Friday, July 10, 2026
Home Blog Page 5658

गेहूं के सस्ते आयात ने बिगाड़ी घरेलू जिंस बाजार की स्थिति

नई दिल्ली । सस्ते गेहूं का आयात बढ़ने से घरेलू जिंस बाजार डगमगाने लगा है। कीमतें पिछले साल के समर्थन मूल्य से भी नीचे बोली जा रही हैं। चालू रबी सीजन में एमएसपी और बढ़ा दिया गया है, जिससे सस्ते गेहूं का आयात और बढ़ सकता है।

जिन राज्यों में गेहूं पैदा नहीं होता है, वहां सस्ता आयात पहले से ही तेजी पकड़ रहा है। जबकि सरकारी एजेंसी भारतीय खाद्य निगम के गोदाम गेहूं से ठसाठस भरे हुए हैं। खुले बाजार में गेहूं बेचने की एफसीआई की योजना (ओएमएसएस) का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं है। उधर, गेहूं के आयात पर मात्र 10 फीसद का सांकेतिक शुल्क लगाया गया है।

वैश्विक बाजार में गेहूं की पर्याप्त उपलब्धता और मांग में कमी होने की वजह से कीमतें काफी नीचे हैं।यही वजह है कि उपभोक्ता राज्यों में गेहूं की मांग को सस्ते आयात से पूरा किया जा रहा है। इसका खामियाजा घरेलू बाजार को भुगतना पड़ रहा है। गेहूं उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में कीमतें 1400 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल बोली जा रही हैं।

जबकि पिछले साल का एमएसपी 1625 रुपये है। ऐसे में अच्छे दाम की आस में बैठे गेहूं किसानों को बाजार का समर्थन न मिलने से बहुत नुकसान हो रहा है। पिछले रबी सीजन में गेहूं की पैदावार सर्वाधिक 9.6 करोड़ टन रही थी। उसी के अनुरूप सरकारी एजेंसियों ने गेहूं की खरीद भी जमकर की है।

पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश की तर्ज पर पहली बार उत्तर प्रदेश ने भी जमकर सरकारी खरीद की। इसके चलते सरकारी गोदाम भर गये। लेकिन सरकारी खरीद कुल पैदावार के मुकाबले 20 फीसद से थोड़ी अधिक हो पाती है।

बाकी गेहूं खुले बाजार में ही किसान अपनी सुविधा और जरूरत के हिसाब से बेचते हैं। चालू रबी सीजन के लिए सरकार ने गेहूं का एमएसपी 1735 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इसे देखते हुए गेहूं का आयात और तेज हो सकता है।

सूत्रों के मुताबिक विभिन्न बंदरगाहों पर अभी तक 15 लाख आयातित गेहूं पहुंच चुका है। जबकि इससे कहीं अधिक गेहूं के आयात सौदे हो चुका हैं, जिसका एक बड़ा हिस्सा कभी भी बंदरगाहों पर पहुंच सकता है। गेहूं आयात पर समय रहते अंकुश न लगाया गया तो घरेलू बाजार का हुलिया बिगड़ सकता है।

भारत में 5-7 बड़े बैंक ही होने चाहिए: अरविंद सुब्रमण्यन

नई दिल्ली। भारत में आदर्श रूप से 5 से 7 बड़े बैंक ही होने चाहिए। यह मानना है कि मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन का। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का पूंजी आधार मजबूत बनाने के लिए सरकार की तरफ से 2.11 लाख करोड़ रुपये के पूंजी समर्थन की घोषणा के एक दिन बाद सुब्रमण्यन ने यह बैंकों के बारे में यह विचार रखा।

उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में सुदृढ़ीकरण और एकीकरण पर जोर दिया। शिरोमणि गुरुतेग बहादुर खालसा (एसजीटीबी) कॉलेज में एक कार्यक्रम में सुब्रमण्यन ने कहा कि आने वाले समय के बैंकिंग परिवेश में देश में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में ऐसे बड़े बैंक होने चाहिए जो घरेलू स्तर पर प्रतिस्पर्धी होने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिस्पर्धी हों।

उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां चार बड़े बैंक हैं जो कि इस समय दुनिया के बड़े बैंकों में गिने जाते हैं।सुब्रमण्यन ने कहा, ‘बड़ा सवाल आज यह उठ रहा है कि क्या बैंकिंग प्रणाली में निजी क्षेत्र की ज्यादा हिस्सेदारी होनी चाहिए? आज से 5 से 10 साल के दौरान भारत के लिए किस तरह का बैंकिंग ढांचा बेहतर होगा।

