Wednesday, June 24, 2026
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माल्या के प्रत्यर्पण का रास्ता निकालने के लिए भारतीय अधिकारियों का लंदन में डेरा

नई दिल्ली। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों की एक टीम लंदन पहुंची है जो कि भारतीय बैंकों का कर्ज लेकर भागे उद्योगपति विजय माल्या के प्रत्यर्पण के बारे में स्थानीय अधिकारियों से बातचीत करेगी। सीबीआई  ने “लेनदेन न्यूज़” को  बताया कि सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक राकेश अस्थाना की अगुआई में यह चार सदस्यीय टीम ब्रिटेन के अधिकारियों को माल्या के खिलाफ ऋण भुगतान में असफल रहने के मामलों की बारीकी से जानकारी देगी।

इस टीम में ईडी के दो वरिष्ठ अधिकारी भी हैं। माल्या के प्रत्यर्पण का मामला इस समय ब्रिटेन की एक अदालत में है, जहां न तो सीबीआई और न ही प्रवर्तन निदेशालय सीधे कोई पक्ष हैं। एक अधिकारी ने कहा कि भारतीय एजेंसियां वहां अदालत में भगौड़ों की ओर से दायर याचिकाओं के विरोध में ब्रिटिश अभियोजकों की मदद करती है।

भारत से टीम लंदन भेजने का उद्देश्य यही है कि माल्या के प्रत्यर्पण के लिए वहां की अदालत में मजबूत मामला बनाया जा सके। गौरतलब है कि 61 वर्षीय माल्या को भारत के प्रत्यर्पण आग्रह पर पिछले महीने ब्रिटेन के अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था। हालांकि, लंदन की एक अदालत ने कुछ ही घंटे में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया इस मामले में अब 17 मई को सुनवाई होनी है।
यह गिरफ्तारी आईडीबीआई बैंक में 900 करोड़ रुपये के कर्ज का भुगतान नहीं करने से जुड़े मामले में हुई। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। माल्या की फिलहाल बंद पड़ी किंगफिशर एयरलाइंस पर विभिन्न बैंकों का (ब्याज सहित) 9000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। माल्या दो मार्च 2016 को भारत से ब्रिटेन चले गए थे। सीबीआई ने उनके खिलाफ दो मामले दर्ज किए हैं। 

मौजूदा अप्रैल-मार्च की जगह जनवरी-दिसंबर हो सकता है वित्त वर्ष

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  • 2019 से शुरू हो सकती है नई व्यवस्था
  • इस दिशा में आगे बढ़ रही है सरकार
  • मोदी ने मुख्यमंत्रियों से इस पर विचार करने को कहा 

नई दिल्ली।  केंद्र सरकार वित्त वर्ष की मौजूदा अवधि में बदलाव करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यानी वह वित्त वर्ष जनवरी में शुरू करके दिसंबर में समाप्त करना चाहती है। अभी सरकार का वित्त वर्ष अप्रैल में शुरू होकर मार्च में समाप्त होता है।

शीर्ष सरकारी सूत्रों के मुताबिक यह बदलाव धीरे-धीरे होगा। इसकी शुरुआत अगले साल आम बजट से होगी जिसे एक महीने पहले जनवरी में पेश किया जा सकता है। यह वित्त वर्ष में बदलाव के लिए जमीन तैयार करेगा। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘वित्त वर्ष में बदलाव का सबसे बेहतरीन संकेत आम बजट को पहले पेश करने से मिलेगा। इससे यह साफ होगा कि सरकार वित्त वर्ष में बदलाव की अपनी योजना पर आगे बढ़ रही है।’

अलबत्ता अभी तक यह साफ नहीं है कि आम बजट को जनवरी की शुरुआत में पेश करने से अगले वर्ष से ही जनवरी-दिसंबर वित्त वर्ष का रास्ता साफ होगा या नहीं। इसके लिए आम बजट को दिसंबर में ही पेश करने की जरूरत पड़ेगी। इसलिए नए वित्त वर्ष की व्यवस्था को जनवरी 2019 से लागू किया जा सकता है।

