Wednesday, July 8, 2026
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काउंसलिंग : आईआईटी एवं एनआईटी में छठे राउण्ड का सीट आवंटन आज

छठे राउण्ड में प्रथम बार सीट का आवंटन होगा, उन्हें आवश्यक दस्तावेज के साथ रिपोर्टिंग सेंटर पर रिपोर्ट करना होगा।

कोटा। देश की 23 आईआईटी, 31 एनआईटी, 23 ट्रिपलआईटी एवं 20 जीएफटीआई के लिए आयोजित ज्वाइंट काउंसलिंग के छठे राउण्ड का सीट आवंटन मंगलवार को घोषित किया जाएगा।

एेसे विद्यार्थी जिन्हें छठे राउण्ड में प्रथम बार सीट का आवंटन होगा, उन्हें आवश्यक दस्तावेज के साथ रिपोर्टिंग सेंटर पर रिपोर्ट करना होगा। एेसा नहीं करने पर वो काउंसलिंग से बाहर हो जाएंगे।

सीट आवंटन रिपोर्टिंग की अंतिम तिथि 20 जुलाई है। पांचवें राउण्ड के सीट आवंटन में सामान्य वर्ग के लिए आईआईटी की क्लोजिंग रैंक 9464 रही, जो कि आईआईटी-बीएचयू की पांच वर्षीय फार्मास्यूटीकल इंजीनियरिंग की रही।

एनआईटी की क्लोजिंग रैंक 10 लाख 44 हजार 649 पर एनआईटी सिक्किम की सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच की होम स्टेट कोटे से रही।

ट्रिपलआईटी की क्लोजिंग रैंक 34145 पर ट्रिपलआईटी मणिपुर की इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग ब्रांच की रही। जीएफटीआई की क्लोजिंग रैंक 1,19,750 पर आसाम यूनिवर्सिटी सिल्चर की एग्रीकल्चर ब्रांच की रही।

421 सीटें रिक्त
पांचवें राउण्ड के सीट आवंटन के बाद 421 सीटें रिक्तरही। आईआईटी में एक सीट भुवनेश्वर की मेटलर्जी ब्रांच की एसटी कैटेगरी में खाली रही।

शेष 420 सीटें एनआईटी अगरतला, कालीकट, मेघालय, पाण्डुचेरी, सिक्किम, मिजोरम, मणिपुर की हैं। इनमें ज्यादातर सीटें एससी-एसटी कैटेगिरी की होम स्टेट कोटे से खाली रही। सातवें व अंतिम राउण्ड का सीट आवंटन 21 जुलाई को घोषित होगा।

विड्रॉल कराएं फीस, वरना अगले वर्ष वंचित
कॅरियर काउंसलर अमित आहूजा ने बताया कि एेसे विद्यार्थी जो आईआईटी की आवंटित सीट से संतुष्ट नहीं हैं और अगले वर्ष दोबारा जेईई-एडवांस परीक्षा में बैठना चाहते हैं, उन्हें सातवें राउण्ड के सीट आवंटन से पूर्व अपनी सीट छोड़कर फीस विड्रॉल करानी होगी। एेसा नहीं करने पर वो अगले वर्ष जेईई-एडवांस में बैठने के पात्र नहीं रहेंगे। 

विद्यार्थियों के लिए सीट छोड़कर फीस विड्रॉल करवाने का यह अंतिम अवसर है। इसके लिए विद्यार्थी जोसा पोर्टल पर दिए गए विड्रॉल विकल्प पर अपनी बैंक डिटेल भरकर विड्रॉल आवेदन फॉर्म को डाउनलोड करना होगा।

इस पर हस्ताक्षर कर रिपोर्टिंग सेंटर पर रिपोर्ट करना होगा। जोसा द्वारा 1000 रुपए शुल्क काटकर शेष फीस लौटा दी जाएगी।

जीएसटी के पोर्टल पर गड़बड़ी, खुल रहा कोई और अकाउंट

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टैक्स विभाग ने इसके लिए चार्टर्ड अकाउंटेट्स को जिम्मेदार ठहराया है।

