Friday, June 26, 2026
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रेलवे भर्ती में बड़ा बदलाव, अब विभागीय परीक्षाएं होंगी कंप्यूटर आधारित

नई दिल्ली।/ कोटा। भारतीय रेलवे ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सटीक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब रेलवे की सभी विभागीय परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) के माध्यम से आयोजित की जाएंगी।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे भर्ती बोर्ड की भर्ती प्रक्रिया को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में भर्ती प्रक्रियाओं को अधिक तेज, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

भारतीय रेलवे ने विभागीय परीक्षाओं में टैबलेट आधारित टेस्टिंग का दायरा बढ़ाने का भी निर्णय लिया है, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक सटीक, समयबद्ध और प्रभावी बन सके।

बैठक में बताया गया कि वित्त वर्ष 2025-26 में रेलवे ने भर्ती प्रक्रिया में उल्लेखनीय गति लाते हुए 6 प्रमुख श्रेणियों में 47,084 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की तथा 43,781 अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान की।

इनमें सर्वाधिक 18,799 नियुक्तियां असिस्टेंट लोको पायलट और 14,298 नियुक्तियां टेक्नीशियन पदों पर हुईं। इसके अतिरिक्त 452 सब-इंस्पेक्टर व कॉन्स्टेबल, 4,208 जूनियर इंजीनियर तथा 1,376 पैरामेडिकल श्रेणी के पदों पर भी नियुक्तियां की गईं।

अब मोबाइल में नहीं बजेगा इमर्जेंसी अलार्म, सरकार ने बंद कर दी सेवा, जानिए क्यों

नई दिल्ली। बीते दिनों आपके मोबाइल पर तेज अलार्म के साथ ही पॉप-अप मेसेज जरूर आया होगा। अब कुछ दिनों तक किसी के मोबाइल पर इस तरह का संदेश नहीं आएगा। कारण है कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम को फिलहाल रोकने का फैसला किया है। जानकारी के मुताबिक कुछ जरूरी रिव्यू और सुधार के बाद इसे फिर से शुरू किया जाएगा।

बीते दिनों एनडीएमए ने लोगों को प्राकृतिक आपदाओं से आगाह करने के लिए एक सेवा शुरू की थी। इसके तहत लोगों के मोबाइल फोन पर एक साथ जोरदार अलार्म बजता था और साथ ही संदेश भी फ्लैश होता था। यह सामान्य संदेश से एकदम अलग होता था। किसी आपातकालीन संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए ही इसका इस्तेमाल किया जाता था।

सरकार ने मई में ही इस सेवा को शुरू किया था। इसके तहत लोगों को अलर्ट किया जाता था। सेवा शुरू होने के बाद कई बार लोगों के पास आंधी या मूसलाधार बारिश के अलर्ट आए। उत्तर भारत में तूफान से पहले भी लोगों के फोन बजने लगे। यह सेवा में तेज अलार्म इसलिए बजता है ताकि आपका ध्यान तुरंत उस संदेश की ओर चला जाए और आप सतर्क हो जाएं।

अब सवाल है कि एनडीएमए ने इस सेवा को अस्थायी तौर पर बंद क्यों की। इसकी कोई पुख्ता वजह आधिकारिक तौर पर तो नहीं बताई गई है लेकिन जानकारों का कहना है कि कुछ एजेंसियां साथ मिलकर इस तकनीक को और सटीक बनाने और इसकी समीक्षा कर रही हैं। ऐसे में कुछ समय में इसे फिर से शुरू किया जा सकता है। इस सेवा में कुछ सुधार भी हो सकते हैं।

इस सेवा की जरूरत
इस सेवा की सबसे बड़ी खासियत तो यह है कि बिना इंटरनेट के भी यह अलर्ट आपके मोबाइल पर आ जाताहै। इसके अलावा ब्रॉडकास्ट मेसेज तुरंत आपके फोन में पहुंचता है। इसमें देर नहीं लगती है। इस मेसेज का अलर्ट भी काफी जोर से बजता है जो कि तुरंत ध्यान खींचता है।

