Thursday, June 18, 2026
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सिमरन की कहानी कंगना ने नहीं मैंने लिखी – अपूर्व असरानी का दावा

नई दिल्ली। कंगना रनौत अभिनीत हंसल मेहता की अगली फिल्म सिमरन के नये पोस्टर को लेकर विवाद पैदा हो गया है। दरअसल इस पोस्टर में नीचे बहुत छोटे-छोटे लेकिन अहम अक्षरों में फिल्म के राइटर ‘अलीगढ़’ और ‘शाहिद’ फेम अपूर्व असरानी के नाम के पहले कंगना रनौत का नाम बतौर अडिशनल डायलॉग और स्टोरी राइटर लिखा गया है।

इससे पहले भी कई इंटरव्यूज में कंगना और खुद हंसल भी फिल्म की कहानी लिखने का क्रेडिट कंगना को देते रहे हैं। फाइनली इस पर अपूर्व ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। बुधवार सुबह एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से अपूर्व ने अपनी बात लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की है।

अपूर्व ने लिखा है कि- किसी राइटर का नाम अडिशनल राइटिंग क्रेडिट के बाद धकेल दिया जाना उस राइटर की प्रतिष्ठा के खिलाफ है लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं कि मेरी चिंता ‘क्रेडिट’ को लेकर नहीं है, असल में कुछ इससे भी बड़ा है जो मुझे समझ नहीं आ रहा कि क्यों किया गया।

कंगना कई इंटरव्यूज में दावा कर रही हैं कि सिमरन के डायरेक्टर हंसल मेहता उनके पास केवल एक लाइन का स्क्रीनप्ले लेकर पहुंचे थे। उनका कहना है कि उस स्टेज पर स्टोरी डार्क और ग्रिटी थ्रिलर थी और उन्होंने खुद इस स्टोरी को एक हल्की-फुल्की, मजेदार स्टोरी में तब्दील किया। उनके इस बात के सबूत  है। 

उनके ये बयान मेरे प्रयासों को पूरी तरह नकार रहे हैं और मुझे यह जानते हुए भी अब इस झूठ को उजागर करना पड़ रहा है कि ऐसा करने से उनके कई प्रशंसक मेरे खिलाफ हो जाएंगे। जो लोग मुझसे परिचित हैं वे जानते हैं कि मैंने हमेशा सच की लड़ाई लड़ी है और यह मेरे लिए एक हिट फिल्म से कहीं ज्यादा मायने रखता है।

हंसल ने मुझे अमेरिका में कानून का उल्लंघन करने वाली एक औरत की खबर भेजी थी। मुझे यह पसंद आई और मैंने सोचा कि इस पर एक बहुत अच्छी फिल्म बन सकती है। लेकिन मैं ‘अलीगढ़’ के बाद एक और सीरियल फिल्म नहीं करना चाहता था।

‘अलीगढ़’ के साथ मेरा अनुभव इतना जबर्दस्त था कि इस फिल्म ने मुझे अंदर से पूरी तरह मथ दिया था और मैं भावनात्मक तौर पर बहुत खाली महसूस कर रहा था। ऐसे में ‘सिमरन’ के रूप में मुझे कुछ मजेदार लिखने का मौका मिल रहा था। यह 2 साल पहले की बात है।

मैंने हंसल की कंपनी कर्मा फीचर्स के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट साइन किया। फिल्म के शुरुआती आइडिया को एक ऑरिजिनल स्टोरी में डिवेलप किया और एक लाइन का स्क्रीनप्ले लिखा। हंसल को यह पसंद आया और वह मुझे कंगना से मिलाने ले गए।  

डेढ़ साल के दौरान 9 ड्राफ्ट लिखते वक्त किसी भी मौके पर इसको लेकर कोई बात सामने नहीं आई कि कंगना को स्क्रिप्ट का डायरेक्शन या टोन पसंद नहीं आई। बल्कि जब-जब मैं उनको स्क्रिप्ट सुनाता था तो वह खुशी से उछल पड़ती थीं। मैं यह देखकर बहुत खुश था कि पूरी की पूरी फिल्म उसी स्टोरी और स्क्रीनप्ले पर शूट की गई है जिसे मैंने फिल्म राइटर्स असोसिएशन में रजिस्टर कराया था। 

 

GST : 90 प्रतिशत वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स की दरों का निर्धारण

