नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों में मची उथल-पुथल और पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय वायदा बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
बुधवार, 2 सितंबर को सोने के वायदा भाव लगातार सातवें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के कारण कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में आई भारी तेजी ने
वैश्विक बाजारों में महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चिंताओं को हवा दे दी है। इसी का नतीजा है कि सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने में निवेशकों ने वैश्विक स्तर पर बिकवाली तेज कर दी है, जिससे घरेलू स्तर पर सोने के दाम गिरकर ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गए हैं।
सोने के दामों में कितनी बड़ी गिरावट आई
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर बुधवार को सोने के अक्तूबर डिलीवरी वाले अनुबंध (वायदा भाव) में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। यह अनुबंध अपने पिछले बंद स्तर 1,51,729 रुपये से 1,559 रुपये यानी 1.03 प्रतिशत गिरकर 1,50,170 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
केवल अक्टूबर ही नहीं, बल्कि दिसंबर डिलीवरी वाले अनुबंध में भी भारी गिरावट देखने को मिली। दिसंबर का अनुबंध 1,753 रुपये या 1.14 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ 1,51,540 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि इसका पिछला बंद भाव 1,53,293 रुपये था। कमोडिटी विश्लेषकों के मुताबिक, एमसीएक्स पर सोने के भाव गिरकर तीन सप्ताह से अधिक के सबसे निचले स्तर पर आ गए हैं।
पश्चिम एशिया में चल रहे सैन्य संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक नए संकट में डाल दिया है। हाल ही में ईरानी सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी हवाई हमलों के बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। ईरान की ओर से बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और इराक में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने से एक बड़े युद्ध की आशंका बढ़ गई है।
इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि की है कि उसने ईरानी सैन्य ठिकानों के खिलाफ हवाई हमलों का एक नया दौर पूरा कर लिया है। यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों और अमेरिकी सेवा सदस्यों पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) द्वारा किए गए हमलों के प्रयासों के बाद की गई है।

