Thursday, July 9, 2026
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रोल्स रॉयस की नई 8th जनरेशन की फैंटम पेश

नई दिल्ली। लग्ज़री कारों की बादशाह मानी जाने वाली रोल्स रॉयस ने आठवीं जनरेशन की फैंटम से पर्दा उठाया है।नई फैंटम को कंपनी ने लंदन में आयोजित ‘दी ग्रेट एट फैंटम्स’ इवेंट के दौरान पेश किया है। नई फैंटम को मजबूत पर कम वज़नी नए एल्यूमिनियम स्पेसफ्रेम प्लेटफार्म पर तैयार किया गया है, कम वज़नी होने की वजह से इसका माइलेज बढ़ा है।

कंपनी का कहना है कि नई जनरेशन की घोस्ट और डॉन को भी इस नए प्लेटफार्म पर बनाया जाएगा। नई फैंटम में कंपनी का आइकॉनिक 6.75 लीटर वी12 इंजन लगा है, जो 571 पीएस की पावर और 900 एनएम का टॉर्क देता है।

इंजन के शोर-शराबे को रोकने के लिए कंपनी ने इस में दो टर्बोचार्जर लगाए गए हैं। यह इंजन 8-स्पीड ऑटो गियरबॉक्स से जुड़ा है। दिलचस्प बात ये है कि 2.5 टन वज़नी होने के बाद भी नई फैंटम 5.3 सेकंड में 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार पा लेगी।

कंपनी का कहना है कि इस मामले में नई फैंटम पुराने मॉडल से करीब 10 फीसदी तेज है ।रोल्स रॉयस फैंटम दुनियाभर में लग्ज़री और कंफर्ट के लिए मशहूर है, नई फैंटम में कुछ नए फीचर जोड़े गए हैं जो इसे और बेहतर बनाएंगे। कंपनी के अनुसार इसकी लंबाई को करीब 20 फिट और चौड़ाई को 6.5 फिट बढ़ाया गया है।

 ये हैं फीचर्स

  • अर्ल्टनेस असिस्टेंस
  • 4-कैमरा सिस्टम के साथ पैनारोमिक व्यू
  • ऑल-राउंड विजिबिलिटी के साथ हेलिकॉप्टर व्यू
  • नाइट विज़न और विज़न असिस्ट
  • एक्टिव क्रूज़ कंट्रोल
  • कोलिजन और पैडरेशन वार्निंग
  • क्रॉस-ट्रैफिक वार्निंग
  • लेन डिपार्चर और लेन चेंज वार्निंग
  • 7×3 हाई-रेज्यूलेशन हैड्स-अप डिस्प्ले
  • वाई-फाई हॉटस्पॉट

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति तय करेगी शेयर बाजार की चाल

नई दिल्ली। इस हफ्ते शेयर बाजार की चाल रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा, आर्थिक आंकड़ों और इंडिया इंक के तिमाही नतीजों से तय होगी।  पिछले सप्ताह के दौरान बीएसई का सेंसेक्स 280.99 अंक यानी 0.87 फीसद बढ़ा था। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी में 99.25 अंक या एक प्रतिशत की तेजी आई थी।

ट्रेड स्मार्ट ऑनलाइन के संस्थापक विजय सिंहानिया ने कहा कि रिजर्व बैंक की आगामी दोमाही मौद्रिक नीति समीक्षा और कंपनियों के जून तिमाही के परिणाम बाजार धारणा को प्रभावित करेंगे। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक समीक्षा बैठक दो अगस्त को होने वाली है।

इस हफ्ते पावर ग्रिड, टेक महिंद्रा, ल्यूपिन, पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी प्रमुख कंपनियां अपने तिमाही वित्तीय नतीजों का एलान करेंगी।

सैम्को सिक्योरिटीज के सीईओ जिमीत मोदी ने कहा कि इस हफ्ते मौद्रिक समीक्षा बैठक में ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंक के रुख का बेसब्री से इंतजार है। विशेषज्ञों ने कहा कि मैन्यूफैक्चरिंग और सेवाओं के पीएमआइ आंकड़े भी सप्ताह के दौरान कारोबारी धारणा को प्रभावित करेंगे।