नई दिल्ली। जीएसटी लागू हुए अभी दो हफ्ते हुए हैं और इसके पोर्टल पर गड़बड़ियां सामने आने लगी हैं। कुछ कारोबारियों ने शिकायत की है कि पोर्टल पर लॉग इन के लिए वे अपनी डिटेल्स डालते हैं, लेकिन खुलता किसी और का अकाउंट है। इससे कारोबारियों का डाटा लीक होने का खतरा बन गया है।

जीएसटी लागू होने से पहले सरकार ने दावा किया था कि दूसरे के अकाउंट देखना मुमकिन नहीं है, इसलिए डाटा पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि टैक्स विभाग ने इसके लिए चार्टर्ड अकाउंटेट्स को जिम्मेदार ठहराया है। उसका कहना है कि टैक्स प्रैक्टिशनर एक साथ कई कंपनियों के अकाउंट खोलते हैं, इसलिए ऐसा हो रहा है।

जीएसटी लागू करने वाले सीबीईसी की मुंबई डिवीजन ने इस बारे में एक सर्कुलर जारी किया है। इसमें कहा गया है कि ऐसा उन्हीं मामलों में देखने को मिल रहा है जिनमें रजिस्ट्रेशन या एनरोलमेंट एक ही टैक्स प्रैक्टिशनर कर रहा है। गौरतलब है कि सरकार ने पुराने कारोबारियों के माइग्रेशन के लिए 22 जुलाई और नए रजिस्ट्रेशन के लिए 30 जुलाई तक की तारीख तय की है।

इसने कहा है कि अगर कोई कंपनी या कारोबारी एक पैन पर अलग-अलग वर्टिकल के लिए अलग रजिस्ट्रेशन चाहता है तो उसे अलग ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे रजिस्ट्रेशन नंबर यूनिक बने रहेंगे।

सीबीईसी ने कहा – सीए की गलती से रही समस्या
टैक्सप्रैक्टिशनर (सीए) अपने कंप्यूटर पर अलग-अलग टैक्सपेयर (कारोबारी) के लिए कई विंडो खोलता है, तभी ऐसा होता है। एप्लिकेशन फॉर्म भरते वक्त जो आंकड़े भरे जाते हैं वे कंप्यूटर की कैश मेमोरी में रह जाते हैं। इसी से यह समस्या रही है।

कंप्यूटर पर एक बार में एक कारोबारी का ही विंडो खोलें
सीबीईसीने टैक्स प्रैक्टिशनरों को सलाह दी है कि वे एक बार में एक ही कारोबारी का विंडो खोलें। काम पूरा होने पर कंप्यूटर की कैश मेमोरी डिलीट कर दें। उसके बाद दूसरे रजिस्ट्रेशन या एनरोलमेंट की प्रक्रिया शुरू करें।

सैंड स्टोन पर जीएसटी तो लगा दिया लेकिन, वैट नहीं हटाया, वीडियो देखें—-

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2011 में सरकार ने वैट को रॉयल्टी में मिला दिया था इस पर 95 रुपए प्रति टन पर रॉयल्टी लग रही थी।

कोटा। सरकार ने जीएसटी तो लगा दिया लेकिन, वैट नहीं हटाया। रॉयल्टी के नाम पर 60 रुपए ज्यादा लिए जा रहे हैं।

इसी मामले को लेकर सोमवार को एसजीएसटी उपायुक्त ने सैंड स्टोन व्यवसायी और क्रेशर वालों की एक मीटिंग बुलाई।जिसमें सैंड स्टोन पर लग रही रॉयल्टी को लेकर वित्त विभाग ने सेल्स टैक्स विभाग के उपायुक्त से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।