केंद्र सरकार इस बात से अच्छी तरह वाकिफ है कि पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार शंकर एन आचार्य की अगुआई वाली विशेषज्ञ समिति ने मौजूद वित्त वर्ष में बदलाव का समर्थन नहीं किया था। समिति के सुझावों पर अभी विचार किया जा रहा है लेकिन सरकार बदलाव के पक्ष में है और इस मुद्दे पर विभिन्न लोगों की राय लेनी शुरू कर दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्रियों से कहा था कि उन्हें वित्त वर्ष चक्र  में बदलाव के सुझाव पर गौर करना चाहिए और इसे लागू करने के लिए केंद्र को सुझाव देने चाहिए। आदर्श स्थिति तभी बनेगी जब राज्य सरकारें भी जनवरी-दिसंबर वित्त वर्ष को अपनाएं। अगर केंद्र जनवरी-दिसंबर वित्त वर्ष को अपनाता है तो राज्यों को भी ऐसा ही करना होगा। 

सेंसक्स ने छुआ 30 हजार का आंकड़ा

मुंबई। दिनभर के उतार चढ़ाव के कारोबार के बाद शेयर बाजार सपाट बंद हुआ है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 3 अंक की मामूली बढ़त के साथ 29921 के स्तर पर और निफ्टी 10 अंक की बढ़त के साथ 9313 के स्तर पर कारोबार कर बंद हुआ है। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज पर मिडकैप में 0.56 फीसद और स्मॉलकैप में 0.12 फीसद की तेजी हुई है।

सेक्टोरियल इंडेक्स का हाल

सेक्टोरियल इंडेक्स की बात करें तो बैंकिंग, मेटल और फार्मा सेक्टर में गिरावट हुई है। वहीं, ऑटो (0.39 फीसद), फाइनेंशियल सर्विस (0.57 फीसद), एफएमसीजी (0.34 फीसद), आईटी (0.63 फीसद) और रियल्टी (1.83 फीसद) की तेजी हुई है।

रियल्टी शेयर्स में अच्छी खरीदारी

देश में एक मई से रेरा (रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट) लागू होने के बाद मंगलवार के कारोबार में रियल्टी शेयर्स में अच्छी खरिदारी देखने को मिली है। बीएसई पर गोदरेज प्रॉपर्टीज लिमिटेड में करीब 9 फीसद तक की तेजी देखने को मिली है। वहीं, डीसीबी बैंक (7.39 फीसद), सुप्रीम इंडस्ट्रीड लिमिटेड (6.71 फीसद), सोभा लिमिटेड (6.55 फीसद) और इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस में करीब 6 फीसद तक की तेजी हुई है।

मारुति का शेयर रहा टॉप गेनर

निफ्टी में शुमार शेयर्स में से 24 हरे निशान में और 27 गिरावट के साथ बंद हुए है। सबसे ज्यादा तेजी इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस, एचडीएफसी, बीपीसीएल, ओएनजीसी और मारुति के शेयर्स में हुई है। वहीं, गिरावट ल्यूपिन, टाटा मोटर्स डीवीआर, एसीसी, भारती एयरटेल और टाटा मोटर्स के शेयर्स में हुई है।

एचआरए के दावे के लिए सिर्फ किराये की रसीद से काम नहीं चलेगा 

इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (आईटीएटी) मुंबई का आदेश

कोटा। अब आवास किराया भत्ते (एचआरए) की प्राप्ति रसीद भरते समय आपको इसकी पुष्टि के लिए अलग से भी कागजात की जरूरत पड़ सकती है। हाल में ही इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (आईटीएटी) मुंबई ने अपने एक फैसले  में इस संबंध में आदेश दिए हैं। एक करदाता ने यह कहते हुए 2.52 लाख रुपये के एचआरए का दावा किया कि वह अपनी माता को किराया देती है। जब उनसे इससे जुड़े संबंधित कागजात की मांग की गई वह कोई प्रमाण नहीं दे पाईं, जिससे वह मुकदमा हार गईं। 

सीए मिलिंद का कहना है कि ‘एचआरए का दावा करते समय किसी व्यक्ति को दो शर्तें पूरी करनी चाहिए। पहली बात तो यह कि वास्तव में उसका जायदाद पर नियंत्रण है और दूसरी बात यह कि मकान मालिक वास्तव में किराया प्राप्त करता है। इसके लिए सुनिश्चित करें कि आपके पास नोटरी में बना लीव-ऐंड-लाइसेंस एग्रीमेंट है। इस बारे में सोसाइटी को सूचित किया जा सकता है।