 7 पर्सेंट आइटम्स पर नहीं लगेगा कोई टैक्स,  अनाज और दूध जीएसटी से बाहर

श्रीनगर। गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) काउंसिल ने गुरुवार को शुरू अपनी दो दिन की बैठक के पहले दिन 80 से 90 प्रतिशत वस्तुओं और सेवाओं पर कर की दरों का निर्धारण कर लिया है। प्रस्तावित जीएसटी व्यवस्था में चार स्तर की दरें रखी गई हैं, जिनमें रोजमर्रा के इस्तेमाल की आवश्यक वस्तुओं पर 5 प्रतिशत की न्यूनतम दर रखी गई है।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली काउंसिल ने बैठक के पहले सत्र में जीएसटी के तहत नियमों को भी मंजूरी दी। जीएसटी एक जुलाई से लागू किए जाने की योजना है। जीएसटी से जुड़े 9 में से 7 नियमों को मंजूरी दे दी गई है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली के मुताबिक बाकी 2 नियमों को लीगल कमेटी देख रही है। सर्विस टैक्स पर भी शुक्रवार को फैसला होगा। जेटली ने यह भी भरोसा दिया है कि जीएसटी से महंगाई नहीं बढ़ेगी।

कुल 1,112 आइटम्स की दरें तय की जा चुकी हैं। 7 पर्सेंट वस्तुओं पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। 17 पर्सेंट आइटम्स पर 12 पर्सेंट टैक्स देना होगा। 81 फीसदी आइटम्स पर 18 पर्सेंट या इससे कम टैक्स देना होगा। 19 पर्सेंट आइटम्स पर 28 पर्सेंट टैक्स लगाया जाएगा। अनाज और दूध को जीएसटी से बाहर रखा गया है।

चाय, कॉफी, चीनी और मसाले, प्रोसेस्ड फूड को 5% टैक्स स्लैब के दायरे में रखा गया है। जीएसटी लागू होने के बाद अनाज सस्ते हो सकते हैं । काउंसिल में सभी राज्यों के वित्त मंत्री या उनके प्रतिनिधि शामिल हैं। फिटमेंट इस तरीके से किया गया है कि लोगों पर नई कर व्यवस्था के कारण कर का बोझ नहीं बढ़े।

इसलिए वस्तुओं और सेवाओं को उनके ऊपर इस समय लागू उत्पाद शुल्क, वैट या सेवा कर को ध्यान में रखकर जीएसटी की विभिन्न दरों के साथ जोड़ा जा रहा है। समझा जाता है कि कल बैठक संपन्न होने के बाद तय कर दरों का पूरा ब्योरा उपलब्ध हो पाएगा। विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्रियों ने रेशमी धागे, पूजा की सामग्री और हस्तशिल्प उत्पादों को जीएसटी दरों में छूट की मांग की।

हालांकि, जेटली का मानना है कि जीएसटी के तहत न्यूनतम छूट दी जानी चाहिए और यह आवश्यक होने पर ही दी जानी चाहिए।  बैठक शुरू होने से पहले केरल के वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने जीएसटी व्यवस्था में सोने पर 5 प्रतिशत टैक्स लगाने का मामला उठाया। कुछ हलकों से सोने पर एक प्रतिशत की कर लगाने की मांग की जा रही है।

इसाक ने कहा कि सोना आवश्यक वस्तु नहीं है और इस पर 5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगना चाहिए। वहीं योगी आदित्यनाथ की अगुआई वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने पूजा सामग्री पर शून्य फीसदी टैक्स की मांग की है। अभी इस पर 18 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाने का प्रस्ताव है। कुछ अन्य राज्यों ने सर्विस टैक्स की दो दरें 12 और 18 प्रतिशत रखने की मांग की।

जीएसटी राष्ट्रीय बिक्री कर होगा, जो वस्तुओं के उपभोग या सेवाओं के इस्तेमाल पर लगाया जाएगा। यह 16 मौजूदा शुल्कों और टैक्सों का स्थान लेगा। केंद्र के स्तर पर उत्पाद शुल्क और सेवा कर इसमें समाहित होंगे, जबकि राज्यों के 9 टैक्स मसलन वैट और एंटरटेनमेंट टैक्स भी इसमें समाहित होंगे।

इससे भारत एक कर दर वाला एक बाजार बन जाएगा। जीएसटी के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जीएसटी लागू है। फ्रांस ने सबसे पहले 1954 में जीएसटी को लागू किया था। उसके बाद से जर्मनी, इटली, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, जापान, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे एक दर्जन से अधिक राष्ट्रों ने जीएसटी लागू किया है। 