सैंड स्टोन विकास समिति के अध्यक्ष उत्तम अग्रवाल ने बताया कि सेंड स्टोन पर जीएसटी लगने से काफी नुकसान हो रहा था। इसके चलते प्रिंसिपल सेक्रेटरी और सीएम से मिले थे। मीटिंग में सैंड स्टोन के व्यापारियों ने उपायुक्त को रॉयल्टी और जीएसटी से व्यापार में पड़ रहे प्रभाव के बारे में विस्तार से बताया।

अग्रवाल ने बताया कि 2011 में सरकार ने वैट को रॉयल्टी में मिला दिया था। इस पर 95 रुपए प्रति टन पर रॉयल्टी लग रही थी। सरकार ने जीएसटी तो लगा दिया लेकिन, वैट नहीं हटाया।  माइनिंग विभाग ने रॉयल्टी की पूरी जानकारी दी है। उन्हें यह भी बताया कि अभी एक गाड़ी पर 2000 रुपए जीएसटी का खर्च आएगा।

इसमें से वैट हटा देंगे तब भी 1300 रुपए जीएसटी के नाम पर सरकार को मिलेंगे। एमपी के भी बिल विभाग को दिए गए हैं। जुलाई का रिकॉर्ड देख तो पता चला कि अभी तक 100 गाडिय़ां निकल जानी चाहिए थीं, लेकिन निकली केवल 30 है। वहीं एसीटीओ शर्मा ने बताया कि कमिश्नर आलोक ने वीडियो कांफ्रेंसिंग की। इसमें निर्देश दिए कि वे ज्यादा से ज्यादा व्यापारियों का माइग्रेशन करें।

प्रतिनिधिमंडल में सूरजमल बंसल, बंशीधर राठौर, अनिल जैन, शाहिद, दीनदयाल डागा मौजूद थे। एसीटीओ अनुपम शर्मा ने बताया कि उपायुक्त अपनी रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजेंगे। प्रशासन की ओर से  माइनिंग विभाग, सेल्स टैक्स विभाग के उपायुक्त एनके गुप्ता, सीटीओ शिवेंद्र सक्सेना, एसीटीओ अनुपम शर्मा थे।

निर्यात पर असर नहीं
हाड़ौती में निकलने वाला सेंड स्टोन यहाँ से विदेशों में एक्सपोर्ट होता है। हालाँकि जीएसटी से इसके निर्यात पर असर नहीं पड़ेगा। फिर भी इसके कारण भवन निर्माण की लागत बढ़ जाएगी। जीएसटी से सेंड स्टोन पर पड़ने वाले असर को लेकर  LEN-DEN NEWS चैनल ने सेंड स्टोन एक्सपोर्टर एवं सिविल इंजीनियर महेंद्र चौधरी से की बातचीत की। आइये विस्तार से जानने के लिए वीडियो देखें–

 

 

 

 

 

यूएसबी केबल पर सरकार ने 10 फीसद की इंपोर्ट ड्यूटी लगाई

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भारत में आयात होने वाले उन स्टेटिक कन्वर्टर पर भी उसी तरह 10 फीसद की बेसिक कस्टम ड्यूटी लगा दी जाएगी जैसा कि इंपोर्टेड मोबाइल चार्जर पर लगी हुई है।

नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने सेल्युलर फोन के इस्तेमाल में आने वाले स्टेटिक कन्वर्टर जैसे कि यूएसबी केबल पर 10 फीसद की इंपोर्ट ड्यूटी लगाई है। अभी तक यह बेसिक कस्टम ड्यूटी के अंतर्गत छूट के दायरे में आती थी।

सेल्युलर मोबाइल फोन के इस्तेमाल में आने वाले स्टेटिक कन्वर्टर में फोन चार्जिंग केबल आते हैं, जिनका इस्तेमाल हैंडसेट के डेटा को कंप्यूटर, लैपटॉप, टीवी और टैबलेट में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।

सरकार के इस कदम के साथ अब भारत में आयात होने वाले उन स्टेटिक कन्वर्टर पर भी उसी तरह 10 फीसद की बेसिक कस्टम ड्यूटी लगा दी जाएगी जैसा कि इंपोर्टेड मोबाइल चार्जर पर लगी हुई है।