आदर्श रूप से 5, 6, 7 बड़े बैंकों की जरूरत है। ये बैंक निजी और सार्वजनिक क्षेत्र दोनों में होने चाहिए। ये बैंक घरेलू स्तर के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी होने चाहिए।’सुबमण्यन ने इस मामले में रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर वाईवी रेड्डी का हवाला देते हुए कहा कि उद्देश्य यह होना चाहिए कि न चलने लायक बैंकों के लिए जगह कम से कम हो।

बैंकों में नई पूंजी डॉलर के बारे में उन्होंने कहा कि यह प्रोत्साहन और चुनिंदा आधार पर होना चाहिए। यह उन बैंकों के लिए होना चाहिए जहां नए कर्ज सृजन की संभावना ज्यादा से ज्यादा हो।

उन्होंने कहा, आज सभी बैंकों को न्यूनतम पूंजी पर्याप्तता को बनाए रखना है, ऐसे में एक संभावना यह भी है कि जो बैंक चलाने लायक नहीं है उन्हें उनकी मौजूदा बैलेंस सीट आकार के अनुरूप उनके पूंजी पर्याप्तता अनुपात को पूरा करने के लिए पूंजी उपलब्ध कराई जाए जिसमें उनकी वृद्धि के लिए कोई अलग से प्रावधान शामिल न हो।

उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री अरण जेटली ने कल एनपीए के बोझ तले दबे बैंकों के पूंजी आधार को मजबूत बनाने के लिये 2.11 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की है।

मामूली गिरावट के साथ खुला सेंसेक्स , बैंकों के शेयर में तेजी

नई दिल्ली। गुरुवार को शेयर बाजार मामूली गिरावट के साथ खुला। हालांकि रुपया बुधवार के मुकाबले थोड़ा मजबूत रहा। रीकैपिटलाइजेशन प्लान की वजह से लगातार दूसरे दिन पब्लिक सेक्टर के बैंकों में तेजी देखने को मिली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जेपी समूह को यमुना एक्सप्रेसवे की संपत्ति बेचने की इजाजत नहीं देने पर रियल एस्टेट कंपनी के शेयरों में गिरावट देखने को मिला।

गुरुवार को रुपये में मजबूती देखने को मिली। रुपया कल के मुकाबले (64.79) 10 पैसे मजबूती (64.89) पर खुला। वहीं सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 17 अंकों की गिरावट पर 33025.20 पॉइंट पर खुला। निफ्टी में भी मामूली कमजोरी रही और यह 10291 अंक के करीब खुला।

यमुना एक्सप्रेसवे पर संपत्ति बेचने की इजाजत नहीं मिलने से जेपी असोसिएट्स के शेयरों में करीब 12 फीसदी गिरावट देखने को मिली। सरकारी बैंकों के हाथ में 2.11 लाख करोड़ रुपये देने के केंद्र सरकार के प्लान का असर लगातार दूसरे दिन भी बाजार पर रहा। शुरुआती कारोबार में पीएनबी के शेयरों में 4 फीसदी, एसबीआई और आईडीबीआई में 3 फीसदी बढ़त देखने को मिली।

अब GSTN पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन रद्द कराना आसान

0

कोटा । जीएसटी पोर्टल पर आ रही तमाम दिक्कतों के बीच एक राहत भरी खबर आई है। यह खबर खासकर उन लोगों के लिए है जो जीएसटी के लागू होने के बाद अपना बिजनेस बंद कर चुके थे, लेकिन उन्हें मजबूरन रिटर्न दाखिल करना पड़ रहा था। 

चार्टेड अकाउंटेंट मिलिंद विजय ने बताया कि जीएसटी पोर्टल पर अब कैंसिलेशन का फीचर जोड़ दिया गया है। यानी अब ऐसे यूजर अपना रजिस्ट्रेशन कैंसल कर सकते हैं जो अपना बिजनेस जुलाई महीने में 1 तारीख के बाद बंद कर चुके हैं।

आपको क्या करना होगा: अगर आप भी ऐसे ही कारोबारी हैं तो आपको जीएसटीएन पोर्टल पर अपने अकाउंट से लॉग-इन करना होगा। लॉग-इन करते ही आपको कैंसिलेशन ऑफ प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन का ऑप्शन दिखाई देगा। यहां पर आपको अपने रजिस्ट्रेशन को कैंसिल करने का पर्याप्त कारण देना होगा।

