Thursday, July 9, 2026
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जीएसटी और नोटबंदी का वेडिंग सीजन पर 10-15 प्रतिशत असर: एसोचैम

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बेंगलुरु। पिछले साल शादी के सीजन में हुई नोटबंदी और 1 जुलाई से लागू हुए जीएसटी का असर इस बार भी शादियों के सीजन पर पड़ेगा। नवंबर में शादियों का सीजन शुरू हो रहा है।

इंडस्ट्री चैंबर एसोचैम ने कहा कि शादी के लिए हॉल/गार्डेन बुकिंग, टेंट बुकिंग, फोटोग्राफी जैसी शादी की सर्विसेज पर नोटबंदी और जीएसटी का 10 से 15 प्रतिशत असर होगा।

एसोचैम ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी के कारण जूलरी और अन्य सामान, फोटोग्राफी , मैरिज हॉल जैसी सर्विसेज पर पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। जीएसटी के कारण कई गुड्स और सर्विसेज की कीमतें बढ़ने से शादी पर औसत खर्चा ज्यादा होगा।

शादी से जुड़ी कई सर्विसेज पर जीएसटी रेट 18 से 28 प्रतिशत तक है जो जीएसटी लागू होने से पहले कम था। जीएसटी से पहले ऐसी कई सर्विसेज पर कोई टैक्स नहीं देना होता था क्योंकि कई काम अनरजिस्टर्ड बिल्स पर होते थे।

वेडिंग सेक्टर में 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाले डेस्टिनेशन वेडिंग या देश के वेडिंग टूरिज्म पर नोटबंदी और जीएसटी का कोई खास असर नहीं पडे़गा।

क्या हुआ है महंगा?
500 रुपये से ज्यादा की कीमत के फुटवेअर्स पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है। सोना और हीरे के आभूषणों पर टैक्स 1.6 प्रतिशत से बढ़कर 3 प्रतिशत हो चुका है।

फाइव स्टार होटल्स की बुकिंग पर भी 28 प्रतिशत जीएसटी देना होगा। इवेंट मैनेजमेंट सर्विस पर भी 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। मैरिज हॉल बुकिंग या गार्डेन बुकिंग जैसी सर्विसेज पर भी 18 प्रतिशत जीएसटी देना होगा।

उधार में मुश्किल
अधिकतर लोग शादी के समय ज्यादा कैश न होने के कारण ग्रोसरीज और अन्य सामान उधार पर खरीदते हैं जिसे बाद में चुकाते रहते हैं लेकिन जीएसटी के कारण ट्रेडर्स उधार पर सामान देने से हिचक सकते हैं।

शादी पर इतना करते हैं खर्च
एक अनुमान के मुताबिक भारत में एक औसत व्यक्ति शादी पर अपनी कुल दौलत का पांचवा हिस्सा खर्च करता है। नवंबर में शादी की तैयारी कर बैठे कई परिवार बजट बढ़ने के बाद अब अपने खर्चों पर फिर से नजर डाल बजट कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

एसोचैम ने बताया कि भारत में गोवा के बीच और राजस्थान के किले डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए पहली पसंद रहते हैं। विदेश में शादी करने की इच्छा रखने वालों की पहली पसंद बाली और दुबई है। भारत की वेडिंग इंडस्ट्री सालाना 25 से 30 प्रतिशत की बढ़त दर्ज कर रही है।

सेंसेक्स 117 अंक चढ़ा और निफ्टी 10,200 के नीचे बंद

नई दिल्ली। दिवाली की लंबी छुट्टी के बाद खुले बाजारों का पहला कारोबारी दिन बढ़त वाला रहा। सोमवार सुबह शेयर मार्केट की शुरुआत बढ़त के साथ हुई और दिनभर तेज मुनाफावसूली का दौर रहा जिससे बाजार लाल निशान पर लुढ़क गए। हालांकि बाजार बंद होने तक बाजार में फिर से तेजी लौटी और सेंसेक्स 117 अंक चढ़ कर बंद हुआ लेकिन निफ्टी 10,200 के नीचे ही बंद हुआ।