आम्रपाली आद्या ट्रेडिंग एंड इन्वेस्टमेंट्स के अवनीश कुमार सुधांशु ने कहा कि मौद्रिक समीक्षा के अलावा पीएमआइ आंकड़ों से भी अर्थव्यवस्था की स्थिति के बारे में जानकारी मिलेगी

बीते हफ्ते सेंसेक्स की दस सबसे मूल्यवान कंपनियों में से आठ के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में 62,997.73 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी देखने को मिली। एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक को बाजार की तेजी के सबसे ज्यादा लाभ मिला।

एचडीएफसी का बाजार पूंजीकरण (सभी शेयरों का बाजार मूल्य) 22,651 करोड़ रुपये बढ़कर 2,84,140 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। एचडीएफसी बैंक की बाजार हैसियत 19,579.63 करोड़ रुपये की बढ़त के साथ 4,58,002.04 करोड़ रुपये हो गई।

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) का बाजार मूल्य 7,639.37 करोड़ बढ़कर 2,58,270.95 करोड़ रुपये रहा। इंफोसिस को 4,123.01 करोड़ की बाजार पूंजीकरण वृद्धि का फायदा मिला।

आइटीसी की हैसियत 3,344.5 करोड़ रुपये बढ़ गई। मार्केट कैप की बढ़ोतरी वाली कंपनियों में मारुति सुजुकी, ओएनजीसी और रिलायंस इंडस्ट्रीज भी शामिल रहीं। इसके उलट टीसीएस और हिंदुस्तान यूनिलीवर के बाजार पूंजीकरण में क्रमश: 1,560 करोड़ व 963 करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज हुई। 

 

By Shubham Shankdhar 

 

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राजधानी, शताब्दी, दूरंतो का सफर मंगलवार से होगा सस्ता

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धनबाद। राजधानी, दूरंतो और शताब्दी का सफर एक अगस्त से सस्ता हो जाएगा। यदि आप ट्रेन का खाना और नाश्ता नहीं लेंगे तो राजधानी, दूरंतो और शताब्दी एक्सप्रेस का किराया 90 रुपए से 260 तक किफायती हो जाएगा। रेलवे ने एक अगस्त से ट्रेनों में कैटरिंग शुल्क की बाध्यता समाप्त कर दी है।

रेलवे की खानपान व्यवस्था पर कैग रिपोर्ट में उठे सवालों के बाद रेलवे ने नई व्यवस्था लागू की है। अब यदि आप ट्रेन में खाना, पानी और नाश्ता नहीं लेना चाहते हैं तो रेलवे आपको बाध्य नहीं करेगा। अभी राजधानी, दूरंतो और शताब्दी में नहीं चाहते हुए यात्रियों से कैटरिंग शुल्क के रूप में चार्ज लिया जाता है। इस संबंध में रेलवे बोर्ड का आदेश धनबाद पहुंच गया है। तीनों प्रीमियम ट्रेनों की खानपान की व्यवस्था आइआरसीटीसी को सौंप दी गई है।

टिकट लेते समय पूछा जाएगा विकल्प
राजधानी, दूरंतो और शताब्दी में बुकिंग काउंटर से रिजर्वेशन लेते समय ही यात्रियों से पूछा जाएगा कि उन्हें ट्रेन पर कैटरिंग की सुविधा लेनी है अथवा नहीं। अभी रिजर्वेशन कार्यालय से टिकट बुक करने पर ही यह सुविधा मिल रही है।

आइआरसीटीसी की साइट से ऑनलाइन टिकट बुक कराने पर अभी भी कैटरिंग का शुल्क देना अनिवार्य है। माना जा रहा है कि एक-दो दिनों में ऑन लाइन टिकट बुकिंग में भी कैटरिंग की अनिवार्यता को समाप्त कर विकल्प दिए जाएंगे।

किस ट्रेन में कितना है कैटरिंग चार्ज
हावड़ा और सियालदह राजधानी में धनबाद से नई दिल्ली की टिकट बुकिंग पर 220 रुपए कैटरिंग चार्ज के रूप में लिया जाता है। इसके बदले में यात्रियों को रात का खाना और सुबह का नाश्ता दिया जाता है। हालांकि फर्स्ट क्लास में यह शुल्क 260 रुपए है।