यानी यहां पर आप डिस्कन्टीन्यू ऑफ बिजनेस लिख सकते हैं। ऐसा करते ही आपका रजिस्ट्रेशन कैंसिल हो जाएगा। कैसिल करते ही आपको यह संदेश दिखेगा

इस सूरत में नहीं कर पाएंगे कैंसिल: हालांकि यह सुविधा सिर्फ ऐसे पूर्व व्यापारियों के लिए है, जिन्होंने अपना कारोबार बंद कर दिया है या बंद करना चाहते हैं, जिन्होंने बीते कई महीनों से कोई भी बिजनेस नहीं किया है विशेषकर जुलाई के आस पास।

इस कैंसिलेशन प्रक्रिया के दौरान आपसे यह भी पूछा जाएगा कि क्या आपने जीएसटी लागू होने के बाद कोई भी टैक्स-इनवॉइस यानी बिल जनरेट किया है या नहीं। अगर आपने कोई भी बिल नहीं बनाया है तो आप नो पर क्लिक करें।

अगर आपने कोई बिल जनरेट किया है तो आप अपना रजिस्ट्रेशन कैंसिल नहीं कर पाएंगे। ऐसे लोगों के लिए बाद में एक फॉर्म जारी किया जाएगा।

आपको मिलेगी कैंसिलेशन की जानकारी: अगर आपका जीएसटी नंबर कैंसिल हो गया है तो आपको रजिस्टर्ड ई-मेल या मोबाइल नंबर पर मैसेज भेजा जाएगा। वहीं अगर आपको किसी कारणवश मेल नहीं आया हो तो भी आपके पास इसे पता करने का एक रास्ता है।

आप पोर्टल पर जाकर अपनी आईडी पर लॉग इन करें। अगर आपका रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया जा चुका है तो आप लॉग-इन ही नहीं कर पाएंगे। लॉग-इन करते ही आपको संदेश दिखने लगेगा कि आपका रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया जा चुका है।

भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को अमेरिका का झटका, एच-1बी वीजा विस्तार मुश्किल

वाशिंगटन। अमेरिका ने एच-1बी और एल-1 जैसे गैर अप्रवासी वीजा के नवीनीकरण को और कठिन बना दिया है। ट्रंप प्रशासन ने एक नया दिशा-निर्देश जारी कर कहा है कि वीजा अवधि बढ़ाने की मांग करते वक्त भी साक्ष्य दिखाने की जिम्मेदारी आवेदक की होगी।

अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने अपनी 13 साल से अधिक पुरानी नीति को निष्प्रभावी करते हुए कहा कि साक्ष्य प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी हर वक्त आवेदक की होगी। बता दें कि 23 अप्रैल 2004 के नियम के तहत यह जिम्मेदारी फेडरल एजेंसी की होती थी। 

यूएससीआईएस ने 23 अक्तूबर को जारी अपने हालिया ज्ञापन में कहा है कि साक्ष्य प्रस्तुत करने की जिम्मेवारी याचिकाकर्ता की होगी, चाहे क्यों न उसने गैर-अप्रवासी स्तर के वीजा विस्तार की मांग की हो। 

हालांकि कहा यह भी गया है कि पिछली नीति के तहत भी प्रथम दृष्टया यदि कोई कामकाजी, वीजा के योग्य पाया जाता है तो उसके आवेदन पर विचार होगा।

वहीं अमेरिकन इमिग्रेशन लॉयर्स एसोसिएशन के प्रमुख विलियम स्टॉक ने कहा कि नया नियम पहले से रह रहे लोगों पर लागू होगा। फिलहाल नए वीजा आवेदकों इसमें राहत होगी। 

वहीं वेबसाइट नंबर यूएसए ने कहा है कि नई नीति से धोखाधड़ी रुकेगी और केवल योग्य एच-1बी वीजा धारक ही अमेरिका में रह पाएंगे। इससे वीजा धोखाधड़ी और दुरुपयोग कम होगा। 

SBI ने आईएमपीएस सर्विस पर घटाए चार्जेस

नई दिल्ली। डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए देश का अग्रणी बैंक एसबीआई अपने ग्राहकों के लिए नई सौगातें लेकर आ रहा है। इस बार बैंक ने अपने ग्राहकों को राहत देते हुए आईएमपीएस चार्जेस में कटौती कर दी है। यह कटौती 80 प्रतिशत तक की गई है जिसके बाद आईएमपीएस से ट्रांजेक्शन करने पर कम पैसे देने होंगे। नई दरें 15 अक्टूबर से लागू हो चुकी है।