इसके अलावा यह सिर्फ उस लोकेशन पर ही संदेश भेजता है जहां खतरे का अंदेशा होता है। इस तकनीक को C-DOT यानी सेंटर फॉर डिवेलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स और गृह मंत्रालय ने मिलकर तैयार किया है।

100% एथेनॉल फ्यूल को कानूनी मंजूरी, 22 लाख करोड़ का आयात बिल कम होगा

नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को कहा कि उन्होंने 100 फीसदी एथेनॉल फ्यूल के उपयोग को कानूनी मान्यता देने वाले नियमों को मंजूरी दे दी है। इस कदम का मकसद आयातित फ्यूल पर भारत की निर्भरता कम करना और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर बदलाव को तेज करना है।

NDA सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर नागपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गडकरी ने कहा, “कल रात 8 बजे मैंने फाइल पर हस्ताक्षर किए और 100 फीसदी एथेनॉल के उपयोग को कानूनी मंजूरी देने वाले नियमों को अंतिम रूप दे दिया।”

गडकरी के अनुसार, एथेनॉल पेट्रोल का एक व्यवहारिक विकल्प बन सकता है और इससे भारत का भारी-भरकम ईंधन आयात बिल कम करने में मदद मिलेगी। देश वर्तमान में ईंधन आयात पर करीब 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है और सरकार घरेलू स्तर पर उत्पादित वैकल्पिक ईंधनों के जरिए इस बोझ को कम करना चाहती है।

एथेनॉल आधारित ईंधन के लंबे समय से समर्थक रहे गडकरी ने कहा कि शुरुआत में इस विचार का मजाक उड़ाया जाता था। उन्होंने कहा, “मैं इस सपने की बात करता था तो लोग हंसते थे। मेरे कुछ मित्र इसकी आलोचना भी करते थे।”

गडकरी ने हाल में लॉन्च किए गए फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का भी जिक्र किया। उन्होंने हाल ही में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ मिलकर मारुति सुजुकी की एथेनॉल-संगत वैगनआर लॉन्च की थी।

यह कंपनी की लोकप्रिय हैचबैक का ऐसा संस्करण है, जो E20 से लेकर E100 तक एथेनॉल-पेट्रोल मिक्स पर चल सकता है। हालांकि मौजूदा भारतीय नियमों के तहत इसे E85 ईंधन के उपयोग की मंजूरी मिली हुई है।

मंत्री ने हीरो मोटोकॉर्प की पहल का भी उल्लेख किया। कंपनी ने स्प्लेंडर प्लस और HF डीलक्स के फ्लेक्स-फ्यूल संस्करण लॉन्च किए हैं, जिनमें E85-संगत इंजन लगाए गए हैं। पिछले सप्ताह हीरो मोटोकॉर्प के कार्यक्रम में गडकरी और पुरी दोनों ने परिवहन ईंधन में एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ाने की वकालत की थी।

गडकरी ने कहा कि कई बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां भी जल्द एथेनॉल-संगत वाहन लॉन्च करने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने कहा, “टोयोटा, सुजुकी, एमजी और हुंडई जैसी कंपनियां अगले डेढ़ महीने के भीतर 100 फीसदी एथेनॉल पर चलने वाले वाहन लॉन्च करेंगी।”

एथेनॉल के अलावा गडकरी ने परिवहन ईंधन के रूप में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ाने की योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जल्द ही नागपुर में एक पायलट परियोजना शुरू की जाएगी, जिसमें हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग स्टेशन और दो हाइड्रोजन से चलने वाली बसें शामिल होंगी। ये बसें इलेक्ट्रोलाइजर की मदद से पानी से तैयार किए गए ग्रीन हाइड्रोजन पर चलेंगी और आम जनता के लिए उपलब्ध होंगी।

नितिन गडकरी की यह घोषणा ऐसे समय आई है जब हाल ही में सरकार ने 22 से 30 फीसदी एथेनॉल मिश्रण वाले एथेनॉल-पेट्रोल ब्लेंड को केंद्रीय उत्पाद शुल्क से छूट देने का फैसला किया है। इससे इन मिश्रणों को E20 ईंधन के समान दर्जा मिल गया है, जो वर्तमान में पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध मानक मिश्रण है।

सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन का भी प्रस्ताव रखा है, ताकि E85 ईंधन और 100 फीसदी एथेनॉल ईंधन को औपचारिक मान्यता दी जा सके। यह कदम भारत में वैकल्पिक ईंधनों को व्यापक स्तर पर अपनाने के लिए आवश्यक नियामकीय आधार तैयार करेगा।

Stock Market: इस सप्ताह कैसा रहेगा शेयर बाजार का रूख, जानिए एक्सपर्ट की राय

नई दिल्ली। Stock Market This Week: भारतीय शेयर बाजार की चाल इस सप्ताह मुख्य रूप से महंगाई के आंकड़ों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर संबंधी घोषणा और कच्चे तेल की कीमतों के रुख से तय होगी। विश्लेषकों ने यह राय जताई है।

विश्लेषकों का कहना है कि रविवार को संभावित अमेरिका-ईरान समझौते की स्थिति, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक बाजारों के रुझान भी घरेलू शेयर बाजार की धारणा को प्रभावित करेंगे।

रिलायंस ब्रोकिंग के सीनियर वाइस-प्रसिडेंट और हेड ऑफ रिसर्च अजित मिश्रा ने कहा, ”घरेलू मोर्चे पर निवेशकों की नजर मई माह के थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी।” उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक और उसका निर्णय सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर किए जाएंगे और इसके बाद रणनीतिक महत्व वाले होर्मुज स्ट्रेट को सभी के लिए तुरंत खोल दिया जाएगा। हालांकि, ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यदि समझौता अपेक्षित रूप से सफल नहीं हुआ तो नए हमलों की संभावना बनी रहेगी।

ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक्नोलॉजी कंपनी एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. ने कहा कि बाजार अमेरिका-ईरान समझौते से जुड़े हर घटनाक्रम पर बेहद संवेदनशील बना रहेगा। इस बीच, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) जून के पहले पखवाड़े में भारतीय शेयरों से 62,853 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी कर चुके हैं।

नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में अब तक एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से कुल 2.87 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। यह पूरे 2025 में निकाले गए 1.66 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा है।

स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट प्रवेश गौड़ ने कहा कि घरेलू मोर्चे पर निवेशकों की निगाह मॉनसून की प्रगति और महंगाई की स्थिति पर रहेगी। उन्होंने कहा कि 16-17 जून को होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक पर भी निवेशकों की नजर है। बाजार भागीदार फेडरल रिजर्व की टिप्पणियों, महंगाई के दृष्टिकोण, आर्थिक वृद्धि के अनुमान और भविष्य में ब्याज दरों में कटौती के संकेतों पर करीबी नजर रखेंगे।

पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,284.61 अंक यानी 1.73 फीसदी चढ़ा, जबकि एनएसई निफ्टी 256.20 अंक यानी एक फीसदी मजबूत हुआ।

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों से ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण पॉजिटिव संकेत है।

विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से अब तक 2.87 लाख करोड़ रुपये निकाले

नई दिल्ली। FPI withdrawal: बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंताओं और रुपये की लगातार कमजोरी के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने 14 जून तक भारतीय शेयर बाजार से 62,853 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी की है।

नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 में अब तक एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से लगभग 2.87 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। यह राशि पूरे वर्ष 2025 में हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से भी कहीं ज्यादा है।

बजाज ब्रोकिंग के वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पबित्रो मुखर्जी ने कहा कि आने वाले सप्ताह में एफपीआई इन्वेस्टमेंट फ्लो अमेरिकी-ईरान शांति वार्ता, अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के नीतिगत फैसले, बैंक ऑफ जापान की ब्याज दर समीक्षा तथा प्रमुख केंद्रीय बैंकों की टिप्पणियों पर निर्भर करेगा।