राजस्व विभाग ने कहा कि सीमा शुल्क विभाग की एक अधिसूचना में संशोधन किया जा रहा है जो कि छूट प्राप्त सामानों को शामिल करेगा, “ऑटोमेटिक डेटा प्रोसेसिंग मशीनों और उसकी यूनिट्स के लिए स्टेटिक कन्वर्टर एवं सेल्युलर मोबाइल फोन के स्टेटिक कन्वर्टर के अलावा अन्य टेलिकम्युनिकेशंस उपकरण।”

भारतीय सेलुलर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज मोहिन्द्रो ने कहा कि यह चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम की ओर सरकार की उस प्रतिबद्धता का जताता है जिसे भारत में मोबाइल फोन उत्पादन के लिए घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन किया गया है।

मोहिन्द्रो ने कहा, “हम सेल्युलर फोन के लिए स्टेटिक कन्वर्टर के परिभाषा में लूपहोल को, जो कि मोबाइल चार्जर सेगमेंट को प्रभावित कर रहा था, को खत्म करने में राजस्व विभाग की ओर से की गई इस त्वरित कार्यवाई की सराहना करते हैं।”

 

ग्रैच्युटी में टैक्स छूट की सीमा अब बढ़कर होगी 20 लाख

संसद के मॉनसून सत्र में सरकार ग्रैच्युटी ऐक्ट में संशोधन कर टैक्स छूट को दोगुना कर सकती है।

नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सेशन की शुरुआत हो चुकी है। इस सत्र में भी सरकार कई अहम विधेयकों को पारित कराने की कोशिश करेगी। इनमें से एक ग्रैच्युटी ऐक्ट में संशोधन भी है। इसके तहत सरकार ग्रैच्युटी पर टैक्स छूट को दोगुना कर सकती है।

अब तक 10 लाख रुपये से अधिक राशि की ग्रैच्युटी पर टैक्स लगता रहा है, लेकिन अब ग्रैच्युटी पर छूट की सीमा को 20 लाख रुपये तक करने की तैयारी है। कैबिनेट ने इस साल 15 मार्च को ही इस फैसले को मंजूरी दी थी।

रिटायरमेंट के बाद नियोक्ता की ओर से एंप्लॉयी को ग्रैच्युटी की रकम दी जाती है। इसके अलावा कंपनियां 5 साल या उससे अधिक समय तक नौकरी करने पर भी एंप्लॉयीज को यह लाभ देती हैं।

मौजूदा पेमेंट ऑफ ग्रैच्युटी ऐक्ट, 1972 के तहत सरकारी एंप्लॉयीज को मिलने वाली ग्रैच्युटी की राशि पर टैक्स में छूट मिलती है यानि सरकारी कर्मचारियों को ग्रैच्युटी पर कोई टैक्स नहीं देना होता।

दूसरी तरफ गैर-सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट पर मिलने वाली ग्रैच्युटी की 10 लाख रुपये तक की राशि पर कोई टैक्स नहीं लगता है, लेकिन इसके बाद टैक्स चुकाना होता है।

इन संस्थानों पर लागू है नियम
10 या उससे अधिक एंप्लॉयीज की संख्या वाले संस्थानों पर ग्रैच्युटी ऐक्ट लागू होता है। इस ऐक्ट के तहत यदि कोई संस्थान इस ऐक्ट के दायरे में एक बार आ जाता है तो एंप्लॉयीज की संख्या 10 से कम होने पर भी उस पर यह नियम लागू रहता है। यदि कोई संस्थान इसके अंतर्गत नहीं है तो वह अपने एंप्लॉयीज को एक्सग्रेशिया पेमेंट कर सकता है।

योग्यता
ऐक्ट के तहत कोई भी एंप्लॉयी लगातार 5 साल या फिर उससे अधिक वक्त तक संस्थान में काम करता है, तभी वह ग्रैच्युटी का हकदार है। हालांकि बीमारी, दुर्घटना, लेऑफ, स्ट्राइक या लॉकआउट की स्थिति में आए व्यवधान को इसमें नहीं जोड़ा जाता।

