घरेलू और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के साथ विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर भी रहेगी नजर
नई दिल्ली। अगले सप्ताह घरेलू शेयर बाजार की चाल काफी हद तक अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड से तय होगी। इसके अलावा निवेशकों की नजर घरेलू और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के साथ विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर भी रहेगी।
जानकारों का कहना है कि अमेरिका-ईरान बातचीत में प्रगति से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है तो भारतीय बाजार को राहत मिल सकती है। वहीं तनाव बढ़ने या तेल आपूर्ति को लेकर नई चिंता पैदा होने पर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के एसवीपी रिसर्च अजित मिश्रा के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए किसी समझौते की दिशा में प्रगति होती है तो ऊर्जा की कीमतों में नरमी आ सकती है। इससे भारत के आयात बिल और रुपये को भी कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
घरेलू मोर्चे पर अगस्त के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े, एचएसबीसी मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां और मासिक वाहन बिक्री के आंकड़े बाजार के लिए अहम रहेंगे। महात्मा गांधी जयंती के कारण शुक्रवार को शेयर बाजार बंद रहेगा, जिससे अगला सप्ताह सामान्य से छोटा कारोबारी सप्ताह होगा।
एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सितंबर के नीतिगत फैसले के बाद वैश्विक बॉन्ड यील्ड भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। बॉन्ड यील्ड और डॉलर में आगे बढ़ोतरी होती है तो उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर दबाव पड़ सकता है। वहीं यील्ड में नरमी से कुछ राहत मिल सकती है।
रुपये की चाल भी महत्वपूर्ण रहेगी। कच्चे तेल के कारण डॉलर की मांग और FII की लगातार बिकवाली रुपये पर दबाव बनाए रख सकती है। हालांकि RBI के हस्तक्षेप से रुपये में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव को सीमित करने में मदद मिली है। इसके अलावा अमेरिका से आने वाले कई आर्थिक आंकड़े भी वैश्विक बाजार की धारणा के लिए अहम होंगे। पिछले सप्ताह BSE सेंसेक्स 399.22 अंक यानी 0.53 फीसदी गिरा था। वहीं NSE निफ्टी में 205.9 अंक यानी 0.88 फीसदी की गिरावट आई थी।
एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और CEO हरिसेलवन राधाकृष्णन के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड करीब 105-106 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर है, जो आर्थिक मोर्चे पर बड़ी राहत देने के लिहाज से अभी भी काफी ऊंचा है। अमेरिका-ईरान बातचीत में प्रगति होने पर कच्चे तेल की कीमतों में शामिल भू-राजनीतिक जोखिम का असर कम हो सकता है। वहीं तनाव बढ़ने या तेल की आपूर्ति बाधित होने पर महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड करीब 5.2 फीसदी पर है और यह वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की धारणा पर दबाव डालने वाला एक और अहम कारक रहेगा।
पोनमुडी के मुताबिक, ऊंची कच्चे तेल की कीमतों, बढ़ी हुई बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के मेल ने पिछले सप्ताह के मध्य में बाजार में आई तेज बिकवाली में भूमिका निभाई थी। ऊंची यील्ड वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों को सख्त करती है और उभरते बाजारों में निवेश का आकर्षण कम कर सकती है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में वेल्थ मैनेजमेंट के हेड ऑफ रिसर्च सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक, बाजार भारत के अगस्त के औद्योगिक उत्पादन और केंद्र सरकार के राजकोषीय घाटे के आंकड़ों पर नजर रखेगा। इनसे घरेलू अर्थव्यवस्था की रफ्तार और राजकोषीय स्थिति को लेकर संकेत मिलेंगे।
वैश्विक स्तर पर अमेरिका के कंज्यूमर कॉन्फिडेंस और जॉल्ट्स जॉब ओपनिंग के आंकड़ों के साथ यूरोजोन के सितंबर के महंगाई आंकड़े भी अहम होंगे। इनसे वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों की आगे की दिशा को लेकर बाजार की उम्मीदों पर असर पड़ सकता है।

