नीट 2026: शिक्षा की काशी कोटा से भावी चिकित्सकों के नाम एक खुला पत्र

0
20

हौसलों के तरकश में,
कोशिश का वो तीर ज़िंदा रख,
हार जा चाहे ज़िंदगी में सब कुछ,
मगर जीतने की उम्मीद ज़िंदा रख।

माना कि डगर बहुत कठिन है,
और घनघोर अंधेरा छा रहा है,
पर याद रखना, आपके पसीने का हर कतरा,
आपकी जीत की कहानी गा रहा है…

प्रिय नीट 2026 के हमारे अजेय रणबांकुरों,

दिनाँक 3 मई 2026, यानी इस रविवार का दिन आपके कमरे में टंगे कैलेंडर की कोई आम तारीख भर नहीं है। यह उन अनगिनत रातों की खामोश तपस्या, नींद के उस अत्यंत कठिन बलिदान और आपके माता-पिता की उन मौन प्रार्थनाओं के मुकम्मल होने का पावन महापर्व है, जिन्हें आपने बंद और थकी हुई आँखों से न जाने कितनी बार जिया है।

घर की चौखट से दूर, किसी हॉस्टल या पीजी के छोटे से कमरे में जब आप अपनी आँखों में नींद भरकर भी देर रात तक किताबें पढ़ रहे थे, तब आपके साथ आपके माता-पिता के अक्स भी जाग रहे थे। नीट 2026 की यह यात्रा केवल एक ओ.एम.आर. शीट के गोलों को काले करने तक सीमित नहीं है।

यह मानवता की सेवा के उस पवित्र पथ का पहला कदम है, जहाँ कल आपकी उंगलियाँ किसी की धुंधली आँखों में रोशनी का संचार करेंगी और आपका चिकित्सा ज्ञान, अनुभव व हीलिंग स्पर्श किसी मरणासन्न हृदय को फिर से धड़कने का माध्यम बनेगा। नीट परीक्षा का यह विशेष दिन उस उजले सफेद कोट और स्टेथोस्कोप को अपने नाम करने का दिन है, जो इंसानियत की सबसे बड़ी उम्मीद है।

इस वर्ष लगभग 23 लाख विद्यार्थी सपनों के इस नीट महाकुंभ में उतर रहे हैं। यह प्रतियोगिता निस्संदेह कठिन है, लेकिन यकीन मानिए, आपका अथक परिश्रम और आपकी संकल्प शक्ति इस बाहर के शोर से कहीं अधिक ताकतवर है।

आज जब आप ‘शिक्षा की काशी’ कहलाने वाले कोटा जैसे ऊर्जावान शहर में अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं, तो अपने आप को सौभाग्यशाली महसूस करें। यहाँ के कोचिंग संस्थानों का अद्वितीय माहौल और आपके देवतुल्य शिक्षकों का मार्गदर्शन आपकी सफलता के सबसे मजबूत स्तंभ हैं। उन्होंने आपको सिर्फ विज्ञान के सूत्र नहीं रटाए, बल्कि हर असफलता के बाद गिरकर फिर से ऊँगली पकड़कर उठना सिखाया है।

आज इस मुकाम पर सफलता और संघर्ष की बात करते हुए, हम आपके साथ अपनी स्वयं की इस यात्रा के कुछ ऐसे पन्ने साझा करना चाहते हैं, जो आपको यह विश्वास दिलाएंगे कि दृढ़ संकल्प आपको सफलता के शिखर तक ले जाता है।

डॉ. विदुषी शर्मा की प्री मेडिकल टेस्ट की यात्रा की बात करें, तो वह एक ऐसा दौर था जब मार्गदर्शन के लिए आज जैसी उन्नत कोचिंग सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थीं। लेकिन सीने में कुछ कर गुजरने की एक जिद्द धधकती थी।

अपने अडिग आत्मविश्वास, अथक परिश्रम और केवल स्व-अध्ययन (सेल्फ स्टडी ) के बल पर उन्होंने अपने प्रथम प्रयास में ही देश के सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा संस्थान, एम्स (AIIMS) नई दिल्ली में प्रवेश प्राप्त करने का अपना सपना साकार किया।