सेंसेक्स और निफ्टी 0.5 प्रतिशत बढ़त के साथ बंद होने में कामयाब रहे। सोमवार के कारोबारी दिन सेंसेक्स 32,312 अंकों तक लुढ़का और निफ्टी 10,124 अंकों तक गिरा। सेंसेक्स 32,500 अंकों के ऊपर बंद हुआ। मिडकैप शेयरों में थोड़ा जोश नजर आया, लेकिन स्मॉलकैप शेयरों में सुस्ती बनी रही।

बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 0.5 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ। निफ्टी के मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स 0.1 फीसदी की मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ।

भ्रष्ट अफसरों को बचाने वाला विवादित अध्यादेश विधानसभा में पेश, हंगामा

  • विवादित अध्यादेश पर विधानसभा में सरकार को घेरा, अंदर और बाहर सभी जगह विरोध

  • हंगामा के बाद विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित, मीडिया जगत में रोष 

जयपुर। राजस्थान की वसुंधरा सरकार ने विपक्ष के कड़े विरोध के बाद भी सोमवार को विवादित क्रिमिनल लॉज (राजस्थान अमेंडमेंट) अध्यादेश विधानसभा में पेश कर दिया। इस अध्यादेश के तहत राजस्थान में अब पूर्व व वर्तमान जजों, अफसरों, सरकारी कर्मचारियों और बाबुओं के खिलाफ पुलिस या अदालत में शिकायत करना आसान नहीं होगा।

ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के लिए सरकार की मंजूरी अनिवार्य होगी। इस विधेयक का विपक्षी कांग्रेस के अलावा सत्तारूढ़ बीजेपी के भी दो विधायक भी विरोध कर रहे हैं। बिल के विधानसभा में पेश किए जाने के बाद जबर्दस्त हंगामा शुरू हो गया जिसके बाद विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

इस अध्यादेश के विरोध में कांग्रेसी विधायकों ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर विधानसभा के बाहर विरोध किया। विधायकों ने हाथ में बैनर ले रखे थे, जिस पर लिखा था- लोकतंत्र की हत्या बंद करो, काला कानून वापस लो, सरकार चाहे मुखबंद देश चाहे आवाज बुलंद…। इस बीच वरिष्ठ वकील एके जैन ने वसुंधरा सरकार के इस अध्यादेश के खिलाफ राजस्थान हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की है।

अध्यादेश पर विवाद
गौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने एक अध्यादेश जारी कर दंड प्रक्रिया संहिता व भारतीय दंड संहिता में संशोधन किया है, जिसके तहत राज्य सरकार की मंजूरी के बिना शिकायत पर जांच के आदेश देने और जिसके खिलाफ मामला लंबित है, उसकी पहचान सार्वजनिक करने पर रोक लगा दी गई है।

अध्यादेश के अनुसार, राज्य सरकार की मंजूरी नहीं मिलने तक जिसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाना है, उसकी तस्वीर, नाम, पता और परिवार की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकेगी। इसकी अनदेखी करने पर 2 साल की कैद और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

7 सितम्बर को जारी अध्यादेश के अनुसार, सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत अदालत शिकायत पर सीधे जांच का आदेश नहीं दे पाएगी। अदालत, राज्य सरकार से अनुमति मिलने के बाद ही जांच के आदेश दे सकेगी।

सरकार की मंजूरी के बगैर FIR नहीं
अध्यादेश के तहत राज्य सरकार की मंजूरी के बिना लोक सेवकों के खिलाफ पुलिस न कोई मुकदमा दर्ज कर सकेगी, न ही जांच कर सकेगी, न ही मैजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे सकेगा।

पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधेकांत सक्सेना और प्रदेश अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव ने इस अध्यादेश का विरोध करते हुए कहा था कि इससे अदालतों और मीडिया के अधिकार सीमित हो जाएंगे। पीयूसीएल ने कहाथा कि इस अध्यादेश को राजस्थान हाई कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

