Wednesday, July 8, 2026
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आयकर विभाग की नजर 10 साल में पंजीकृत करोड़ों की संपत्तियों पर

  • एक करोड़ रुपये से अधिक के 5 लाख सौदे हुए 10 साल में
  • हर साल होते हैं करीब 45-50 हजार सौदे मुंबई में
  • विभाग ने मांगी खरीदारों-विक्रेताओं की पूरी जानकारी

मुंबई। अघोषित आय के मामलों को निपटाने के बाद आय कर विभाग ने अब अपना ध्यान बेनामी संपत्तियों की पहचान पर केंद्रित कर दिया है। बेनामी संपत्तियां काला धन खपाने का बहुत बड़ा जरिया हैं। परंपरागत रूप से कारोबारी, नेता, नौकरशाह और यहां तक कि अंडरवल्र्ड भी अपनी काली कमाई को खपाने के लिए यह रास्ता अपनाते रहे हैं।

मुंबई आय कर विभाग ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी सब रजिस्ट्रारों और तहसीलदारों को पिछले 10 साल में पंजीकृत एक करोड़ रुपये या उससे अधिक मूल्य की संपत्तियों की जानकारी देने को कहा है।

विभाग ने बेनामी लेनदेन रोकथाम कानून, 1988 की धारा 21 (1) और पिछले साल 25 अक्टूबर की सीबीडीटी अधिसूचना के तहत उसे मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए अप्रैल 2007 से इस साल जून के दौरान हुए संपत्ति के सौदों की जानकारी मांगी है। बेनामी लेनदेन रोकथाम कानून में पिछले साल व्यापक संशोधन किए गए थे।

मुंबई में कुल 25 पंजीकरण कार्यालय हैं जिनमें से 5 शहर में और 20 उपनगरीय इलाकों में हैं। अनुमानों के मुताबिक मुंबई में हर साल एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य संपत्ति के 45,000 से 50,000 सौदे होते हैं। एक करोड़ रुपये से अधिक के वास्तविक सौदों की संख्या बहुत अधिक होने का अनुमान है।

लेकिन अधिकांश सौदे रेडी रेकनर वेल्यू पर होते हैं। रेडी रेकनर रेट को स्टांप शुल्क और आय कर उद्देश्यों के लिए बाजार मूल्य के रूप में स्वीकार किया जाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक मुंबई में पिछले एक दशक में कम से कम 5 लाख ऐसी संपत्तियां का लेनदेन हुआ है जिनका मूल्य एक करोड़ रुपये से ज्यादा है। धु्रवा एडवाइजर्स एलएलपी के मुख्य कार्याधिकारी दिनेश कनाबार ने कहा, ‘इसमें कोई दोराय नहीं है कि काले धन का ज्यादातर इस्तेमाल रियल एस्टेट में हुआ है।

इसका एक अच्छा खासा हिस्सा बेनामी संपत्ति में लगा है। पिछले कुछ समय से कर अधिकारी संपत्ति के लेनदेन की जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहे हैं और अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इनमें काले धन का इस्तेमाल तो नहीं हुआ है। यह सही कदम है।’

विभाग ने सब रजिस्ट्रारों से सभी तरह के पंजीकरण की जानकारी मांगी है। इनमें डेवलपमेंट एग्रीमेंट, किरायेदारी हस्तांतरण, बिक्री प्रमाणपत्र, फ्लैट/दफ्तर/व्यावसायिक परिसरों की बिक्री, विलय-अलग होना, संपत्ति का हस्तांतरण, तोहफे, एक करोड़ रुपये से अधिक के लीज एग्रीमेंट, संपत्ति गिरवी रखने, पावर ऑफ अटॉर्नी, संपत्तियों का विभाजन, रिलीज डीड, लीज और वर्क कांट्रेक्ट का स्थानांतरण आदि शामिल हैं।

 

 

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आपके लिए कौन सा ITR फॉर्म भरना है जरूरी, जानिए

