Saturday, May 16, 2026
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अमेरिका की दंडात्मक व्यापारिक कार्रवाई पर भारत के उद्योग जगत का कड़ा एतराज

नई दिल्ली। भारत के उद्योग जगत ने विनिर्माण में हमेशा जरूरत से ज्यादा क्षमता का आरोप लगाकर धारा 301 के जरिये उसकी जांच के अमेरिकी फैसले का कड़ा विरोध किया है।

उद्योगों का तर्क है कि देश में क्षमता का विस्तार मांग के मुताबिक होता है, न कि निर्यात को प्रभावित करने के लिए क्षमता बढ़ाई जाती है। उन्होंने अमेरिका को ऐसी दंडात्मक व्यापार कार्रवाई को लेकर आगाह करते हुए कहा है कि इससे साझा रणनीतिक उद्देश्य कमजोर पड़ सकते हैं।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) कार्यालय को दिए गए ज्ञापन में विभिन्न उद्योग संगठनों और कंपनियों ने कहा कि घरेलू आर्थिक हकीकतों के मुताबिक भारत में विनिर्माण होता है और अतिरिक्त उत्पादन वैश्विक व्यापार की गति को विकृत करने से इसका कोई संबंध नहीं है।

टेक्सटाइल दिग्गज शाही एक्सपोर्ट्स ने अपने ज्ञापन में कहा, ‘भारत का विनिर्माण संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता का संकेतक नहीं है, बल्कि घरेलू मांग की बुनियादी जरूरतों के मुताबिक आवश्यक है।

अमेरिका को कोई भी दंडात्मक व्यापार कार्रवाई नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे अनजाने में साझा भूराजनीतिक और आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन के लक्ष्य कमजोर पड़ सकते हैं।’

ट्रेड ऐक्ट 1974 के तहत शुरू की गई धारा 301 की जांच में यह जानने की कवायद होती है कि क्या संबंधित देश ऐसी नीतियां या बाजार की स्थिति बना रहा है, जिससे ढांचागत हिसाब से विनिर्माण क्षेत्र में अतिरिक्त क्षमता बन रही है और इसकी वजह से कारोबार का प्रवाह बाधित हो रहा है।

शाही एक्सपोर्ट्स ने बताया कि भारत के कपड़ा और परिधान बाजार लगभग 182 अरब डॉलर का है, जिसमें से लगभग 80 प्रतिशत घरेलू मांग में इस्तेमाल होता है। कुल विनिर्माण का लगभग 37 अरब डॉलर का निर्यात होता है और इसमें से दो-तिहाई से अधिक अमेरिका से इतर बाजारों में जाता है।

इससे अमेरिका के बाजार में सीमित कारोबार का पता चलता है। अमेरिका के परिधान आयात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 6 प्रतिशत है, और शिपमेंट माल पाटने पर केंद्रित न होकर ऑर्डर के मुताबिक जाता है। इसमें ‘डंपिंग या मूल्य को विकृत करने का कोई सबूत नहीं है।’

ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एक्मा) का भी कहना है कि यह क्षेत्र बाजार की मांग के मुताबिक चलता है और सरकार के समर्थन से कोई अनुचित लाभ नहीं होता है। इसने कहा कि भारत वाहन कल पुर्जा क्षेत्र में बाजार को प्रभावित करने वाली सब्सिडी, कम वेतन, सरकारी उद्यमों या सब्सिडी वाले ऋण का असर नहीं है।

इसने कहा है कि निर्यात वृद्धि बहुराष्ट्रीय ओएमई की वैश्विक सोर्सिंग की रणनीति से जुड़ी है। साथ ही अमेरिका के आयात में भारत की हिस्सेदारी कीमत या आपूर्ति को प्रभावित करने के हिसाब से बहुत कम है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने तर्क दिया कि भारत की नीतियां ‘न तो अनुचित हैं न भेदभावपूर्ण’। इसमें कोई सबूत नहीं मिलता कि अमेरिकी वाणिज्य पर यह बोझ डाल रही हैं।

इसने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिकी विनिर्माण आयात में भारत की हिस्सेदारी मामूली है, जो बाजार को विकृत करने या घरेलू उत्पादन की जगह लेने के लिए नाकाफी है।

कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव की ओर इशारा किया है। संगठन का कहना है कि चीन से अमेरिकी आयात में तेज गिरावट आई है और यह 2016 के 41.7 अरब डॉलर से घटकर 2024 में 20.8 अरब डॉलर रह गया है। इन प्रतिस्पर्धी वजहों से भारत का निर्यात बढ़ा है।

इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस ने कहा कि क्षेत्र में अतिरिक्त क्षमता बनाने या बनाए रखने के उद्देश्य से कोई नीति नहीं बनी है। वहीं इंडियन सोलर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने कहा है कि घरेलू कमी के कारण विनिर्माण बढ़ा है। इसने कहा, ‘भारत वर्तमान में सौर उत्पादों की गंभीर कमी का सामना कर रहा है, और इसकी मौजूदा उत्पादन क्षमता स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है।’ संगठन ने कहा कि यह क्षेत्र अमेरिकी वाणिज्य पर बोझ नहीं डालता है।

कालीन निर्यात संवर्धन परिषद ने कहा कि कालीन जैसे श्रम केंद्रित क्षेत्र में कारीगरों के करघों के मुताबिक उत्पादन होता है और यह पूरी तरह मांग से संचालित है। इस क्षेत्र में 85 से 90 प्रतिशत उत्पादन ऑर्डर पर होता है। इंडियन स्टील एसोसिएशन ने इस बात पर जोर दिया कि क्षमता में बढ़ोतरी बुनियादी ढांचे के विकास और शहरीकरण के अनुरूप है, जिसमें प्रति व्यक्ति खपत अभी भी वैश्विक औसत से नीचे है। एसोसिएशन ने यह भी उल्लेख किया कि अमेरिका माल भेजने वाले निर्यातकों को पहले से ही धारा 232 के तहत शुल्क व अन्य कारोबारी व्यवधानों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे अतिरिक्त कदम का कोई मतलब नहीं रह जाता है।

Stock Market: हरे निशान पर खुले बाजार; सेंसेक्स 78000 और निफ्टी 24200 के पार

नई दिल्ली। Stock Market Update, April 17, 2026: एशियाई बाजारों में गिरावट के बीच भारतीय शेयर बाजार हफ्ते के अंतिम ट्रेडिंग सेशन यानी शुक्रवार (17 अप्रैल) को मामूली बढ़त के साथ खुले। सेंसेक्स 154 अंकों की बढ़त के साथ 78142 पर पहुंच गया है। जबकि, निफ्टी 16 अंक ऊपर 24216 के लेवल पर है। एनएसई पर 2545 स्टॉक्स ट्रेड कर रहे हैं। इनमें 2080 हरे और 394 लाल हैं।

तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) सपाट रुख के साथ 77,976.13 अंक पर खुला। गुरुवार को यह 77,988 पर बंद हुआ था। सुबह 9:33 बजे यह 95.38 अंक या 0.12 फीसदी की बढ़त लेकर 78,084.06 पर चल रहा था।

इसी तरह, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 (Nifty-50) 24,165 अंक पर लगभग सपाट खुला। सुबह 9:35 बजे यह 12.40 अंक या 0.05 फीसदी की मामूली गिरावट लेकर 24,184 . 35 पर ट्रेड कर रहा था।

एफएमसीजी सेक्टर की कंपनियों में खरीदारी से बाजार को समर्थन मिल रहा है। हालांकि, निवेशक अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर और अधिक स्पष्टता के इंतजार के बीच सतर्क रुख अपना रहे हैं।

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने दोहराया कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध जल्द खत्म होना चाहिए। उन्होंने गुरुवार को यह भी घोषणा की कि लेबनान और इज़राइल 10 दिनों के युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इज़राइल द्वारा लेबनान पर हमले रोकना, ईरान की उन प्रमुख शर्तों में से एक था, जिसके बाद वह युद्ध खत्म करने को तैयार हुआ। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सप्ताहांत में बैठक करने वाले हैं।

ग्लोबल मार्केट के संकेत

एशियन मार्केट का हाल
अमेरिका-ईरान युद्ध को लेकर सतर्कता के बीच एशियाई बाजारों में शुक्रवार को गिरावट रही। जापान का निक्केई 225 0.7 फीसदी गिर गया, और टॉपिक्स 0.62 फीसदी गिर गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.43 फीसदी गिर गया जबकि कोस्डैक 0.35 फीसदी गिर गया। हांगकांग हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स ने गिरावट के साथ खुलने का संकेत दिया।

गिफ्ट निफ्टी टुडे
गिफ्ट निफ्टी 24,140 के आसपास कारोबार कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद भाव से करीब 56 अंकों की छूट है। यह भारतीय शेयर बाजार के सूचकांकों के लिए नकारात्मक शुरुआत का संकेत देता है।

वॉल स्ट्रीट का हाल
अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को उच्च स्तर पर बंद हुए। नैस्डैक और एसएंडपी 500 ने इंट्राडे रिकॉर्ड ऊंचाई को छू लिया। डॉऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 115.00 अंक या 0.24 फीसदी बढ़कर 48,578.72 पर पहुंच गया, जबकि एसएंडपी 500 18.33 अंक या 0.26 फीसदी बढ़कर 7,041.28 पर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 86.69 अंक या 0.36 फीसदी बढ़कर 24,102.70 पर बंद हुआ।