इसी तरह सियालदह-दूरंतो में धनबाद से नई दिल्ली जाने वाले यात्रियों से सुबह के नाश्ते के लिए 90 रुपए लिए जाते हैं, जबकि हावड़ा दूरंतो में धनबाद से नई दिल्ली की टिकट पर स्लीपर में 110 व थर्ड व सेकेंड एसी में 185 रुपए वसूला जाता है। शताब्दी एक्सप्रेस से धनबाद से रांची जाने वालों को 145 रुपए और धनबाद से हावड़ा जाने वालों को 175 रुपए कैटरिंग चार्ज चुकाना पड़ता है।

 सीनियर डीसीएम धनबाद आशीष कुमार झा ने बताया कि कैटरिंग चार्ज को वैकल्पिक बनाने संबंधी आदेश धनबाद रेल मंडल को मिल गए हैं। रिजर्वेशन ऑफिस के सिस्टम को अपडेट कर दिया गया है। ट्रेनों में खानपान की व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए भी लगातार प्रयास चल रहे हैं।

GST : 40 तरह के उत्पादों पर एचएसएन कोड को लेकर असमंजस

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जयपुर। पहले टैक्स नहीं था, अब है लेकिन पता नहीं कितना लगेगा। इस वजह से एक महीने से हमारा व्यापार ठप है। तो सरकार और ना ही सीए बता रहे हैं कि हमारे प्रोडक्ट का एचएसएन कोड क्या है। यह कहना है कई छोटे व्यापारियों का।
जिन उत्पादों की टैक्स रेट एचएसएन कोड को लेकर असमंजस बना हुआ है। इनमें लाख की चूड़ियां, बांस की टोकरियां, मावा, एंब्रायडरी, मूंगा जैसे करीब 40 उत्पाद है।

इनवायस जनरेट में करने में परेशानी
कई प्रोडक्ट का एचएसएन कोड नहीं होने तथा टैक्स रेट समेत दूसरी समस्याओं की वजह से इनवायस जनरेट में करने में परेशानी हो रही है। जीएसटी व्यवस्था में छोटे व्यापारियों के लिए कारोबार करना मुश्किल हो गया है। राज्य के साथ केंद्र सरकार के सामने भी इन समस्याओं को उठाया गया है, लेकिन अभी तक जवाब नहीं मिला है।
-बाबूलालगुप्ता, अध्यक्ष, राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार महासंघ 

एचएसएन कोड अलग-अलग
कई प्रोडक्ट्स के कई एचएसएन कोड अलग-अलग टैक्स रेट है। इससे इनवायस बनाना मुश्किल हो रहा है। व्यापारी तय नहीं कर पा रहे हैं कि कितना टैक्स लें। टैक्स कम लिया और सरकार ने रिकवरी निकाल दी तो भरपाई कैसे करेंगे। इस वजह से एंब्रायडरी, बांस की टोकरियां बेचने वालों समेत कई व्यापारियों ने अभी तक इनवायस जनरेट करना शुरू नहीं किया है।
-पंकज घीया, कर सलाहकार