पेट्रोल पम्पों पर सस्ते दामों में जल्द मिलेंगें एलईडी बल्ब, ट्यूबलाइट और पंखें

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नई दिल्ली। अब जल्द ही लोग पेट्रोल पंपों पर एलईडी बल्ब, ट्यूबलाइट और छत के पंखे बहुत सस्ते दामों पर खरीद पायेंगे। उपभोक्ताओं को इन स्थानों पर 65 रुपये में एलईडी, 230 रुपये में ट्यूबलाइट और 1150 रुपये में छत के पंखे मिलेंगे।

तीन सरकारी पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियां हिंदुस्तान पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम ये उपकरण सरकारी कंपनी इनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) से आउटसोर्स करेंगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन उपकरणों की बिक्री के लिए इन कंपनियों और ईईएसएल के बीच आज करार होना था लेकिन पर्यावरण मंत्री अनिल दवे के निधन के कारण इसे टाल दिया गया।

सहमति पर हस्ताक्षर की नई तारीख जल्द ही तय की जाएगी जिसके करीब एक महीने बाद पेट्रोल पंपों पर ये उत्पाद मिलने शुरु हो जाएंगे।इन तीन कंपनियों के देशभर में 53000 से अधिक पेट्रोल पंप हैं लेकिन फिलहाल यह तय नहीं हुआ है कि ये उपकरण इन कंपनियों के सारे पेट्रोल पंपों पर मिलेंगें होंगे या नहीं।

झारखण्ड सरकार ने किया ‘ग्राउंड ब्रेकिंग’ समारोह का आयोजन

निवेश के चलते 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे

राँची । झारखण्ड सरकार ने आज होटवार, राँची, झारखण्ड में उन 21 परियोजनाओं की नींव रखने के लिए एक भव्य ‘ग्राउंड ब्रेकिंग’ समारोह का आयोजन किया, जिनकी शुरूआत मोमेन्टम झारखण्ड अभियान के दौरान हुई थी।

समारोह के दौरान अपने विचार अभिव्यक्त करते हुए झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा, ‘‘ग्राउण्ड ब्रेकिंग’ समारोह राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित करने के लिए झारखण्ड सरकार के प्रयास से न्यूनतम सम्भव समय में परियोजनाओं को अनुमोदन दिया है।

यह परियोजना राज्य के ओद्यौगिक विकास को स्थायी बढ़ावा देगी तथा स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। जिस गति से इन 21 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है, उससे स्पष्ट है कि झारखण्ड सरकार राज्य को देश का प्राथमिक निवेश गंतव्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।’’

इस कार्यक्रम में 310,000 करोड़ रु मूल्य के 210 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। अप्रत्याशित 11000 से ज़्यादा भारतीयों एवं 600 विदेशी प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम के लिए पंजीकरण किया था। कार्यक्रम ने भारत के अलावा विदेशों जैसे रूस, कोरिया, बेलारूस और चीन आदि से भी निवेश आकर्षित किया।

आज शुरू की गई 21 परियोजनाआें के लिए अनुमानित 700 करोड़ रु का निवेश आया है और ये परियोजनाएं 21,000 से ज़्यादा प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा करेंगी। इसका गुणक प्रभाव होगा और निवेश के चलते 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे तथा राज्य में छोटे एवं मध्यम आकार के उद्यमों की आय कई गुना बढ़ जाएगी।

इन परियोजनाओं में देश भर से उन्नीस कोरपोरेट शामिल हैं और आठ ओद्यौगिक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में टेक्सटाईल, फूड एवं फूड प्रोसेसिंग, फार्मास्युटिकल्स, व्यर्थ प्रबन्धन, स्वास्थ्य, फुटवियर, वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स शामिल हैं।

इन परियोजनाओं को बढ़ावा देने वाले कुछ प्रमुख कोरपोरेट्स में  ओरिएन्ट क्राफ्ट, शाही एक्सपोर्ट्स, कावेरी एग्री वेयरहाउसिंग, देव आहार फूड इंडस्ट्रीज़, शॉ फार्मा, मैट्रिक्स क्लोदिंग, प्रगति बेवरेजेस और त्रिवेणी अपेरेल्स शामिल हैं।  