टिकट कन्फर्म नहीं तो मिलेगा हवाई यात्रा का विकल्प

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ट्रेन टिकट और एयर टिकट के दाम के बीच जो अंतर होगा, उतना पैसा आपको इसके लिए चुकाना होगा

नई दिल्ली। अगर राजधानी एक्सप्रेस में AC-I या AC-II क्लास का आपका टिकट कन्फर्म नहीं हो पाता है तो आपको अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए हवाई यात्रा का विकल्प मिल सकता है। हालांकि ट्रेन टिकट और एयर टिकट के दाम के बीच जो अंतर होगा, उतना पैसा आपको इसके लिए चुकाना होगा।

अश्वनी लोहानी ने एयर इंडिया का चेयरमैन रहते हुए पिछले साल गर्मियों में यह प्रस्ताव रेलवे को दिया था, लेकिन उस वक्त रेलवे ने इसे लेकर कोई सकरात्मक जवाब नहीं दिया था। अब जबकि वह खुद रेलवे बोर्ड के चेयरमैन हैं तो उन्होंने कहा है कि अगर एयर इंडिया की तरफ से अब ऐसा प्रस्ताव आता है तो वह इसे मंजूरी दे देंगे।

रेलवे में डिमांड और सप्लाई के बीच अंतर होने के चलते रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों को राजधानी एक्सप्रेस में कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाता। ऐसे में एयर इंडिया का चेयरमैन रहते हुए लोहानी ने योजना बनाई थी कि अगर ऐसे लोगों की कॉन्टैक्ट डीटेल्स एयर इंडिया को रेलवे मुहैया कराए तो उन यात्रियों को फ्लाइट में सीट ऑफर की जा सकती है।

इसके लिए पैसा भी ज्यादा नहीं खर्च करना होगा। लोहानी ने कहा, ‘राजधानी AC-II के किराए और हवाई किराए में बहुत ज्यादा फर्क नहीं होता।’ हालांकि दूसरी तरफ सरकार एयर इंडिया को प्राइवेट हाथों में देने की तैयारी भी कर रही है। बताया जा रहा है कि मामला आखिरी चरण में है। ऐसे में यह देखना होगा कि एयर इंडिया फिर से रेलवे को ऐसा प्रस्ताव देती है या नहीं।

एयर इंडिया से जुड़े एक शख्स ने कहा, ‘सरकारी एयरलाइन होने का यही तो फायदा है कि रेलवे अपने अनकन्फर्म्ड यात्रियों को हमारे यहां भेज सकता है। लोहानी का आइडिया बहुत अच्छा है। लेकिन क्या रेलवे किसी प्राइवेट एयरलाइन के साथ ऐसा कर पाएगी। उस पर प्राइवेट कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगने लगेगा।’

उधर लोहानी को रेलवे बोर्ड का चेयरमैन बनाए जाने के बाद एयर इंडिया की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाल रहे सीनियर IAS अधिकारी राजीव बंसल ने कहा कि अभी वह इस प्रस्ताव पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, ‘मैं पहली बार इस तरह की बात सुन रहा हूं। ट्रेन के किराए और हवाई किराए में अंतर होता है।’

दिवाली के बाद शेयर बाजार में उत्साह,32595 पर खुला

मुंबई। फेस्टिव सीजन के बाद सोमवार को खुले शेयर बाजार में उत्साह देखने को मिला है। 205 अंकों की बढ़त के साथ सेंसेक्स 32,595 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी भी 69 अंकों की बढ़त के साथ 10,216 पर कारोबार कर रहा है। इससे पहले रुपये में भी डॉलर के मुकाबले छह पैसे का उछाल देखने को मिला है।

फिलहाल भारतीय करंसी 65.09 के स्तर पर कारोबार कर रही है। दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान कारोबार में कमजोरी रहने के बाद इस तरह के उछाल से निवेशकों को बड़ी राहत मिली है। माल्या की ओर से यूनाइडेट ब्रेवरीज के डायरेक्टर पद को छोड़ने से राजी होने का असर इस कंपनी के शेयरों पर देखने को मिला है और 1 फीसदी से अधिक का उछाल दर्ज किया गया है।

