रूसी दूत का ऐलान; भारत को जितना तेल चाहिए, उतना रूस देने को तैयार

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नई दिल्ली। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक भू-राजनीति पर खुलकर बात की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं और रूस, भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का पूरी तरह से समर्थन करता है।

WION को दिए एक इंटरव्यू में राजदूत अलीपोव ने बताया कि दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय संपर्कों का सिलसिला जारी रहेगा। रूस को उम्मीद है कि सितंबर 2026 में भारत की अध्यक्षता में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए खुद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत का दौरा करेंगे। रूस ने ब्रिक्स के लिए भारत की प्राथमिकताओं को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। पिछले साल दिसंबर में राष्ट्रपति पुतिन के भारत दौरे के बाद, अब रूस इस साल भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रूस में स्वागत करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए बातचीत जारी है।

रक्षा सहयोग: S-400 और नई तकनीक
भारत और रूस के बीच रक्षा संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं, जिस पर राजदूत ने महत्वपूर्ण अपडेट दिए। इंटरव्यू में अलीपोव ने पुष्टि की है कि S-400 वायु रक्षा प्रणाली की कुछ बची हुई खेप जल्द ही भारत को सौंप दी जाएगी। इसके लिए आपसी सहमति से तय की गई समय-सीमा का पालन किया जा रहा है।

उन्होंने भारत और रूस द्वारा मिलकर बनाए जा रहे ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल और ‘AK-203’ असॉल्ट राइफल को आपसी सहयोग का बेहतरीन और सफल उदाहरण बताया।

उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की कि भारत ने रूस के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान SU-57 में दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि, पश्चिमी देशों की नजरों से बचाने के लिए उन्होंने अन्य रक्षा सौदों की जानकारी को गुप्त रखने की बात कही।

ऊर्जा के क्षेत्र में रूस भारत का एक प्रमुख साझेदार बनकर उभरा है। अलीपोव ने जोर देकर कहा कि भू-राजनीतिक उठापटक और पश्चिम एशिया के तनाव के बावजूद, रूस भारत की जरूरत के हिसाब से कच्चा तेल और LPG की आपूर्ति करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय देशों को ‘अविश्वसनीय साझेदार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि टैरिफ और प्रतिबंधों की धमकियां देकर अमेरिका भारत-रूस के द्विपक्षीय संबंधों में दखल देने और हानिकारक भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि रूस भारत को जरूरत के मुताबिक ईंधन निर्यात करता रहेगा। जब उनसे पूछा गया कि वर्तमान में इसकी स्थिति क्या है? भारत ने रूस से कितनी ऊर्जा आयात की है- विशेष रूप से पिछले एक महीने में, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की पृष्ठभूमि में? तो उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि अब आंकड़े उपलब्ध हो गए हैं।

बाद में, शायद हमारे पास और भी ज्यादा विस्तृत जानकारी होगी। अभी तक, जो मैंने देखा है उसके हिसाब से सप्लाई में काफी बढ़ोतरी हुई है। लेकिन मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि हम अपनी स्थिति और प्रतिबद्धता को लेकर हमेशा एक जैसे रहे हैं।

हमने हमेशा यही कहा है कि हम भू-राजनीतिक घटनाक्रमों की परवाह किए बिना भारत को तेल सप्लाई करने के लिए तैयार हैं। हमारा नजरिया हमेशा से यही रहा है। असल में, भारत को जितने तेल की जरूरत है, हम उतना तेल सप्लाई करने के लिए तैयार हैं।

हम LPG सप्लाई पर भी बातचीत करते हैं, इसलिए हम उतनी सप्लाई करने के लिए तैयार हैं, जितनी भारत लेने के लिए तैयार है। हमारे सामने जो रुकावटें हैं, जैसे कि टैरिफ की धमकियां, सेकेंडरी प्रतिबंध, या जो भी आप जानते हैं, ये रुकावटें सिर्फ यही दिखाती हैं कि हमारे द्विपक्षीय संबंधों और यूरोप के मामले में अमेरिका कितनी नुकसान पहुंचाने वाली भूमिका निभा रहा है।

इसलिए इस नजरिए से, मैं यह कहूंगा कि हम एक भरोसेमंद पार्टनर रहे हैं- जो कि एक सच्चाई है और भारत के साथ व्यापार को लेकर हमारा नजरिया हमेशा एक जैसा रहा है। इस पृष्ठभूमि में, अमेरिका और यूरोप ने खुद को पूरी तरह से अविश्वसनीय पार्टनर साबित किया है।’

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच तनाव पर रूस ने अपना रुख साफ किया है। अलीपोव ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले को “अकारण आक्रामकता” और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान को अपने अस्तित्व का और शांतिपूर्ण नागरिक परमाणु ऊर्जा का पूरा अधिकार है।

उन्होंने कहा कि केवल युद्धविराम ही काफी नहीं है, बल्कि एक दीर्घकालिक कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता है। मध्य पूर्व की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों और रूस के राष्ट्रीय हितों पर पड़ता है।