नई दिल्ली । इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग में अब कुछ ही दिन का समय बचा है। वित्त वर्ष 2016-17 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2017 निर्धारित है। आमतौर पर लोग सिर्फ यही मानते हैं कि आईटीआर फाइलिंग के लिए नियोक्ता की ओर से दिया गया फॉर्म-16 ही अहम होता है। लेकिन आपको जानना चाहिए कि वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए फॉर्म-16 की ही तरह फॉर्म 26AS भी उतनी ही अहमियत रखता है।

कौन सा फॉर्म भरना है जरूरी:

  • ITR1 (सहज): अगर किसी इंडिविजुअल को सैलरी, पेंशन, प्रॉपर्टी के किराए या ब्याज से आमदनी होती है तो यह फॉर्म भरें। कोई भी व्यक्ति जिसे बिना बिक्री के कर मुक्त आय (कृषि के अलावा 5 हजार से ऊपर की आय) हो रही है, तो वो
  • आईटीआर-1 फॉर्म भर सकता है। यह सिर्फ पचास लाख तक की आमदनी पर ही भरा जा सकता है।
  • ITR2: ऐसे इंडिविजुअल और HUF जिन्हें सैलरी, पेंशन, एक से ज्यादा प्रॉपर्टी से किराए, कैपिटल गेन, अन्य स्रोत से आय में लॉटरी और रेसिंग से भी आमदनी होती है। उनके लिए यह फॉर्म भरना जरूरी होता है।
  • ITR3: फर्म के ऐसे साझेदार जिन्हें ब्याज, सैलरी, बोनस से आमदनी, कैपिटल गेन, एक से ज्यादा प्रॉपर्टी से किराए इनकम होती है उनके लिए यह फॉर्म भरना जरूरी होता है।
  • ITR4: जिन लोगों को बिजनस, प्रोफेशन (डॉक्टर, वकील आदि) के जरिए आमदनी हो रही हो, उनके लिए यह फॉर्म होता है। यह उनके लिए है जिनकों अपने खाते चार्टेड अकाउंटेंट से ऑडिट कराने होते हैं।
  • ITR4s (सुगम): बिजनेस में जिनका टर्नओवर 2 करोड़ से कम हो, बिजनेस प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन रुल के दायरे में जो भी आता हो उसके लिए यह फॉर्म होता है। यह छूट 44 AD के तहत मिलती है।
  • ITR5: यह फॉर्म सिर्फ पार्टनरशिप फर्म या फिर ट्रस्ट या सोसाइटी के लिए होता है।

किन सूरतों में दाखिल करना होता है इनकम टैक्स रिटर्न
अगर आपकी कुल आय 2.50 से कम है और आप कर अदायगी के दायरे में नहीं आते हैं तब भी आपको इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करना चाहिए। वहीं अगर आपकी सैलरी में से टीडीएस काटा भी जा चुका हो तो भी आपके लिए इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करना जरूरी है।

अगर आप किसी विदेशी संपत्ति का मालिकान हक रखते हैं और भारत के बाहर आपका कोई खाता है तो आपको आयकर रिटर्न दाखिल करना होगा भले ही आपकी आय टैक्स कटौती के दायरे में न आती हो।

क्या होता है फॉर्म 26AS:
फॉर्म 26AS एक ऐसा दस्तावेज है जिसमें आपके वेतन से स्रोत पर हुई कर कटौती (TDS) की पूरी जानकारी होती है। यह एक टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट है जो बताता है कि आयकर विभाग को आपकी तरफ से कितने टैक्स का भुगतान किया गया है। आप इस फॉर्म को आयकर विभाग की वेबसाइट (incometaxindiaefiling.gov.in) पर अपने एकाउंट में लॉग-इन करके डाउनलोड कर सकते हैं।

स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए खत्म किए 1,200 पुराने कानून

स्टार्टअप के रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को सरल बनाने से अब कोई भी एक दिन में कंपनी पंजीकृत करा सकता है।

नई दिल्ली। स्टार्टअप के रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को सरल बनाने के लिए सरकार ने करीब 1,200 जटिल कानूनों और प्रक्रियाओं को हटाया है, ताकि देश के उद्यमियों को बढ़ावा दिया जा सके। यह बात मंगलवार को नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कही।