Kota Mandi: घटे भावों पर लिवाली निकलने से चना, सोयाबीन और सरसों तेज बिकी

कोटा। Kota Mandi Price Today: भामाशाह अनाज मंडी में गुरुवार को घटे भावों पर लिवाली निकलने से चना, सोयाबीन और सरसों 50 रुपये तेज बिकी। लहसुन 300 रुपए ऊंचा बिका। मंडी में सभी कृषि जिंसों की मिलाकर करीब दो लाख कट्टे और लहसुन की 12000 कट्टे की आवक रही। जिंसों के भाव रुपये प्रति क्विंटल इस प्रकार रहे-

गेहूं नया मिल लस्टर 2250 से 2300, गेहूं एवरेज टुकड़ी 2350 से 2450, बेस्ट टुकड़ी 2500 से 2650, ज्वार शंकर 1700 से 2300, ज्वार सफेद 2800 से 5000, बाजरा 1800 से 2050, मक्का लाल 1400 से 1800, मक्का सफेद 1600 से 2200, जौ नया 1900 से 2250 रुपये प्रति क्विंटल।

धान सुगन्धा 2800 से 3601, धान (1509) 3400 से 4200, धान (1847) 3200 से 4151, धान (1718-1885) 4000 से 4700, धान (पूसा-1) 3000 से 4300, धान (1401-1886) 4100 से 4550, धान दागी 1500 से 3900 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन 4500 से 5650, सोयाबीन बीज क्वालिटी 5600 से 5700, सरसों 6200 से 6751 अलसी 6800से 7600, तिल्ली 7000से 8500 रुपये प्रति क्विंटल। मूंग 6000 से 7000, उड़द 4500 से 8000, चना देशी 4800 से 5200, चना मौसमी नया 5100 से 5100, चना पेप्सी 5100 से 5251, चना डंकी पुराना 4000 से 4600, चना काबुली 5500 से 6500 रुपये प्रति क्विंटल।

लहसुन 2500 से 13000, मैथी पुरानी 5000 से 5800, मैथी नयी 5800 से 6250, धनिया बादामी 11000 से 11500, धनिया ईगल 11500 से 12000,धनिया रंगदार 13000 से 15000 रुपये प्रति क्विंटल।

यामाहा ने लॉन्च किया नया स्टाइलिश स्कूटर, जानिए फीचर्स और कीमत

नई दिल्ली। यामाहा मोटर इंडिया ने फेसिनो 125 (Yamaha Fascino) का नया अपडेट वर्जन लॉन्च किया है। कंपनी ने इसके डिजाइन में कई सुधार किए गए हैं। यह अपडेट कंपनी के लिए एक बड़ी उपलब्धि का सेलिब्रेशन भी है।

दरअसल, फेसिनो की लॉन्च के बाद से अब तक इसकी 1.5 मिलियन यूनिट का प्रोडक्शन हो चुका है। सबसे बड़ा बदलाव इसके पिछले हिस्से में देखने को मिलता है। इसने डिजाइन पर कंपनी ने काफी काम किया है। इसका पिछला हिस्सा अब पहले से ज्यादा छोटा लेकिन बेहतर नजर आता है।

अपडेटेड यामाहा फेसिनो 125 के डिजाइन की बात करें तो इसमें नए LED टेल लैंप, फ्लैशर और ब्रांड का खास Viconic स्टाइलिंग एलिमेंट इसे ज्यादा प्रीमियम लुक देता है। डिजाइन से जुड़े ये सभी अपडेट यामाहा की इंडिया R&D टीम द्वारा सोचे और लागू किए गए हैं। 2026 यामाहा फेसिनो 125 Fi तीन वैरिएंट में उपलब्ध है, जिसमें कई कलर ऑप्शन भी मिलेंगे। भारतीय बाजार में इसका मुकाबला होंडा एक्टिवा, हीरो मेस्ट्रो, टीवीएस जुपिटर, सुजुकी एक्सेस जैसे मॉडल से होता है।

2026 यामाहा फेसिनो 125 के वैरिएंट और कीमतें
वैरिएंटकलर्सएक्स-शोरूम कीमत
फेसिनो Sमैट ग्रे, मैट ब्लैक95,200 रुपए
फेसिनो डिस्ककूल ब्लू मेटैलिक, मेटैलिक लाइट ग्रीन, डार्क मैट ब्लू88,000 रुपए
फेसिनो ड्रमविविड रेड, मेटैलिक ब्लैक, मेटैलिक व्हाइट76,500 रुपए


