व्यक्ति के वचन उसकी मनोवृत्ति का परिचय देते हैं: विवर्धन सागर महाराज

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कोटा। कुन्हाड़ी स्थित ऋद्धि-सिद्धि नगर के चंद्रप्रभु जिनालय में आयोजित धर्मसभा में गणधर विवर्धन सागर महाराज ने वाणी के महत्व और कर्मों के आश्रव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यक्ति के वचन उसकी मनोवृत्ति का परिचय देते हैं। वाणी अमृत बनकर दूसरों को सुख पहुंचा सकती है, वहीं कटु वचन विष के समान पीड़ा भी दे सकते हैं। इसलिए जीवन में हितकारी, मित और प्रिय वचनों का प्रयोग करना चाहिए।

मुनिश्री ने कहा कि  सभी की बात सुननी चाहिए, लेकिन निर्णय विवेक से लेना चाहिए। अशुभ भाव और कटु वचन कर्मबंध का कारण बनते हैं, जबकि श्रेष्ठ भाव और मधुर वाणी शुभ कर्मों का मार्ग प्रशस्त करते हैं। जीवन में परिस्थितियां सदैव एक जैसी नहीं रहतीं, इसलिए व्यवहार में संयम और वाणी में मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है।

इससे पूर्व मुनिश्री विशाखमंड सागर महाराज ने मंगलाचरण के माध्यम से धर्मसभा का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि संसार में प्रत्येक प्राणी सुख चाहता है और दुख से बचना चाहता है।

दुखों से मुक्ति तथा मोक्ष की प्राप्ति के लिए देव, शास्त्र और गुरु की शरण में जाने का पुरुषार्थ करना चाहिए। धर्मसभा का शुभारंभ लुहाड़िया परिवार, ऋद्धि-सिद्धि नगर की ओर से चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट के पुण्यार्जन के साथ हुआ।

मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेंद्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि धर्मसभा में प्रेमचंद दुगेरिया, टीकम पाटनी, जम्बू गोधा, रामबाबू जैन, पारस लुहाड़िया, पारस सेठी, राजेंद्र बगड़ा, जोनू बाकलीवाल, पारस कासलीवाल और संजय सांवला, संदीप बंसल सहित समाज के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।