उन्होंने कहा कि देश में संपत्ति का निर्माण करने के लिए उद्यमियों को बढ़ावा देना होगा। सरकार ने खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए कई कदम उठाए हैं।

कांत ने यहां एक कार्यक्रम में संवाददाताओं से कहा कि गत दो साल में हमने अनेक नियमावलियों और कानूनों, प्रक्रियाओं और कागजी कार्यवाहियों को समाप्त करने की कोशिश की है। हमने करीब 1,200 कानूनों को हटा दिया है, जैसा पहले कभी नहीं हुआ था।

वह एंटरप्रेन्योर इंडिया-2017 सम्मेलन में बोल रहे थे। इस सम्मेलन में निवेशक, स्टार्टअप, एसएमई तथा पेशेवर नेटवर्किंग के लिए और संभावनाशील कारोबारी विचारों तथा अन्य पर विचार करने के लिए जमा हुए थे।

कांत ने कहा कि आज कोई भी एक दिन में कंपनी पंजीकृत करा सकता है। एमएसएमई के लिए पंजीकरण में करीब पांच मिनट लगता है। स्टार्टअप को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि जो असफल हो जाते हैं, वो तुरंत कारोबार से बाहर निकल सकते हैं, क्योंकि देश में दिवालिया कानून बन चुका है।

उन्होंने कहा कि देश में जीएसटी कानून और जीएसटी लागू हो चुका है। यह सारे कदम भारत को कारोबार के लिए एक उपयुक्त जगह बनाने के लिए उठाए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने फंडों का फंड बनाया है, ताकि युवा उद्यमियों को धन उपलब्ध कराने के लिए विशाल संख्या वेंचर फंड मौजूद रहें। जब स्टार्टअप को वेंचर फंड से सहायता मिलेगी, तो स्टार्टअप परितंत्र का विकास होगा। 

कपड़े पर जीएसटी नहीं घटेगा, वित्त मंत्री जेटली ने कहा

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जीएसटी में कितना है टैक्स  
यार्न  : पॉलिएस्टरजैसे कृत्रिम यार्न पर 18% टैक्स है। कॉटन, वूल, सिल्क जैसे प्राकृतिक धागे पर 5% टैक्स। फैब्रिक: कॉटन,वूलन और सिंथेटिक सभी कपड़े पर 5 फीसदी टैक्स है। रेडीमेड गारमेंट : कीमत1,000 रु तक है तो टैक्स 5% होगा। 1,000 रु से ज्यादा है तो 12% लगेगा।

नई दिल्ली। कपड़े पर टैक्स घटाने से सरकार ने साफ इनकार कर दिया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा, फैब्रिक पर जीएसटी रेट 0% करने से घरेलू इंडस्ट्री को इनपुट क्रेडिट नहीं मिल पाएगा। देश में बने कपड़ों की तुलना में इंपोर्टेड कपड़े सस्ते पड़ेंगे। फैब्रिक पर अभी 5% जीएसटी है। गुजरात, खासकर सूरत के टेक्सटाइल कारोबारी इसका विरोध कर रहे हैं।

इंडस्ट्री का दावा है कि टैक्स से फैब्रिक 10-12% महंगे हो जाएंगे। इससे भारतीय कपड़ों का निर्यात मुश्किल हो जाएगा। पर जेटली ने कहा कि जीएसटी में रेट या तो पुराने स्तर पर हैं या कम हुए हैं। इसलिए फैब्रिक की कीमत बढ़नी नहीं चाहिए। उन्होंने इस दावे को गलत बताया कि जीएसटी से पहले स्वतंत्र भारत में कभी टेक्सटाइल पर टैक्स नहीं लगा था।

उन्होंने कहा कि 2003-04 में इस सेक्टर पर एक्साइज ड्यूटी लगती थी। जेटली ने कहा कि जीएसटी से टेक्सटाइल सेक्टर के संगठित ट्रेडर और असंगठित विक्रेताओं पर असर नहीं हुआ है। एक सवाल के जवाब में वित्त राज्यमंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि कीटनाशकों पर पहले 12.5% एक्साइज और औसतन 4% वैट था। 

