Thursday, July 16, 2026
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स्वच्छता एप में कोटा राज्य में पहले नंबर पर

कोटा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता एप डाउनलोड करने, उस पर शिकायत डालने तथा इससे कितने लोग संतुष्ट हैं, इस मापदंड पर केंद्र सरकार ने 31 जनवरी तक की रैंकिंग बुधवार को जारी की। इसमें सर्वे में शामिल 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले 52 शहरों में कोटा का स्थान 17वें और राज्य में पहले नंबर पर आया है। टॉप-20 में आने वाले शहरों को स्वच्छता एप संबंधी तीन बिंदुओं में 400 में से 400 नंबर मिलेंगे।

नगर निगम संबंधी शिकायतों के लिए तैयार किया स्वच्छता एप को 1 अप्रैल 2017 से लेकर 31 जनवरी तक जनता के मोबाइल पर डाउनलोड करवाना था। कोटा की जनसंख्या और मकानों के हिसाब से नगर निगम को 22 हजार 500 एप डाउनलोड करना था। नगर निगम ने प्रशिक्षु आईएएस जसमीत सिंह संधू व उपायुक्त राजेश डागा के नेतृत्व में जो टीमें बनाकर अभियान चलाया।

इससे कोटा शहर से 25 हजार एप डाउनलोड हुए हैं। इसके आधार पर कोटा का कुल स्कोर 59830.80 हुआ। यूजर एंगेजमेंट में 9707.70 अंक, यूजर हैप्पीनेस में 14888.70 अंक मिले हैं। इन अंकों के साथ कोटा का स्थान टॉप 20 शहरों में 17वें स्थान पर आया है।

राजस्थान में पहले स्थान पर 
इस रैंकिंग में 52 शहरों में से टॉप 20 में राजस्थान का कोटा को छोड़कर अन्य कोई शहर नहीं है। सभी की रैंकिंग कोटा से पीछे है। जयपुर 23960 अंकों के साथ 27वें स्थान पर है। जोधपुर 4496.10 अंक के साथ 38वें स्थान पर है।

इनमें इसलिए मिलेंगे कोटा को पूरे अंक
1) 31 जनवरी तक कुल मकानों का 10% स्वच्छता एप डाउनलोड करना।
10 प्रतिशत से अधिक पर 150 अंक।
(कोटा ने 25 हजार एप डाउनलोड किए)
2) शिकायतों का समाधान और सर्विस लेवल एंगेजमेंट पर
90 से 100 प्रतिशत पर 150 नंबर
(कोटा ने 95 प्रतिशत समाधान की)
3) यदि शहर स्वच्छता एप डाउनलोड करने में टाॅप-20 शहरों में आता है तो
1 से 20 रैंकिंग में आने पर-100 अंक
(कोटा 17वें स्थान पर है)

28 फरवरी तक बढ़ी तारीख :अब केंद्र सरकार ने एप डाउनलोड करने की तारीख 28 फरवरी तक बढ़ा दी है। जिन लोगों ने एप डाउनलोड नहीं किया है वे भी डाउनलोड कर सकते हैं। साथ ही एप पर नगर निगम से संबंधित शिकायतें दर्ज कर सकते हैं।

उड़ान के दूसरे चरण में भी कोटा को नहीं मिली नई फ्लाइट

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कोटा। भारत सरकार के केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय की रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम उड़ान योजना’ के दूसरे राउंड से कोटा को निराशा हाथ लगी है। सप्ताहभर पहले दूसरे चरण के रूट्स अवार्ड किए गए हैं, इसमें कोटा को लेकर किसी ऑपरेटर का चयन नहीं हो सका है। इसकी सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है कोटा एयरपोर्ट का मौजूदा रनवे, जहां बड़े विमान नहीं उतर सकते।

जब नए रूट्स अवार्ड होने के बाद पड़ताल की तो सामने आया कि राजस्थान के बीकानेर, जैसलमेर, किशनगढ़ और उतरलाई एयरपोर्ट को लेकर ऑपरेटर्स का चयन कर लिया गया है। कोटा का इस सूची में कहीं नाम नहीं है। कुछ कंपनियों ने कोटा को लेकर रुचि भी दिखाई थी। 