आंकड़ों के अनुसार, फरवरी को छोड़कर 2026 के हर महीने में एफपीआई शुद्ध विक्रेता रहे हैं। जनवरी में उन्होंने भारतीय शेयर बाजार से 35,962 करोड़ रुपये निकाले थे, जबकि फरवरी में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो पिछले 17 महीनों का सबसे बड़ा मासिक निवेश था।

हालांकि मार्च में रुख फिर बदल गया और विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की निकासी की। इसके बाद अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये और मई में 32,963 करोड़ रुपये की निकासी हुई। जून के पहले दो सप्ताह में ही निकासी 62,853 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के हेड ऑफ मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों की दिशा, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और वैश्विक वृद्धि संबंधी चिंताओं के कारण निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम कम करने की रणनीति अपनाते हुए उभरते बाजारों से धन निकालकर विकसित बाजारों और अपेक्षाकृत सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, अन्य उभरते बाजारों की तुलना में भारतीय शेयरों का अपेक्षाकृत ऊंचा मूल्यांकन भी विदेशी निवेशकों के ज्यादा सतर्क रुख का कारण बना है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये में लगातार गिरावट भी निकासी की प्रमुख वजह है। भारतीय मुद्रा वर्ष 2026 में अब तक लगभग छह फीसदी और पिछले एक वर्ष में करीब 10 फीसदी कमजोर हुई है।

शेयर बाजार से निकासी के उलट जून के पहले पखवाड़े में एफपीआई ने एफएआर रूट के जरिये बॉन्ड प्रतिभूतियों में 13,200 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है। इस रूट से वर्ष 2026 में अब तक कुल निवेश लगभग 28,000 करोड़ रुपये पहुंच चुका है।

Market Cap: सेंसेक्स की शीर्ष 8 कंपनियों का मार्केट कैप 1.90 लाख करोड़ बढ़ा

नई दिल्ली। Market Cap News: शेयर बाजार में पिछले सप्ताह आई जोरदार तेजी ने निवेशकों की वेल्थ में बड़ा इजाफा किया। सेंसेक्स और निफ्टी की मजबूत बढ़त के बीच देश की शीर्ष 10 कंपनियों में से 8 का संयुक्त मार्केट कैप 1.90 लाख करोड़ रुपये बढ़ गया।

इस रैली में ICICI बैंक सबसे बड़ा विनर बनकर उभरा, जबकि HDFC बैंक और SBI ने भी निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया। हालांकि TCS और LIC के मार्केट कैप में गिरावट दर्ज की गई।

बीते सप्ताह BSE का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 1,284.61 अंक यानी 1.73 फीसदी चढ़ा, जबकि NSE निफ्टी 256.2 अंक यानी 1 फीसदी मजबूत हुआ।

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार ने उतार-चढ़ाव भरे सप्ताह का अंत मजबूती के साथ किया और लगातार दो सप्ताह की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया। वैश्विक माहौल में सुधार और विदेशी मुद्रा प्रवाह आकर्षित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा उठाए गए कदमों ने बाजार को समर्थन दिया।

उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर बढ़ती उम्मीदों से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। इससे भू-राजनीतिक तनाव कम होने और ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद जगी।

टॉप-10 कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक, भारती एयरटेल, ICICI बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और हिंदुस्तान यूनिलीवर के मार्केट कैप में बढ़ोतरी हुई। वहीं टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के मार्केट कैप में गिरावट दर्ज की गई।

ICICI बैंक का मार्केट कैप 56,223 करोड़ रुपये बढ़कर 9,61,297.77 करोड़ रुपये पहुंच गया। एचडीएफसी बैंक का मार्केट कैप 38,571.11 करोड़ रुपये बढ़कर 11,89,314.42 करोड़ रुपये हो गया, जबकि SBI का मूल्यांकन 36,137.87 करोड़ रुपये बढ़कर 9,38,661.50 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

बजाज फाइनेंस का मार्केट कैप 18,366.57 करोड़ रुपये बढ़कर 5,71,947.54 करोड़ रुपये हो गया। वहीं भारती एयरटेल का मूल्यांकन 14,380.14 करोड़ रुपये बढ़कर 11,10,530.63 करोड़ रुपये पहुंच गया।

