Thursday, July 9, 2026
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भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टोलरेंस की नीति पर कायम राजस्थान सरकार

जयपुर। राज्य सरकार द्वारा प्रख्यापित दण्ड विधियां (राजस्थान संशोधन) अध्यादेश, 2017 में ऎसा कोई प्रावधान नहीं है जिससे भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टोलरेंस की राज्य सरकार की इच्छा शक्ति कमजोर हो रही हो।  जीरो टोलरेंस की अपनी नीति पर कायम रहते हुए सरकार ने कहीं भी भ्रष्ट लोकसेवकों को संरक्षण देने की इस अध्यादेश में बात नहीं कही है।

महाराष्ट्र विधानसभा  संशोधन पारित कर चुकी
दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) एवं 190 (1) में इस प्रकार के संशोधन करने वाला राजस्थान पहला राज्य नहीं है, इससे पहले महाराष्ट्र विधानसभा 23 दिसम्बर, 2015 को इसी आशय का  संशोधन पारित कर चुकी है।

जिसके पिछे सिर्फ और सिर्फ एक ही मंशा है कि धारा 156(3) का कोई भी व्यक्ति गलत इस्तेमाल कर किसी भी ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ लोकसेवक की छवि खराब न कर सके।
 
73 प्रतिशत मुकदमों में पुलिस ने  एफआर लगाई
क्योंकि धारा 156 (3) में अदालत के माध्यम से पुलिस थानों में अधिकतर छवि खराब करने, नीचा दिखाने और व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण किसी भी प्रतिष्ठित और बड़े से बड़े लोकसेवक के खिलाफ मुकदमें दर्ज करवा दिए जाते हैं और मीडिया में उनके खिलाफ खबर छप जाती हैं।

इससे लोकसेवक की छवि तो धूमिल हो ही जाती है और उसे मानसिक संताप तथा झूठी बदनामी का सामना भी करना पड़ता है। बाद में ऎसे अधिकांश प्रकरण झूठे पाये जाते हैं और उनमें पुलिस एफआर लगाती है।

इसलिए यह संशोधन ऎसे झूठे मुकदमों पर अंकुश लगाने के लिए किये गये हैं ताकि ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ लोकसेवक अपने कर्तव्यों का निर्वहन बिना किसी मानसिक संताप के कर सकें और उन्हें झूठी बदनामी का शिकार नहीं होना पड़े।

उदाहरण के तौर पर 2013 से 2017 के बीच जितने भी मुकदमे 156 (3) में दर्ज हुए उनमें से करीब 73 प्रतिशत मुकदमों में पुलिस ने एफआर लगाई।

यानि इस अवधि में इन करीब 73 प्रतिशत लोगों को झूठी बदनामी का सामना करना पड़ा। उन्हें दोषी नहीं होते हुये भी न केवल मानसिक संताप झेलना पड़ा बल्कि न्यायालय और कार्यपालिका का समय भी जाया हुआ।

आरोप सही पाये गये तो कानूनी कार्यवाही
 इन संशोधनों का अर्थ कतई ये नहीं है कि किसी भी लोकसेवक के खिलाफ अदालत के माध्यम से पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज होगा ही नहीं।

इसके लिए 180 दिन के अंदर मंजूरी प्राधिकारी को किसी लोकसेवक के खिलाफ जांच कर सुनिश्चित करना होगा कि मुकदमा दर्ज होने योग्य है या नहीं। यदि आरोप सही पाये जाते हैं तो इसकी स्वीकृति दी जायेगी और मुकदमा दर्ज कर कानून सम्मत कार्रवाही होगी। 

अब तक यही होता आया है कि मुकदमा झूठा हो या सच्चा, मुकदमा दर्ज होते ही वह मीडिया के लिए बड़ी खबर बन जाता है और निर्दोष होते हुए भी संबंधित लोकसेवक को सामाजिक अपमान का सामना करना पड़ता है।

उसका नाम, उसका फोटो, और उसके परिवार के बारे में जानकारी तक प्रकाशित हो जाती है और उसकी मान-मर्यादा को, जो ठेस पहुंचती है, उसे वह जीवनभर नहीं भूल पाता।