इंपोर्टेड कपड़ा ‘जीरो रेटिंग’ कैटेगरी में जाएगा
जेटली ने कहा कि टेक्सटाइल कारोबारी फैब्रिक पर टैक्स नहीं चाहते। लेकिन 0% टैक्स स गारमेंट बनाने वालों को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल पाएगा। बिना क्रेडिट के लागत बढ़ेगी, जिसका असर कीमत पर होगा। शून्य टैक्स का मतलब है कि इंपोर्टेड कपड़ा ‘जीरो रेटिंग’ कैटेगरी में जाएगा, जबकि घरेलू इनपुट टैक्स का बोझ होगा।

प्रदेश में कपड़ा कारोबार को 1,000 करोड़ का नुकसान
जयपुर | वित्तमं त्री जेटली के साफ तौर पर कपड़े पर टैक्स हटाने से इनकार करने के बाद सूरत में व्यापारियों ने मंगलवार को अपनी हड़ताल खत्म कर दी है वहीं राजस्थान में भी अब कारोबारियों ने कामकाज फिर से शुरू कर दिया है। विभिन्न व्यापारिक संगठनों के अनुमान के अनुसार प्रदेश में एक जुलाई से लेकर अब तक कपड़ा कारोबार को लगभग 1,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। 

 

सैनिटरी नैपकिन पर जीएसटी को लेकर वित्त मंत्रालय को नोटिस

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महिलाओं के जीवन यापन के लिए सैनिटरी पैड एक अावश्यक वस्तु है और ये उनकी ‘राइट टु लाइफ’ और मर्यादा से जु़ड़ा हुआ है।

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को वित्त मंत्रालय और जीएसटी काउंसिल को उस याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है जिसमें याचिकाकर्ता ने सैनिटरी नैपकीन पर 12 फीसदी जीएसटी लगाने को चुनौती दी है।

हाई कोर्ट की ऐक्टिंग चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी. हरि शंकर की बेंच ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह 15 नवंबर तक इस मामले में दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर जवाब दाखिल करें। साथ ही याचिकाकर्ता से कहा है कि वह केंद्र सरकार को इस मामले में एक रिप्रजेंटेशन दें।

इस मामले में जेएनयू में अफ्रीकन स्टडीज में पीएचडी स्कॉलर जरमीना इसार खान की ओर से PIL दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि भारत की महिला के साथ ये भेदभाव है और यह गैर संवैधानिक है। सैनिटरी नैपकीन पर इस तरह से 12 फीसदी जीएसटी लगाना अवैध है।

एक जुलाई 2017 से जीएसटी लागू किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश एडवोकेट अमित जॉर्ज ने कहा कि नैपकीन की चाहे जो भी वैल्यू हो उस पर एक दर से 12 फीसदी जीएसटी लगाया गया है। जबकि अन्य सामग्री में अन्य तरह से टैक्स लगाया गया है।

महिलाओं के जीवन यापन के लिए सैनिटरी पैड एक अावश्यक वस्तु है और ये उनकी ‘राइट टु लाइफ’ और मर्यादा से जु़ड़ा हुआ है साथ ही ये स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा मामला है। महिलाओं के हेल्थ प्रॉटेक्शन से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि सैनिटरी नैपकीन पर 12 फीसदी जीएसटी लगाए जाने को खारिज करने की मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि नैपकीन को जीएसटी से मुक्त किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने कहा कि काजल, कुमकुम, बिंदी, सिंदूर, अलता, कांच की चूड़ी, पूजा सामग्री और अन्य तरह के गर्भ निरोधक और कॉन्डम आदि को जीएसटी से अलग रखा गया है लेकिन नैपकीन को जीएसटी के दायरे में रखा गया है।

बैंक कर्मी आज बैंक बचाओ दिवस के रूप में मनाएंगे

19 जुलाई 1969 को देश के 14 बड़े निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था।