कब होती है ग्रैच्युटी की पेमेंट
आमतौर पर एंप्लॉयी के रिटायर होने पर ही ग्रैच्युटी ही पेमेंट की जाती है। हालांकि इसके अल्वा भी कुछ अन्य स्थितियों में कर्मचारी को ग्रैच्युटी का लाभ मिलता है। जैसे:

पेंशन की स्थिति में

  • यदि वह संस्थान में 5 साल तक काम करने के बाद इस्तीफा देता है।
  • यदि कोई एंप्लॉयी 5 साल पूरे नहीं कर पाता है और बीच में ही उसकी मृत्यु हो जाती है, तब भी उसके परिवार को ग्रैच्युटी की राशि मिलेगी।
  •  5 साल का कार्यकाल पूरा न होने से पहले ही यदि वह हादसे के चलते अक्षम हो जाता है या फिर वह किसी बीमारी का शिकार हो जाता है, तब भी उसे ग्रैच्युटी का लाभ मिलेगा।

सिगरेट आज रात 12 बजे से हो जाएगी महंगी

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नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली लागू होने के बाद सिगरेट पर केंद्र और राज्यों की ओर से लगने वाले कर में आई कमी को सुधार लिया गया है। सरकार ने सोमवार और मंगलवार की दरम्यानी रात से सिगरेट पर जीएसटी की दरों में बढ़ोतरी कर दी है। यानी जीएसटी लागू होने के बाद सिगरेट के मूल्य में जो कमी आई थी, वह मंगलवार से पूर्व की दरों पर ही बिकेगी।

वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में सोमवार को जीएसटी परिषद की हुई 19वीं बैठक में इस आशय का निर्णय लिया गया। परिषद की बैठक समाप्त होने के बाद जेटली ने बताया कि सिगरेट पर जीएसटी की दर 28 फीसदी और एड वोलेरम पांच फीसदी सेस बरकरार रहेगी।  सिर्फ कंपनसेशन सेस में बढ़ोतरी की जा रही है जिससे पांच हजार करोड़ रुपये की कर वसूली बढ़ेगी। 

एक महीने में पेट्रोल पांच और डीजल तीन रुपए सस्ता हुआ

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पेट्रोल-डीजल के दाम रोजाना रिवाइज करने के फैसले को एक महीना पूरा हो गया है, इस अवधि में सबसे ज्यादा पेट्रोल के दाम मुंबई में गिरे हैं। 

नई दिल्ली। 16 जून से केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम रोजाना रिवाइज करने का फैसला किया था। सोमवार को इस फैसले को आए हुए एक महीना पूरा हो गया। इन 30 दिनों में दोनों वस्तुओं के दामों में इजाफा नहीं हुआ, जिससे लोगों को काफी राहत मिली। 

इन 30 दिनों में पूरे देश में पेट्रोल के दामों में 5 रुपये प्रति लीटर की कमी आई है। सबसे ज्यादा पेट्रोल के दाम मुंबई में गिरे हैं। एटलस.कॉम के मुताबिक मुंबई में पेट्रोल के दाम 4.99 रुपये प्रति लीटर कम हुए हैं। इसके बाद चेन्नई में 3.36 पैसे, दिल्ली में 2.80 पैसे और कोलकाता में 1.97 पैसे प्रति लीटर की कमी आई है। 

वहीं डीजल के दामों में तीन रुपये प्रति लीटर की कमी आई है। डाटा के मुताबिक मुंबई में बीते 30 दिनों में डीजल के दाम 3.20 पैसे प्रति लीटर कम हुए हैं। वहीं चेन्नई में 1.30 पैसे, नई दिल्ली में 1.01 पैसे और कोलकाता में 0.61 पैसे प्रति लीटर की कमी दर्ज की गई है। 