जापान में पीएम शिंजो आबे की पार्टी को एक बार फिर से बहुमत मिलने का भी बाजार पर असर दिख सकता है। सोमवार सुबह से ही सभी एशियाई बाजारों में कारोबार तेज रहा है। बता दें कि गुरुवार को दिवाली के मौके पर दशक की सबसे कमजोर मुहूर्त ट्रेडिंग के बाद कारोबार कमजोर रहने की आशंकाएं थीं, जो गलत साबित हुईं।

माल्या के भारत लौटने की संभावना कम, यूबीएल का अध्यक्ष पद छोड़ने को राजी

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मुंबई। विजय माल्या को यूनाइटेड ब्रेवरीज लिमिटेड (यूबीएल) के बोर्ड से हटने के लिए मना लिया गया है और वह अपने उत्तराधिकारी के नाम का जल्द ही ऐलान करेंगे। दरअसल, सेबी के एक आदेश की वजह से माल्या किसी भी लिस्टेड कंपनी के डायरेक्टर नहीं हो सकते, इसलिए उनका बोर्ड से हटना तय था।

सूत्रों ने बताया कि माल्या की स्वेच्छा से भारत लौटने की संभावना भी कम हो गई है और बोर्ड से हटने की एक वजह यह भी है। सूत्रों ने यह भी कहा कि माल्या ने अपने उत्तराधिकारी की पहचान जाहिर नहीं की है।

बैंकों के माल्या को ‘विलफुल डिफॉल्टर’ घोषित करने के बाद सेबी ने उन्हें बोर्ड से हटाने के लिए कहा था। वहीं, हेनेकेन और माल्या के बीच आर्टिकल्स ऑफ असोसिएशन के मुताबिक माल्या ताउम्र कंपनी के चेयरमैन और नॉन-रिटायरिंग डायरेक्टर रह सकते हैं, बशर्ते वह किसी को अपना प्रतिनिधि नियुक्त नहीं करते या स्वेच्छा से बोर्ड से बाहर नहीं होते।

यूबीएल में हेनेकेन और माल्या ज्वाइंट वेंचर पार्टनर हैं। इस बारे में ईमेल से पूछे गए सवालों का माल्या ने जवाब नहीं दिया और हेनेकेन ने टिप्पणी करने से मना कर दिया। यूबीएल ने अपने एक डायरेक्टर सी वाई पाल को ऐक्टिंग चेयरमैन नियुक्त किया है। बोर्ड कॉर्पोरेट गवर्नेंस रूल्स का हवाला देकर चेयरमैन नियुक्त करने का दबाव डाल रहा है।

एक बोर्ड मेंबर ने कहा, ‘बोर्ड अच्छी तरह से काम कर रहा है और कंपनी का कामकाज भी बढ़िया चल रहा है। हालांकि, जब मौजूदा चेयरमैन बोर्ड में डायरेक्टर की भूमिका नहीं निभा रहे हों और उन्हें रेग्युलेटरी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा हो, तब ऐक्टिंग चेयरमैन नियुक्त करना बेस्ट कॉरपोरेट गवर्नेंस नहीं है।’

माल्या के लिए अपना प्रतिनिधि चुनना आसान नहीं होगा, भले ही कंपनी के कई एग्जिक्यूटिव्स उनके वफादार हैं। वह जिसे अपना प्रतिनिधि बनाएंगे, उसे रेग्युलेटरी अथॉरिटीज की जांच का सामना करना पड़ सकता है। सूत्रों ने बताया कि इस साल के अंत तक वह अपने प्रतिनिधि के नाम का ऐलान कर सकते हैं।

एग्जिक्यूटिव ने बताया, ‘माल्या अब बोर्ड के डायरेक्टर नहीं रह जाएंगे। इसलिए उन्हें एक नॉमिनी चुनना होगा। अगर हालात बिगड़ते हैं तो उन्हें हेनेकेन के नॉमिनी को भी स्वीकार करना पड़ सकता है।’ माल्या 2016 में भारत से ब्रिटेन फरार हो गए थे।