वित्त सचिव (राजस्व) प्रवीण गुप्ता और वाणिज्यिक कर आयुक्त आलोक गुप्ता से वार्ता

  • क्या सौ फीसदी व्यापारियों का जीएसटी में माइग्रेशन हो गया है?
  • प्रदेश में अभी तक 89% व्यापारियों का जीएसटी में माइग्रेशन हुआ है। शेष वो लोग हैं, जो जीएसटी के दायरे से बाहर है। इनका टर्नओवर 20 लाख से कम है।
  • कंपोजीशन स्कीम में व्यापारियों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका। विभाग क्या कर रहा है?
  • यह समस्या थी, लेकिन अब कंपोजीशन स्कीम में रजिस्ट्रेशन की तिथि 21 जुलाई से बढ़ाकर 16 अगस्त तक कर दी गई है। इससे व्यापारी रजिस्ट्रेशन करा लेंगे।
  • जीएसटी नेटवर्क पर इनवॉयस अपलोड प्रक्रिया में परेशानी है। विभाग की क्या तैयारी है?
  • बड़ी संख्या में इनवॉयस जनरेट करने वाले बी 2 बी व्यवसायियों के लिए जीएसटीएन पर इनवॉयस अपलोड करने की प्रक्रिया 24 जुलाई से शुरू कर दी गई है। कंपनियों को सितंबर में इनवॉयस आधारित रिटर्न दाखिल करनी है।
  • लेकिन आखिरी समय में नेटवर्क पर भारी दबाव से होने वाली परेशानी से बचने के लिए व्यापारी अभी से इनवॉयस अपलोड करना शुरू कर दें। इससे इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने में भी आसानी होगी। किसी भी समस्या के समाधान के लिए वाणिज्यिक कर विभाग की हेल्प डेस्क नंबर 18001806102 पर संपर्क कर सकते हैं।
  • इसके अलावा कारोबारी केंद्रीकृत कॉल सेंटर नंबर 18001806127 तथा ईमेल gstquery@rajasthan.gov.in के जरिए भी अपनी समस्या का समाधान पा सकते हैं।

बेटियों को मिलेगी मुफ्त कोचिंग, आईआईटी में सलेक्शन पर पढ़ाई फ्री

कोटा। बेटियों को अब आईआईटी की तैयारी के लिए शहर के केंद्रीय स्कूल-2 में निशुल्क कोचिंग दी जाएगी। देशभर के करीब 65 स्कूलों में कोटा का चयन किया गया है। यहां करीब 30 बेटियों को मुफ्त में कोचिंग दी जाएगी। केंद्र सरकार की उड़ान योजना में सीबीएसई के माध्यम से यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।

किसी छात्रा का आईआईटी में सलेक्शन होता है तो उसकी पढ़ाई से लेकर हॉस्टल, बुक्स सहित अन्य खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

केंद्रीय स्कूल-2 प्रशासन के अनुसार इसके लिए कक्षा 10 में 8 सीजीपीए और कम से कम 76 प्रतिशत अंक के साथ कक्षा 11 में साइंस, मैथ्स अथवा बॉयोलॉजी के साथ मैथ्स सब्जेक्ट होना अनिवार्य है। साथ ही माता-पिता की कुल वार्षिक आय 6 लाख रुपए से अधिक नहीं होना चाहिए।

छात्राएं सीबीएसई की वेबसाइट पर 7 अगस्त तक ऑनलाइन फॉर्म सबमिट कर सकती हैं। यदि इसमें किसी छात्रा को समस्या हो रही है तो केंद्रीय स्कूल-2 से फॉर्म भरने की भी व्यवस्था निशुल्क रहेगी। संबंधित छात्राएं स्कूल के फोन नंबर 0744- 2466171 पर संपर्क कर सकती हैं।

यहां दो साल की पढ़ाई में यदि किसी छात्रा का आईआईटी में सलेक्शन होता है तो उसकी पढ़ाई से लेकर हॉस्टल, बुक्स सहित अन्य खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। यही नहीं सीबीएसई की ओर से इसमें आदेश जारी हुए तो संबंधित छात्रा के माता-पिता को एक बार दिल्ली ट्रेन से घुमाया भी जाएगा।

सप्ताह में दो दिन कक्षाएं, फ्री में टैबलेट और किताब
प्रिंसिपल जखोड़िया ने बताया कि इस योजना में सलेक्शन के बाद संबंधित छात्राओं को दो साल तक निशुल्क पढ़ने की सुविधा रहेगी। यहां एडमिशन के बाद करीब 15 हजार रुपए का टैबलेट फ्री में दिया जाएगा। उन्हें बैग, बुक्स सहित अन्य आयटम भी निशुल्क मिलेंगे।

 कोटा के केंद्रीय स्कूल-2 में लगेगी छात्राओं की कोचिंग क्लास
देश के 65 सेंटर में कोटा केंद्रीय स्कूल-2 का चयन हुआ है। उड़ान प्रोजेक्ट में छात्राओं को इंजीनियरिंग सेक्टर में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। छात्राओं के लिए पूरी व्यवस्था निशुल्क रहेंगी।
-शेखर जखोड़िया , प्रिंसिपल, केंद्रीय स्कूल-2