अब कितना लगेगा शुल्क
नेट बैंकिंग के दौरान आईएमपीएस सर्विस के तहत एक हजार रुपये तक का फंड ट्रांस्फर करने में किसी तरह का कोई भी शुल्क नहीं लगाया जाएगा। वहीं, 1001 से 10 हजार रुपये तक के फंड ट्रांस्फर करने में अब महज एक रुपये ही शुल्क चुकाना होगा। 10 हजार एक से एक लाख रुपये तक के फंड का ट्रांस्फर करने पर केवल दो रुपये का शुल्क लगेगा और एक लाख एक रुपये से दो लाख रुपये तक के ट्रांस्फर करने पर मात्र 3 रुपये शुल्क लगाया जाएगा।

क्या है आईएमपीएस सर्विस का फायदा
आईएमपीएस के जरिए ग्राहक इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से 24 घंटे और सातों दिन कभी भी पैसा ट्रांस्फर कर सकते हैं। आमतौर पर इंटरनेट बैंकिंग केवल बैंकिंग के घंटों तक ही सीमित होती है लेकिन आईएमपीएस सेवा छुट्टी के दिन या फिर दिन रात कभी भी इस्तेमाल की जा सकती है।

आढ़तिये किसानों का शोषण करने पर आमादा , इलेक्ट्रॉनिक काँटों का विरोध

कोटा।  अनाज मंडियों में इलेक्ट्रॉनिक काँटों से किसानों की जिंस तोलने के राज्य सरकार के आदेश के बाद भी भामाशाह मंडी में इसकी पालना नहीं हो रही है। पुराने काँटों से तोलने पर तुले हुए हैं। जिससे किसानों को दो किलो प्रति बोरी का नुकसान हो रहा है। बजाय आढ़तिये इलेक्ट्रॉनिक कांटे के विरोध में उतर आए, जिससे मंडी में बुधवार को किसानों के माल की ढाई घंटे नीलामी नहीं हुई।

 किसान प्रतिनिधि और ग्रेन मर्चेंट मंडी एसोसिएशन के पदाधिकारियों के बीच बात हुई। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने व्यापारियों को समझाइश दी और आश्वासन दिया कि इस मामले में तीन दिन में इस समस्या का समाधान तलाशेंगे। सरकार से प्रॉपर व्यवस्था करने के लिए कहेंगे। उनका प्रतिनिधि आज कलेक्टर से भी मिलेगा। इसके बाद नीलामी शुरू की गई।

व्यापारियों का कहना था कि इलेक्ट्रॉनिक कांटे पर तुलाई से उनके एक क्विंटल में 1 से लेकर 2 किलो तक की कमी रही है। एक गाड़ी में एक क्विंटल जिंस कम रहा है। ऐसे में वे इलेक्ट्रॉनिक कांटे पर तुलाई नहीं करेंगे। सुबह से नीलामी नहीं हुई। किसान प्रतिनिधि दुलीचंद बोरदा और पन्नालाल मीणा भी मौजूद थे। उन्होंने भी व्यापारियों से बात की।

मंडी एसोसिएशन हाल में एक आमसभा बुलाई गई। इसमें व्यापारियों ने अध्यक्ष अविनाश राठी, उपाध्यक्ष नरेंद्र शर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों को अपनी परेशानी बताई। अध्यक्ष राठी ने कहा कि वे इस संबंध में प्रशासन से बात करेंगे। तीन दिन में इससे होने वाली परेशानियों को दूर करने का प्रयास करेंगे। उपाध्यक्ष नरेंद्र शर्मा ने बताया कि उनका प्रतिनिधि आज कलेक्टर से मिलेगा।

व्यापारी नई व्यवस्था में सहयोग करें
इलेक्ट्रॉनिक कांटे की व्यवस्था से किसानों का हित हो रहा है। व्यापारी को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं है। उनकी जायज परेशानी या समस्या होगी तो उसे दूर किया जाएगा। व्यापारी नई व्यवस्था में सहयोग करें, क्योंकि यह पूरे प्रदेश में लागू हो चुकी है। – आरपीकुमावत, मंडी सचिव

राजस्थान को बनाएंगें ग्रीन स्टेट – मुख्यमंत्री राजे

जयपुर। मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने कहा कि राजस्थान एक मरूस्थलीय प्रदेश है जिसे हम हर संभव प्रयास कर एक ग्रीन स्टेट बनाएंगे। उन्होंने कहा कि शहरों के सौंदर्यीकरण तथा हरियाली विकसित करने के लिए वे ही पेड़-पौधे लगाए जाएं जिनका रखरखाव आसान और सस्ता हो। 