केंद्र सरकार ने नए रूट्स के लिए कोटा से भी मांगे थे टेंडर
भारत सरकार ने उड़ान के दूसरे चरण के जिन रूट्स के लिए टेंडर मांगे थे, उनमें कोटा भी शामिल था। कोटा से कई नए रूट्स जोड़ते हुए अहमदाबाद, मुंबई, दिल्ली, जयपुर, लखनऊ और इंदौर से सीधी एयर कनेक्टिविटी प्रस्तावित थी। वर्तमान में कोटा से सिर्फ जयपुर की कनेक्टिविटी है, वह भी शेड्यूल्ड एयर सर्विस नहीं है। एक चार्टर फ्लाइट के तौर पर इंट्रा स्टेट एयर कनेक्टिविटी के तहत सेवा संचालित है।

अधिकतम 1500 मी. तक बढ़ सकता है रनवे
कोटा एयरपोर्ट का मौजूदा रनवे 1220 मीटर ही है, ऐसे में इस पर छोटे विमान ही उड़ सकते हैं। कोटा में रुचि दिखा रही कंपनियों की मानें तो इस रनवे को बढ़ाकर 1500 मीटर तक भी कर दिया जाए तो भी यहां एटीआर-42 श्रेणी के विमान ही उतारे जा सकते हैं, वह भी लोड घटाकर।

इसमें सबसे बड़ा पेंच यह है कि इस तरह के विमान अब कॉमर्शियली वाईबल नहीं है और देश में गिनती के ही ऐसे विमान बचे हैं। सामान्य 50 सीटर विमान उतारने के लिए भी 1600 से 1700 मीटर लंबा रनवे चाहिए, जो कोटा में नहीं है। एएआई के सूत्रों ने बताया कि कोटा एयरपोर्ट के रनवे को लेकर पूर्व में सर्वे कराया जा चुका, इसे दादाबाड़ी वाले छोर पर 1500 मीटर तक बढ़ाने की गुंजाइश है, लेकिन इससे ज्यादा संभव नहीं है।

शंभूपुरा में चिह्नित है नए एयरपोर्ट की जमीन
सारे हालात से यह बात स्पष्ट है कि कोटा की बड़े शहरों से एयर कनेक्टिविटी तभी संभव है, जब यहां नया एयरपोर्ट शुरू हो जाए। इसके लिए कोटा के 2031 के मास्टर प्लान में शंभूपुरा में 750 एकड़ जमीन भी चिह्नित की गई है। यह जमीन आबादी क्षेत्र से दूर है और इस इलाके को मास्टर प्लान में नए ग्रोथ सेंटर के रूप में विकसित करना तय किया गया है।

लिवाली निकलने से धनिया 100 और उड़द 150 रुपये उछला

कोटा। भामाशाह अनाज मंडी में बुधवार को लहसुन की आवक 2000 हजार कट्टे की रही । माल की कुल आवक 40000 हजार बोरी की रही। लिवाली निकलने से धनिया 100 रुपये और उड़द 150 रुपये तेज बिका।  गेहूं मिल 1500से 1570 लोकवान 1600 से 1625 पीडी 1600 से 1620 टुकडी 1600 से 1650 रुपये प्रति क्विंटल।

धान सुगंधा 2600 से 3050 पूसा -1 2500 से 2850 पूसा 4 (1121) 2500 से 3550 धान (1509) 2000 से 3251रुपये प्रति क्विंटल। सोयाबीन 2400 से 3705 सरसो 3200 से 3650 तिल्ली 6000 से 7800 रुपये प्रति क्विंटल। मैथी 2000 से 2900 धनिया बादामी 4000 से 4550 ईगल 4200 से 4750 रंगदार 5000 से 5500 धनिया नया 5000 से 7100 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंग 3300 से 4400 उडद 2400 से 3850 चना 3000 से 3600 चना काबुली 7000 से 10500 चना पेपसी 3400 से 3800 चना मौसमी 3000 से 3800 मसूर 3000 से 3400 रुपये प्रति क्विंटल। ग्वार 3000से 4150 मक्का नई 1000 से 1250 जौ 1100 से 1200 ज्वार 1300 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल। 