भले ही बाद में प्रकरण झूठा निकल जाये। अब तक जितने भी ऎसे प्रकरण दर्ज हुए हैं उनमें ज्यादातर बाद में झूठे ही निकले हैं।  संशोधनों के बाद भी भ्रष्ट लोकसेवक कानून के दायरे से बाहर नहीं हो पायेगा। क्योंकि अगर आरोपों में सच्चाई पाई गई तो उसके खिलाफ हर हाल में कानूनी कार्रवाही की जायेगी। 

सुप्रीम कोर्ट ने भी की तल्ख टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने भी 156(3) के दुरुपयोग के संबंध में क्रिमिनल अपील संख्या 781/2012 में तल्ख टिप्पणी की है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने 17 नवम्बर 2015 को भी सिविल रिट पीटिशन नंबर 933 के मामले में दिए गए एक फैसले में यह टिप्पणी की थी कि सिस्टम में तभी सुधार हो सकता है।

जब ईमानदार अधिकारी या लोकसेवक को संरक्षण मिले तथा भ्रष्ट को यह महसूस कराया जा सके कि वो कानून से ऊपर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि ईमानदार लोकसेवक को संरक्षण मिलना न केवल उसके हितों की रक्षा के लिए बल्कि समाज हित में भी जरूरी है। 

पिछले साढ़े तीन साल में एसीबी में 1158 केस रजिस्टर
राजस्थान उन चुनिंदा राज्यों में है, जहां पिछले साढ़े तीन साल में एसीबी ने 1158 केस रजिस्टर किए हैं। इनमें 818 लोकसेवक तो ट्रेप हुए हैं जबकि आय से अधिक संपत्ति के 51 एवं पद के दुरुपयोग के 289 केस शामिल हैं।

राजस्थान तो उन चुनिंदा राज्यों में है जहां वरिष्ठ आईएएस अधिकारी (दो मौजूदा एवं एक सेवानिवृत्त) भी भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जा चुके हैं। राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में किसी तरह का संशोधन नहीं किया है।

जजों और सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ जांच अब आसान नहीं

नए अध्यादेश के मुताबिक ड्यूटी के दौरान किसी जज या किसी भी सरकारी कर्मचारी की कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट के जरिए भी एफआईआर दर्ज नहीं कर सकते हैं

जयपुर। राजस्थान में अब पूर्व व वर्तमान जजों, अफसरों, सरकारी कर्मचारियों और बाबुओं के खिलाफ पुलिस या अदालत में शिकायत करना आसान नहीं होगा। ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के लिए सरकार की मंजूरी अनिवार्य होगी। वसुंधरा राजे सरकार ने यह नया अध्यादेश पारित किया है।

इस नए अध्यादेश के मुताबिक ड्यूटी के दौरान किसी जज या किसी भी सरकारी कर्मचारी की कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट के जरिए भी एफआईआर दर्ज नहीं कर सकते हैं। इसके लिए सरकारी की अनुमति अनिवार्य होगी। हालांकि अगर सरकार इजाजत नहीं देती है तो 180 दिनों के बाद कोर्ट के जरिए एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है।

सरकार के इस नए अध्यादेश के तहत इस तरह के किसी भी सरकारी कर्मचारी, जज या अधिकारी का नाम, स्थान की जानकारी या किसी भी तरह की पहचान तब तक प्रेस रिपोर्ट में नहीं दे सकते जब तक सरकार इसकी इजाजत न दे। ऐसा नहीं करने पर दो साल की सजा का भी प्रावधान किया गया है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का रेट तय, जानिए क्या है प्रति ग्राम दाम

एसजीबी में निवेशक न्यूनतम 1 ग्राम और अधिकतम 500 ग्राम का निवेश कर सकता है

नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) की खरीद कीमत 2,971 रुपए प्रति ग्राम तय कर दी है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक इसके सब्सक्रिप्शन की अवधि 23 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तय है और इसका इश्यू प्राइज 2,971 प्रति ग्राम है। इसका निपटान (सेटलमेंट) 30 अक्टूबर को होगा।

यह एसजीबी कलेंडर का ही एक हिस्सा है जो बीते 12 हफ्तों से जारी है। इस कलेंडर के मुताबिक यह 9 अक्टूबर से लेकर 27 दिसंबर तर हर हफ्ते सोमवार से लेकर बुधवार तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। इस कलेंडर के अंतर्गत पहली किश्त 11 अक्टूबर को खत्म हुई है। इसका निपटान अगले हफ्ते के पहले कार्यकारी दिवस पर किया जाएगा।