लार्सन एंड टुब्रो का मार्केट कैप 13,241.39 करोड़ रुपये बढ़कर 5,57,197.83 करोड़ रुपये हो गया, जबकि हिंदुस्तान यूनिलीवर का मूल्यांकन 10,984.34 करोड़ रुपये बढ़कर 5,09,285.65 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) का मार्केट कैप भी 2,097.54 करोड़ रुपये बढ़कर 17,49,418.94 करोड़ रुपये हो गया।

दूसरी ओर, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का मार्केट कैप 13,296.47 करोड़ रुपये घटकर 7,82,049.62 करोड़ रुपये रह गया। वहीं LIC का मूल्यांकन 822.25 करोड़ रुपये घटकर 5,05,051.07 करोड़ रुपये पर आ गया।

सबसे मूल्यवान कंपनियों की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर बनी रही। इसके बाद एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, ICICI बैंक, SBI, TCS, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, हिंदुस्तान यूनिलीवर और LIC का स्थान रहा।

राम मंदिर चढ़ावे की राशि के गबन के मामले में बड़ा खुलासा, कई अहम सबूत मिले

अयोध्या। Ram Mandir donations embezzlement: राम मंदिर चढ़ावे की राशि को गबन करने मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। हेरफेर व गबन का ये खेल पिछले सवा साल से चल रहा था। भनक लगी तो निगरानी की गई और फिर खेल उजागर हुआ। आखिरी के कुछ महीने में बड़ी रकम पार की गई।

सूत्रों के मुताबिक, मार्च 2025 से संदिग्धों ने रकम पार करना शुरू किया था। सूत्रों का दावा है कि पहली बार 25 मार्च 2025 को रकम पार की गई थी। उसके बाद ये सभी नियमित रूप से गिनती के दौरान रकम इधर से उधर लेकर चले जाते थे। मंदिर परिसर कैमरों की निगरानी में है।

मंदिर के नियमित कार्यों को देखें तो उसमें सबसे अहम कार्य चंदे की राशि की गिनती है। जो सिर्फ इन कर्मियों के भरोसे छोड़ दी गई थी। हालांकि ये यकीन से परे है कि जहां रोजाना लाखों-करोड़ों रुपये गिने जाते हों, वहां सिर्फ यही पांच लोग रहते होंगे।

कुछ पदाधिकारी व सुरक्षाकर्मी भी रहते थे। अब उनकी मौजूदगी व निगरानी में इतनी बड़ी रकम पार कर ले जाना और उनको भनक न लगना बड़ा सवाल खड़ा करता है। इसलिए इसमें और कई लोगों की भूमिका का अंदेशा है। वहीं, जो संदिग्ध पकड़े गए हैं, उनके साथ वाले भी कई रडार पर हैं।

चढ़ावे की गिनती के दौरान पदाधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी व निगरानी में इतनी बड़ी रकम पार कर ले जाना और उनको भनक न लगना बड़ा सवाल है।

चंदे की राशि गबन की गई है। बरामदगी से इसकी पुष्टि हो चुकी है लेकिन अब तक एफआईआर न करवाना सवाल खड़ा करता है। आखिर ट्रस्ट की तरफ से एफआईआर क्यों नहीं कराई जा रही है।

अपने स्तर से ट्रस्ट जांच तो कर सकती है लेकिन किसी को पकड़ कर लाना, उससे पूछताछ करना और घरों में जाकर चोरी की रकम बरामद करना, ट्रस्ट का काम नहीं बल्कि पुलिस व जांच एजेंसियों का है।

किसी बड़े की भूमिका
ट्रस्ट की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। बड़ा सवाल है कि क्या गबन के खेल के पीछे कोई बड़ा नाम है, इसलिए मामला दबाया जा रहा है। जब गबन का मामला खुला था, उसी वक्त पुलिस, अन्य किसी एजेंसी या एसआईटी को जांच क्यों नहीं सौंपी गई? इतने दिन बीतने के बाद एसआईटी की मांग की गई है। क्या इतने वक्त में सुबूत नष्ट करने का काफी वक्त नहीं मिल गया?