अपडेटेट फेसिनो का एंट्री-लेवल ड्रम वैरिएंट की एक्स-शोरूम कीमत 76,500 रुपए है। इसे विविड रेड, मेटैलिक ब्लैक और मेटैलिक व्हाइट कलर ऑप्शन में खरीद सकते हैं। इसके ऊपर फेसिनो डिस्क वैरिएंट आता है। जिसे कूल ब्लू मेटैलिक, मेटैलिक लाइट ग्रीन और डार्क मैट ब्लू कलर ऑप्शन में खरीद सकते हैं। इसकी एक्स-शोरूम कीमत 88,000 रुपए है। जबकि, टॉप वैरिएंट फेसिनो S है। इसे मैट ग्रे और मैट ब्लैक कलर में खरीद सकते हैं। इसकी एक्स-शोरूम कीमत 95,200 रुपए है।

2026 यामाहा फेसिनो 125 का इंजन
इंजन की बात करें तो, फेसिनो में पहले की तरह ही 125cc ब्लू कोर इंजन लगा है। यह एयर-कूल्ड, फ्यूल-इंजेक्टेड मोटर यामाहा के स्मार्ट मोटर जनरेटर (SMG) सिस्टम से जुड़ा है, जो साइलेंट स्टार्ट और बेहतर पावर असिस्ट जैसे फीचर्स देता है। यह हाइब्रिड टेक्नोलॉजी रुक-रुककर चलने वाले ट्रैफिक में बेहतर शुरुआती एक्सीलरेशन देती है। साथ ही, अच्छी फ्यूल एफिशिएंसी भी बनाए रखने में भी मदद करती है।

यामाहा फेसिनो 125 के फीचर्स
इसका स्टॉप एंड स्टार्ट सिस्टम (SSS) और E20 फ्यूल कम्पैटिबिलिटी जैसे फीचर्स इसकी उपयोगिता को और बढ़ाते हैं। हार्डवेयर के मामले में इस स्कूटर में टेलीस्कोपिक फ्रंट सस्पेंशन, साइड-स्टैंड इंजन कट-ऑफ और 21-लीटर का अंडरसीट स्टोरेज कम्पार्टमेंट दिया गया है। प्रीमियम फेसिनो S वैरिएंट में एक कलर TFT इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलता है, जो टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन और आंसर बैक फंक्शन को सपोर्ट करता है।

अमेरिका ने रूसी-ईरानी तेल पर छूट खत्म की, जानिए भारत पर क्या होगा असर

नई दिल्ली। अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल खरीदने के लिए दी गई छूट खत्म कर दी है। इससे भारत पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है। इसकी वजह यह है कि भारत ने हाल में इन देशों से काफी तेल खरीदा था जिससे होर्मुज स्ट्रेट से होने वाला आयात की काफी हद तक भरपाई हो गई थी।

खासकर रूस के तेल की खरीद बंद होने से भारतीय रिफाइनर्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा बड़ा आयातक है और अपना करीब 90 फीसदी क्रूड आयात करता है।

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने वाइट हाउस में एक ब्रीफिंग में कहा कि अमेरिका रूसी और ईरानी तेल पर दी गई छूट को रिन्यू नहीं करेगा। यह छूट उस तेल पर दी गई थी जो 11 मार्च से पहले अपलोड किया जा चुका था। रूसी तेल पर दी गई छूट की मियाद शनिवार को खत्म हो चुकी है जबकि ईरानी तेल की मियाद रविवार को खत्म हो रही है। हालांकि ट्रंप सरकार के अधिकारी पहले ही कह चुके थे कि यह छूट रिन्यू नहीं होगी।

अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था। इसके बाद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आवाजाही बंद हो गई थी। दुनिया का 20 फीसदी कच्चा तेल और एक तिहाई गैस इसी रास्ते से गुजरती है।

भारत का ज्यादातर तेल और गैस इसी रास्ते आता है। इससे भारत में तेल और गैस की स्थिति टाइट हो गई थी। लेकिन अमेरिकी छूट से भारतीय रिफाइनरीज को रूसी तेल खरीदने का मौका मिला और उन्होंने रूस से करीब 30 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीदा।

इंटेलीजेंस फर्म Kpler के मुताबिक मार्च में भारत ने रूस से रोजाना औसतन 1.98 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीदा जो जून 2023 के बाद सबसे ज्यादा है। अप्रैल में यह आंकड़ा गिरकर 1.57 मिलियन बैरल रह गया। लेकिन इसकी बड़ी वजह यह है कि नयारा एनर्जी की रोजाना 400,000 बैरल क्षमता वाली रिफाइनरी मेंटनेंस के लिए बंद थी। भारत ने इस महीने डिलीवरी के लिए रूस से करीब 60 मिलियन बैरल तेल खरीदा है।

