुआ। हम पत्थर लगाकर छोड़ नहीं देते हैं बल्कि काम पूरा कर जनता को समर्पित करते हैं।

मुख्यमंत्री की मेहनत रंग लाई
समारोह में केन्द्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयन्त सिन्हा ने एयरपोर्ट के शुभारम्भ की बधाई दी और कहा कि यह मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे के निरन्तर प्रयासों और उनकी मेहनत से ही संभव हो सकता है। उन्होंने कहा कि तकनीकी सर्वे और परीक्षण के बाद जल्द ही यहां से दिल्ली के लिए फ्लाइट शुरू हो जाऎगी।

रिफाइनरी के नाम पर लादा था कर्ज का बोझ
श्रीमती राजे ने कहा कि पिछली सरकार ने रिफाईनरी के नाम पर चार साल निकाल दिये और चुनाव से पहले 56 हजार करोड़ रुपए का एमओयू कर प्रदेश की जनता पर कर्ज का बोझ लादने की पूरी तैयारी कर ली। अब हम अपनी शर्ताें पर रिफाइनरी लगाने जा रहे हैं। इसमें प्रदेश की जनता की गाढ़ी कमाई के 40 हजार करोड़ रुपए हमने बचाये हैं। 

ऎसा है नवनिर्मित किशनगढ़ एयरपोर्ट
आधुनिक सुविधाओं से युक्त किशनगढ़ एयरपोर्ट के निर्माण पर 145 करोड़ रुपए व्यय किये गये हैं। इसका रन-वे दो किलोमीटर लंबा है और इसकी टर्मिनल बिल्डिंग की क्षमता 150 यात्रियों की है।

यहां रेनवाटर हारवेस्टिंग स्ट्रक्चर, एसटीपी, एलईडी लाइटिंग सिस्टम, फायर अलार्म सिस्टम, केन्द्रीयकृत पेयजल सुविधा, पैसेंजर लिफ्ट, रेस्टोरेन्ट जैसी सुविधाओं के साथ-साथ 6 चैक-इन-काउन्टर भी स्थापित किए गए हैं। यात्री एयरपोर्ट तक आसानी से पहुंच सके, इसके लिए एनएच-8 से टर्मिनल बिल्डिंग तक फोरलेन सड़क बनाई है। 

परवन परियोजना का काम शुरू, 800 गांवों को मिलेगा पेयजल

673 करोड़ रुपए की लागत से  बांध और टनल का निर्माण मुम्बई की फर्म ने शुरू किया, 2021 में होगा पूरा होने की उम्मीद

झालावाड़। परवन सिंचाई परियोजना का निर्माण कार्य अब शुरू हो चुका है। इसमें तमाम बाधाएं दूर हो चुकी हैं। इस परियोजना में अभी बांध और टनल निर्माण के लिए 673 करोड़ रुपए से मुम्बई की फर्म ने काम शुरू कर दिया है।
28 मई 2021 तक यह काम पूरा होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

अकावद क्षेत्र में परवन नदी पर 360 मीटर लंबे और 15 रेडियल गेटों सहित कंक्रीट बांध का निर्माण होगा। इसके साथ ही साथ 8 किमी लम्बी टनल का निर्माण होगा। इसके लिए मूलभूत सुविधाएं और भवन निर्माण सहित अन्य संरचनाएं तैयार की जा रही हैं।

केंद्रीय जल आयोग को प्रस्तुत की गई बांध के ओवरफ्लो और नॉन ओवरफ्लो की डिजाइन की खुदाई का काम भी शुरू हो चुका है। यहां पर क्वालिटी कंट्रोल भवन का निर्माण हो चुका है। विभागीय कार्यालय, संवेदक श्रमिकों के निवास, डिस्पेंसरी सहित अन्य निर्माण भी करवाए जा रहे हैं। टनल के एक्जिट बिंदु पर भूमि आवंटन हो चुका है।

इसका काम भी शुरू हो जाएगा। दरअसल परवन सिंचाई परियोजना कोटा संभाग की काफी महत्वपूर्ण परियोजना है। इस परियोजना का निर्माण यहां पर राजनीतिक मुद्दा भी बनता रहा है। सालों से कांग्रेस और भाजपा के बड़े नेता इस परियोजना के मुद्दे को चुनावों में भुनाते रहे हैं। अब जाकर यहां पर काम शुरू हो पाया है।

313 गांवों के खेत होंगे सरसब्ज
परवनसिंचाई परियोजना में कोटा, बारां और झालावाड़ के 313 गांवों की 1 लाख 31 हजार हैक्टेयर भूमि सरसब्ज होगी। इससे इन तीनों जिलों के 800 गांवों के लोगों को पीने का पानी भी मिल सकेगा। बांध क्षेत्र में आने वाले गांवों के खेत सरसब्ज होंगे। इस परियोजना से करीब एक लाख से अधिक किसानों को लाभ मिल सकेगा।