इसमें नियत सप्ताह में प्राप्त हुए आवेदन ही मान्य किए जाएंगे।  इसमें कहा गया, “केंद्र सरकार जो कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के साथ परामर्श के क्रम में है ने तय किया है कि जिन आवेदकों ने इसके लिए आनलाइन आवेदन किया है और डिजिटल मोड में भुगतान किया है उन्हें इश्यू प्राइज पर 50 रुपए प्रति ग्राम का डिस्काउंट दिया जाएगा।”

ऐसे निवेशकों के लिए गोल्ड बॉन्ड का इश्यू प्राइज 2,921 रुपए प्रति ग्राम होगा। इस योजना के अंतर्गत सोने की एक यूनिट को एक ग्राम और इसके गुणांक में बांटा गया है। इसमें एक वित्त वर्ष के दौरान प्रति निवेशक न्यूनतम 1 ग्राम और अधिकतम 500 ग्राम का निवेश कर सकता है।

अगर अधिकतम सब्सक्रिप्शन की बात करें तो एक व्यक्ति (इंडीविजुअल) और हिंदु अनडिवाइडेड फैमिली (एचयूएफ) 4 किलोग्राम तक सब्सक्रिप्शन ले सकता है। वहीं किसी ट्रस्ट और इसके जैसी इकाइयों के लिए यह सीमा 20 किलोग्राम निर्धारित है। इसके बारे में सरकार की ओर से समय समय पर अधिसूचना जारी की जाती रहेगी।

भाई-दूज के दिन सोना हुआ सस्ता , जानिए कितने का हो गया 10 ग्राम

नई दिल्ली/ कोटा। शुक्रवार के कारोबार में सोने की कीमत में गिरावट देखने को मिली है। भाई-दूज के दिन सोना 100 रुपए कमजोर होकर 30,650 रुपए प्रति दस ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। इसकी प्रमुख वजह कमजोर वैश्विक संकेत और स्थानीय आभूषण निर्माताओं की ओर से सुस्त मांग रही।

हालांकि चांदी की कीमत में मामूली तेजी देखने को मिली है। शुक्रवार को चांदी 50 रुपए मजबूत होकर 40,850 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई है। इसकी प्रमुख वजह औद्योगिक इकाईयों की ओर से मिली-जुली मांग को माना जा रहा है।

व्यापारियों का कहना है कि कमजोर वैश्विक संकेतों के अलावा, मजबूत होते डॉलर के कारण कीमतों पर असर हुआ हुआ है। वहीं घरेलू बाजार में घरेलू ज्वैलर्स और खुदरा विक्रेताओं की मांग में गिरावट ने मुख्य रूप से सोने की कीमतों पर असर डाला है।

वैश्विक स्तर पर न्यूयॉर्क में सोना 0.75 फीसद की गिरावट के साथ 1,280 डॉलर प्रति औंस पर और चांदी 1.34 फीसद की गिरावट के साथ 17.00 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई है।

 दिल्ली में 99.9 फीसद और 99.5 फीसद शुद्धता वाले सोने की कीमत क्रमश: 100 रुपए गिरकर 30,650 रुपए और 30,500 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है। गुरूवार को विश्वकर्मा पूजा के चलते बुलियन मार्केट बंद रहा था।

कोटा सर्राफा
चांदी 40300 रुपए प्रति किलोग्राम
सोना केटबरी 30600 रुपए प्रति दस ग्राम,  35700 रुपए प्रति तोला।
सोना शुद्ध 30750 रुपए प्रति दस ग्राम,  35870  रुपए प्रति तोला।

किसानों के उत्थान के लिए इफ्को के प्रयासों की मोदी ने तारीफ की

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत की विशाल सहकारी समिति इफ्को द्वारा किसान समुदाय को उर्वरकों के उचित प्रयोग, उपयुक्त उन्नत तकनीकों के चयन और नकदी रहित लेने-देन के प्रशिक्षण के लिए किए जा रहे उपायों से वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने में मदद मिलेगी। 
     
इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लि़ (इफ्को)  की स्वर्ण जयंती पर मोदी ने एक संदेश में कहा, किसानों और सहकारी संस्थाओं के उत्थान में इफ्को का योगदान सराहनीय है।