इसके अलावा रकम के स्थानांतरण का रिकॉर्ड भी होना चाहिए, इसलिए जायदाद मालिक को रकम के भुगतान के लिए बैंकिंग माध्यम का इस्तेमाल करें। अगर आप नकद में भुगतान करते हैं तो एटीएम निकासी में यह दिखना चाहिए। जिस मामले का जिक्र किया गया है उसमें आय कर विभाग ने इस बात की भी जांच की कि बिजली और पानी बिल का भुगतान कौन करता है।

अगर आप अपने माता-पिता, जिनकी आय कर योग्य नहीं है, को किराये का भुगतान करते हैं तो उनके द्वारा कर दाखिल करना और किराये के तौर पर प्राप्त रकम का उल्लेख करना फायदेमंद होगा। जायदाद के रख-रखाव के तौर पर उन्हें 30 प्रतिशत रियायत मिलती है। किराया अधिक दिखाना समस्याएं खड़ी कर सकता है।हरेक साल कर विभाग दाखिल होने वाले आयकर रिटर्न में 3 प्रतिशत की जांच विभिन्न बातों जैसे एक निश्चित सीमा से अधिक आय, दाखिल में दिखाया गया बड़ा लेन-देन आदि के लिए करता है। 

रकम जुटाने पूंजी बाजार में उतरेंगी कंपनियां

मुंबई। भारतीय कंपनियां अगले चार से छह सप्ताहों में करीब 15,000 करोड़ रुपये रकम जुटाने की मुहिम पर निकल पड़ेंगी। बेंचमार्क सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी के उच्चतम स्तर छूने और प्राथमिक निर्गमों को लेकर सकारात्मक रुख से कंपनियों और निवेश बैंकरों का मनोबल बढ़ा है, इसलिए वे पूंजी जुटाने की योजना के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

जिन साधनों के जरिये रकम जुटाई जाएगी उनमें इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट/इनविट (अधोसरंचना क्षेत्र में निवेश करने वाली नई योजना), आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ), क्वालीफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट्स (क्यूआईपी) और ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) शामिल हैं। 
 इससे पहले नवंबर और फरवरी के बीच नोटबंदी के बाद पैदा हुई अनिश्चिताओं के बीच रकम जुटाने की रफ्तार धीमी पड़ गई थी।

हालांकि निवेश बैंकरों का कहना है कि विदेशी और घरेलू दोनों निवेशकों का मनोबल अब ऊपर है, जिससे बाजार में आने वाले नए निर्गमों में रकम लगाने के लिए वे पूरी शिद्दत से तैयार हैं। कम से दो इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियां-आरबी इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्टरलाइट पावर ग्रिड- 7,5000 करोड़ रुपये से अधिक रकम जुटाने हेतु इनविट के लिए एक शुरुआती निर्गम लाएंगी। आईआरबी इन्फ्रा की इनविट पेशकश 3 मई को बाजार में आएगी वहीं स्टरलाइट मई के अंत में या जून के शुरू में पेशकश लाएगी।
 
सरकारी कंपनी हाउसिंग ऐंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (हुडको) आगामी 8 मई को 1,200 करोड़ रुपये का निर्गम लाएगी। निवेश बैंकरों के अनुसार निर्गम लाने की अन्य कंपनियों की कतार में केबल एवं ब्रॉडबैंड सेवा प्रदाता कंपनी जीटीपीएल हैथवे, निर्माण कंपनी पीएसपी प्रोजेक्ट्स और दूरसंचार उपकरण कंपनी तेजस नेटवर्क्स  शामिल हैं। इनके अलावा कुछ सूचीबद्ध कंपनियां भी अगले कुछ हफ्तों में रकम जुटाने के लिए निवेश बैंकरों से बात कर रही है।

रियल एस्टेट कंपनी ब्रिडेज एंटरप्राइजेट का 500 करोड़ रुपये का क्यूआईपी संभवत: मंगलवार को बंद होगा। फेडरल बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने नए शेयर जारी कर क्रमश: 2,500 करोड़ और 2,000 करोड़ रुपये जुटाने की पहल की है। सरकार भी कुछ सार्वजनिक उपक्रमों में ओएफएस के जरिये अपनी हिस्सेदारी बेच सकती है।
 