बच्चों ने शूटिंग रैंज व तीरंदाजी में दिखाया उत्साह

कोटा। एसआर पब्लिक सी. सै. स्कूल में गुरूवार को आयोजित समर कैम्प 2017 के आठवें दिन बच्चों ने शूटिंग रैंज, तैराकी व तीरंदाजी में बडे़ जोश के साथ भाग लिया। एसआर शूटिंग, तीरंदाजी व तैराकी अकादमी, संभाग की एक मात्र अकादमी है, जो हर वर्ग के बच्चों को प्रशिक्षित कर रही है ।

 एसआर अकादमी में प्रशिक्षण लेने वाले बच्चे राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर अपना कमाल दिखा चुके हैं । इस अकादमी का एक मात्र उद्देश्य है कि वह बच्चों में छिपी प्रतिभा को बाहर निकालकर, उनकी प्रतिभा को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक ले जाना है । इस अकादमी में राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षक प्रशिक्षण दे रहे हैं ।

कैम्प में भाग लेने वाले बच्चों से पूछा गया तो बच्चों ने बताया कि एसआर पब्लिक स्कूल में हर सुविधा एक ही छत के नीचे उपलब्ध है, जो हमें चाहिए । कोटा के अन्य किसी भी स्कूल में यह सुविधा नहीं है, जो हमें इस विद्यालय में चल रहे समर कैम्प में मिली है ।विद्यालय की प्रधानाचार्या सीमा शर्मा ने बताया कि इन गतिविधियों को सीखकर बच्चों में कुछ नया करने की प्रेरणा इस कैम्प में आकर मिली है।

शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 223 अंक फिसला

मुंबई। गुरुवार को शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुआ है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 223 अंक लुढ़क कर 30434 के स्तर पर और निफ्टी 97 अंक की कमजोरी के साथ 9429 के स्तर पर कारोबार कर बंद हुआ है। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज पर मिडकैप 2.27 फीसद और स्मॉलकैप 2.35 फीसद की कमजोरी के साथ बंद हुए हैं।

रियल्टी सेक्टर में 3 फीसद से ज्यादा की कमजोरी

सेक्टोरियल इंजेक्स की बात करें तो आईटी सेक्टर को छोड़ सभी सूचकांक लाल निशान में कारोबार कर बंद हुए हैं। तीन फीसद से ज्यादा की कमजोरी के साथ सबसे ज्यादा बिकवाली रियल्टी सेक्टर में हुई है। वहीं मेटल सेक्टर में तीन चौथाई फीसद की गिरावट है। ऑटो और बैंकिंग सेक्टर में दो फीसद से ज्यादा की गिरावट आई है। वहीं फाइनेंशियल सर्विस (0.91 फीसद), एफएमसीजी (1.66 फीसद) और फार्मा सेक्टर में 0.61 फीसद की कमजोरी के साथ बंद हुए हैं।

निफ्टी के 45 शेयर्स लाल निशान में

दिग्गज शेयर्स की बात करें तो निफ्टी में शुमार शेयर्स में से 6 हरे निशान में और 45 लाल निशान में कारोबार कर बंद हुए है। सबसे ज्यादा तेजी विप्रो, टीसीएस, इंफोसिस, सनफार्मा और ल्यूपिन के शेयर्स में हुई है। वहीं, गिरावट येस बैंक, ग्रासिम, बॉश लिमिटेड, बैंक ऑफ बड़ौदा और आईशर मोटर्स के शेयर्स में हुई है। सबसे ज्यादा तेजी बैंक ऑफ बड़ौदा, भारती एयरटेल, विप्रो, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक के शेयर्स में है। वहीं, गिरावट हिंडाल्को, येस बैंक, इंफ्राटेल, अंबूजा सीमेंट और एशियन पेंट के शेयर्स में है। 

 

इंडिया दुनिया का 9वां सबसे बड़ा शेयर बाजार बना

शेयर मार्केट कैप पहुंचा 2 लाख करोड़ डॉलर के पार, बनी रहेगी तेजी

मुंबई। लोकल और विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी के चलते मार्केट कैप 2 लाख करोड़ डॉलर के पार चला गया है। इससे भारत दुनिया का 9वां सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है। वहीं, इमर्जिंग मार्केट्स में चीन के बाद भारत का मार्केट कैप सबसे अधिक है।

