जयपुर। राजस्थान में इसबगोल बीज पर जीएसटी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। एक ओर गुजरात में प्राकृतिक, कच्चे और बिना प्रसंस्करण किए गए इसबगोल बीज को फ्रेश मानते हुए शून्य जीएसटी का फैसला सामने आया है।
वहीं राजस्थान में मंडियों और गोदामों में रखे इसबगोल को सूखा मानकर 5 प्रतिशत जीएसटी लगाया जा रहा है। जीएसटी की इस अलग-अलग दर को लेकर राजस्थान का इसबगोल प्रसंस्करण उद्योग चिंतित है।
राजस्थान इसबगोल प्रोसेसर्स एसोसिएशन ने जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। एसोसिएशन के मुताबिक देश के कुल इसबगोल उत्पादन का करीब 80 प्रतिशत राजस्थान में होता है। ऐसे में राज्य में अलग जीएसटी दर लागू रहने का असर किसानों से लेकर मंडी व्यापारियों और प्रोसेसिंग इकाइयों तक पड़ सकता है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप कुमार और महासचिव विभोर गोयल ने कहा कि मंडियों में आने वाला इसबगोल प्राकृतिक अवस्था में ही खरीदा और बेचा जाता है। बीज वातावरण से स्वाभाविक रूप से नमी ग्रहण करते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें किसी कृत्रिम या यांत्रिक प्रक्रिया से सुखाया गया है।
एसोसिएशन का कहना है कि सुखाने की प्रक्रिया एक जान-बूझकर की जाने वाली प्रक्रिया है, जिसमें बाहरी या यांत्रिक हस्तक्षेप होता है। इसके उदाहरण के तौर पर अंगूर को सुखाकर किशमिश बनाने की प्रक्रिया का हवाला दिया गया।
उद्योग से जुड़े लोगों ने आशंका जताई कि यदि राजस्थान में इसबगोल पर 5 प्रतिशत जीएसटी और गुजरात में शून्य जीएसटी लागू रहता है, तो प्रोसेसिंग उद्योग राजस्थान से हटकर गुजरात जैसे राज्यों का रुख कर सकता है। इससे राज्य की मंडियों, परिवहन, भंडारण और रोजगार पर असर पड़ने की आशंका है।
एसोसिएशन के अनुसार इसबगोल का करीब 90 प्रतिशत उत्पादन निर्यात किया जाता है। जीएसटी रिफंड मिलने के बावजूद पहले टैक्स का भुगतान करना पड़ता है, जिससे कार्यशील पूंजी फंस रही है और कारोबार के नकदी प्रवाह पर असर पड़ रहा है।
एसोसिएशन ने राजस्थान सरकार से 12 सितंबर को होने वाली 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में इस मुद्दे को उठाने और प्राकृतिक, कच्चे इसबगोल पर पूरे देश में समान रूप से शून्य जीएसटी लागू करने की सिफारिश करने की मांग की है। साथ ही राजस्थान AAR के फैसले की पुनः जांच कराने और मंडियों में इसबगोल की खरीद प्रक्रिया सामान्य कराने की भी अपील की है।