जून 16 को तेल कंपनियों ने पेट्रोल के प्राइस में 1.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 1.24 रुपये प्रति लीटर की कमी की थी। इसके बाद से तेल कंपनियां रोजाना 1 से 20 पैसे प्रति लीटर की कमी कर रही थी। 

दलहन और तिलहन के उत्पादन में आत्म निर्भर होगा भारत – राधा मोहन

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घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश में अभी 50 लाख टन दाल और 1.45 करोड़ टन वनस्पति तेल हर साल आयात किया जाता है।

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने भरोसा जताया है कि आने वाले वर्षों में भारत दलहन और तिलहन के उत्पादन में आत्मनिर्भर हो जाएगा। सरकार इनका उत्पादन बढ़ाने के लिए बेहतर गुणवत्ता के बीज और तकनीक के उपयोग को लेकर कदम उठा रही है।

घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश में अभी 50 लाख टन दाल और 1.45 करोड़ टन वनस्पति तेल (खाद्य और अखाद्य दोनों) हर साल आयात किया जाता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) के 89वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे सिंह ने कहा कि सरकार न केवल उत्पादन बढ़ाने के लिए कदम उठा रही है, बल्कि कृषि को आय-केंद्रित बनाने के लिए भी प्रयासरत है। 

सिंह ने आइसीएआर के वैज्ञानिकों से इस लक्ष्य को पाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया। साथ ही फसल की उपज और कृषि आय बढ़ाने के लिए इस क्षेत्र में कौशल विकास पर जोर दिया। भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि व संबद्ध क्षेत्रों की हिस्सेदारी 18 फीसद है।

कृषि मंत्री बोले कि हरित क्रांति ने भारत को गेहूं और चावल में आत्मनिर्भर बनाने में मदद की। लेकिन, देश अब भी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए दलहन और तिलहन का आयात कर रहा है। इसमें भारी मात्र में विदेशी मुद्रा खर्च होती है।
मंत्री के मुताबिक, फसल वर्ष 2016-17 में दालों का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ।

इस वर्ष बुवाई क्षेत्र भी ज्यादा है। देश आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अगले दो से तीन सालों में हम दालों में आत्मनिर्भर हो जाएंगे। तिलहन पर वह बोले कि देशभर में 600 से अधिक कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के जरिये इनकी उत्पादकता और उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।

देश में दालों का उत्पादन 2016-17 फसल वर्ष (जुलाई-जून) में बढ़कर 2.24 करोड़ टन हो गया। पिछले फसल वर्ष में यह 16.15 करोड़ टन था। इसी प्रकार बीते साल के मुकाबले तिलहन का उत्पादन 29 फीसद बढ़कर 3.25 करोड़ टन पर पहुंच गया।

बीएसई सेंसेक्स की 32075 पर रिकॉर्ड क्लोजिंग, निफ्टी पहली बार 9900 के पार

बीएसई सेंसेक्स 54.03 अंक की तेजी के साथ 32074 के स्तर पर औऱ निफ्टी 26 अंक की तेजी के साथ 9915 के स्तर पर कारोबार कर बंद हुआ है।

नई दिल्ली। दिन भर के उतार चढ़ाव के बाद भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ कारोबार कर बंद हुआ है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 54.03 अंक की तेजी के साथ 32074 के स्तर पर और निफ्टी 26 अंक की तेजी के साथ 9915 के रिकॉर्ड हाई पर कारोबार कर बंद हुआ है।

सोमवार को पहली बार निफ्टी 9900 के स्तर के पार बंद हुआ है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर मिडकैप 0.18 फीसद और स्मॉलकैप 0.56 फीसद की बढ़त के साथ कारोबार कर बंद हुआ है।