जनवरी के बाद से डॉलर टर्म में भारतीय बाजार में 28 पर्सेंट की तेजी आई है, जो मार्केट कैप के लिहाज से दुनिया के 20 सबसे बड़े मार्केट्स में सबसे अधिक रिटर्न है। इस रैली से भारत का मार्केट कैप टु जीडीपी रेशियो 10 साल के एवरेज 0.78 पर्सेंट से अधिक हो गया है।इमर्जिंग मार्केट्स के लिए यह रेशियो 0.2 से 0.8 के बीच रहती है, जबकि विकसित देशों के शेयर बाजार के लिए 0.5-2.2 के बीच।

ब्रोकरेज फर्म आनंद राठी के चीफ इकॉनमिस्ट और ईडी सुजान हाजरा ने कहा, ‘भारत में लिस्टेड कंपनियों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा हैएक्टिवली ट्रेडेड कंपनियों में से करीब 50 पर्सेंट का मार्केट कैप 500 करोड़ रुपये से कम है। इससे पता चलता है कि दूसरे देशों की तुलना में भारत में कंपनियां शेयर बाजार से जल्द फंड जुटाती हैं। भारत में मार्केट कैप टु जीडीपी रेशियो इसलिए अधिक है क्योंकि यहां के उद्यमी पब्लिक से फंड जुटाने में दिलचस्पी रखते हैं ।’

भारत में मार्केट कैप टु जीडीपी रेशियो 2007 में 1.48 के पीक लेवल पर पहुंची थी। ग्लोबल मार्केट कैप टु जीडीपी रेशियो 0.98 थी। इस रेशियो से इक्विटी मार्केट के ग्लोबल एक्सपर्ट्स कई बार शेयर बाजार के रिलेटिव वैल्यूएशन का अंदाजा लगाते हैं। जब यह 1 से अधिक होती है, तब बाजार को महंगा माना जाता है। अगर इस थ्योरी पर यकीन करें तो भारत में मार्केट कैप टु जीडीपी रेशियो को 1 से अधिक होने के लिए और 10 पर्सेंट की तेजी जरूरी है।

बिड़ला सनलाइफ म्यूचुअल फंड के सीईओ ए बालसुब्रमण्यन ने बताया, ‘भारत में प्राइवेट और गवर्नमेंट कैपेक्स के शुरू होने पर मार्केट कैप टु जीडीपी रेशियो में और बढ़ोतरी हो सकती है। इस साल के अंत तक देश की रेटिंग भी अपग्रेड होने की संभावना है। ऐसा होता है तो मार्केट कैप टु जीडीपी रेशियो में और बढ़ोतरी होगी।’

भारत का ग्लोबल मार्केट कैप में कंट्रीब्यूशन  2.7 पर्सेंट

ब्राजील और मेक्सिको की मार्केट कैप टु जीडीपी रेशियो क्रमश: 0.18 और 0.27 के साथ सबसे कम है। उसकी वजह यह है कि दोनों इकॉनमी कमोडिटीज पर आश्रित हैं, जिनकी कीमतों में गिरावट जारी है। वहीं, फ्रांस के लिए यह 0.67 और जर्मनी के लिए 0.49 है। हालांकि, दोनों देशों के बेंचमार्क इंडेक्स नए पीक लेवल पर हैं। भारत का ग्लोबल मार्केट कैप में कंट्रीब्यूशन भी 2.7 पर्सेंट के साथ 6 साल में सबसे ज्यादा हो गया है, जबकि इसका 6 साल का एवरेज 2.2 पर्सेंट है। यह पिछले तीन साल में दोगुना हो गया है।

 

रीमा लागू का दिल का दौरा पड़ने से निधन

मुंबई। आशिकी, साजन, कुछ कुछ होता से लेकर हम साथ साथ हैं जैसी फिल्मों में मां का किरदार निभाने वाली बॉलीवुड की ऑनस्क्रीन मां रीमा लागू का गुरुवार को  निधन हो गया है। वो 59 साल की थीं।

 गुरुवार सुबह 3.15 बजे मुंबई स्थित कोकिलाबेन अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। कई फिल्मों और टीवी पर मां के किरदार निभा चुकी रीमा को देर रात तबीयत खराब होने के बाद अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।

सलमान की ऑनस्क्रीन मां के रूप मे थी मशहूर

रीमा लागू ने सलमान और शाहरुख खान की ऑनस्क्रीन मां के रूप में कई हिट फिल्मों में काम किया था। इनमें मैंने प्यार किया, हम साथ साथ हैं, साजन, कुछ कुछ होता है शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने टीवी पर तूतू मैंमैं और श्रीमान-श्रीमती जैसे कॉमेडी सीरियल्स से भी खूब वाहवाही बटोरी।