आगे बढ़ेगी मुश्किल
पिछले साल के अंत में भारत ने अमेरिकी दबाव के कारण रूस से तेल की खरीदारी में कटौती की थी। इस कारण जनवरी की शुरुआत में समुद्र में रूस के अनबिके तेल का मात्रा करीब 155 मिलियन बैरल पहुंच गई थी जबकि पिछले साल के मध्य में यह 93.2 मिलियन बैरल थी। डेटा इंटेलीजेंस फर्म Vortexa के आंकड़ों में यह बात सामने आई है। अभी रूस का करीब 100 मिलिटन बैरल तेल समुद्र में जहाजों में भरा है। इनमें कुछ कार्गो ऐसे भी हैं जो खरीदे जा चुके हैं।

Stock Market: सेंसेक्स 122 अंक टूटकर 77988 पर, निफ्टी 24200 के नीचे बंद

नई दिल्ली। Stock Market Closed: घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार के दिन लाल निशान पर क्लोजिंग हुई। शुरुआती बढ़त गंवाकर 30 शेयरों का बीएसई सेंसेक्स 122.56 (-0.16%) अंकों की गिरावट के साथ 77,988.68 के स्तर पर बंद हुआ। दूसरी ओर, निफ्टी 34.55 (-0.14%) अंक टूटकर 24,196.75 के स्तर पर बंद हुआ।

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 (Nifty-50) भी मजबूती के साथ 24,385 अंक पर खुला। कारोबार के दौरान यह 24,400.95 अंक के इंट्रा-डे हाई तक गया। अंत में 34.55 अंक या 0.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,196 पर बंद हुआ।

अमेरिका और ईरान में बातचीत फिर से शुरू होने की उम्मीद में शेयर बाजार में आज तेजी के साथ खुला था। बीएसई सेंसेक्स में शुरुआती कारोबार में 500 अंक से अधिक की तेजी आई जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 इंडेक्स में 150 अंक उछला।

लेकिन दिन चढ़ने के साथ यह निगेटिव हो गया। बैंकिंग और ऑटो शेयरों में गिरावट के कारण सेंसेक्स आखिरकार 122.56 अंक यानी 0.16% गिरावट के साथ 77,988.68 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी 34.55 अंक यानी 0.14% की गिरावट के साथ 24,196.75 अंक पर आ गया।

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 15 गिरावट के साथ बंद हुए। ट्रेंट, इटरनल, अडानी पोर्ट्स, बीईएल, लार्सन एंड टुब्रो, इन्फोसिस, टाटा स्टील, टीसीएस, एशियन पेंट्स, आईटीसी और बजाज फिनसर्व में तेजी रही।

दूसरी ओर एचडीएफसी बैंक, टाइटन, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारती एयरटेल, कोटक बैंक और बजाज फाइनेंस में गिरावट रही। निफ्टी में एचडीएफसी बैंक, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन और एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में सबसे ज्यादा गिरावट रही।

CBSE 10th का फाइनल रिजल्ट, 93.70% स्टूडेंट्स परीक्षा में सफल

नई दिल्ली। CBSE 10th Result 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा दसवीं (सेकेंडरी) का रिजल्ट जारी कर दिया गया है। क्लास 10th का रिजल्ट इस बार पिछले वर्ष की अपेक्षा बेहतर दर्ज हुआ और कुल 93.70% स्टूडेंट्स ने बोर्ड परीक्षा में सफलता प्राप्त की।

इसी में से दिल्ली की हितिशा सोगानी ने भी 10th क्लास में 98.4% अंक पाकर राजधानी में टॉप किया है। टॉपर की मार्कशीट अब वायरल हो रही है जिसमें उनके द्वारा किये गए शानदार प्रदर्शन का नजारा देखने को मिल रहा है।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ( सीबीएसई ) के 10वीं के पहले बोर्ड एग्जामिनेशन में 55368 स्टूडेंट्स ने 95% और इससे ऊपर का स्कोर पाया है। ये स्टूडेंट्स टॉप 2.24% में शामिल हैं, पिछले साल यह आंकड़ा 45516 (1.92%) था यानी .32% का इजाफा हुआ है।

वहीं, 221574 स्टूडेंट्स (8.96%) को 90% और इससे ऊपर का स्कोर मिला, जो कि पिछले साल 199944 था (8.43%)। वहीं, 10वीं में सीडब्ल्यूएसएन कैटेगरी के 96.02% स्टूडेंट्स पास हुए, पिछले साल आंकड़ा 93.45% था।