विदेशी बाजारों से मजबूत रुख से सोना 160 रुपये उछला

नई दिल्ली/कोटा । शादी के मौसम को देखते हुए स्थानीय आभूषण निर्माताओं की लिवाली और विदेशी बाजारों से मजबूत रुख के चलते बुधवार को दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने का भाव 160 रुपये बढ़कर 31,400 रुपये प्रति दस ग्राम पहुंच गया। औद्योगिक इकाइयों और सिक्का निर्माताओं का उठाव बढ़ाने से चांदी भी 150 रुपये मजबूत होकर 40,200 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। शेयर बाजार की गिरावट ने भी बढ़त का समर्थन किया।

कारोबारियों ने कहा कि विवाह-शादी के सीजन को देखते हुए स्थानीय आभूषण निर्माताओं की लगातार लिवाली और वैश्विक स्तर पर मजबूत रुख से सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिली।  वैश्विक स्तर पर सिंगापुर में सोना 0.37 प्रतिशत बढ़कर 1,343 डॉलर प्रति औंस रहा।

चांदी भी 0.58 प्रतिशत बढ़कर 17.19 डॉलर प्रति औंस रही। राष्ट्रीय राजधानी में 99.9 प्रतिशत और 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 160-160 रुपये बढ़कर क्रमश: 31,400 और 31,250 रुपये प्रति दस ग्राम पहुंच गया। मंगलवार को सोना 120 रुपये चढ़ा था।

हालांकि, आठ ग्राम वाली गिन्नी 24,800 रुपये प्रति इकाई पर टिकी रही। चांदी हाजिर 150 रुपये सुधरकर 40,200 रुपये प्रति किलोग्राम और साप्ताहिक डिलीवरी 235 रुपये मजबूत होकर 39,310 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। हालांकि, चांदी सिक्का लिवाल और बिकवाल क्रमश: 74,000 रुपये और 75,000 रुपये प्रति सैकड़ा पर स्थिर रहा।

कोटा सर्राफा
चांदी 39800 रुपये प्रति किलोग्राम।
सोना केटबरी 31050 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 36220 रुपये प्रति तोला। 
सोना शुद्ध 31200 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 36400 रुपये प्रति तोला।

कोटा से कैट कोर्स परीक्षा में 83% छात्र हुए उत्तीर्ण

कोटा। दी इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया कोलकता द्वारा कैट कोर्स (सर्टिफिकेट इन एकाउंटिंग टेक्निक्स) की जनवरी 2018 में आयोजित परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया गया। कोटा चैप्टर सेक्रेटरी सीएमए जय बंसल ने बताया कि कोटा सेन्टर से कैट परीक्षा में 83% छात्र पास हुये।

कोटा चैप्टर चेयरमैन सीएमए एस.एन.मित्तल ने बताया कि जून 2018 में सीएमए कोर्स की होने वाली परीक्षा के लिए सभी कोर्स हेतु छात्रों को एडमिशन की तारीख 7 फरवरी 2018 तक बढ़ा दी है, उन्होंने बताया कि कैट कोर्स में पास स्टूडेन्ट सीएमए इंटरमीडिएट में सीधे प्रवेश ले सकते है।

आकाशीय रंगमंच पर दिखा ब्लू मून, सुपर मून और चंद्रग्रहण

कई वर्षों बाद आकाश में दिखा चमत्कारिक नजारा, अगला पूर्ण चंद्रग्रहण 2037 में होगा 

अरविंद, कोटा। आकाशीय रंगमंच पर चंद्रमा का अनोखा नजारा राज्य के विभिन्न शहरों में लोगों ने बहुत उत्सुकता से देखा। देश के उत्तरी आसमान में बुधवार शाम 5ः58 बजे से रात 8ः41 बजे तक पूर्ण एवं आंशिक चंद्रग्रहण की दुर्लभ खगोलीय घटना हुई।

