नई दिल्ली। Stock Market This Week: भारतीय शेयर बाजार की चाल इस सप्ताह मुख्य रूप से महंगाई के आंकड़ों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर संबंधी घोषणा और कच्चे तेल की कीमतों के रुख से तय होगी। विश्लेषकों ने यह राय जताई है।
विश्लेषकों का कहना है कि रविवार को संभावित अमेरिका-ईरान समझौते की स्थिति, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक बाजारों के रुझान भी घरेलू शेयर बाजार की धारणा को प्रभावित करेंगे।
रिलायंस ब्रोकिंग के सीनियर वाइस-प्रसिडेंट और हेड ऑफ रिसर्च अजित मिश्रा ने कहा, ”घरेलू मोर्चे पर निवेशकों की नजर मई माह के थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी।” उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक और उसका निर्णय सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर किए जाएंगे और इसके बाद रणनीतिक महत्व वाले होर्मुज स्ट्रेट को सभी के लिए तुरंत खोल दिया जाएगा। हालांकि, ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यदि समझौता अपेक्षित रूप से सफल नहीं हुआ तो नए हमलों की संभावना बनी रहेगी।
ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक्नोलॉजी कंपनी एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. ने कहा कि बाजार अमेरिका-ईरान समझौते से जुड़े हर घटनाक्रम पर बेहद संवेदनशील बना रहेगा। इस बीच, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) जून के पहले पखवाड़े में भारतीय शेयरों से 62,853 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी कर चुके हैं।
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में अब तक एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से कुल 2.87 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। यह पूरे 2025 में निकाले गए 1.66 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा है।
स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट प्रवेश गौड़ ने कहा कि घरेलू मोर्चे पर निवेशकों की निगाह मॉनसून की प्रगति और महंगाई की स्थिति पर रहेगी। उन्होंने कहा कि 16-17 जून को होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक पर भी निवेशकों की नजर है। बाजार भागीदार फेडरल रिजर्व की टिप्पणियों, महंगाई के दृष्टिकोण, आर्थिक वृद्धि के अनुमान और भविष्य में ब्याज दरों में कटौती के संकेतों पर करीबी नजर रखेंगे।
पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,284.61 अंक यानी 1.73 फीसदी चढ़ा, जबकि एनएसई निफ्टी 256.20 अंक यानी एक फीसदी मजबूत हुआ।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों से ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण पॉजिटिव संकेत है।