इस साल 9248 स्टूडेंट्स ने रजिस्टर किया था, 9160 ने एग्जाम दिया और 8795 पास हुए। इनमें 452 बच्चों को 90% और इससे ऊपर अंक (पिछले साल 411) और 91 स्टूडेंट्स को 95% और इसके ऊपर स्कोर मिला है, पिछले साल ऐसे 66 स्टूडेंट्स थे। इस साल 9443 में से 9088 स्टूडेंट्स (96.24%) पास हुए हैं, पिछले साल यह आंकड़ा 96.02% था।

CBSE 10th फाइनल रिजल्ट
सीबीएसई ने बुधवार को पहली बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी किया है और कोई मेरिट लिस्ट जारी नहीं की गई है। हालांकि, बोर्ड ने कहा कि टॉप 0.1 प्रतिशत स्टूडेंट्स को मेरिट सर्टिफिकेट दिया जाएगा, जो उनके DigiLocker से मिलेगा। सीबीएसई ने बताया कि क्लास 10 का फाइनल रिजल्ट, दूसरी बोर्ड परीक्षा के बाद घोषित किया जाएगा और ग्रेडिंग मेन और सेकेंड बोर्ड परीक्षा के जॉइंट परफॉर्मेंस के आधार पर होगी। स्टूडेंट्स को स्कूलों के जरिए प्रिंटेड सीबीसीएसई 10वीं मार्कशीट और पासिंग सर्टिफिकेट भी बाद में दी जाएंगी।

दसवीं के दूसरे एग्जाम कब
‘दो बोर्ड एग्जाम’ पॉलिसी स्टूडेंट फ्रेंडली कदम है ताकि उन्हें परीक्षा में और लचीलापन मिले और उनका तनाव भी घटे। बोर्ड ने कहा कि जो स्टूडेंट अपने स्कोर से संतुष्ट नहीं हैं, वे आंसरकॉपी की स्कैन कॉपी भी पा सकता है, साथ ही अंकों का वेरिफिकेशन और रिवैल्यूशन भी करवा सकता है। ये सभी सुविधाएं केवल ऑनलाइन होंगी और दूसरे बोर्ड परीक्षा के बाद ही शुरू की जाएंगी।

ईंधन और कच्चे तेल की कीमतों से थोक महंगाई 38 महीने के उच्च स्तर पर

नई दिल्ली। Wholesale Inflation Rate: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार मार्च में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई दर फरवरी के 2.13 प्रतिशत से बढ़कर 3.88 पर पहुंच गई। यह 38 महीने का उच्च स्तर है। यह मुख्य रूप से कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के कारण हुआ।

हालांकि मार्च में सभी प्रमुख समूहों में व्यापक रूप से वृद्धि देखी गई, लेकिन प्राथमिक वस्तुओं के खंड में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इस खंड में महंगाई मार्च में 14 महीने के उच्च स्तर 6.36 प्रतिशत पर पहुंच गई। इसके पहले अक्टूबर 2024 में कीमतों में 8.26 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

उल्लेखनीय है कि ईंधन और बिजली खंड में मार्च महीने में पिछले माह की तुलना में सर्वाधिक 4.13 प्रतिशत वृद्धि हुई। यह खंड फरवरी में -3.78 प्रतिशत की अवस्फीति में था और पश्चिम एशिया संकट के कारण मार्च में महंगाई दर 1.05 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह 11 महीनों की अपस्फीति के बाद पहली धनात्मक वृद्धि है और यह 20 महीनों का उच्चतम स्तर है। जुलाई 2024 में इस खंड की महंगाई दर 1.72 प्रतिशत थी।

विनिर्मित वस्तुओं की महंगाई दर बढ़कर मार्च में 40 महीने के उच्च स्तर 3.39 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो फरवरी में 2.92 प्रतिशत थी। सूचकांक में इसका भार 64 प्रतिशत से ज्यादा है।

इक्रा के वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल के अनुसार मार्च में मुख्य डब्ल्यूपीआई पिछले महीने के 3.3 प्रतिशत से बढ़कर 3.7 प्रतिशत के 41 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई। उन्होंने कहा, ‘क्रमिक आधार पर मार्च 2026 में मुख्य सूचकांक पिछले 3 महीनों के औसत के अनुरूप 0.7 प्रतिशत बढ़ा।’

आंकड़ों से पता चला कि प्राथमिक खाद्य पदार्थों की महंगाई दर फरवरी के 2.19 प्रतिशत से घटकर मार्च में 1.9 प्रतिशत रह गई। धान (0.15 प्रतिशत), सब्जियों (1.45 प्रतिशत), फलों (2.11 प्रतिशत) और दूध (2.62 प्रतिशत) की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ अनाज (-2.51 प्रतिशत), गेहूं (-4.60 प्रतिशत), आलू (-27.94 प्रतिशत) और प्याज (-42.11 प्रतिशत) में अवस्फीति बढ़ी है।