बुनियादी ढांचा उद्योग की वृद्धि दर 5 फीसदी रही

नई दिल्ली।बुनियादी ढांचा उद्योग की वृद्धि दर मार्च में 5 फीसदी रही जबकि पिछले महीने यानी फरवरी में यह महज 1 फीसदी बढ़ा था। इस्पात और कोयला उत्पादन के साथ ही प्राकृतिक गैस उत्पादन में तेजी से बुनियादी उद्योगों के विकास को बल मिला है।

सोमवार को जारी आंकड़े के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष में 8 प्रमुख बुनियादी उद्योगों की  वृद्घि दर 4.5 फीसदी रही। औद्योगिक उत्पादन में 38 फीसदी भारांश रखने वाले बुनियादी उद्योगों की वृद्घि दर फरवरी में नरम रही थी। हालांकि मार्च में स्टील का उत्पादन 11 फीसदी बढ़ा, वहीं सीमेंट के उत्पादन में नरमी भी कम ही रही।
 
इसी तरह कोयले के उत्पादन में मार्च महीने में करीब 10 फीसदी की वृद्घि दर्ज की गई। इससे देश में कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में तेजी आई और बिजली उत्पादन 5.9 फीसदी बढ़ गया। कच्चा तेल और रिफाइनरी उत्पादों के प्रदर्शन में भी सुधार हुआ लेकिन इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी रही।

फरवरी में 3.4 फीसदी फिसलने के बाद मार्च में कच्चे तेल में 0.9 फीसदी की तेजी आई। इसी तरह रिफाइनरी उत्पादों में गिरावट भी पहले के 2.3 फीसदी से कम होकर 0.3 फीसदी तक सीमित रह गई। उर्वरकों का उत्पादन लगातार चौथी तिमाही कमजोर रहा। 

देशभर में बदलेंगी पेट्रोल पंपों की डिस्पेंसिंग मशीनें

नई दिल्ली। भविष्य में आप पेट्रोल पंप पर घटतौली के शिकार न हो इसके लिए सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। सरकार पेट्रोल पंपों के लिए ऐसी डिस्पेंसिंग मशीनों की व्यवस्था करने जा रही है जिसमें छेड़छाड़ करना मुश्किल होगा।

पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने डिस्पेंसिंग मशीन बनाने वाली देशी व विदेशी कंपनियों की बैठक बुलाई है और साथ ही देश भर में पेट्रोल पंपों पर औचक निरीक्षण कराने का फैसला भी किया है।

देश में इस समय 58 हजार पेट्रोल पंप हैं। इनमें से 54 हजार पेट्रोल पंप सिर्फ सरकारी तेल कंपनियों के हैं। प्रधान के मुताबिक, हर पेट्रोल पंप पर औसतन 4 से 5 डिस्पेंसिंग मशीनें लगी होती हैं। इस हिसाब से देश में 2.50 लाख के करीब डिस्पेंसिंग यूनिटें हैं।

“हम इन सभी को अत्याधुनिक बनाना चाहते हैं ताकि समाज विरोधी तत्वों के लिए इसमें छेड़छाड़ करना मुश्किल हो जाए।” पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि वेंडिंग मशीनों को आधुनिक बनाना एक सतत प्रक्रिया है।

पहले के मुकाबले भारतीय पेट्रोल पंपों पर बेहद आधुनिक मशीनें लग रही हैं लेकिन उत्तर प्रदेश की घटना के बाद सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी भी सूरत में इनके साथ गड़बड़ी न की जा सके।

भारत में तेल मार्केटिंग कंपनियों को डिस्पेंसिंग मशीन आपूर्ति करने वाली कंपनियों में जीवीआर, मिडको, टोकहेम, टैटसुनु और ड्रेसर वेन प्रमुख हैं। इनमें मिडको को छोड़ कर अन्य सभी बहुराष्ट्रीय हैं, जिनके लिए भारत एक बहुत बड़ा बाजार है।