राजे ने कहा कि जो भी पेड़-पौधे लगाए जाएं वो ऎसे हों जिनकी सुन्दरता और हरियाली लम्बे समय तक बनी रहे। राजे बुधवार को मुख्यमंत्री निवास पर जयपुर शहर के सड़क मार्गों तथा उद्यानों के सौंदर्यीकरण संबंधी बैठक को संबोधित कर रही थीं।

उन्होंने कहा कि शहर के विभिन्न स्थानों पर ग्रीन स्पेस बढ़ाने से शहरवासियों को भरपूर मात्रा में ताजा हवा उपलब्ध होगी।मुख्यमंत्री ने कहा की जिन प्रमुख सड़क मार्गों पर खुले नाले हैं, उन्हें कवर कर उनपर कियोस्क तैयार किए जाएं। यह कियोस्क फल-सब्जी विक्रेताओं तथा अन्य छोटे विक्रेताओं आवंटित किए जा सकेंगे।

 बैठक में राजे के समक्ष दिए गए प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि जेएलएन मार्ग को अधिक सुन्दर और ग्रीन बनाने के लिए इसे नौ जोन में बांटकर हर जोन में अलग-अलग थीम पर पेड़ लगाए जाएगें और फूलवारी विकसित की जाएगी। सड़क किनारे ऎसे पेड़ लगाए जाएंगे जिनपर मौसम के अनुसार अलग-अलग रंगों के फूल लगेंगे।

वहीं सर्विस लेन के साथ-साथ अमलतास और गुलमोहर के पेड़ भी लगाए जाएंगे बैठक में नगरीय विकास मंत्री श्रीचन्द कृपलानी, अतिरिक्त मुख्य सचिव नगरीय विकास  मुकेश शर्मा, प्रमुख सचिव स्वायत्त शासन डॉ. मंजीत सिंह, जयपुर विकास प्राधिकरण आयुक्त  वैभव गालरिया, जयपुर नगर नगम आयुक्त रवि जैन तथा सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट के लिए नियुक्त सलाहकार उपस्थित थे।

होंडा की सेल्फ बैलेंसिंग बाइक दिल जीत लेगी युवाओं का

नई दिल्ली।  सड़कों पर तेजी से बढ़ती वाहनों की भीड़ में मोटर साइकिल को सबसे सकुशल परिवहन माना जाता है। लेकिन इसकी एक समस्या पर हमारा ध्यान बहुत कम बार जाता है। दरअसल मोटरसाइकिल को धीमी गति में मोड़ना सबसे कठिन काम है।वहीं, जापान की ऑटोमाबाइल निर्माता कंपनी होंडा ने इस समस्या का हल खोज निकाला है।

होंडा की इस ‘सेल्फ बैलेंसिंग बाइक’ को इसी साल लास वेगास में आयोजित ‘कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक शो’ (सीईएस) में प्रस्तुत किया गया था। इस बाइक की खासियत है कि यह किसी भी दिशा में आसानी से रुख कर सकती है। बाइक चलाते वक्त आपने महसूस किया होगा कि मोटरसाइकिल को दाईं या बाईं तरफ मोड़ते वक्त पर्याप्त शारीरिक श्रम और सटीक बैलेंस की आवश्यक्ता होती है।

बैलेंस जरा सा डगमगाते ही आप हादसे का शिकार हो सकते हैं। लेकिन सेल्फ बैलेसिंग बाइक ‘इल्क्ट्रॉनिक स्टेयरिंग सिस्टम’ दिया गया है, जो इसे किसी भी दिशा में आसानी से मुड़ने के लिए सक्षम बनाता इस शानदार बाइक में ऑटोमेटिक ब्रेक सिस्टम को भी जोड़ा गया है।

दरअसल बाइक में मौजूद ‘इल्क्ट्रॉनिक स्टेयरिंग सिस्टम’ को मोटरसाइकिल के अगले टायर (व्हील) से जोड़ा गया है, जो ऑटोमेटिक ब्रेक सिस्टम पर आधारित है।

इससे मोड़ पर बाइक टर्न करते वक्त यदि अचानक कोई व्यक्ति, वाहन या गड्ढा रास्ते में आ जाता है तो यह इसमें मौजूद ऑटोमेटिक ब्रेक एक्टिव हो जाते हैं और बाइक आसानी से थम जाती है।