दानपात्र प्रकरण पर नृपेंद्र मिश्र ने साधी चुप्पी
राम मंदिर के दानपात्र से धन गबन प्रकरण की जांच के बीच शनिवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंचे। उनके दौरे पर सबकी निगाहें दान विवाद को लेकर संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी थीं, लेकिन उन्होंने टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया।

महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पत्रकारों ने सवाल पूछा तो उन्होंने कहा, मैं केवल निर्माण कार्य देखता हूं और कुछ नहीं। नृपेंद्र मिश्र का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राम मंदिर में दान राशि के गबन को लेकर ट्रस्ट और पुलिस स्तर पर जांच चल रही है।

दूसरी ओर, अयोध्या प्रवास के दौरान नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर परिसर में चल रही विभिन्न निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत रास, ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र, गोपाल राव, आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा समेत अन्य मौजूद रहे।

G7 शिखर सम्मेलन फ़्रांस में कल से, पीएम मोदी और ट्रंप करेंगे द्विपक्षीय वार्ता

नई दिल्ली। व्हाइट हाउस ने शनिवार को पुष्टि की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप फ्रांस में होने वाले जी-7 (G7) शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बैठक करेंगे।

फरवरी 2025 में मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की मुलाकात होगी। उस समय मोदी ने नवंबर 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद ट्रंप से मुलाकात की थी। G7 शिखर सम्मेलन सोमवार से शुरू हो रहा है।

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब जी-7 शिखर सम्मेलन पर ईरान युद्ध, होर्मुज का भविष्य और वैश्विक ऊर्जा एवं शिपिंग क्षेत्र पर इसके प्रभाव को लेकर चर्चा की गहमागहमी बनी रहने की संभावना है।

समाचार एजेंसी एपी (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप जी-7 सम्मेलन के दौरान अपने सहयोगी देशों के नेताओं के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को बारूदी सुरंगों से मुक्त करने की योजना पर चर्चा कर सकते हैं। एपी ने यह जानकारी अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से दी है।

G7 के सदस्य देश ब्रिटेन और फ्रांस ने संकेत दिए हैं कि संघर्ष में विराम आने के बाद वे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाने और बारूदी सुरंगों को हटाने के प्रयासों में सहयोग कर सकते हैं।

व्हाइट हाउस द्वारा तय नियमों के तहत नाम न बताने की शर्त पर पत्रकारों को जानकारी देने वाले अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ट्रंप सम्मेलन के इतर मिस्र, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में ईरान युद्ध को समाप्त करने और तनाव कम करने के प्रयासों पर चर्चा होने की संभावना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस और स्लोवाकिया की एक सप्ताह की यात्रा पर रवाना हो चुके हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड ने पहले अपनी रिपोर्ट में बताया था कि फ्रांस के एवियन-ले-बैं (Evian-les-Bains) शहर में 16 और 17 जून को जी-7 शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन के दौरान मोदी कई वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे।

फ्रांस की ओर से आयोजित इस शिखर सम्मेलन में भारत को विशेष आमंत्रित देशों में शामिल किया गया है। भारत के अलावा ब्राजील, दक्षिण कोरिया और केन्या को भी आमंत्रित किया गया है। फ्रांस प्रमुख गैर G7 अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापक सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

यात्रा पर रवाना होने से पहले जारी बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की रणनीतिक सोच में फ्रांस का एक विशेष स्थान है। मोदी ने कहा, “फ्रांस भारत की रणनीतिक दृष्टि में एक विशेष स्थान रखता है। इसी साल राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत आए थे और हमने अपने संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी तक ले गए हैं।”

भारत और फ्रांस ने इसी वर्ष अपने संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया है। भारत फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन के राफेल लड़ाकू विमानों का एक प्रमुख खरीदार भी है।

स्लोवाकिया में भारत की राजदूत अपूर्वा श्रीवास्तव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा “ऐतिहासिक और अत्यंत महत्वपूर्ण” होगी और इससे दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।