खुदरा महंगाई दर के आंकड़े आने के बाद ये आंकड़े सामने आए हैं। आधार वर्ष 2024 की नई श्रृंखला के मुताबिक मार्च में खुदरा महंगाई बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गई, जो इसके पहले महीने में 3.21 प्रतिशत थी। खासकर खाद्य व ईंधन की कीमतों के कारण इसमें तेजी आई।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का अनुमान है कि पश्चिम एशिया के युद्ध का असर खुदरा महंगाई की तुलना में थोक महंगाई पर ज्यादा साफ नजर आएगा, क्योंकि खुदरा महंगाई में ईंधन का असर कम होता है।

उन्होंने कहा, ‘डब्ल्यूपीआई में तेजी अपेक्षित है और आधार के असर के साथ विभिन्न खंडों में मूल्य वृद्धि के कारण आने वाले महीनों में इसमें और वृद्धि होने की संभावना है।’ उन्होंने कहा कि मौजूदा धारणा मॉनसूनी बारिश में कमी की संभावना को देखते हुए 2026-27 में थोक महंगाई दर 5 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है, क्योंकि बारिश कम होने से खाद्य उत्पादों की कीमत में तेजी आ सकती है।

इक्रा को उम्मीद है कि ऊर्जा की वैश्विक कीमतों में उछाल के प्रतिकूल प्रभाव, माल ढुलाई अधिक होने और इनपुट लागत अधिक होने के कारण कुल मिलाकर आयात की लागत अधिक रहने की उम्मीद है। इक्रा को उम्मीद है कि अप्रैल 2026 में थोक महंगाई लगभग 4.8 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी और वित्त वर्ष 2027 में औसतन लगभग 3.5 प्रतिशत रहेगी।

रूसी दूत का ऐलान; भारत को जितना तेल चाहिए, उतना रूस देने को तैयार

नई दिल्ली। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक भू-राजनीति पर खुलकर बात की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं और रूस, भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का पूरी तरह से समर्थन करता है।

WION को दिए एक इंटरव्यू में राजदूत अलीपोव ने बताया कि दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय संपर्कों का सिलसिला जारी रहेगा। रूस को उम्मीद है कि सितंबर 2026 में भारत की अध्यक्षता में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए खुद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत का दौरा करेंगे। रूस ने ब्रिक्स के लिए भारत की प्राथमिकताओं को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। पिछले साल दिसंबर में राष्ट्रपति पुतिन के भारत दौरे के बाद, अब रूस इस साल भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रूस में स्वागत करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए बातचीत जारी है।

रक्षा सहयोग: S-400 और नई तकनीक
भारत और रूस के बीच रक्षा संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं, जिस पर राजदूत ने महत्वपूर्ण अपडेट दिए। इंटरव्यू में अलीपोव ने पुष्टि की है कि S-400 वायु रक्षा प्रणाली की कुछ बची हुई खेप जल्द ही भारत को सौंप दी जाएगी। इसके लिए आपसी सहमति से तय की गई समय-सीमा का पालन किया जा रहा है।

उन्होंने भारत और रूस द्वारा मिलकर बनाए जा रहे ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल और ‘AK-203’ असॉल्ट राइफल को आपसी सहयोग का बेहतरीन और सफल उदाहरण बताया।

उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की कि भारत ने रूस के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान SU-57 में दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि, पश्चिमी देशों की नजरों से बचाने के लिए उन्होंने अन्य रक्षा सौदों की जानकारी को गुप्त रखने की बात कही।

ऊर्जा के क्षेत्र में रूस भारत का एक प्रमुख साझेदार बनकर उभरा है। अलीपोव ने जोर देकर कहा कि भू-राजनीतिक उठापटक और पश्चिम एशिया के तनाव के बावजूद, रूस भारत की जरूरत के हिसाब से कच्चा तेल और LPG की आपूर्ति करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय देशों को ‘अविश्वसनीय साझेदार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि टैरिफ और प्रतिबंधों की धमकियां देकर अमेरिका भारत-रूस के द्विपक्षीय संबंधों में दखल देने और हानिकारक भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि रूस भारत को जरूरत के मुताबिक ईंधन निर्यात करता रहेगा। जब उनसे पूछा गया कि वर्तमान में इसकी स्थिति क्या है? भारत ने रूस से कितनी ऊर्जा आयात की है- विशेष रूप से पिछले एक महीने में, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की पृष्ठभूमि में? तो उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि अब आंकड़े उपलब्ध हो गए हैं।