दुनिया के अन्य कई बाजारों में बेहद अत्याधुनिक डिस्पेंसिंग मशीनें आ चुकी हैं जो स्वाचालित तरीके से न केवल पेट्रोल-डीजल में होने वाली मिलावट रोकती हैं बल्कि उचित मात्रा भी सुनिश्चित करती है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अगस्त, 2016 में एक मामले में अत्याधुनिक डिस्पेंसिंग यूनिटें लगाने का निर्देश दिया था।

न्यूनतम मजदूरी 10 हजार रुपये मिलने का सपना एक वर्ष बाद भी अधूरा

मुरझाए मजदूर : सांसदों-विधायकों के वेतन-भत्ते  सर्वसम्मति से बढ़ा लिए, लेकिन मजदूर दिवस पर भी न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की घोषणा नहीं हुई 

कोटा। केंद्र सरकार ने गत वर्ष मजदूर दिवस से पूर्व घोषणा की थी कि अगले 1-2 माह में देश के ठेका मजदूरों का प्रतिमाह न्यूनतम वेतन 10,000 रूपए कर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल,2016 में केद्र सरकार को निर्देश दिए थे कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक तथा महंगाई भत्ता में परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए कामगारों की न्यूनतम मजूदरी बढ़ाई जाए।

इसके पश्चात् केद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि सरकार ठेका मजदूर (नियमन एवं समापन) के नियम-25 एवं केंद्रीय नियम में जल्द ही बदलाव लाने का प्रयास करेगी तथा सर्वव्यापी मजदूरी की दिशा में आवश्यक कदम उठाएगी, जिसमें सभी ठेकेदारों को श्रम मंत्रालय में पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। देश के 44 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर उन्हें 4 आचार संहिता में समाहित करने का दावा किया गया था, जो अधुरा रहा।

एक वर्ष पूर्व केंद्रीय श्रम राज्यमंत्री की घोषणा से देश के 15 करोड़ मजदूरों ने उम्मीद की थी कि 1 मई,2016 से उन्हें न्यूनतम मजदूरी 10 हजार रू प्रतिमाह (333 रू प्रतिदिन) मिलने लगेगी। लेकिन सरकार इसे लागू नहीं कर सकी जिससे महंगाई की मार झेल रहे मेहनतकश मजदूरों को गहरी निराशा हाथ लगी। दूसरी ओर, बढ़़ती महंगाई को देखते हुए सरकार ने सभी सांसदों एवं राजस्थान में मंत्रियों तथा विधायकां के वेतन भत्ते बढ़ाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से तत्काल पारित कर दिया।

राज्य में लाखों मजदूरों के चेहरे मुरझाए

मजदूर संगठनों का कहना है कि वर्तमान में न्यूनतम मजदूरी प्रतिमाह 6330 रूपए (211 रू प्रतिदिन) से भी कम मिल रही है। कुशल, अर्द्धकुशल तथा अकुशल श्रमिकों को तीन अलग-अलग दरों से वेतन मिलता है। तीनों श्रेणियों में न्यूनतम वेतन में यह बढोतरी नहीं हो सकी। कोटा के हजारों ठेका मजदूर इस उम्मीद में थे कि केद्र सरकार इस वर्ष मजदूर दिवस पर उन्हें न्यूनतम मजदूरी 10.000 रूपए प्रतिमाह करने का तोहफा देगी लेकिन 1 वर्ष बाद भी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनुपालना नहीं होने से मजदूरों के चेहरे मुरझा गए।

उनमें इस बात का आक्रोश है कि सभी राज्यों में ठेका मजदूरों को एक समान न्यूनतम मजदूरी नहीं मिल रही। महंगाई का असर सभी वर्गों पर एक समान होता है लेकिन मजदूरी कम मिलने से श्रमिकों को आर्थिक मार अधिक झेलनी पड़ रही है। मजदूरी नहीं बढ़ने से इस वर्ष भी मजूदर दिवस पर ठेका मजदूरों के चेहरे मुरझाए रहे।

‘बच्चों को थोड़ा तनाव में पालिए’ वीडियो को 12 लाख पेरेंट्स ने सराहा

‘गुड पेरेंटिंग : मोटिवेशनल वीडियो को देश-विदेश में 35 से 44 आयुवर्ग की महिलाओं ने सबसे उपयोगी माना।