सप्ताह में दो दिन शनिवार को दोपहर एक से 5 बजे और संडे को सुबह 9 से शाम 5 बजे तक यहां पढ़ाई करवाई जाएगी। दिल्ली से समय-समय पर वर्ल्ड क्लास फैकल्टी से भी इनकी ऑनलाइन कक्षाएं लगेंगी।

7 अगस्त तक भरे जाएंगे फाॅर्म, 10 तक होगा वेरीिफकेशन
केंद्रीय स्कूल-2 प्रिंसिपल शेखर जखोड़िया ने बताया कि अंतिम तिथि के बाद 10 अगस्त तक छात्राओं के डॉक्यूमेंट्स वेरीफिकेशन होंगे।

इसमें छात्राओं को फॉर्म की हार्ड कॉपी के साथ सभी ओरिजनल डॉक्यूमेंट्स वेरीफिकेशन के समय साथ लाने होंगे। इसके बाद अधिक संख्या होने पर मेरिट लिस्ट के आधार पर सलेक्शन किया जाएगा। वेटिंग लिस्ट भी जारी होगी।

 

जाली नोट और काली कमाई के दोगुना मामले सामने आए, 562 करोड़ जब्त

नयी दिल्ली। पिछले वित्त वर्ष के दौरान देश के बाजारों में संदिग्ध लेन-देन, जाली नोट, सीमा पार से धन के अंतरण के पकड़े गए मामले बढ़कर दोगुना हो गए तथा 560 करोड़ रुपये के कालेधन का खुलासा हुआ। एक सरकारी रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है।

वित्त मंत्रालय के प्रतिष्ठित तकनीकी जांच निकाय फाइनेंसियल इंटेलीजेंस यूनिट (एफआईयू) की रिपोर्ट में कहा गया है कि विा वर्ष 2015-16 के दौरान बड़ी संख्या में ऐसी घटनाएं सामने आयीं।

सभी बैंक और वित्तीय  कंपनियां देश के धन-शोधन एवं आतंकवाद वित्त पोषण निरोधक उपायों के अनुपालन की बाध्यता के तहत ऐसे किसी भी प्रकार के लेन-देन की खबर इस यूनिट को देती हैं।

हाल की इस रिपोर्ट में कहा गया है, वित्तवर्ष 2015-16 में एफआईयू को ऐसी रिपोर्ट मिलने, उसके प्रोसेस और वितरण में खासी वृद्धि हुई।

उसके अनुसार नकद लेन-देन रिपोर्ट की संख्या 2014-15 के 80 लाख से बढ़कर 2015-16 में 1.6 हो गया जबकि संदिग्ध लेन रिपोर्ट 58,646 से बढ़कर 1,05,973 हो गयी।

रपट में कहा गया है, जाली नोट के चलन संबंधी दर्ज रपटों में 16 % और लाभ-निरपेक्ष संगठनों के लेनदेन की रपटों में 25 % हो गयी। इस दौरान सीमापार इलेक्ट्रानिकअंतरण के पकड़े गए संदिग्ध मामलों 850 करोड की वृद्धि हुई। 

इस केंद्रीय एजेंसी ने धनशोधन रोकथाम अधिनयम की विभिन्न धाराओं के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले निकायों को रिकार्ड 21 पाबंदियां भी जारी की। इस एजेंसी पर भारतीय बैंकिंग एवं अन्य वित्तीय चैनलों में संदिग्ध लेन-देनों का विश्लेषण का जिम्मा है।

भारत का चीन को इंजीनियरिंग निर्यात बढ़कर 123 फीसद हुआ

नई दिल्ली। अप्रैल से जून तिमाही के दौरान चीन में भारत के इंजीनियरिंग सामानों के निर्यात में 123 फीसद का इजाफा हुआ है। इस इजाफे के साथ यह 629 मिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। यह इजाफा नॉन-फेरस मैटल के शिपमेंट में हुई बढ़ोतरी के कारण दिखा है। यह जानकारी ट्रेड बॉडी ईईपीसी इंडिया के जरिए सामने आई है। 