कोटा।  देश की सभी बैंक कर्मचारी अधिकारी यूनियनों के संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने 19 जुलाई को बैंक राष्ट्रीयकरण दिवस को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बचाओ दिवस के रूप में मनाने का आव्हान किया है।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस,कोटा के संयोजक पदम पाटोदी ने बताया कि बैंक समय में बैंक अधिकारी एवं कर्मचारी जन विरोधी सुधारों को रोकने, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण न करने, बैंकों का विलय व एकाकीकरण योजनाएं रद्द करने, जानबूझ कर ऋण न चुकाने वालों के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही करने, कार्पोरेट डूबत ऋणों को बट्टे खाते में डालने के बजाय वसूली करने कॉर्पोरेट के डूबत ऋण का बोझ सेवा शुल्क बढ़ा कर ग्राहकों पर न डालने संबंधी मांगो का बैज लगा कर कार्य करेंगे।

उन्होंने बताया कि सायं 5.30 बजे से एक दुपहिया वाहन रैली भारतीय स्टेट बैंक एरोड्राम चौराहा शाखा से प्रारंभ हो कर शॉपिंग सेन्टर, छावनी चौराहा कोटड़ी चौराहा होते हुए सेवन वंडर्स के सामने समाप्त होगी । यूनाइटेड फोरम बैंक यूनियंस के नेताओं अशोक ढल , ललित गुप्ता,पदम पाटोदी, विपिन चोरायवाल, सुरेश खंडेलवाल, सुशील मेहता,मोहम्मद अकरम,सी एल भार्गव, मुकेश वर्मा ने बैंक कर्मियों एवं अधिकारियों से उक्त कार्यक्रमों को सफल बनाने का आव्हान किया है।

5 स्टार होटल में रुकने पर भी नहीं लगेगा GST, होगी यह शर्त….

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सीबीईसी ने बताया है कि होटल पर जीएसटी की दर का होटल की स्टार रेटिंग से कोई संबंध नहीं है।

नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) तो एक जुलाई से देशभर में लागू हो चुका है, लेकिन लोगों और व्यापारियों के बीच अब भी कई चीजों पर लगने वाली जीएसटी की दर को लेकर असमंजस है। ऐसे में सरकार ने स्पष्ट किया है 5 स्टार होटल या किसी भी रेटिंग का होटल, जहां पर एक दिन के ठहरने का किराया 7500 रुपये से कम है पर 18 फीसद की दर से जीएसटी लगेगा।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम ने मंगलवार को स्पष्टीकरण जारी किया है कि लग्जरी होटल और 5 स्टार होटल पर जीएसटी की उच्चतम दर 28 फीसद की होगी। एक आधिकारिक स्टेटमेंट में सीबीईसी ने बताया है कि होटल पर जीएसटी की दर का होटल की स्टार रेटिंग से कोई संबंध नहीं है।

एक जुलाई को जब देश में नई व्यवस्था को लागू किया गया तब 1000 रुपये से कम के किराए वाले होटल पर जीरो जीएसटी, 2500 रुपये से कम के किराए वाले पर 12 फीसद और 2500 रुपये से 7500 रुपये के बीच के किराये वाले होटल पर 18 फीसद जीएसटी की दर तय की गई थी।

इसक तहत जो उच्चतम दर है (28 फीसद) वो केवल लग्जरी होटल्स के लिए है। मंगलवार को दिए गए स्पष्टीकरण के तहत इन लग्जरी होटल्स में 7500 रुपये से ज्यादा किराये वाले होटल शामिल है।

हालांकि ग्राहकों को डिक्लेयर्ड टैरिफ का ध्यान रखना पड़ेगा। इसका मतलब है कि किसी होटल के रेट पर दिए किराये पर जीएसटी लगेगा। इसमें किसी भी थर्ड पार्टी बुकिंग एप्स या ट्रैवल एजेंट्स की ओर से दिए गए डिस्काउंट या डील को टैरिफ नहीं माना जाएगा।