वहीं दूसरी ओर, डॉ. सुरेश पाण्डेय की यात्रा की शुरुआत राजस्थान की रावतभाटा तहसील के एक छोटे से गाँव ‘मोहना’ की एक कच्ची कुटिया से हुई। वर्ष 1986 की उन झुलसती और संघर्षपूर्ण गर्मियों में, हवा से बार-बार कांपती एक लालटेन की पीली और मद्धम रोशनी के नीचे बैठकर उन्होंने भी डॉक्टर बनने का एक सपना बुना था।

उस समय न कोई इंटरनेट था, न आज जैसी कोचिंग, बस एक अटूट जज़्बा था। और जब उस छोटी सी कांपती लालटेन की रोशनी, स्व-अध्ययन के बल पर, प्रथम प्रयास में ही जबलपुर मेडिकल कॉलेज के शानदार गलियारों तक पहुँची, तो लगा जैसे वह कांपती लौ भीषण आंधी पर जीत गई हो।

हमारे ये अनुभव इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि यदि आपके लक्ष्य के प्रति आपकी निष्ठा सच्ची है, तो कोई भी मुकाम असंभव नहीं है। किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए बाहरी साधनों से कहीं अधिक आपकी आंतरिक साधना और आपकी एकाग्रता मायने रखती है।

अब नीट 2026 के इस अंतिम प्रहर में कुछ भी नया खोजने की बेचैनी से पूरी तरह बचें। जो ज्ञान आपने महीनों के पसीने से सींचा है, बस उसी पर अपना पूर्ण विश्वास बनाए रखें। बायोलॉजी की एन.सी.ई.आर.टी. की पंक्तियों को मन के भीतर एक शांत नदी की तरह उतरने दें।

फिजिक्स और केमिस्ट्री के समीकरणों को अपनी रची हुई कहानी का हिस्सा मानें। 180 प्रश्नों के इस कुरुक्षेत्र में आपका धैर्य और सटीकता ही आपका सबसे बड़ा अस्त्र है।

नकारात्मक अंकन (नेगेटिव मार्किंग ) के जाल से बचना ही असल बुद्धिमानी है। परीक्षा से पूर्व की 7-8 घंटे की गहरी नींद को अपने थके हुए मस्तिष्क को नई धार देने की सबसे जरूरी प्रक्रिया मानें और पूरे होशोहवास में तनावमुक्त होकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें।

प्रकृति ने आपमें से हर एक को अद्वितीय बनाकर भेजा है, इसलिए अपनी इस खूबसूरत कहानी की तुलना किसी और से कभी न करें। पूरे आत्मविश्वास और चेहरे पर एक शांत मुस्कान के साथ परीक्षा भवन में उतरें।

यदि परिणाम उम्मीदों के सांचे में न भी बैठे, तो हमारे विद्यार्थियों, रत्ती भर भी हार मत मानना। एक अकेली परीक्षा या तीन घंटे का एक प्रश्नपत्र आपके समग्र वजूद और आपकी असीम काबिलियत की सीमाएं कतई तय नहीं कर सकता। कई बार नियति एक दरवाजा बंद करती है ताकि वह आपके लिए असंख्य अवसरों का पूरा आसमान खोल सके।

महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा था—”सपने वो नहीं जो हम नींद में देखते हैं, सपने तो वो हैं जो हमें नींद नहीं आने देते।” उन जाग्रत और धड़कते सपनों को सीने में संजोए हुए 3 मई को परीक्षा भवन में इस तरह प्रवेश कीजिएगा जैसे आप अपनी सुनिश्चित जीत का जश्न मनाने जा रहे हों।

विजयश्री आपका ही वरण करेगी! निडर होकर आगे बढ़िए और इस आसमान को अपनी मुट्ठी में कर लीजिए।

आपके शुभचिंतक

डॉ. विदुषी शर्मा
एम्स, नई दिल्ली (AIIMS New Delhi, FRCSEdin)
नेत्र सर्जन एवं लेखिका, ‘मेरी किताब मेरी दोस्त’

डॉ. सुरेश पाण्डेय
अमेरिका एवं ऑस्ट्रेलिया में कार्य कर चुके नेत्र सर्जन, लेखक, प्रेरक वक्ता, सुवि नेत्र चिकित्सालय, कोटा

नोट – इस लेख को हमारी सम्पादकीय टीम ने बिना एडिट किए हूबहू प्रकाशित किया है। ताकि आपको लेखक की भावना से सीधे रूबरू कराया जा सके।