पिछले वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में चीन को देश का निर्यात 282 मिलियन (28.2 करोड़) डॉलर रहा था। यह इजाफा इस मायने में महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत का चीन के साथ व्यापारिक घाटा बड़े स्तर पर बढ़ा है, जो कि बीते साल 46.56 बिलियन डॉलर रहा है।

ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय निर्यात में गिरावट जारी है, जबकि द्विपक्षीय व्यापार में मामूली रूप से 2.1 फीसद की गिरावट आई और यह लगभग 71 अरब डॉलर रहा है।

कॉमर्स मिनिस्ट्री के डेटा के मुताबिक जून में भारत का कुल निर्यात 4.39 फीसद बढ़कर 23.56 बिलियन डॉलर रहा है। वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में शिपमेंट 10.57 फीसद बढ़कर 72.21 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि आयात 32.78 फीसद बढ़कर 112.2 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया (40 बिलियन डॉलर का व्यापार घाटा छोड़ने के बाद)।

वहीं भारत से चीन तक इंजीनियरिंग सामानों की शिपमेंट्स जून में कुल 234 मिलियन डॉलर की रही, जबकि बीते वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 94 मिलियन डॉलर का रहा था। 

 

 

By Praveen Dwivedi  

मॉर्गन स्टेनली ने मुद्रास्फीति पूर्वानुमान को कम किया

नई दिल्ली। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली ने साल 2017 के लिए अपने मुद्रास्फीति पूर्वानुमान को घटाकर 3.1 फीसद कर दिया है। इससे पहले उसने जीएसटी और मानसून का हवाला देते हुए मुद्रास्फीति के 3.6 फीसद रहने का अनुमान लगाया था।

हालांकि इसने यह भी कहा कि जून के महीने के दौरान हैडलाइन इन्फ्लेशन बढ़ी है और इसमें क्रमिक वृद्धि अभी भी बरकरार है। मॉर्गन स्टेनली ने कैलेंडर इयर 2017 के लिए हैडलाइन सीपीआई को संशोधित करते हुए 3.6 फीसद से 3.1 फीसद कर दिया है। वहीं साल 2018 के लिए उसने अपने अनुमान को 4.6 फीसद से घटाकर 4.3 फीसद कर दिया है।

साथ ही उसने चालू वित्त वर्ष के लिए हैडलाइन सीपीआई के 3.2 फीसद रहने और वित्त वर्ष 2018-19 के लिए 4.3 फीसद रहने की उम्मीद जताई है जो कि पहले 4.5 फीसद अनुमानित थी।

मॉर्गन स्टेनली ने अपने पूर्वानुमान को क्यों बदला
दो अहम कारकों के चलते मॉर्गन स्टेनली ने अपने पूर्वानुमान को बदला है। पहला, खाद्य मुद्रास्फीति की साल-दर-साल में गिरावट लगातार अधिक रही है और वहीं दूसरा जीएसटी, एचआरए में इजाफा होना और मानसून का बेहतर रहना भी प्रमुख रहा है।

सब्जियों, दालों और दूध उत्पादों जैसे खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट आने के कारण जून में खुदरा मुद्रास्फीति 1.54% के ऐतिहासिक स्तर पर आ गई। आरबीआई के मौद्रिक नीतिगत रुख पर, रिपोर्ट में कहा गया है कि मुद्रास्फीति में हालिया गिरावट ने एक और दर कटौती की गुंजाइश को तेज किया है।

ट्रांसपोर्ट कारोबार में टैक्स चोरी का खेल

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नई दिल्ली। ई-वे बिल प्रणाली के कार्यान्वयन में विलंब और कुछ राज्यों की तरफ से उठाये गए कदमों से उपजे असमंजस से ट्रांसपोर्ट व्यवसाय की पुरानी बुराइयां फिर से उभरने लगी हैं। ई-वे बिल की चिंता न होने से जहां व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों ने कर चोरी वाले माल की बुकिंग व ढुलाई का कारोबार फिर शुरू कर दिया है।