वर्षों बाद आकाश में एक माह में दो बार पूर्णिमा के चांद देखने को मिले। इस घटना के समय धीरे-धीरे चंद्रमा पर पृथ्ची की छाया तिरछी (कर्व) होकर बढती गई, इस बदलती रगबिरंगी छाया को कई जगह टेलीस्कोप से निरंतर देखा गया।
नागरिकों एवं बच्चों ने टेलीस्कोप के जरिए चंद्रमा पर पृथ्वी की बदलती छाया को देखा।

वरिष्ठ विज्ञान लेखक देवेंद्र मेवाड़ी ने बताया कि पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए संयोग से नीला चंद्रमा 1 एवं 31 जनवरी को माह में 2 बार देखने को मिला। सुपर मून यानी बड़ा चांद अपने सामान्य आकार से 13-14 प्रतिशत बड़ा दिखाई दिया। चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर अंडाकार कक्षा में चक्कर लगाता है, जिससे कभी वह 4 लाख किमी दूर हो जाता है,तो कभी 3.56 लाख किमी नजदीक आ जाता है।

जब पृथ्वी के पास आए तो ‘सुपर मून’ कहलाता है। ब्लू मून, सुपर मून के साथ रेड मून यानी चंद्रग्रहण का संयोग कई वर्षों बाद देखने को मिलता है। सूत्रों के अनुसार, बुधवार को आंशिक चंद्रग्रहण शाम 5ः01 बजे गोवाहाटी मे, 5ः28 बजे पटना में दिखाई दिया।

उसके बाद 6ः22 बजे नईदिल्ली में रेड मून पूर्ण चंद्रग्रहण शुरू हुआ जो मुंबई सहित कई शहरों में 6ः29 बजे तक देखा गया। रात्रि 7ः38 बजे चंद्रग्रहण आंशिक ग्रहण में परिवर्तित हो गया। रात 8ः41 बजे के बाद चंद्रमा अपने मूल स्वरूप में चमकता हुआ दिखा।

प्राचीन परम्पराओं के अनुसार, कई मंदिरों में पूर्ण चंद्रग्रहण के कारण आरती का समय बदला गया। ग्रहण का सूतक मानकर कई लोगों ने नए कार्य शुरू नहीं किए। ग्रहण के पश्चात लोगों ने स्नान कर जगह-जगह पूजा-पाठ किए और दान-पुण्य किया।

ऐसे होता है चंद्रग्रहण
एजुसेट, नई दिल्ली के प्रोजेक्ट अधिकारी नवनीत गुप्ता ने बताया कि चंद्रग्रहण चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ने के कारण दिखाई देता है। चन्द्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा से 50 झुकी हुई है। सूर्य के चारों ओर घूमते हुए कभी-कभी सूर्य, पृथ्वी व चंद्रमा एक सीधे में आ जाते हैं। चंद्रमा का अपना कोई प्रकाश नहीं है।

चंद्रमा पर सूर्य को जो प्रकाश पडता है, वह पलटकर हमें चमकीले चांद के रूप में दिखता है। लेकिन जब सूर्य और चंद्रमा के बीच में पृथ्वी आ जाती है तो उसकी छाया सीधे चंद्रमा पर पड़ती है, ऐसे समय वह तांबई, सिंदूरी या भूरे रंग का दिखाई देता है।

उन्होंने बताया कि पूर्णिमा पर जब सूर्य व चंद्रमा के बीच पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है तो चंद्रमा का कुछ भाग धूमिल होकर चाप के आकार में कटा हुआ रहता है और पृथ्वी से नहीं दिखाई देता। इसे खंड या आंशिक चंद्रग्रहण कहते हैं। जब पृथ्वी की छाया समूचे भाग पर पड़ती है तो चंद्रमा अंधकारमय हो जाता है, जिसे पूर्ण ग्रहण ( टोटल इक्लिप्स) कहते है। चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण की अपेक्षा कम होता है लेकिन निर्दिष्ट क्षेत्र में यह सूर्यग्रहण की अपेक्षा अधिक बार दिखाई पड़ता है।