सेंसेक्स में 8 महीने की सबसे बड़ी गिरावट, 31710 के स्तर पर बंद

सेंसेक्स 363 अंक की कमजोरी के साथ 31710 के स्तर पर और निफ्टी 89 अंक की कमजोरी के साथ 9827 के स्तर पर कारोबार कर बंद हुआ है।

नई दिल्ली । मंगलवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। इस गिरावट में सेंसेक्स 363 अंक टूट गया। यह बीते 8 महीने की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट है।

बाजार में गिरावट की बड़ी वजह सेंसेक्स और निफ्टी दोनों इंडेक्स में शुमार दिग्गज एफएमसीजी कंपनी आईटीसी के शेयर में आई 14 फीसद की गिरावट थी। यह गिरावट सरकार की ओर से सिगरेट पर सेस में बढ़ोतरी की जाने की वजह से आई।

गौरतलब है कि आज सेंसेक्स 363 अंक की कमजोरी के साथ 31710 के स्तर पर और निफ्टी 89 अंक की कमजोरी के साथ 9827 के स्तर पर कारोबार कर बंद हुआ है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर मिडकैप में 0.52 फीसद और स्मॉलकैप (0.59 फीसद) की कमजोरी के साथ कारोबार कर बंद हुआ है।

एफएमसीजी सेक्टर में मुनाफावसूली
सेक्टोरियल इंडेक्स की बात करें तो एफएमसीजी शेयर्स में मुनाफावसूली देखने को मिली है। इस सेक्टर में 6.73 फीसद की गिरावट देखने को मिली है। फाइनेंशियल सर्विस (0.15 फीसद), मेटल (0.17 फीसद) और रियल्टी (1.02 फीसद) की गिरावट हुई है। वहीं, ऑटो, आईटी और फार्मा के शेयर्स में बढ़त देखने को मिली है।

आईटीसी में 12.44 फीसद की गिरावट 
दिग्गज शेयर्स की बात करें तो निफ्टी में शुमार शेयर्स में से 29 हरे निशान में और 22 गिरावट के साथ कारोबार कर बंद हुए है। सबसे ज्यादा तेजी आईशर मोटर्स, एशियनपेंट, सनफार्मा, एचसीएलटेक और एक्सिस एक्सिस बैंक और सनफार्मा के शेयर्स है। वहीं, गिरावट आईटीसी, ऑरोफार्मा, रिलायंस, गेल और एनपीसीटी के शेयर्स में देखने को मिल रही है।

एफएमसीजी शेयर्स में मुनावसूली
सेक्टोरियल इंडेक्स की बात करें तो आईटी को छोड़ सभी सूचकांक लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। एफएमजीसी (5.50 फीसद) में भारी मुनाफावसूली देखने को मिल रही है। बैंक (0.24 फीसद), ऑटो (0.08 फीसद), फाइनेंशियल सर्विस (0.15 फीसद), मेटल (0.15 फीसद), फार्मा (0.12 फीसद) और रियल्टी (0.43 फीसद) की कमजोरी देखने को मिल रही है।

आईटीसी टॉप लूजर
दिग्गज शेयर्स की बात करें तो निफ्टी में शुमार शेयर्स में से 43 हरे निशान मे और 8 गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। सबसे ज्यादा तेजी विप्रो, अल्ट्रासीमेंट, वेदांता लिमिटेड, एचसीएल टेक और सिप्ला के शेयर्स में है। वहीं, गिरावट आईटीसी, गेल, कोल इंडिया, येस बैंक और मारुति के शेयर्स में है।

 

By Surbhi Jain 

एप्पल ने एचसीएल इन्फोसिस्टम्स से मिलाया हाथ

डिस्ट्रीब्यूशन के लिहाज से भारत के छोटे कस्बों तक अपनी पहुंच बनाने को एप्पल ने एचसीएल के साथ हाथ मिलाया है

नई दिल्ली ।  दिग्गज आईफोन निर्माता कंपनी एप्पल, शिव नडार की एचसीएल इन्फोटेक के साथ डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनरशिप के लिए डील को अंतिम रूप देने में लगी है।

