नई दिल्ली। 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश के विकास और आत्मनिर्भरता को लेकर कई बड़े ऐलान किए।
उन्होंने कहा कि आने वाला दौर डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम और दूसरी नई तकनीकों का है, जिसके चलते भारत को इस क्षेत्र में तेजी से काम करना होगा। पीएम मोदी ने ऐलान किया कि अगले एक साल में देश के 1 करोड़ युवाओं को AI की ट्रेनिंग दी जाएगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक और इनोवेशन शक्ति की ‘सप्तधारा’ की तीसरी शक्ति है। भारत को इनोवेशन का ग्लोबल हब बनना होगा और अपनी डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजी को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाना होगा।
उन्होंने कहा कि अगले 5 से 7 साल में देश में वह काम किया जा सकता है, जो पिछले 5 से 7 दशकों में नहीं हुआ। इसके लिए देश को नई गति और नई ताकत के साथ आगे बढ़ना होगा।
मैन्युफैक्चरिंग से ग्लोबल मार्केट तक पहुंचने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में और आगे बढ़ना होगा। केवल बड़े सामान बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि छोटे-छोटे पुर्जों से लेकर पूरे उत्पाद तक बनाने की क्षमता देश में विकसित करनी होगी। उन्होंने उद्योगों से कहा कि ग्लोबल मार्केट में भारतीय उत्पादों की पहचान भरोसे और अच्छी क्वालिटी के साथ बननी चाहिए।
उन्होंने किसानों, युवाओं और महिलाओं पर भरोसा जताते हुए कहा कि इन्हीं की ताकत से देश बड़े सपनों को पूरा कर सकता है। पीएम ने कहा कि रिफॉर्म उनके लिए सिर्फ कोई नीति नहीं, बल्कि एक विश्वास है और देश ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर आगे बढ़ चुका है।
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया अब भारत की क्षमता को पहचानने लगी है। उनके मुताबिक भारत के पास राजनीतिक जनादेश, स्थिर सरकार, मजबूत न्याय तंत्र और संविधान है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ कई एफटीए और ट्रेड एग्रीमेंट हो रहे हैं और लक्ष्य है कि देश में बने टेक्सटाइल, मशीन और दवाइयां समेत अलग-अलग उत्पाद दुनिया के बाजारों तक पहुंचें।
संकट के बीच आत्मनिर्भरता पर जोर
प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता की जरूरत बताते हुए कहा कि जब देश ने आत्मनिर्भरता की बात शुरू की थी, तब कुछ लोग ग्लोबलाइजेशन को लेकर सवाल उठाते थे। उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक परिस्थितियों में आत्मनिर्भरता और भी जरूरी हो गई है।
कोरोना संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान देश में वैक्सीन, डीजल, गैस और खाद की कमी को लेकर आशंकाएं जताई गई थीं। पीएम मोदी ने कहा कि इन मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद देश में गैस, पेट्रोल और यूरिया उपलब्ध रहा। उन्होंने बताया कि दुनिया में यूरिया करीब 3,000 रुपये में मिलता है, जबकि भारत में किसानों को यह 300 रुपये में दिया जा रहा है। डीएपी 1,350 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा फोकस
पीएम मोदी ने बताया कि 2014 के मुकाबले देश में पाइप से गैस पहुंचाने का दायरा काफी बढ़ा है। पहले 70 शहरों में पाइप से गैस पहुंचाई जाती थी, जबकि पिछले 12 साल में 700 शहरों के पौने दो करोड़ घरों तक पाइप से गैस पहुंचाने का काम शुरू हुआ है।
उन्होंने कहा कि 2014 से पहले भारत की सोलर एनर्जी क्षमता केवल 2 गीगावॉट थी, जो अब बढ़कर 160 गीगावॉट हो गई है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि करीब 50 लाख घरों में सोलर एनर्जी का काम तेजी से चल रहा है। इससे कई घरों का बिजली बिल शून्य हुआ है और लोग अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई भी कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को कच्चे तेल के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करनी होगी। इसी दिशा में समुद्र के भीतर नए भंडार खोजे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल ‘समुद्र मंथन’ की घोषणा की गई थी और इसके लिए 85 हजार करोड़ रुपये देने की बात कही गई थी।
सेमीकंडक्टर और रक्षा में आत्मनिर्भरता
प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा को आज की बड़ी जरूरत बताते हुए कहा कि नई दुनिया को चलाने के लिए बड़ी मात्रा में बिजली चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकार ने संसद में ‘शांति एक्ट’ पास किया है और 2047 तक 100 गीगावॉट का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने मेक इन इंडिया, स्वदेशी और वोकल फॉर लोकल को भी देश के विकास से जोड़ते हुए कहा कि आज भारतीयों का जुड़ाव इन अभियानों से बढ़ा है। सेमीकंडक्टर को लेकर पीएम ने कहा कि चिप अब हर क्षेत्र के लिए जरूरी है। भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाए हैं। उन्होंने बताया कि तीन प्लांट शुरू हो चुके हैं और वहां से निर्यात भी शुरू हो गया है।
प्रधानमंत्री ने रक्षा शक्ति को ‘सप्तधारा’ की पांचवीं शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि डिफेंस के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की जरूरत भारत और दुनिया दोनों ने महसूस की है। साथ ही साइबर सुरक्षा को भी रक्षा का अहम हिस्सा बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें युवा शक्ति की क्षमता का इस्तेमाल किया जा सकता है।

