ईंधन और कच्चे तेल की कीमतों से थोक महंगाई 38 महीने के उच्च स्तर पर

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नई दिल्ली। Wholesale Inflation Rate: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार मार्च में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई दर फरवरी के 2.13 प्रतिशत से बढ़कर 3.88 पर पहुंच गई। यह 38 महीने का उच्च स्तर है। यह मुख्य रूप से कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के कारण हुआ।

हालांकि मार्च में सभी प्रमुख समूहों में व्यापक रूप से वृद्धि देखी गई, लेकिन प्राथमिक वस्तुओं के खंड में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इस खंड में महंगाई मार्च में 14 महीने के उच्च स्तर 6.36 प्रतिशत पर पहुंच गई। इसके पहले अक्टूबर 2024 में कीमतों में 8.26 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

उल्लेखनीय है कि ईंधन और बिजली खंड में मार्च महीने में पिछले माह की तुलना में सर्वाधिक 4.13 प्रतिशत वृद्धि हुई। यह खंड फरवरी में -3.78 प्रतिशत की अवस्फीति में था और पश्चिम एशिया संकट के कारण मार्च में महंगाई दर 1.05 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह 11 महीनों की अपस्फीति के बाद पहली धनात्मक वृद्धि है और यह 20 महीनों का उच्चतम स्तर है। जुलाई 2024 में इस खंड की महंगाई दर 1.72 प्रतिशत थी।

विनिर्मित वस्तुओं की महंगाई दर बढ़कर मार्च में 40 महीने के उच्च स्तर 3.39 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो फरवरी में 2.92 प्रतिशत थी। सूचकांक में इसका भार 64 प्रतिशत से ज्यादा है।

इक्रा के वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल के अनुसार मार्च में मुख्य डब्ल्यूपीआई पिछले महीने के 3.3 प्रतिशत से बढ़कर 3.7 प्रतिशत के 41 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई। उन्होंने कहा, ‘क्रमिक आधार पर मार्च 2026 में मुख्य सूचकांक पिछले 3 महीनों के औसत के अनुरूप 0.7 प्रतिशत बढ़ा।’

आंकड़ों से पता चला कि प्राथमिक खाद्य पदार्थों की महंगाई दर फरवरी के 2.19 प्रतिशत से घटकर मार्च में 1.9 प्रतिशत रह गई। धान (0.15 प्रतिशत), सब्जियों (1.45 प्रतिशत), फलों (2.11 प्रतिशत) और दूध (2.62 प्रतिशत) की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ अनाज (-2.51 प्रतिशत), गेहूं (-4.60 प्रतिशत), आलू (-27.94 प्रतिशत) और प्याज (-42.11 प्रतिशत) में अवस्फीति बढ़ी है।

खुदरा महंगाई दर के आंकड़े आने के बाद ये आंकड़े सामने आए हैं। आधार वर्ष 2024 की नई श्रृंखला के मुताबिक मार्च में खुदरा महंगाई बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गई, जो इसके पहले महीने में 3.21 प्रतिशत थी। खासकर खाद्य व ईंधन की कीमतों के कारण इसमें तेजी आई।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का अनुमान है कि पश्चिम एशिया के युद्ध का असर खुदरा महंगाई की तुलना में थोक महंगाई पर ज्यादा साफ नजर आएगा, क्योंकि खुदरा महंगाई में ईंधन का असर कम होता है।

उन्होंने कहा, ‘डब्ल्यूपीआई में तेजी अपेक्षित है और आधार के असर के साथ विभिन्न खंडों में मूल्य वृद्धि के कारण आने वाले महीनों में इसमें और वृद्धि होने की संभावना है।’ उन्होंने कहा कि मौजूदा धारणा मॉनसूनी बारिश में कमी की संभावना को देखते हुए 2026-27 में थोक महंगाई दर 5 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है, क्योंकि बारिश कम होने से खाद्य उत्पादों की कीमत में तेजी आ सकती है।

इक्रा को उम्मीद है कि ऊर्जा की वैश्विक कीमतों में उछाल के प्रतिकूल प्रभाव, माल ढुलाई अधिक होने और इनपुट लागत अधिक होने के कारण कुल मिलाकर आयात की लागत अधिक रहने की उम्मीद है। इक्रा को उम्मीद है कि अप्रैल 2026 में थोक महंगाई लगभग 4.8 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी और वित्त वर्ष 2027 में औसतन लगभग 3.5 प्रतिशत रहेगी।