कोटा। सुवि नेत्र चिकित्सालय एवं लेसिक लेजर सेंटर, कोटा में मेडिकल रेटिना फेलोशिप प्रशिक्षण समापन, प्रमाण-पत्र वितरण तथा नई फेलो के स्वागत के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ फिजिशियन एवं एपीआई के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. के. पारीक तथा विशिष्ट अतिथि राजकीय संभागीय सार्वजनिक पुस्तकालय, कोटा के संभागीय पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव रहे।
इस अवसर पर मेडिकल रेटिना फेलोशिप का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाली डॉ. हिमांशी भारद्वाज को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
वहीं आंध्र प्रदेश के ओंगोल शहर से आईं डॉ. ललिता मनासा ने सुवि नेत्र चिकित्सालय में नई मेडिकल रेटिना फेलो के रूप में अपना प्रशिक्षण प्रारंभ किया। अतिथियों और वरिष्ठ चिकित्सकों ने दोनों युवा चिकित्सकों को उज्ज्वल, सफल और सेवाभावी भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं।
सुवि नेत्र चिकित्सालय के निदेशक एवं वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय, डॉ. विदुषी शर्मा तथा रेटिना विशेषज्ञ डॉ. निपुण बागरेचा ने बताया कि मेडिकल रेटिना फेलोशिप का उद्देश्य युवा नेत्र चिकित्सकों को रेटिना रोगों की आधुनिक जाँच, सटीक निदान, वैज्ञानिक उपचार और दीर्घकालीन प्रबंधन का व्यापक व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है।
प्रशिक्षण के दौरान फेलोज़ को आधुनिक तकनीकों के साथ रोगियों की समस्याओं को संवेदनशीलता से समझने, सही चिकित्सकीय निर्णय लेने, प्रभावी संवाद स्थापित करने और टीम के साथ समन्वयपूर्वक कार्य करने का भी प्रशिक्षण दिया जाता है।
मुख्य अतिथि डॉ. के. के. पारीक ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में निरंतर अध्ययन, व्यावहारिक प्रशिक्षण और अनुभवी चिकित्सकों का मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान तेजी से विकसित हो रहा है, इसलिए प्रत्येक चिकित्सक को जीवनभर विद्यार्थी बने रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चिकित्सक की वास्तविक पहचान केवल उसके ज्ञान और तकनीकी कौशल से नहीं, बल्कि रोगियों के प्रति संवेदनशील, विनम्र, नैतिक और जिम्मेदार व्यवहार से भी होती है। एक अच्छा चिकित्सक रोग के उपचार के साथ रोगी और उसके परिवार में विश्वास तथा आशा का संचार भी करता है।

