गन्ने के रस से एथनॉल बनाने पर रोक से चीनी मिलों को 7000 करोड़ का नुकसान संभव

0
16

नई दिल्ली। गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी शीरे से एथेनॉल बनाने पर रोक लगने से चीनी मिलों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस फैसले से राज्य की चीनी मिलों को करीब 7,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होने की आशंका है। इससे मिलों के लिए गन्ना किसानों को समय पर भुगतान करना भी मुश्किल हो सकता है। दरअसल, इस साल चीनी उत्पादन कम रहने की आशंका है। ऐसे में केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और त्योहारों के मौसम के साथ अगले साल भी कीमतों को काबू में रखने के लिए यह फैसला लिया है।

चीनी सीजन 2026-27 के अनुमानों के अनुसार, महाराष्ट्र में लगभग 990 लाख टन गन्ना पेराई के लिए उपलब्ध होने की उम्मीद थी। एथेनॉल उत्पादन के लिए 15 लाख टन चीनी का उपयोग करने के बाद राज्य में लगभग 96 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया गया था। हालांकि, पेराई सीजन जल्दी शुरू होने और गन्ने की पैदावार कम रहने के कारण राज्य का चीनी उत्पादन में करीब 18 लाख टन की कमी आने की आशंका है।

सूखे की मौजूदा स्थिति को देखते हुए चीनी मिलों ने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) मौजूदा 31 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 45 रुपये प्रति किलो करने, गन्ना किसानों को 1,000 रुपये प्रति टन और चीनी मिलों को 500 रुपये प्रति टन की आर्थिक सहायता देने की मांग की गई है।

महाराष्ट्र राज्य सहकारी चीनी कारखाना संघ के अनुसार, राज्य की चीनी मिलों में एथेनॉल उत्पादन की स्थापित क्षमता लगभग 375 करोड़ लीटर है। वर्ष 2025-26 के सीजन में मिलों ने लगभग 125 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की थी, जो उनकी कुल स्थापित क्षमता का करीब 30 प्रतिशत है। चीनी उद्योग के अनुसार औसतन 60 रुपये प्रति लीटर की दर से एथेनॉल की बिक्री से चीनी मिलों को लगभग 7,500 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के टेंडर में लगाई गई शर्तों के कारण गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल की मांग प्रभावित होगी। इससे महाराष्ट्र की चीनी मिलों को चालू वर्ष में 7,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो सकता है। इससे पहले से आर्थिक दबाव झेल रहे चीनी उद्योग की स्थिति और खराब होने की आशंका है।

एथेनॉल प्लांट्स में ₹35,000 करोड़ से अधिक का निवेश
राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ (एनएफसीएसएफ) के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटील ने कहा कि, पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने की केंद्र सरकार की नीति के अनुरूप महाराष्ट्र की चीनी मिलों ने एथेनॉल उत्पादन प्लांट्स में 35,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है।

उन्होंने कहा कि नई नीति के कारण उद्योग की एथेनॉल उत्पादन क्षमता का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल से बाहर रह सकता है, क्योंकि सी-हैवी शीरे से होने वाला उत्पादन कुल उत्पादन का बहुत छोटा हिस्सा है। केंद्र सरकार को गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी शीरे से एथेनॉल उत्पादन के लिए निर्धारित मात्रा कम करनी चाहिए थी, न कि इन स्रोतों से उत्पादित इथेनॉल की खरीद पूरी तरह रोकनी चाहिए थी।

चीनी और एथेनॉल के दाम बढ़ाने की मांग
किसान संगठनों का कहना है कि चीनी का मौजूदा न्यूनतम बिक्री मूल्य उत्पादन लागत की तुलना में अपर्याप्त है। इसलिए चीनी का एमएसपी बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो और एथेनॉल का भाव 75 रुपये प्रति लीटर किया जाना चाहिए। गन्ने का भाव 5,000 रुपये प्रति टन निर्धारित करने की मांग की। संगठनों ने राज्य सरकार से इन मांगों को केंद्र के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाने की अपील की। इस पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने किसान संगठनों और चीनी मिल मालिकों की संयुक्त बैठक आयोजित कर इन मुद्दों का समाधान निकालने के लिए प्रयास करने का आश्वासन दिया।