बाद में, शायद हमारे पास और भी ज्यादा विस्तृत जानकारी होगी। अभी तक, जो मैंने देखा है उसके हिसाब से सप्लाई में काफी बढ़ोतरी हुई है। लेकिन मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि हम अपनी स्थिति और प्रतिबद्धता को लेकर हमेशा एक जैसे रहे हैं।

हमने हमेशा यही कहा है कि हम भू-राजनीतिक घटनाक्रमों की परवाह किए बिना भारत को तेल सप्लाई करने के लिए तैयार हैं। हमारा नजरिया हमेशा से यही रहा है। असल में, भारत को जितने तेल की जरूरत है, हम उतना तेल सप्लाई करने के लिए तैयार हैं।

हम LPG सप्लाई पर भी बातचीत करते हैं, इसलिए हम उतनी सप्लाई करने के लिए तैयार हैं, जितनी भारत लेने के लिए तैयार है। हमारे सामने जो रुकावटें हैं, जैसे कि टैरिफ की धमकियां, सेकेंडरी प्रतिबंध, या जो भी आप जानते हैं, ये रुकावटें सिर्फ यही दिखाती हैं कि हमारे द्विपक्षीय संबंधों और यूरोप के मामले में अमेरिका कितनी नुकसान पहुंचाने वाली भूमिका निभा रहा है।

इसलिए इस नजरिए से, मैं यह कहूंगा कि हम एक भरोसेमंद पार्टनर रहे हैं- जो कि एक सच्चाई है और भारत के साथ व्यापार को लेकर हमारा नजरिया हमेशा एक जैसा रहा है। इस पृष्ठभूमि में, अमेरिका और यूरोप ने खुद को पूरी तरह से अविश्वसनीय पार्टनर साबित किया है।’

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच तनाव पर रूस ने अपना रुख साफ किया है। अलीपोव ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले को “अकारण आक्रामकता” और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान को अपने अस्तित्व का और शांतिपूर्ण नागरिक परमाणु ऊर्जा का पूरा अधिकार है।

उन्होंने कहा कि केवल युद्धविराम ही काफी नहीं है, बल्कि एक दीर्घकालिक कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता है। मध्य पूर्व की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों और रूस के राष्ट्रीय हितों पर पड़ता है।

Stock Market: सेंसेक्स 566 अंक बढ़ कर 78600 के पार, निफ़्टी 24385 पर खुला

नई दिल्ली। Stock Market Update: वैश्विक बाजारों से पॉजिटिव संकेत लेते हुए भारतीय शेयर बाजार गुरुवार (16 अप्रैल) को मजबूती के साथ खुले। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने का निवेशकों के सेंटीमेंट्स पर सकारात्मक असर पड़ा है। इसके अलावा आईटी और मेटल शेयरों में खरीदार से भी बाजार को सपोर्ट मिला रहा है।

बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 566 अंकों की बढ़त के साथ के 78677 के स्तर पर खुला। जबकि, एनएसई का 50 शेयरों वाले बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी ने गुरुवार के कारोबार की शुरुआत 153 अंकों की बढ़त के साथ 24385 के लेवल से की।

तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 78,677 अंक पर खुला। बुधवार को यह 78,111 पर बंद हुआ था। सुबह 9:23 बजे यह 531.64 अंक या 0.68 फीसदी की बढ़त लेकर 78,642.88 पर कारोबार कर रहा था।

इसी तरह, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 (Nifty-50) भी मजबूती के साथ 24,385 अंक पर खुला। सुबह 9:24 बजे यह 152.50 अंक या 0.63 फीसदी की बढ़त लेकर 24,383.80 पर कारोबार कर रहा था।

ग्लोबल मार्केट के संकेत
भारतीय बाजार के लिए एशियाई बाजारों से भी अच्छी खबर आई है। जापान का निक्केई 225 करीब 1.9 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.8 प्रतिशत ऊपर है। यह तेजी दिखाती है कि पूरे क्षेत्र में निवेशकों का मूड सकारात्मक बना हुआ है, जिसका फायदा भारत को भी मिल सकता है।

अमेरिका के बाजारों ने भी जबरदस्त प्रदर्शन किया। एसएंडपी 500 और नैस्डैक ने नए रिकॉर्ड बनाए। बैंकिंग सेक्टर की मजबूती ने इस तेजी को और ताकत दी। हालांकि डाउ जोन्स में हल्की गिरावट रही, लेकिन कुल मिलाकर संकेत मजबूत ही हैं, जो भारतीय बाजार के लिए अच्छा संकेत माने जा रहे हैं।