-अरविंद

कोटा। ‘हम बच्चों को समय नहीं सुख-सुविधाएं ज्यादा दे रहे हैं। जब खुद संघर्ष नहीं करते हैं तो वे इन सुविधाओं को अपना हक मान लेते हैं। एक इंजीनियर अपनी बिल्डिंग का सर्वे खुद ही करने लगे तो उसकी खामियां सामने नहीं आ सकती। इसी तरह, अपने बच्चों के व्यवहार एवं पढ़ाई का फीडबेक हमेशा दूसरों से लें।

बच्चे के बारे में दूसरों की बातें बहुत ध्यान से सुनें।’ नेशनल कॅरिअर काउंसलर नीलेश गुप्ता ने ‘बच्चों को थोड़ा तनाव में पालिए’ वीडियो को फेसबुक पर 12.10 लाख पेरेंट्स ने इसे उपयेगी माना। गुड पेंरेंटिंग पर 2 से 4 मिनट के 35 प्रेरक विडियो को 2 माह में 16.20 लाख पेरेंट्स ने सुना और शेयर किया।

स्कूलों में लॉजिकल डेवलपमेंट नहीं हो रहा
केएसपी हाइड्रो इंजीनियरिंग प्रा.लि.,पुणे की ऑपरेशन हेड संदेश बी गरड़ ने कमेंट किया कि स्कूलों में बच्चों को सिम्पल लॉजिक भी नहीं सिखाए जा रहे। मुंबई के फिल्म निर्माता व क्रिएटिव राइटर इरफान जामी ने लिखा कि स्कूलों में लॉजिक पर टीचर्स खुद दिमाग लगाना नहीं चाहते। वे रट्टाफिकेशन ज्यादा करवाते हैं।

कोलकाता की प्रिया घोष लिखती हैं, मैं बचपन में कमजोर थी, इसलिए सवाल बहुत पूछती थी, जिससे मेरा लॉजिकल डेवलपमेंट हुआ। नोएडा की पूजा धोंधियाल ने कहा कि स्कूल टीचर्स बेसिक को टच नहीं कर रहे, क्वालिटी की बजाय क्वांटिटी पर ध्यान रहता है। आईटी में मास्टर्स करने वाले ग्वालियर की प्रिया गुप्ता ने लिखा, पेंरेंट्स बच्चे की हर एक्टिविटी पर नजर रखें।

सिर्फ गरजिए मत, कभी बरसिए भी :

उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि बचपन में बच्चे आपकी बात नहीं मानें तो उन्हें गीदड़ भभकी न दें, अन्यथा उसके मन में आपका डर खत्म हो जाएगा। व्यवाहारिक उदाहरण देकर बताया कि जो बच्चे घर से दूर बाहर रहकर पढाई कर रहे हैं, उनकी क्लोज मॉनिटरिंग करें। इंस्टीट्यूट से और ऐसे दोस्तों से फीडबेक अवश्य लें जिनसे वह थोड़ी दूरी रखता है। फिर उसकी कमियों को ताकत में बदलें।

‘एक उम्र से पहले आईआईटी की तैयारी सही या गलत’

‘एक उम्र से पहले आईआईटी की तैयारी करना सही है या गलत’, ‘स्कूल में पढाई के नाम पर गलत क्या हो रहा है’, ‘पैसे की कीमत समझाना जरूरी है बच्चों को’, ‘कहीं आप अपने बच्चे के दुश्मन तो नहीं बन रहे’, ‘बच्चों को अपनी च्वाइस से पालिए, न कि उनकी’, ‘मोबाइल का ज्यादा उपयोग कैसे रोकें’ आदि टॉपिक पर उन्होंने 2 माह में 35 से अधिक विडियो शेयर किए, जिन्हें देश-विदेश में 26.20 लाख से अधिक पेरेंट्स ने सुना व शेयर किया।