साल 1993 में स्वतंत्रता मिलने के बाद यह पहला अवसर होगा जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री स्लोवाकिया की यात्रा करेगा।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की बैठक पर भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर खास नजर रहेगी। हालांकि, पूरे शिखर सम्मेलन का मुख्य फोकस ईरान युद्ध और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर रहने की संभावना है।

Mustard: पिछले सप्ताह बूंदी मंडी में सरसों 8,000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी

नई दिल्ली। Mustard Price: सरसों के बड़े उत्पादक राज्यों के मुख्य थोक बाज़ारों में सरसों की सप्लाई कम होने लगी है, फिर भी व्यापारियों और तेल मिल मालिकों की तरफ़ से मज़बूत माँग बनी हुई है।

नतीजतन, 6-12 जून के हफ़्ते में सरसों की कीमतों में औसतन 100–200 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई; खास तौर पर, राजस्थान के बूंदी बाज़ार में कीमतें 800 रुपये बढ़कर 8,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुँच गईं।

हफ़्ते के दौरान, दिल्ली में 42% कंडीशन वाली सरसों की कीमतों में 50 रुपये प्रति क्विंटल और जयपुर में 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई। दूसरे बाज़ारों में औसत क्वालिटी वाली सरसों की कीमतों में 100–200 रुपये की बढ़ोतरी हुई, हालाँकि गंगानगर में ऊँची कीमत में 250 रुपये की गिरावट आई। सभी बाज़ारों में सरसों की कीमतें अभी 7,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर चल रही हैं।

सरसों के तेल (एक्सपेलर और कच्ची घानी) की कीमतों में भी 20–30 रुपये प्रति 10 किलो की बढ़ोतरी हुई। दिल्ली में एक्सपेलर ऑयल का दाम ₹30 बढ़कर 1,580 रुपये प्रति 10 किलो हो गया, जबकि चरखी दादरी में यह 1,585 रुपये प्रति 10 किलो पर पहुंच गया। इसी तरह, कच्ची घानी सरसों तेल का दाम मुरैना में 40 रुपये बढ़कर 1,610 रुपये प्रति 10 किलो और भरतपुर में 30 रुपये बढ़कर 1,600 रुपये प्रति 10 किलो हो गया।

सरसों की रोज़ाना की औसत आवक घटकर 5-6 लाख बैग (हर बैग में 50 kg) रह गई। 6 जून को 5 लाख बैग; 8 और 9 जून को 6 लाख बैग; 10 और 11 जून को 5.50 लाख बैग; और 12 जून को 5.25 लाख बैग आवक रही।मस्टर्ड ऑयल केक और DOC में कम ट्रेडिंग एक्टिविटी के कारण कीमतों पर कुछ दबाव देखा गया।

Coriander: धनिया की कीमतों में फिर से तेजी आने का अनुमान

नई दिल्ली। इस हफ़्ते धनिया की कीमतों में मिला-जुला ट्रेडिंग ट्रेंड देखने को मिला। हफ़्ते की शुरुआत में, कीमतें कम थीं; लेकिन, हफ़्ते के आखिर में, फ्यूचर्स और स्पॉट मार्केट दोनों में कीमतें तेज़ी से बढ़ने लगीं।

सूत्रों का कहना है कि हफ़्ते के आखिर में फ्यूचर्स की कीमतों में तेज़ी मिडिल ईस्ट के देशों में शांति लौटने की उम्मीद की वजह से आई। उम्मीद है कि विदेश में शांति से भारतीय धनिया का एक्सपोर्ट बढ़ेगा, जिससे कीमतें मज़बूत रहेंगी।

ध्यान देने वाली बात यह है कि इस सीज़न में प्रोडक्शन में गिरावट के अलावा, बड़े प्रोडक्शन सेंटर्स पर बचा हुआ स्टॉक भी बहुत कम हो गया है। इसलिए, कुल उपलब्धता खपत की मांग से कम रहने की उम्मीद है। इस उम्मीद से, हाल ही में बाज़ारों में धनिया की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं।