बैंक उनसे 9,000 करोड़ रुपये का लोन रिकवर करने की कोशिश कर रहे हैं और जांच एजेंसियां उनसे कथित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पूछताछ करना चाहती हैं। भारत ने ब्रिटेन से उनके प्रत्यर्पण की मांग की है। हाल ही में कुछ समय के लिए ब्रिटिश पुलिस ने माल्या को हिरासत में भी लिया था। 

नोटबंदी में बड़ी रकम जमा करने वाली कंपनियों पर चलेगा क्रिमिनल केस

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नई दिल्ली। नोटबंदी के दौरान बड़े पैमाने पर बैंक खातों में राशि जमा करने वाली फर्जी कंपनियों को नए कंपनी लॉ के तहत क्रिमिनल केस का भी सामना करना पड़ सकता है। फर्मों के मकड़जाल के जरिए रकम की हेराफेरी करने वाली कंपनियों के खिलाफ सरकार के ऐक्शन की यह शुरुआत हो सकती है।

कॉर्पोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री ने रिटर्न फाइल न करने वाली 2 लाख कंपनियों का पंजीकरण रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंत्रालय इन पर नए कंपनीज ऐक्ट के सेक्शन 447 के तहत कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है। फ्रॉड करने के मामलों में इस सेक्शन के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।

इस कानून के मुताबिक फ्रॉड के केस में दोषियों को 3 से 10 साल तक की सजा हो सकती है, इसके अलावा जितने राशि के फ्रॉड का आरोप है, उतने तक का ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है। किसी चीज को छिपाना या जानकारी न देना फ्रॉड के दायरे में आता है।

सूत्रों ने बताया कि कंपनियों को डीरजिस्टर करने वाले रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज की ओर से इस पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा जांच जांच के जरिए ऐसी कंपनियों को मिलने वाले फंड के स्रोतों का भी पता लगाया जाएगा। इसके बाद ऐसे डायरेक्टर्स पर बैन भी लगाया जा सकता है।

इनमें से कुछ टॉप लिस्टेड कंपनियों के बोर्ड में भी शामिल हैं। इसके अलावा ऐसी कंपनियों के बैंक अकाउंट्स को फ्रीज भी किया जा सकता है।  राजस्व विभाग और कॉर्पोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री साथ मिलकर शेल कंपनियों पर ऐक्शन का खाका तैयार कर रहे हैं।

इन कंपनियों का कारोबार तो बेहद छोटा है, लेकिन इन्हें कंपनियों के मकड़जाल के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने की आशंका है। सरकार को संदेह है कि ऐसी तमाम कंपनियों को नोटबंदी के दौरान पैसा जमा करने के लिए इस्तेमाल किया गया, जिसे बाद में निकाल लिया गया।

टैक्स डिपार्टमेंट के शुरुआती डेटा के मुताबिक 6,000 से कंपनियों के बैंक खातों से 4,600 करोड़ रुपये तक की हेराफेरी की गई। कुछ कंपनियों के पास 900 बैंक खाते हैं। एक टैक्स अधिकारी ने कहा, ‘कई बैंक खाते होना अवैध नहीं है, लेकिन हमें यह साबित करने की जरूरत होगी कि यह रकम ज्ञात स्रोतों से ही हासिल हुई है।’

माहेश्वरी समाज का अन्नकूट जिसमें घर के ही मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि

कोटा। माहेश्वरी समाज और माहेश्वरी पंचायत की ओर से पूर्वी प्रदेश अन्नकूट महोत्सव पूर्वी राजस्थान प्रादेशिक माहेश्वरी सभा का प्रदेश सम्मेलन 29 अक्टूबर को माहेश्वरी पब्लिक स्कूल, श्रीनाथपुरम में होगा। इसी दिन समाज का अन्नकूट महोत्सव का आयोजन होगा। जिसमें घर के ही मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि होंगे 