प्रधानमंत्री ने इफको के प्रबंध निदेशक यू एस अवस्थी को लिखे पत्र में कहा है कि समिति ने यूरिया की कालाबाजारी को रोकने के लिए सरकार द्वारा शुरू किए गए नीम लेपित यूरिया कार्यक्रम को लागू करने में भी एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मोदी ने देशभर में किसानों और सहकारी समिति के सदस्यों को कषि क्षेत्र में डिजिटलीकरण और नकदी रहित लेन—देन तथा फसलों के लिए  पोषक तत्वों के सही प्रयोग की जानकारी देने समेत कई अन्य विषयों पर किसानों को प्रशिक्षित करने के लिए इफको द्वारा आयोजित कार्यक्रमों की प्रशंसा की।

सरकार द्वारा किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए  मोदी ने कहा  कि इफको की किसानों को उन्नत कषि तकनीक से जोड़ने की पहल इस लक्ष्य को हासिल करने में मददगार साबित होगी।  
    
वर्ष 1967 में मात्र 57 सहकारी समितियों के साथ स्थापित इफको, आज देश में 36,000 से अधिक  सहकारी समितियों का एक विशाल महासंघ है। यह इस समय 125 जगहों पर किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इस सहकारी उपक्रम ने पिछले वित्त वर्ष में 22500 करोड़ रपये का कारोबार किया।

इसने इस दौरान 85 लाख टन उर्वरकों का उत्पादन और 110 लाख टन उर्वरकों की बिक्री की। इसके देश में पांच और दूसरे देशों में तीन कारखाने हैं। इफको साधारण बीमा, ग्रामीण दूरसंचार और ग्रामीण खुदरा कारोबार भी करती है। अवस्थी ने उर्वरक क्षेत्र में इस माह 50वां वर्ष पूरा किया। वह पिछले करीब 25 वर्ष से इफको में हैं। 

नोटबंदी व जीएसटी से सुस्त रही दीपावली, 40 प्रतिशत कम रहा कारोबार: कैट

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नयी दिल्ली। दीपावली का त्यौहार आमतौर पर कारोबार और व्यापार जगत के लिए उत्साहवर्धक रहता आया है पर असंगठित क्षेत्र के व्यापारियों के एक प्रमुख का कहना है कि इस साल नोटबंदी तथा जीएसटी के कारण यह तस्वीर बदली हुई थी।

संगठन का दावा है कि इस दीपावली बिक्री में पिछले साल की तुलना में 40 प्रतिशत की गिरावट आयी और यह पिछले दस सालों की सबसे सुस्त दीपावली मानी माना जा रहा है।

खुदरा कारोबारियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज जारी बयान में कहा कि कि देश में सालाना करीब 40 लाख करोड़ रुपये का खुदरा कारोबार होता है। इसमें संगठित क्षेत्र की हिस्सेदारी महज पांच प्रतिशत है जबकि शेष 95 प्रतिशत योगदान असंगठित क्षेत्र का है।

दीपावली त्यौहार के दस दिन पहले से शुरू होने वाली त्यौहारी बिक्री पिछले सालों में करीब 50 हजार करोड़ रुपये की रही है। इस साल यह 40 प्रतिशत नीचे गिर गयी और इस दृष्टि से यह पिछले दस सालों की सबसे खराब दीपावली रही। है।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि बाजारों में उपभोक्ताओं की कम उपस्थिति, सीमित खर्च आदि इस दीपावली कारोबार कम रहने के मुख्य कारण हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि नोटबंदी के बाद अस्थिर बाजार तथा माल एवं सेवा कर जीएसटी व्यवस्था की दिक्कतों ने बाजार में संशय का माहौल तैयार किया जिसने उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों की धारणा प्रभावित की।

रेडीमेड कपड़े, उपहार के सामान, रसोई के सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, टिका उपभोक्ता उत्पाद, एफएमसीजी वस्तुएं, घड़ियां, बैग-ट्रॉली, घर की साज-सज्जा, सुखे मेवे, मिठाइयां, नमकीन, फर्निचर, लाइट-बल्ब आदि चीजें दीपावली के दौरान मुख्य तौर पर खरीदी जाती हैं। कैट ने कहा कि व्यापारियों की उम्मीदें अब विवाह के सीजन पर लगी हुई हैं।