इतना ही नहीं, ब्रेक लगने पर चालक को मजबूत झटकों का सामना भी नहीं करना पड़ता। सेल्फ बैलेंसिंग बाइक का स्टेयरिंग सिस्टम प्रमुख सेंसर से लैस है, जिसकी मदद से यह धीमी गति में भी हर तर्फ रुख कर सकती है।

बेहद आरामदायक है बाइक
होंड की इस शानदार बाइक डिजाइन बेहद आकर्षक है। चालक के लिए हर तरह के कंफर्ट को ध्यान में रखकर इस बाइक को डिजाइन किया है। बाइक की सीट इतने नीच है कि कम कद वाले चालक भी जमीन पर पैर टिकाकर इसे आसानी से कंट्रोल कर सकते हैं। इसके अलावा बाइक के चौड़े टायर पथरीले रास्तों पर जमकर चलने में सक्षम हैं।

नौसिखिए भी होंडा की इस बाइक को बहुत आसानी से कंट्रोल कर सकते हैं। हालांकि कि कंपनी ने अभी इसके बाकि फीचर्स के बारे में कोई खुलासा नहीं किया है। ऐसा माना जा रहा है कि 27 अक्टूबर को होने वाले टोक्यो मोटर शो में कंपनी कीमत और खास फीचर के बारे में खुलासा कर सकती है।

अब घर बैठे आधार से लिंक होगा मोबाइल नंबर

0

नई दिल्ली। मोबाइल नंबर को अब घर बैठे आधार से लिंक कराया जा सकेगा। इससे आधार से लिंक कराने की जद्दोजहद में सेवा प्रदाता कंपनियों के केंद्रों पर लगी भीड़ जल्द खत्म होगी। सरकार बुजुर्गो, अक्षम लोगों और महिलाओं को सहूलियत देने और करीब सौ करोड़ मोबाइल नंबर होने के मद्देनजर इस प्रक्रिया को सरल बनाने जा रही है।

दूरसंचार मंत्रलय जल्द आधार से मोबाइल नंबर को लिंक करने के नए दिशा-निर्देश जारी करेगा। विशिष्ट पहचान पत्र प्राधिकरण (यूआईडीएआई) की सहमति के बाद मंत्रलय ने वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) के जरिए आधार को मोबाइल से लिंक करने की रूपरेखा तैयार की है।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक ओटीपी प्रक्रिया के जरिए मोबाइल ग्राहकों की मुश्किल का हल निकाल लिया गया है। अगले दो दिनों में इस दिशा में निर्देश जारी कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सभी मोबाइल सिम को सरकार ने आधार से लिंक करने का निर्णय बीते अगस्त में लिया था।

इसकी वजह सत्यापन की प्रक्रिया को आसान करना और फर्जी मोबाइल सिम कार्ड को पूरी तरह से खत्म करना था। इसके बाद सामने आया कि पुनर्सत्यापन में बुजुर्ग, बीमार, अक्षम और महिलाओं को परेशानी हो रही है। देश में सौ करोड़ के करीब मोबाइल नंबर है जिन्हें पुनर्सत्यापन की प्रक्रिया निभानी है।

सेवा प्रदाता कंपनियों के केंद्रों में रोजाना इसके लिए लोगों की भीड़ जुटती है। कुछ लोगों ने न्यायपालिका का भी दरवाजा खटखटाया है। इन्हीं विभिन्न कारणों के मद्देनजर केंद्र ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने का निर्णय लिया। मंत्रालय या यूआईडीएआई की ओर से जल्द इसके लिए एक नंबर जारी किया जाएगा जिस पर आधार नंबर मैसेज के जरिए भेजना होगा।

मैसेज भेजने के बाद एक ओटीपी आधार में पंजीकृत नंबर पर आएगा। ओटीपी को भी उसी नंबर पर भेजना होगा जिस पर आधार नंबर भेजा था। ओटीपी भेजते ही नंबर आधार से लिंक हो जाएगा। अभी नया सिम खरीदने वाले आधार कार्ड धारक ग्राहक से सत्यापन के लिए कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाता है।

नई प्रक्रिया के तहत ग्राहक को सिर्फ अंगूठे या अंगुलियों का निशान दूरसंचार कंपनियों को देना होता है। मोबाइल नंबरों को आधार से जोड़ने के बारे में दूरसंचार विभाग की अधिसूचना को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। यह याचिका तहसीन पूनावाला ने दायर की है।