समाज अध्यक्ष राजेश कृष्ण बिरला ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उनके पिता श्रीकृष्ण बिरला, उनके भाई सांसद ओम बिरला एवं श्यामसुन्दर सोनी सभापति अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा होंगे।

कार्यक्रम का आगाज प्रदेश सम्मेलन से होगा, जिसमें उपसभापति देवकरण गग्गड़, संयुक्त मंत्री श्यामसुन्दर, जुगलकिशोर सोमानी, अ.भा. माहेश्वरी युवा संगठन के अध्यक्ष राजकुमार काल्या, कार्यसमिति सदस्य नारायण स्वरूप कालानी, महिला संगठन की महामंत्री आशा विशाल माहेश्वरी, रामस्वरूप मंत्री होंगे।

इसके अलावा ओम माहेश्वरी, राजेश बिरला की पत्नी सूरज बिरला, उन्हीं के परिवार की कोटा महिला नागरिक सहकारी बैंक लि. की अध्यक्ष मंजू बिरला, बारां नागरिक सहकारी बैंक लि. के अध्यक्ष जयनारायण हल्दिया, पूर्वी राजस्थान प्रादेशिक माहेश्वरी सभा के अध्यक्ष बालकृष्ण बांगड़, मंत्री घनश्याम लाठी, बिट्‌ठलदास मूंदड़ा, राजेन्द्र शारदा, किशनदास मोहता, घनश्याम नकलक, योगेश मंत्री एवं नवनीत मालपानी शामिल होंगे।

इस दौरान कार्यक्रम के फोल्डर का विमोचन किया गया। उन्होंने बताया कि सम्मेलन से पूर्व अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा के सभापति श्यामसुन्दर सोनी पूर्वी प्रदेश के सभी घटकों को समीक्षा बैठक को सं‍बोधित करेंगे।

सम्मेलन के दौरान अखिल भारतीय स्तर पर माहेश्वरी परिवारों के लिए विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी जाएगी तथा समाज के उत्थान एवं विकास के लिए रूपरेखा प्रस्तुत की जाएगी। शिक्षा एवं चिकित्सा के क्षेत्र में दी जाने वाली विभिन्न आर्थिक सहायताओं के बारे में जानकारी देंगे।

डिस्पोजल मुक्त रहेगा आयोजन : अन्नकूट प्रसादी वितरण समन्वयक घनश्याम मूंदड़ा ने बताया कि यह अन्नकूट महोत्सव शत-प्रतिशत डिस्पोजल रहित होगा। इसमें किसी प्रकार का डिस्पोजल यूज नहीं किया जाएगा। महाप्रसादी के दौरान समाज बन्धुओं द्वारा ही परोसगारी की जाएगी तथा कोई भी बाहरी व्यक्ति या वेटर्स की सेवाएं नही ली जाएगी।

माहेश्वरी बंधुओं का होगा महासंगम : कार्यक्रम के मुख्य समन्वयक सुरेश चन्द्र काबरा, समन्वयक नंदकिशोर काल्या एवं महेश चन्द अजमेरा ने संयुक्त रूप से बताया कि इस वर्ष अन्नकूट महोत्सव में कोटा, बूंदी, बारां एवं झालावाड़ जिलों के साथ-साथ रावतभाटा के 6-7 हजार माहेश्वरी बन्धुओं का महासंगम होगा।

माहेश्वरी पंचायत के अध्यक्ष कृष्ण गोपाल जाखेटिया एवं मंत्री रामचरण धूत ने बताया कि सती चबूतरा स्थित मन्दिर चारभुजा जी से ठाकुर चारभुजा स्कूल परिसर में झांकी के साथ बिराजेंगे और भजन संध्या होगाी।

आईएएस की पत्नी सहित 7 जनों की 100 करोड़ की जमीन अटैच

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आयकर विभाग की बेनामी संपत्ति मामले में कार्रवाई, खरीद-बेचान पर रोक

