रासायनिक खेती की अंधी दौड़ से बढ़ा कैंसर का खतरा: कृषि आयुक्त गोयल

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श्रीरामशान्ताय जैविक कृषि अनुसंधान केंद्र पर राज्य स्तरीय प्राकृतिक खेती सेमिनार

कोटा। कोटा के जाखोड़ा स्थित ‘श्रीरामशान्ताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र’ में शनिवार को एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्राकृतिक खेती सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। गोयल ग्रामीण विकास संस्थान द्वारा आयोजित इस सेमिनार में राजस्थान कृषि विभाग के आला अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान कृषि विभाग के आयुक्त (एग्रीकल्चर कमिश्नर) नरेश गोयल ने की। निदेशक ताराचंद गोयल ने बताया कि सेमिनार का मुख्य उद्देश्य गौ-आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, यूरिया व रासायनिक खादों के अंधाधुंध उपयोग पर रोक लगाना और राजस्थान को जैविक कृषि के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करना रहा।

​अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कृषि आयुक्त नरेश गोयल ने रासायनिक खेती के गंभीर दुष्परिणामों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यूरिया और रासायनिक कीटनाशकों की अंधी दौड़ के कारण आज हर घर में कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं और शहरों में बड़े-बड़े कैंसर अस्पताल खोलने पड़ रहे हैं। हमने अधिक उत्पादन की चाह में बहुत कुछ खो दिया है। एग्रीकल्चर कमिश्नर गोयल ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक प्रयोगों से यह सिद्ध हो चुका है कि मिट्टी निर्जीव नहीं है, बल्कि उसमें भी जीवन है। धरती को माता मानने वाले देश में जहर डालना तुरंत बंद होना चाहिए।

​उन्होंने घोषणा की कि राजस्थान कृषि विभाग के इतिहास में यह पहला मौका है जब सभी वरिष्ठ अधिकारी एक जगह एकत्र होकर जैविक खेती पर संवाद कर रहे हैं। श्रीरामशान्ताय केंद्र के कार्यों को प्रमाणिक बताते हुए उन्होंने कहा कि विभाग जल्द ही इस संस्थान के साथ एक एमओयू साइन करेगा, ताकि यहाँ के सफल रिसर्च को खेतों तक पहुँचाया जा सके। साथ ही, जैविक उत्पादों के विपणन के लिए दुर्गापुरा के बाद अब जयपुर के पंत भवन में भी दुकानें आवंटित की जाएंगी।

​’गुणवत्ता’ पर ध्यान देने की आवश्यकता
​कोटा कृषि विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. विमला डूंकवाल ने विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए कहा कि देश ने अब तक खाद्यान्न की मात्रा (क्वांटिटी) बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया था, लेकिन आज के समय की मांग गुणवत्ता (क्वालिटी) में सुधार करने की है। उन्होंने कहा कि जो एग्रो-केमिकल्स कभी दवाओं के रूप में शुरू हुए थे। आज अत्यधिक उपयोग के कारण जहर बन चुके हैं। संपूर्ण सृष्टि के कल्याण के लिए जैविक व प्राकृतिक खेती ही एकमात्र विकल्प है। इस दिशा में कोटा कृषि विश्वविद्यालय और गोयल ग्रामीण विकास संस्थान मिलकर संयुक्त प्रयास कर रहे हैं।

​गौ-आधारित खेती का संकल्प
​गोयल ग्रामीण विकास संस्थान के अध्यक्ष ताराचंद गोयल ने संस्थान के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आहार में आए बदलाव और दूषित मिट्टी के कारण बीमारियां बढ़ रही हैं। जैविक और प्राकृतिक कृषि अपनाने से रासायनिक खेती की तुलना में लागत में 30% तक की कमी आ रही है। उन्होंने कहा कि जब गांव का किसान समृद्ध होगा, तभी भारत आत्मनिर्भर बनेगा। गांव में ही कृषि आधारित उद्योग-धंधे लगने से पलायन रुकेगा और समृद्धि आएगी। भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय बीज प्रमुख कृष्ण मुरारी ने भी इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि दूषित अन्न ही बीमारियों की जड़ है, जिसमें सुधार करके ही भारत को निरोगी बनाया जा सकता है। ​सेमिनार के दौरान उपस्थित कृषि अधिकारियों ने संस्थान के मॉडल फार्म का अवलोकन किया।

किसानों का जीवंत संवाद और अधिकारियों के महत्वपूर्ण सुझाव

  • कृषक संवाद सत्र में प्रगतिशील किसानों ने बताया कि संस्थान द्वारा विकसित ‘सरल कम्पोस्ट विधि’, ‘गोमूत्र-चूने का फॉर्मूला’ और ‘सरल संजीवनी (ताजा गोबर पद्धति)’ के प्रयोग से बिना किसी रसायन के पहले वर्ष से ही बंपर उत्पादन मिल रहा है। इससे किसानों की लागत आधी रह गई है और उत्पादों के दाम भी अच्छे मिल रहे हैं।
  • विभिन्न खंडों से आए कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक और संयुक्त निदेशकों ने भी अपने विचार रखे। निरंजन राठौर (अतिरिक्त निदेशक, उदयपुर खंड) ने कृषि पर्यवेक्षकों व सहायक कृषि अधिकारियों को यहाँ प्रशिक्षण दिलाने की बात कही।
  • सुधीर वर्मा (संयुक्त निदेशक, उदयपुर खंड) ने संस्थान के पर्यावरण-मित्र फार्म डिजाइन की सराहना करते हुए इसे उदयपुर के कलस्टरों में लागू करने की इच्छा जताई।
  • टोंक खंड के संयुक्त निदेशक वीरेंद्र सिंह सोलंकी और जोधपुर खंड के संयुक्त निदेशक एसएन गढ़वाल ने भी इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए तकनीकी सुझाव साझा किए।

सेमिनार में राजस्थान कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक (विस्तार), मुख्यालय के समस्त संयुक्त निदेशक (रसायन/आदान/ATC) और कोटा व जयपुर खंड के सहायक निदेशकों सहित कुल 120 अधिकारियों ने सहभागिता की।

संस्थान के मुख्य प्रबंधक पवन टाक ने सभी अतिथियों का पारंपरिक तरीके से माल्यार्पण व दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम के समापन पर गोयल प्रोटीन्स लिमिटेड, कोटा के निदेशक अजय गोयल ने पधारे हुए सभी वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों, विशेषज्ञों और अन्नदाताओं का आभार व्यक्त किया और धरती माता को जहर मुक्त बनाने के संकल्प को दोहराया।