स्वच्छता अभियान को गति देने पर विचार, कल से अनंतपुरा क्षेत्र में चलेगा

कोटा। स्वच्छता महा अभियान के तहत बुधवार को कोटा व्यापार महासंघ, दी एसएसआई एसोसियेशन एवं एलेन केरियर  ने संयुक्त रूप से बैठक कर कोटा शहर में स्वच्छता के लिए गति देने पर विचार विमर्श किया।

बैठक में कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने बताया कि महासंघ की टीम द्वारा पुरोहित जी की टापरी हरिओम नगर जैसे क्षेत्रों का अवलोकन करने के बाद पाया कि वहां भारी मात्रा में गंदगी व्याप्त है। जिससे लोगों में बीमारियां फैल रही है। अतः हम सभी मिलकर संयुक्त रूप से इन क्षेत्रों को चिन्हित करें, जहाँ सबसे ज्यादा गंदगी है, वहां इन क्षेत्रों में प्राथमिकता से अभियान चलाकर इन्हें गंदगी मुक्त करें।

उन्होंने बताया कि इसी के तहत 1 फरवरी को दोपहर 1.00 बजे अनन्तपुरा एवं औद्योगिक क्षेत्रों में यह स्वच्छता महा अभियान चलाया जायेगा। 3 फरवरी को दी एसएसआई एसोसियेशन व गोबरियां बावड़ी व्यापार संघ द्वारा गोबरियां बावड़ी एवं औद्योगिक क्षेत्र में यह अभियान चलाया जायेगा। इसके पश्चात् पुरोहित जी की टापरी हरिओम नगर, शिवपुरा, इन्द्रा गाँधी नगर, गोविन्द नगर, प्रेम नगर जैसे पिछड़े क्षेत्रों में भी यह स्वच्छता अभियान चलाया जायेगा।

ऐलन के निदेशक माहेश्वरी का स्वागत
कोटा व्यापार महासंघ के अध्यक्ष क्रांति जैन एवं महासचिव अशोक माहेश्वरी, दी एस.एस.आई. एसोसियेशन के अध्यक्ष प्रेम भाटिया एवं सचिव राजकुमार जैन ने बताया कि ऐलन स्वच्छता टीम के 110 सदस्यों द्वारा शहर में की जा रही स्वच्छता से शहर के कई क्षेत्रों में सुधार हुआ है। लेण्ड मार्क सिटी को ऐलन एवं  चम्बल हॉस्टल एसोसियेशन द्वारा आदर्श स्वच्छ शहर बनाये जाने पर कोटा व्यापार महासंघ एवं दी एसएसआई एसोसियेशन द्वारा ऐलन के निदेशक राजेश माहेश्वरी का हार्दिक अभिनन्दन किया गया।

इस अवसर पर ऐलन केरियर के निदेशक राजेश माहेश्वरी ने कहा कि हमारी यह टीम निरंतर सदैव चलती रहेगी और हमे सूचित किये जाने पर दो दिन के अन्दर उस क्षेत्र की सफाई कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में कोटा व्यापार महासंघ द्वारा शहर में करीब दस हजार डस्टबिन बंटवायां जाना इतना बड़ा लक्ष्य है।

आने वाले समय में व्यापार महासंघ की सभी 150 व्यापारिक और औद्योगिक संगठनो एवं समाजसेवी संस्थाओं को इस पुनीत कार्य में अपना सहयोग देने के लिए प्रेरित करें निश्चित रूप से हम सबके प्रयासों से आने वाले समय में कोटा स्वच्छ सुन्दर शहरों में अपना नाम दर्ज करवायेगा। उन्होंने कहां पिछले तीन माह में सभी के संयुक्त प्रयासों से कोटा शहर में स्वच्छता के लिए काफी कार्य हुआ है लेकिन अगर इसकों सम्पूर्ण रूप देना है तो सभी को आगे आना होगा तभी जाकर यह मिशन सफल होगा।