जयपुर । बेनामी संपत्ति के मामले में आयकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की। जयपुर में सिरसी रोड स्थित 21 बीघा जमीन को अटैच किया है। इसकी कीमत 100 करोड़ रु. से अधिक आंकी जा रही है।

इनमें आईएएस ओपी यादव की पत्नी लक्ष्मी यादव, सरकारी डॉक्टर गुलाब यादव समेत कमलेश यादव, विनीता यादव, सविता यादव, पृथ्वी सिंह सहित अन्य के नाम सामने रहे हैं। विभाग ने जमीन के खरीद-बेचान पर रोक लगा दी है।

आयकर विभाग ने बेनामी संपत्ति एक्ट के तहत एसडीआरआई की सिफारिश पर रविवार को यह कार्रवाई की। 1985-86 में रामू राम यादव ने यह जमीन खरीदी थी। बाद में इसे सात लोगों के नाम गिफ्ट कर दिया।

इसमें दो बीघा आठ बिस्वा जमीन अारएएस से प्रमोटी आईएएस आेपी यादव की पत्नी लक्ष्मी के नाम है। दो बीघा 8 बिस्वा सरकारी डॉक्टर गुलाब यादव के नाम है। आयकर विभाग का मानना है कि इस जमीन का कागजी मालिक रामू राम यादव आज अस्तित्व में ही नहीं है।

मौके पर पत्नी का कब्जा नहीं है : आईएएस
आईएएस ओपी यादव का कहना है कि उनकी पत्नी को यह जमीन गिफ्ट में दी गई थी। पत्नी ने कोर्ट में काफी पहले ही यह लिखकर दे दिया था कि उनके नाम से जमीन का म्यूटेशन किया जाए। मौके पर पत्नी का कब्जा भी नहीं है।

पारिवारिक विवाद के कारण किसी ने एसडीआरआई में शिकायत की, जिसके बाद आयकर विभाग की ओर से यह कार्रवाई की गई।

कोटा से वडोदरा के बीच नवंबर से चलेगी मेमू ट्रेन

कोटा। कोटा से रतलाम और वडोदरा के बीच रोजाना 3 से 4 हजार लोग डेली अपडाउन करते हैं। अभी तक पेसिंजर ट्रेनों में धक्के खाने को मजबूर इन डेली पेसिंजर को रेलवे बोर्ड ने दिवाली पर बड़ा तोहफा दिया है। कोटा रेल मंडल में पहली मेमू ट्रेन के संचालन को रेलवे बोर्ड ने हरी झंडी दे दी है।

रेल परिचलन के लिए ड्राइवर व अन्य स्टॉफ का प्रशिक्षण भी पूरा हो चुका है। नवंबर की शुरुआत के साथ ही इस ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि मेमू ट्रेन होने के बावजूद शौचालय जैसी जरूरी सुविधाएं भी यात्रियों को मिल सकेंगी।

कोटा से वडोदरा के बीच जल्द ही मेमू ट्रेन दौड़ेगी। कोटा-वडोदरा पार्सल पैसेंजर को मेमू ट्रेन में तब्दील किया जाएगा। इसके लिए कोटा मंडल और रतलाम मंडल के चालकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कोटा के आठ ट्रेन चालक वडोदरा में प्रशिक्षण ले रहे हैं। प्रशिक्षण के बाद नवम्बर माह में इस ट्रेन सेवा के शुरू होने की संभावना है।

मेमू ट्रेन में होंगे 12 कोच
तीन मल्टीपल यूनिट में कुल 12 कोच होंगे। सूत्रों के अनुसार से इस ट्रेन का सफर लम्बा होने के करण इसमें शौचालय वाले कोच लगाए जाएंगे। पहले इस मेमू का संचालन गत सितम्बर माह में ही शुरू किया जाना था, लेकिन प्रशिक्षक चालकों के अभाव में ट्रेन का परिचालन स्थगित किया गया। अब चालकों को प्रशिक्षण दे दिया गया है। कोटा के ट्रेन चालक रतलाम तक मेमू का परिचालन करेंगे।