दरअसल एप्पल भारत के रिटेल स्पेस में अपनी उपस्थिति का विस्तार करने के लिए बड़ी योजना बना रही है, खासकर छोटे शहरों में। यह जानकारी इंडस्ट्री से जुड़े तीन वरिष्ठ कार्यकारियों के जरिए सामने आई है।

कब पूरी हो सकती है यह डील:
यह डील इस सप्ताह के अंत तक पूरी हो सकती है और अगले महीने से व्यापार शुरू हो सकता है। डिस्ट्रीब्यूशन के मामले में एचसीएल की अच्छी खासी पकड़ है। एचसीएल पहले से लेनोवो, मोटोरोला और नोकिया जैसे बड़े ब्रैंड्स के मोबाइल फोन्स का डिस्ट्रिब्यूशन कर रहा है। इसकी मौजूदगी देश के बड़े हिस्से में है और इससे एप्पल को अपनी पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी।

इससे एप्पल होलसेल प्राइसिंग को लेकर समानता भी ला सकता है। एप्पल फिलहाल भारत में चार पार्टनर्स- इनग्राम माइक्रो, रेडिंगटन, बीटल टेलिटेक और राशि पेरिफरल्स के जरिए डिस्ट्रिब्यूशन करता है।

इंडस्ट्री से जुड़े एक कार्यकारी ने बताया कि एचसीएल के साथ गठजोड़ से आईफोन और आईपैड की पहुंच उन छोटे कस्बों तक हो जाएगी, जिसे एप्पल ने अपना नए ग्रोथ ड्राइवर के रुप में पहचाना है। आपको बता दें कि भारत में आईफोन की 55 फीसद बिक्री ऑनलाइन माध्यम से होती है।

 

सिगरेट पर सेस लगने से इंश्योरेंस कंपनियों को 17 हजार करोड़ का नुकसान

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सिगरेट पर सेस लगाने के बाद विदेशी निवेशकों को भी 9 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।

नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल द्वारा सोमवार को सिगरेट पर सेस लगाने के बाद देश की सबसे बड़ी सिगरेट कंपनियों में शुमार इंडियन टौबेको कंपनी (आईटीसी) के शेयर अपने 15 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। आईटीसी और अन्य सिगरेट कंपनियों की वजह से सोमवार को तेजी में रहा सेंसेक्स और निफ्टी दोनों 300 अंक तक लुढ़क गया। 

वहीं आईटीसी के शेयर गिरने से देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी समेत अन्य बीमा कंपनियों को 17 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो गया। इसके अलावा विदेशी निवेशकों को भी 9 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। गौरतलब है कि एलआईसी समेत अन्य बीमा कंपनियों का आईटीसी में  बड़ा स्टेक है। 

इस बड़ी गिरावट से कंपनी को अकेले 45 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कंपनी का एक शेयर इससे पहले 400 रुपये के स्तर पर था, जो कि 285 रुपये तक गिर सकता है। फिलहाल एनएसई में कंपनी का शेयर 11.01 फीसदी टूट गया, वहीं बीएसई में 11.05 फीसदी गिर गया है। 

सरकार ने सोमवार और मंगलवार की दरम्यानी रात से सिगरेट पर जीएसटी की दरों में बढ़ोतरी कर दी है। यानी जीएसटी लागू होने के बाद सिगरेट के मूल्य में जो कमी आई थी, वह मंगलवार से पूर्व की दरों पर ही बिकेगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में सोमवार को जीएसटी परिषद की हुई 19वीं बैठक में इस आशय का निर्णय लिया गया।

परिषद की बैठक समाप्त होने के बाद जेटली ने बताया कि सिगरेट पर जीएसटी की दर 28 फीसदी और एड वोलेरम पांच फीसदी सेस बरकरार रहेगी। सिर्फ कंपनसेशन सेस में बढ़ोतरी की जा रही है जिससे पांच हजार करोड़ रुपये की कर वसूली बढ़ेगी।आईटीसी के अलावा अन्य सिगरेट कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिल रही है। इन कंपनियों के शेयर भी काफी नीचे आ गए हैं।