महिलाओं ने कहा- पेरेंटिंग पर ध्यान दें

बच्चों को थोडा तनाव में पालिएवीडियो  को सर्वाधिक 55 प्रतिशत महिलाओं व 44 प्रतिशत पुरूषों ने सुना। इसमें 22 प्रतिशत महिलाएं 35 से 44 आयुवर्ग की रहीं। गुड पेरेंटिंग के विडियो को विदेशों मे पेरेंट्स ने काफी पसंद किया। फेसबुक पर यूएसए में 1 लाख से अधिक, आस्ट्रेलिया व नेपाल में 40-40 हजार, यूएई में 32 हजार, कनाडा में 30 हजार, इंग्लैंड में 25 हजार तथा सउदी अरब में 10 हजार यूजर्स ने इसे सुना और शेयर किया। महिलाओं ने कहा कि बच्चे मोबाइल एडिक्ट हो रहे हैं, इसलिए पेंरेंटिंग पर ज्यादा ध्यान दें।

सुविधाओं से नहीं, अभाव से आगे बढाएं

बच्चों की परवरिश में ऐसे वीडियो महत्व रखते हैं। मॉडर्न बच्चे समझदार हैं, हम उनकी हर बात को आसानी से न मानें। थोडे़ अभाव में मिली हुई चीजें उन्हें अच्छा करने के लिए प्रेरित करेंगी।
– ज्योति शर्मा, आईटी एक्सपर्ट, लंदन
देश के एजुकेशन सिस्टम में बदलाव हो। स्कूलों में कम से कम याद कराया जाए, समझाया ज्यादा जाए। बच्चे आपस में डिस्कशन करके इंटरेक्टिव बनें। इससे उनकी लर्निंग प्रेक्टिकल होगी।
– पल्लवी रॉय, एमडी, ब्रांड डेजलर्स, गुड़गांव
मैने वीडियो सुना। बच्चे ग्रामर में बहुत कमजोर होते हैं। हिंदी व इंग्लिश लैग्वेज दोनों में लिखना व पढ़ना खत्म सा होता जा रहा है। वे केवल मोबाइल तक सीमित हैं। केंद्र सरकार तक ये बातें पहुंचे ताकि लैंग्वेज पर ज्यादा ध्यान दिया जाए।
विदिक भट्ट, नैनीताल
मैने स्कूल में पढ़ाई के नाम पर गलत क्या हो रहा है, वीडियो सुनकर खुद को टीच किया। अब मेरा पढाने का तरीका ही बदल गया है। पेरेंटिंग के लिए ऐसे टिप्स बेहद उपयोगी हैं।
– रचना ठाकुर, टीचर, डीपीएस, देहरादून

बिना सब्सिडी सिलेंडर सस्ता, सब्सिडी वाला महंगा

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नई दिल्ली । एलपीजी और केरोसीन की कीमत में मामूली बढ़ोतरी की गई है। सब्सिडी वाला एलपीजी सिलेंडर 2 रुपये महंगा हो गया है तो केरोसीन के लिए प्रति लीटर 26 पैसे अधिक देने होंगे। सरकारी तेल कंपनियों के मुताबिक, दिल्ली में 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 1.87 रुपये बढ़ गई है और अब इसके लिए 442.77 रुपये देने होंगे।

कीमत में यह बढ़ोतरी ईंधन सब्सिडी धीरे-धीरे खत्म करने के उद्देश्य से की गई है। हालांकि, बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर 92 रुपये सस्ता हो गया है। विमान ईंधन (ATF) की कीमत में 0.4 पर्सेंट की कमी की गई है। इससे पहले 1 अप्रैल को तेल कंपनियों ने सब्सिडी वाले सिलेंडर के मूल्य में 5.57 रुपये की वृद्धि की थी।

 यूपी में विधानसभा चुनाव के दौरान फरवरी और मार्च में कीमतों में बदलाव नहीं किया गया ता। इससे पहले लगातार 8 बार हर महीने करीब 2 रुपये का इजाफा हुआ था। सरकार धीरे-धीरे कीमतों को बढ़ाते हुए ईंधन से सब्सिडी खत्म करना चाहती है।बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत में लगातार दूसरी बार गिरावट आई है।

इससे पहले 1 अप्रैल को यह 14.50 रुपये सस्ता हुआ था। बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर ऐसे लोग लेते हैं जिन्होंने या तो सब्सिडी छोड़ दी है या फिर एक साल में 12 से अधिक सब्सिडी वाला सिलेंडर ले चुके हैं। सब्सिडी वाले केरोसीन के दाम में प्रति लीटर 0.26 रुपये की वृद्धि की गई है। मुंबई में एक लीटर केरोसीन की कीमत अब 19.55 रुपये होगी।