वहीं, प्रवर्तन एजेंसियों ने राजस्व के नुकसान के डर से ट्रकों पर छापेमारी तेज कर दी है। इससे जीएसटी लागू होने से ट्रकों के ट्रांजिट टाइम में जो कमी आई थी उसमें फिर से इजाफा होने लगा है। विशेषज्ञों ने इस प्रवृत्ति को जीएसटी के लिए खतरनाक बताते हुए सरकार से ई-वे बिल की अड़चनों को जल्द से जल्द दूर करने की अपील की है।

केंद्र सरकार ने भले ही ई वे बिल प्रणाली को दो महीने में लागू करने का भरोसा दिया हो। लेकिन इससे उन व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों की बांछें खिल गई हैं जो कच्चे पर्चे पर माल की बुकिंग करते हैं। जीएसटी से पहले ज्यादातर व्यापारी और ट्रांसपोर्टर (गुड्स बुकिंग एजेंट) कच्चे पर्चे वाले माल की बुकिंग और ढुलाई करने के आदी थे।

इस प्रक्रिया में टैक्स की जमकर चोरी होती थी, जिसका लाभ दोनों पक्षों को मिलता था। प्रवर्तन एजेंसियों के पास इस नापाक गठजोड़ को तोड़ने का कोई ठोस तंत्र नहीं था क्योंकि अधिकांश ट्रांसपोर्टर गैर-पंजीकृत थे और उनके लेनदेन में कोई पारदर्शिता नहीं थी।

कैसे होती है टैक्स चोरी
एक ट्रक में दोनों तरह का माल लादा जाता था। यानी ट्रक में कच्चे और पक्के पर्चे का माल एक साथ लादा जाता था। कच्चे पर्चे वाला माल टैक्स चोरी करके ले जाया जाता था। इस पर भाड़ा कई गुना ज्यादा लगता था। दूसरा वह माल जिसका पक्का पर्चा होता था, जिस पर टैक्स की पूरी अदायगी होती थी। इस पर सामान्य किराया लगता था

जीएसटी से इस खेल के खत्म होने की उम्मीद पैदा हो गई थी। परंतु ईवे बिल की अड़चन ने इस पर फिलहाल पानी फेर दिया है। इंडियन फाउंडेशन आफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड टेनिंग के अनुसार एक जुलाई से 15 जुलाई के दौरान राजमार्गो पर ट्रकों की संख्या घटकर आधी रह गई थी तथा ट्रकों का ट्रांजिट टाइम 30 प्रतिशत घट गया था।

परंतु अब प्रवर्तन एजेंसियों ने कर चोरी रोकने के लिए ट्रकों पर छापेमारी बढ़ा दी थी। फलत: व्यापारियों ने ट्रांसपोर्टरों ने माल बुक कराना ही बंद कर दिया था। 15 जुलाई तक ज्यादातर जगहों पर कमोबेश यही हालात थे। परंतु 15 जुलाई के बाद स्थिति बदल गई है। ट्रांसपोर्टरों व व्यापारियों ने फिर से बिना दस्तावेजी माल की बुकिंग व ढुलाई शुरू कर दी है।

 

ऑनलाइन रिटर्न फाइल करने में दिक्कत, सर्वर डाउन

नई दिल्ली। आईटीआर फाइल करने का अंतिम दिन 31 जुलाई 2017 है। इस बीच ऑनलाइन रिटर्न दाखिल करने के लिए इनकम टैक्स विभाग की साइट  https://incometaxindiaefiling.gov.in शनिवार दोपहर से खुल नहीं रही है, और रिटर्न फाइल करने की कोशिश कर रहे आयकरदाताओं को लगातार उस पेज पर एरर दिखाई दे रहा है। 

कुछ आयकर दाताओं को HTTP Server Error 503 का मैसेज मिल रहा है, ऐसे में कई करदाता आईटीआर फाइल करने के लिए परेशान रहे। 

दो फॉर्म 16 होने पर ऐसे दाखिल करें इनकम टैक्स रिटर्न
सावधान: टैक्स रिटर्न में नहीं दी पूरी जानकारी तो आयकर विभाग खंगालेगा फेसबुक खाता
यदि आप पहले कुछ सालों से ही आईटीआर भरते आ रहे हैं तो आपको कोई दिक्कत नहीं होगी, लेकिन जो लोग पहली बार आरटीआर भरने जा रहे हैं उन्हें इसे लेकर कुछ उलझन जरूर होगी।