राष्ट्रीय बचत पत्र अब आप बैंकों से भी ले सकेंगे

नई दिल्ली। सेविंग्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक हम कदम उठाया है। अब बैंक भी राष्ट्रीय राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) व मासिक आय योजना समेत तमाम लघु बचत स्कीमों के तहत जमा स्वीकार करेंगे। केंद्र सरकार ने इसके लिए बैंकों को मंजूरी दे दी है।

केंद्र ने इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी है। आईसीआीसीआी समेत तीन निजी बैंक भी इसके दायरे में आएंगे। लघु बचतों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। अब तक अधिकांश स्माल सेविंग्स स्कीमें डाकघरों के जरिये ही बेची जाती थीं।

अधिसूचना के मुताबिक सभी सरकारी बैंक और निजी क्षेत्र के तीनों दिग्गज-आईसीआईसीआई, एक्सिस और एचडीएफसी बैंक लघु बचत स्कीमों के तहत डिपॉजिट स्वीकार कर सकेंगे।

अभी तक बैंक लोक भविष्य निधि (पीपीएफ), किसान विकास पत्र-2014, सुकन्या समृद्धि योजना, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना-2004 के लिए ही सब्सक्रिप्शन स्वीकार कर सकते थे। अब सभी स्कीमों के लिए बैंकों को अनुमति देने के चलते सरकार ज्यादा धनराशि जुटा सकेगी।

पिछले महीने सरकार ने अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही के लिए लघु बचतों पर ब्याज दर को अपरिवर्तित रखने का एलान किया है। पिछले साल अप्रैल से केंद्र हर तिमाही लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा करता है।

दरों में बदलाव करने पर उसकी ओर से अधिसूचना भी जारी की जाती है। फिलहाल पीपीएफ पर सालाना 7.8 फीसद ब्याज मिलता है। किसी भी डाकघर या बैंक में 15 साल के लिए पीपीएफ खाता खोला जा सकता है।

यह खाता कोई भी वयस्क खोल सकता है। नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट यानी एनएससी पर ब्याज की दर 7.8 फीसद है। पीपीएफ और राष्ट्रीय बचत पत्र दोनों में निवेश पर आयकर में छूट भी मिलती है।

किसान विकास पत्र में निवेश करने वालों को 7.5 फीसद का सालाना रिटर्न मिलता है। इसकी मैच्योरिटी अवधि 115 महीने निर्धारित है। इसी तरह कोई भी व्यक्ति बच्चियों के लिए सुकन्या समृद्धि खाता खोल सकता है।

फिलहाल इस स्कीम पर 8.3 फीसद वार्षिक ब्याज दर तय है। इसी तरह पांच साल के सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम में निवेश पर भी इतना ही रिटर्न मिल रहा है। इस स्कीम पर हर तिमाही ब्याज दिया जाता है।’

फोर्ड इकोस्पोर्ट फेसलिफ्ट की लॉन्चिंग 9 नवंबर को होगी

मुंबई। अमेरिका की कार निर्माता कंपनी फोर्ड अगले महीने अपनी पॉपुलर कॉम्पैक्ट एसयूवी कार EcoSport का फेसलिफ्ट वर्जन लॉन्च करने जा रही है।

ऑनलाइन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कार की लॉन्चिंग 9 नवंबर को होगी। यह कार लॉन्चिंग से पहले ही कई बार देखी जा चुकी है जिसके चलते कार के लुक और फीचर्स का खुलासा हो चुका है।

कंपनी फेसलिफ्ट वर्जन में कार के लुक में बदलाव के अलावा नए फीचर्स जोड़ने जा रही है। नई कार की कीमत 7.5 लाख रुपए से 11 लाख रुपए के बीच हो सकती है।

बदलाव की बात करें तो इसमें हेक्सागोनल ग्रिल, नया हेडलैंप, रिडिजाइन फ्रंट बंपर और फॉग लैंप दिए गए हैं। कार के एलॉय व्हील को भी बदला गया है। कार के इंटीरियर में भी काफी बदलाव किया गया है।

