13 दिनों की बमबारी के बाद क्या रुकेगी अमेरिका-ईरान में पांच महीने पुरानी जंग?

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नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले पांच महीनों से चल रहे भू-राजनीतिक संघर्ष में एक नया मोड़ आता दिख रहा है। लगातार 13 दिनों तक चली बमबारी के बाद अमेरिकी सेना ने फिलहाल ईरान पर अपने एयरस्ट्राइक्स को रोक दिया है।

यह संघर्ष इस मंगलवार को अपने पांचवें महीने में प्रवेश कर रहा है, जिसकी शुरुआत इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर की थी। इस बीच, युद्ध को एक बार फिर से पूर्ण रूप से भड़कने से बचाने के लिए कूटनीतिक चैनलों के जरिए कोशिशें तेज कर दी गई हैं।

लेकिन जानकारों का मानना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों देश इस अनिश्चितता भरे दौर के किसी निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए हैं।

होर्मुज को लेकर टकराव
इस पूरे टकराव की सबसे बड़ी जड़ होर्मुज (Strait of Hormuz) है, जो फारस की खाड़ी का वह संकरा रास्ता है जिससे होकर दुनिया भर का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। युद्ध की शुरुआत के साथ ही ईरान ने इस मार्ग पर अपना शिकंजा कस लिया था।

ईरानी रक्षा बलों ने यहां से गुजरने वाले तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दी थीं। ईरान की मांग थी कि सभी जहाज उसकी तटरेखा के करीब वाले रास्ते का इस्तेमाल करें और इस दौरान वह उनसे भारी फीस भी वसूलना चाहता था।

इसके जवाब में, अमेरिका ने ओमान के तट के किनारे एक वैकल्पिक दक्षिणी मार्ग पर जहाजों की सुरक्षा के लिए अपना पहरा बिठा दिया। जब ईरान ने इन जहाजों को भी निशाना बनाना शुरू किया, तो अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी।

अमेरिका ने पहले ईरान की तटीय सुरक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करने के लिए हमले किए और फिर दायरा बढ़ाते हुए दक्षिणी इलाकों के पुलों और बुनियादी ढांचे के साथ-साथ देश के भीतरी हिस्सों को भी निशाना बनाया।

इस बीच, मध्यस्थता में जुटे एक अधिकारी ने बताया कि कूटनीतिक स्तर पर गंभीर बातचीत चल रही है। दोनों पक्ष जून में हुए उस अंतरिम समझौते पर वापस लौटना चाहते हैं जिसके तहत होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को कम पाबंदियों के साथ बहाल किया जा सके।

वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर नियर ईस्ट पॉलिसी के सीनियर फेलो और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के पूर्व अधिकारी माइकल सिंह का कहना है कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि ईरानी शासन कूटनीतिक चैनलों के जरिए किस तरह के संकेत दे रहा है और क्या वे अब बातचीत को लेकर अधिक गंभीर हुए हैं।

हालांकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ईरान के भीतर नेतृत्व बिखरा हुआ है और अलग-अलग गुट सत्ता पर पकड़ बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिससे वहां के नेताओं को यह डर रहता है कि अमेरिका के सामने झुकना या समझौता करना उनकी कमजोरी साबित हो सकता है।

नेतन्याहू की वाशिंगटन यात्रा को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल
तनाव के इस माहौल के बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अगले हफ्ते वाशिंगटन में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं। गौर करने वाली बात यह है कि 28 फरवरी को जब यह युद्ध शुरू हुआ था, तब इजरायल और अमेरिका दोनों ने मिलकर इसकी शुरुआत की थी। लेकिन होर्मुज को लेकर हाल ही में हुए अमेरिकी हमलों में इजरायल की प्रत्यक्ष मौजूदगी नजर नहीं आई है।

माइकल सिंह का मानना है कि इजरायल का इन हमलों से दूर रहना ईरान के लिए यह संदेश हो सकता है कि अमेरिका इस संघर्ष को एक सीमित दायरे में रखना चाहता है।

हालांकि, सिंह का यह भी कहना है कि यदि यह सैन्य विराम कुछ और दिनों तक जारी रहता है, तभी इसे कोई बड़ी घटना माना जाएगा, क्योंकि फिलहाल यह समझना मुश्किल है कि यह कोई रणनीतिक सैन्य विराम है या पर्दे के पीछे चल रही कूटनीति का नतीजा।

इस बीच, ट्रंप ने अपनी रणनीति को लेकर साफ किया है कि उनके पास दो रास्ते हैं, या तो वे इसी तरह ईरान को टुकड़ों में कमजोर करते रहें, या फिर इसे और तेजी से अंजाम दें, या फिर कूटनीतिक रास्ते से समझौता करें। ट्रंप ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह भी साफ किया कि वह नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के दबाव में आकर किसी तरह की जल्दीबाजी में नहीं हैं।

उनका कहना था कि मतदाता गैस और खाने-पीने की ऊंची कीमतों से नाराज हैं, लेकिन चुनाव अपना रास्ता खुद तय करेंगे और उन्हें सही तरीके से काम करना है।

दूसरी तरफ, क्षेत्रीय हिंसा भी पूरी तरह से थमी नहीं है। यमन के हूती विद्रोहियों ने शनिवार को सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए, जिसे उन्होंने सऊदी एयरस्ट्राइक्स का जवाब बताया है। हूती विद्रोही बाब अल-मदब स्ट्रेट को भी बंद कर चुके हैं, जो सऊदी तेल निर्यात के लिए बेहद अहम है।

इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना फारस की खाड़ी में ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी को सख्ती से लागू कर रही है, जिसके तहत शुक्रवार को ओमान की खाड़ी में मोजाम्बिक के झंडे वाले एक जहाज को रोक दिया गया क्योंकि उसने नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश की थी और चेतावनियों को नजरअंदाज किया था।

राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक कर यह चर्चा की कि आगे की सैन्य कार्रवाई का रुख क्या होना चाहिए, हालांकि इसके बाद ईरान में रातभर कोई नया अमेरिकी हमला दर्ज नहीं किया गया।