नई दिल्ली। Stock Market Update 9:18 AM: सुस्त शुरुआत के बाद शेयर बाजार खुलते ही तेजी की पटरी पर आ गया। सेंसेक्स 125 अंकों की बढ़त के संग 73705 के लेवल पर पहुंच। उधर, निफ्टी भी 32 अंक ऊपर 23095 के लेवल पर पहुंच गया। सेंसेक्स में महिंद्रा एंड महिंद्रा, एलएंडटी, इटरनल, स्टेट बैंक, एक्सिस बैंक जैसे स्टॉक्स बढ़त पर हैं। इन्फोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा, सन फार्मा, आईटीसी और एचसीएल टेक में कमजोरी नजर आ रही है।
कल के गिरावट के तूफान के बाद घरेलू शेयर मार्केट की शुरुआत कमजोर रही। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 54 अंकों के नुकसान के साथ 73525 के लेवल पर खुला। जबकि, एनएसई का 50 शेयरों वाला बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 28 अंक नीचे 23035 के लेवल पर खुला।
गुरुवार को लाल निशान में बंद हुआ था बाजार
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी 50 करीब 1.64 प्रतिशत गिरकर 23,169 के आसपास बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में भी करीब 1.67 प्रतिशत की गिरावट आई। सेंसेक्स 1247 अंकों का गोता लगाकर 73580 पर बंद हुआ था। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। अब शुक्रवार को सवाल यह है कि बाजार इस गिरावट के बाद संभलता है या बिकवाली का सिलसिला आगे भी जारी रहता है।
सेंसेक्स एवं निफ़्टी के लिए ग्लोबल मार्केट के संकेत
सेंसेक्स के लिए 73,000 से 73,250 का दायरा अहम है। इस क्षेत्र के ऊपर रहने पर बाजार में सुधार की कोशिश हो सकती है। ऊपर की तरफ 73,850 से 74,000 का स्तर महत्वपूर्ण रहेगा। अगर सेंसेक्स 74,000 के ऊपर टिकता है तो बाजार का दबाव कुछ कम हो सकता है।
- महंगा कच्चा तेल बढ़ा सकता है चिंता: शेयर बाजार के लिए इस समय कच्चा तेल बड़ी चिंता बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर और WTI करीब 94 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। तेल महंगा होने का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इससे कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है।
- अमेरिका की बॉन्ड यील्ड: अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड करीब 5.20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यील्ड बढ़ने से दुनिया भर के शेयर बाजारों पर दबाव बन सकता है।
- ईरान-अमेरिका टेंशन : पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से जुड़ी खबरें भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं। अगर तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं तो कच्चे तेल की कीमतों में राहत आ सकती है। इससे भारतीय शेयर बाजार को भी सहारा मिल सकता है, लेकिन तनाव बढ़ने पर तेल की कीमत फिर ऊपर जा सकती है और बाजार में बिकवाली बढ़ सकती है।