हम आपको आईटीआर से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी देने जा रहे हैं जो आपकी इस उलझन को कम करने में मददगार साबित होगा। आईटीआर फॉर्म मुख्यत: पांच प्रकार का होता है, जिसमें आपको अपने प्रोफेशन के लिहाज से एक ही फॉर्म भरना होता है। आगे जानें पांचों आईटीआर फॉर्म्स के बारे में –

1- एक्सपर्ट्स के मुताबिक नौकरी करने वाले लोगों को ITR-1 सहज फॉर्म ही भरना है। यह फॉर्म उन लोगों कें लिए जरूरी होता है जिनकी सालाना इनकम 2.5 लाख रुपए से 50 लाख रुपए तक है और इनकम का स्रोत सैलरी या एक घर, या जमा पूंजी पर मिलने वाली ब्याज है।

2- वहीं ITR-2 ऐसे व्यक्ति और संयुक्त हिंदू परिवार के लिए है जिनकी आय का साधन कोई बिजनेस या प्रोफेशन की बजाए प्रोपेराइटरशिप है।

3- ITR-3 फॉर्म ऐसे लोगों को भरना है जिनकी इनकम प्रोपरेटरी बिजनेस या किसी प्रोफेशन से हो रही है।

4- फॉर्म ITR-4 उन लोगों को भरना है कि जिन्हें बिजनेस या प्रोफेशन से प्रिजंपटिव इनकम हो रही है। उदाहरण के लिए किसी के पास 40 डंपर हैं वह बुक ऑफ एकाउंट मेंटेन करने की बजाए एक निर्धारित रकम डिक्लेयर कर देता है, इससे अकाउंट मेंटेन करने से राहत मिल जाती है।

5- फॉर्म ITR-5 किसी फर्म, एलएलपी, एसोसिएशन ऑफ परसन, बॉडी ऑफ इंडीविजुअल, कोऑपरेटिव सोसाइटी और स्‍थानीय अथॉरिटी को भरना होता है। वहीं ITR-6 और ITR-7 बड़ी कंपनियों या कंपनी के समूहों के लिए होते हैं।

4 स्टेप में ऑनलाइन भरें अपना फॉर्म
1- सबसे पहले आप इनकम टैक विभाग की https://incometaxindiaefiling.gov.in/ पर जाएं। पहले से इस साइट के यूजर हैं तो लॉगइन करें या फिर न्यू रजिस्ट्रेशन टैब पर क्लिक कर खुद को रजिस्टर कर यूजर आईडी जनरेट करें।

2- साइट पर लॉगइन करने के यूजर आईडी, पासवर्ड, डेट ऑफ बर्थ, पर कैप्चा कोड दर्ज करें। इसके बाद आपका एकाउंट डैशबोर्ड खुलेगा। ई-फाइल टैब पर क्लिक करें इसके बाद प्रिपेयर एंड सब्मिट आईटीआर में क्लिक कर अपना आईटीआर भरें।

3- यहां पर आपको आधार नंबर, पैन नंबर आदि की जानकारियां साझा करनी होंगी। यहां आपको डिजिटल साइन का ऑप्शन भी दिखेगा। इसके लिए आप पहले से अपने डिजिटल साइन की कॉपी रख सकते हैं जिसे कभी यहां अपलोड किया जा सके। साइन अपलोड करने बाद जब आप सब्मिट का बटन क्लिक करेंगे तो आप आईटीआर फॉर्म वाले सेक्शन पर पहुंच जाएंगे।

4- फॉर्म के शुरू में ही कुछ सामान्य निर्देश दिए होतें हैं जिन्हें पढ़कर आप आसानी से समझ सकते हैं कि आपको कहां पर क्या सूचना देनी है। इसके बाद आप फॉर्म में अपने इनकम से जुड़ी जानकारियां साझा करें। फॉर्म पूरा होने के बाद उसे एक बार ध्यान से पढ़ें और फिर सब्मिट बटन क्लिक कर फॉर्म को जमा करें।