जीएसटी : जीवन-यापन से जुड़ी चीजें नहीं होंगी महंगी – अरुण जेटली

नई दिल्ली। सरकार ने संकेत दिया है कि जीएसटी लागू होने पर जीवन यापन से जुड़ी वस्तु एवं सेवाएं महंगी नहीं होंगी। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में आने वाली वस्तुओं एवं सेवाओं पर कर की क्या दर हो, इस पर फैसला करने के लिए जीएसटी परिषद की 14वीं बैठक बृहस्पतिवार एवं शुक्रवार को श्रीनगर में होने वाली है।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में सभी राज्यों के वित्त मंत्री बैठ कर तय करेंगे कि किस वस्तु या सेवा को जीएसटी के दायरे में रखा जाए और किसको छूट दी जाए। यही नहीं, किस वस्तु या सेवा पर कर की क्या दर हो या उसे किस स्लैब में डाला जाए, इसका भी निर्धारण होगा।

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि किस वस्तु एवं सेवा पर कर की क्या दर हो, इस बारे में केंद्रीय राजस्व सचिव हसमुख अढिया की अगुवाई में सभी राज्यों के प्रधान सचिव (वित्त) की बैठक हो चुकी है। श्रीनगर में 18 एवं 19 मई को होने वाली परिषद की बैठक में सिर्फ औपचारिकता भर शेष है, इसलिए इसमें ज्यादा वक्त नहीं लगेगा।

स्लैब की घोषणा पर संशय

एक अधिकारी का कहना है कि वस्तु एवं सेवाओं पर कर की दर के स्लैब तो श्रीनगर की बैठक में तय हो जाएंगे, लेकिन इसकी घोषणा वहां नहीं भी हो सकती है। यदि ऐसा हुआ तो फिर जीएसटी लागू होने से कुछ दिन पहले स्लैब को घोषित किया जाएगा।

हालांकि सूत्रों का कहना है कि जीएसटी के तहत तय की जाने वाली टैक्स की दरें वस्तुओं और सेवाओं पर कर की मौजूदा दरों से बहुत अलग नहीं होंगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी पिछले दिनों कहा था कि नई जीएसटी व्यवस्था में कर की दरें किसी को नहीं चौंकाएंगी। उन्होंने कहा था कि दरें तय करते समय किसी तरह का हैरान करने वाला फैसला नहीं लिया जाएगा।

जीएसटी लागू होने पर सरकारी महकमों के चक्कर लगाने से मिलेगी निजात

कोटा। जीएसटी लागू होने के बाद ट्रेडर्स को अलग -अलग सरकारी महकमों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं रहेगी।  हर व्यापारी एवं ट्रेडर्स का एक ही महकमें से सबंध रहेगा। चाहे वह सर्विस टैक्स का हो या एक्ससाइज का हो या सेल्स टैक्स का हो।  

सेमिनार को सम्बोधित करते कोटा ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अविनाश राठी

 यह जानकारी बुधवार को भामाशाह भवन में वाणिज्यिक कर विभाग की और से  जीएसटी  पर आयोजित सेमिनार में उपायुक्त नरेंद्र गुप्ता ने दी। उन्होंने  बताया कि जीएसटी का पूरा स्ट्रक्चर आईटी बेस होगा। श्रीनगर में होने वाली जीएसटी काउन्सिल की बैठक में किस कमोडिटी में क्या रेट रहेगी इसका निर्णय होगा। इस बैठक के बाद व्यापारियों की अनेक शंकाओं का समाधान हो जायेगा। 

इससे पहले कोटा ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अविनाश राठी ने कहा कि कृषि जिंसों को जीएसटी से मुक्त रखना चाहिए।  क्योंकि कृषि जिंसों पर जीएसटी लगा तो इसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा वरिष्ठ कर सलाहकार एमएल पाटोदी ने कहा की जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारियों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वेट में पंजीकृत व्यापारियों को भी जीएसटी में माइग्रेशन कराना जरुरी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कृषि उत्पादों पर जीएसटी लागू नहीं होगा। सेमिनार में सहायक कर अधिकारी अनुपम शर्मा, सीटीओ शिवेंद्र सक्सेना ने  भी जीएसटी के विभिन्न प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।