निफ्टी बैंक की रिकॉर्ड क्लोजिंग
सेक्टोरियल इंडेक्स की बात करें तो एफएमसीजी को छोड़ सभी सूचकांक हरे निशान में कारोबार कर बंद हुए हैं। निफ्टी बैंक की सोमवार के सत्र में रिकॉर्ड क्लोजिंग हुई है। यह 24115 के स्तर पर बंद हुआ है। ऑटो (0.41 फीसद), फाइनेंशियल सर्विस (0.49 फीसद), आईटी (1.12 फीसद), मेटल (0.96 फीसद) और रियल्टी में (1.48 फीसद) की बढ़त देखने को मिली है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप पहली बार 5 लाख करोड़ के पार
बाजार की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीड की पहली बार मार्केट कैप पांच लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विस के बाद यह दूसरी कंपनी ने जिसकी मार्केट कैप 5 लाख करोड़ के पार पहुंची है। जानकारी के लिए बता दें कि वर्तमान में टीसीएस दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी है।

अल्ट्रा सीमेंट टॉप गेनर
दिग्गज शेयर्स की बात करें तो निफ्टी में शुमार शेयर्स में से 40 हरे निशान में और 11 गिरावट के साथ कारोबार कर बंद हुए है। सबसे ज्यादा तेजी अल्टा सीमेंट, विप्रो, वेदांता लिमिटेड, एचसीएल टेक और अंबूजा सीमेंट के शेयर्स में हुई है। वहीं, गिरावट आईटीसी, गेल, कोल इंडिया, येस बैंक और मारुति के शेयर्स में हुई है।

तिमाही नतीजे तय करेंगे शेयर बाजार की दिशा

रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज ऑटो, एसीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, विप्रो और कोटक जैसी वजनदार कंपनियां तिमाही नतीजे घोषित करेंगी।

नई दिल्ली । रिलायंस और विप्रो जैसी ब्लूचिप कंपनियों के तिमाही नतीजे इस हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे। सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। विशेषज्ञों ने यह राय जताई है।

आम्रपाली आद्या ट्रेडिंग एंड इंवेस्टमेंट्स के डायरेक्टर व रिसर्च हेड अबनीश कुमार सुधांशु ने कहा कि इस हफ्ते बाजार की चाल कंपनियों के तिमाही परिणामों से निर्धारित होगी। तिमाही नतीजों के मौसम में खास स्टॉकों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

ट्रेड स्मार्ट ऑनलाइन के संस्थापक-निदेशक विजय सिंघानिया बोले कि इस सप्ताह कोई महत्वपूर्ण आर्थिक डाटा नहीं आना है। जबकि इस दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज ऑटो, एसीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, विप्रो और कोटक जैसी वजनदार कंपनियां तिमाही नतीजे घोषित करेंगी।

इन पर निवेशकों का फोकस रहेगा। मानसून सत्र 17 जुलाई से शुरू हो चुका है। राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी यही तारीख निर्धारित है। सैमको सिक्योरिटीज के सीईओ जिमित मोदी के मुताबिक, नतीजों के तुरंत बाद बाजार में अस्थिरता आने की आशंका है।

कोटक म्यूचुअल फंड के सीआइओ (इक्विटी) हर्ष उपाध्याय ने कहा कि अभी तक की मानसून की प्रगति सामान्य से बेहतर रही है। यह ग्रामीण उन्मुख कारोबारों के लिए अच्छा है। खुदरा महंगाई की दर में गिरावट ने नीतिगत ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश बढ़ा दी है। इससे बाजार की कारोबारी धारणा को बल मिलेगा।

साप्ताहिक आधार पर बीते हफ्ते दोनों प्रमुख सूचकांकों- सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी आई। इस दौरान बंबई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स 660.12 अंक यानी 2.10 फीसद चढ़ा। जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 220.55 अंक यानी 2.28 फीसद मजबूत हुआ।

इस तेजी में देश की दस सबसे मूल्यवान कंपनियों में से नौ का कुल बाजार पूंजीकरण (एम-कैप) 67,754.53 करोड़ रुपये बढ़ा। रिलायंस इंडस्ट्रीज और टीसीएस को सबसे ज्यादा फायदा हुआ। दस कंपनियों में ओएनजीसी नुकसान उठाने वाली एकमात्र रही।