सेंट्रल कंट्रोल को नया लेआउट दिया गया है और पहले से बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है। इंस्ट्रूमेंट कल्चर और स्टीयरिंग व्हील को भी बदला गया है।

इंजन की बात करें तो कार में तीन विकल्प दिए जाएंगे। फोर्ड इकोस्पोर्ट फेसलिफ्ट में  1.5 लीटर डीजल और 1.0 लीटर इकोबूस्ट पेट्रोल इंजन तो रहेगा ही, इसके अलावा 1.5 लीटर का तीन सिलिंडर पेट्रोल इंजन भी दिया जाएगा।

यह इंजन 120 एचपी की पावर जेनरेट करता है। कंपनी इस कार के जरिए अपने ड्रैगन सीरीज पेट्रोल इंजन को भारतीय बाजार में लाने जा रही है।

सितंबर के लिये अब तक 37 लाख जीएसटीआर-3बी भरे गये

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नयी दिल्ली। जीएसटीएन  पर सितंबर महीने के लिये शुक्रवार शाम सात बजे तक करीब 37 लाख जीएसटी रिटर्न भरे गये और हर घंटे के आधार पर 75,000 बिक्री आंकड़े इसमें अपलोड किये जा रहे हैं। जीएसटीएन नेटवर्क के चेयरमैन अजय भूषण पांडे ने आज यह जानकारी दी।

माल एवं सेवा कर व्यवस्था के तहत जीएसटीआर-3बी में शुरूआती रिटर्न भरने की समय सीमा शुक्रवार को समाप्त हो गई है। पांडे ने कहा कि जीएसटीएन प्रणाली स्थिर है और फिलहाल प्रणाली के तहत जो आंकड़े आ रहे हैं उसमें उसकी कुल क्षमता का मात्र 30 प्रतिशत ही इस्तेमाल हो रहा है। पिछले दो दिनों में इसमें 20 लाख रिटर्न अपलोड किये गये।

उन्होंने कहा, शाम 7 बजे तक 36.84 लाख रिटर्न भरे गये हैं। रिटर्न फाइल करने के काम में तेजी आ रही है। औसतन हर घंटे के हिसाब से 75,000 रिटर्न अपलोड किये जा रहे हैं। जीएसटीएन प्रणाली स्थिर है। हम उम्मीद करते हैं कि अधिक-से-अधिक लोग निर्धारित समय में रिटर्न फाइल कर सकेंगे।

देश में जीएसटी व्यवस्था एक जुलाई से लागू हुई है। उसके बाद यह तीसरा महीना है जिसके लिये कंपनियों को जीएसटीआर-3बी रिटर्न भरना है। इसमें उन्हें अपनी बिक्री के बारे में पूरा ब्योरा देना होता है।

जुलाई और अगस्त के लिये क्रमश: 55.68 लाख और 50 लाख रिटर्न भरे गये जिससे क्रमश: 95,000 करोड़ रुपये और 92,000 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ।

पांडे ने कहा कि पहले दो महीनों में कंपनियों ने निर्धारित तिथि समाप्त होने के बाद भी रिटर्न अपलोड किये। सितंबर माह के रिटर्न का आंकड़ा भी अंतत: बढ़ेगा।

उन्होंने कहा, अगर हम नेटवर्क की क्षमता देखे तो जीएसटीएन केवल 30 प्रतिशत का उपयोग कर रहा है। इस लिहाज से सर्वर में और रिटर्न अपलोड करने की काफी गुंजाइश है।

अनुपालन बोझा कम करने के लिये जीएसटी परिषद ने कंपनियों को जीएसटी क्रियान्वयन के पहले छह महीने दिसंबर तक फार्म जीएसटीआर-3बी में अपना शुरूआती कर रिटर्न भरने की अनुमति दी है।

इसके अनुसार जीएसटीआर-3बी रिटर्न को अगले महीने की 20 तारीख तक भरना होगा। इसका मतलब है कि सितंबर का रिटर्न 20 अक्तूबर तक भरना होगा।

हालांकि, अगस्त के लिये रिटर्न भरे जाते समय नेटवर्क ने बेहतर तरीके से काम किया। जीएसटी के समक्ष समस्याओं पर गौर करने और उसकी पहचान कर पोर्टल के सुचारू रूप से काम करने के लिये बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी की अध्यक्षता में मंत्रियों के समूह की दो बार बैठक हुई है।