वोट चोरी मुद्दे पर नारेबाजी करते गहलोत-डोटासरा समेत कई कांग्रेसी हिरासत में

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जयपुर। ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता सोमवार को विद्याधर नगर थाने में ही धरने पर बैठ गए। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत 100 से ज्यादा कांग्रेस नेताओं-कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था।

पुलिस ने सभी को बसों में बैठाकर विद्याधर नगर थाने पहुंचाया। यहां पहुंचने के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने थाने में ही धरना शुरू कर दिया। डोटासरा और टीकाराम जूली ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की और इस्तीफे की मांग उठाई। करीब एक घंटे तक हिरासत में रखने के बाद पुलिस ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया।

चुनाव आयोग की ओर कूच पर पुलिस ने रोका
इससे पहले कांग्रेस ने जयपुर के शहीद स्मारक पर सभा की। इसके बाद नेता और कार्यकर्ता चुनाव आयोग कार्यालय की ओर पैदल मार्च के लिए निकले। सचिवालय की तरफ बढ़ रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। आगे बढ़ने को लेकर पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई। कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसकी चपेट में गहलोत, डोटासरा, जूली और रंधावा भी आए। कई कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए, जिन्हें पुलिस ने नीचे उतारा। प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों को भी हल्की चोटें आने की बात सामने आई।

शहीद स्मारक पर नेताओं ने लगाए आरोप
प्रदर्शन से पहले हुई सभा में अशोक गहलोत ने चुनाव प्रक्रिया, परिसीमन और लोकतंत्र को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से लोगों के बीच जाकर इन मुद्दों को उठाने का आह्वान किया। डोटासरा ने SIR और मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ‘वोट चोरी’ के खिलाफ अपना अभियान आगे भी जारी रखेगी।वहीं सुखजिंदर सिंह रंधावा ने हालिया निकाय चुनावों को लेकर भाजपा और राज्य सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने कई जगह बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन सरकार और पुलिस के कथित दुरुपयोग से भाजपा ने बोर्ड बनाए। रंधावा ने आगामी पंचायत चुनाव को लेकर भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सक्रिय होने का आह्वान किया। कांग्रेस का प्रदर्शन ‘वोट चोरी’, SIR और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई के बाद कुछ समय के लिए विद्याधर नगर थाना भी कांग्रेस नेताओं के धरने और नारेबाजी का केंद्र बन गया।