‘ईगल’ क्वालिटी का दाम 133 से 135 और ‘बादामी’ क्वालिटी का दाम 122 से 125 रहा, जो पहले कभी नहीं देखा गया। ट्रेडर्स को उम्मीद है कि आने वाले समय में कीमतें और बढ़ेंगी। मौजूदा हालात को देखते हुए, अंदाज़ा है कि ‘ईगल’ धनिया का दाम 145 से 150 रुपये किलो के लेवल तक पहुंच सकता है।

देश में धनिया का प्रोडक्शन पिछले दो-तीन सालों से कम हो रहा है। अनुमान के मुताबिक, 2023 में देश में धनिया का प्रोडक्शन रिकॉर्ड 16 मिलियन (1.60 करोड़) बैग था, जो 2024 में घटकर 12 मिलियन (1.20 करोड़) बैग और 2025 में 11 मिलियन (1.10 करोड़) बैग रह गया। ट्रेड अनुमान के मुताबिक 2026 में यह और घटकर 9.5-9.7 मिलियन (95-97 लाख) बैग रह जाएगा।

मौजूदा सीज़न में, मध्य प्रदेश में प्रोडक्शन 4.3-4.4 मिलियन (43-44 लाख) बैग और गुजरात में 3.8-4.0 मिलियन (38-40 लाख) बैग होने का अनुमान है। इसके अलावा, राजस्थान में धनिया का प्रोडक्शन लगभग 1.2 से 1.3 मिलियन बैग यानी 1.2 से 1.3 करोड़ बैग होने का अनुमान है।

मंडियों में रोज़ाना की आवक कम होने लगी है क्योंकि कुल उपज का बड़ा हिस्सा पहले ही ट्रेडिंग सेंटर्स पर पहुँच चुका है। सूत्रों से पता चला है कि गुजरात से लगभग 80 परसेंट उपज पहले ही आ चुकी है। इसी तरह, मध्य प्रदेश से 65-70 परसेंट उपज मंडियों में पहुँच चुकी है। अनुमान है कि राजस्थान की 70-75 परसेंट धनिया की फसल भी मंडियों में आ चुकी है।

अभी, गुजरात के एक बड़े बाज़ार गोंडल में आवक घटकर 4,000-5,000 बैग रह गई है, जबकि राजस्थान के रामगंज बाज़ार में यह 2,000-2,500 बैग है। मध्य प्रदेश के गुना बाज़ार में आवक लगभग 4,000-5,000 बैग है, जबकि नीमच, अशोकनगर, मंदसौर और बीनागंज जैसे दूसरे बाज़ारों में अभी 500-700 बैग की आवक हो रही है। ‘ईगल’ क्वालिटी का धनिया 128 से 132 प्रति किलो और ‘बादामी’ क्वालिटी का धनिया 120 से 125 प्रति किलो पर बिक रहा है।

तेजी की सम्भावना
कुल उपलब्धता खपत की ज़रूरतों से कम होने की वजह से मार्केट का माहौल बुलिश बना हुआ है। यह ध्यान देने वाली बात है कि मौजूदा सीज़न में धनिया की कुल उपलब्धता – जिसमें नई उपज और कैरी-ओवर स्टॉक शामिल हैं – लगभग 12 से 12.5 मिलियन बैग होने का अनुमान है, जबकि लोकल डिमांड और एक्सपोर्ट के लिए कुल ज़रूरत 14 से 15 मिलियन बैग है। ट्रेड अनुमानों के मुताबिक, आने वाले दिनों में सामान की सप्लाई धीरे-धीरे कम होने से कीमत में 10 से 15 प्रति किलो की बढ़ोतरी हो सकती है।

निर्यात: स्पाइसेस बोर्ड के जारी डेटा के मुताबिक, साल 2025-26 में कुल धनिया एक्सपोर्ट 60,211 टन हुआ, जिससे 679.70 करोड़ का रेवेन्यू मिला; वहीं, 2024-25 में एक्सपोर्ट 60,323 टन हुआ और ₹633 करोड़ की कमाई हुई। साल 2023-24 में रिकॉर्ड 108,624 टन धनिया एक्सपोर्ट हुआ।