हाड़ौती कोटा स्टोन इण्डस्ट्रीज एसोसियेशन के अध्यक्ष छुट्टन लाल शर्मा एवं महासचिव मुकेश त्यागी, अनन्तपुरा व्यापार संघ के अध्यक्ष आमीन पठान एवं सचिव डॉ. अशोक झालानी ने बताया कि इस अभियान में नगर निगम के महापौर महेश विजय, उपमहापोर सुनिता व्यास एवं उपायुक्त राजेश डागा साथ ही कोटा व्यापार महासंघ के अध्यक्ष क्रांति जैन एवं महासचिव अशोक माहेश्वरी एवं नगर निगम की स्वच्छता टीम भी शामिल होगी।  बैठक में दी एसएसआई. एसोसियेशन के अध्यक्ष प्रेम भाटिया, सचिव राजकुमार जैन भी मौजूद थे।

निवेशकों की बिकवाली से सेंसेक्स 69 अंक फिसला

मुंबई। बुधवार को बॉम्बे शेयर बाजार का सेंसेक्स 69 अंक टूटकर 36,000 अंक के नीचे बंद हुआ। वैश्विक स्तर पर मिले-जुले रुख के बीच खुदरा निवेशकों की बिकवाली और ताजा पूंजी निकासी से बाजार में गिरावट आई। एक फरवरी यानी गुरुवार को बजट पेश होने वाला है। ऐसे में शेयर बाजार पर भी इसका दबाव साफ नजर आया।

बजट पेश होने से पहले निवेशक बाजार से दूर नजर आए। तीस शेयरों वाले सेंसेक्स में पूरे कारोबार के दौरान गिरावट का रुख रहा और अंत में 68.71 अंक या 0.19 प्रतिशत की गिरावट के साथ 35,965.02 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 35,818.41 से 36,050.69 अंक के दायरे में रहा।

सेंसेक्स कल 249.52 अंक की गिरावट के बाद रेकॉर्ड स्तर से नीचे आ गया। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 21.95 अंक या 0.20 प्रतिशत की गिरावट के साथ 11,027.70 अंक पर बंद हुआ। अस्थाई आंकड़ों के अनुसार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने शुद्ध रूप से कल 105.56 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे। वहीं घरेलू सस्थागत निवेशकों ने 281.65 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

मोदी सरकार की रफ़्तार को ‘बांध’ सकती हैं तेल की बढ़ती कीमतें

नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी का एनर्जी रिफॉर्म जल्द ही अपनी सबसे कठिन परीक्षा को झेल सकता है। 2014 में मोदी सरकार के केंद्र में आने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में काफी कमी आई। इसके चलते मोदी सरकार का खजाना भरा और ईंधन की कीमतें भी नियंत्रित रखने में सफलता मिली। अब तस्वीर बदल गई है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक देश के इंपोर्ट बिल का करीब पांचवां हिस्सा देने वाले पेट्रोलियम बाजार ने अब अपनी दिशा बदल दी है। इस बीच लंबा चुनावी मौसम भी आ रहा है, जो 2019 के आम चुनावों तक जाएगा। ऐसे में आशंका खड़ी हो गई है कि आर्थिक सुधारों के मोर्चों पर दौड़ रही मोदी सरकार पर लोकलुभावन होने का तकाजा भारी पड़ जाए।

ऐसा हुआ तो यह सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के लिए बुरी खबर है। देश के पंपों पर ईंधन की कीमतें रेकॉर्ड स्तर पर हैं। ईंधन पर सरकार ने टैक्स में भी इजाफा कर रखा है। ऐसे में लोगों की नाराजगी का खतरा अब इसे और आगे बढ़ाने की संभावनाओं को खत्म करता नजर आ रहा है।

ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के ऐनालिस्ट कुणाल अग्रवाल और कर वाई ली के मुताबिक ऐसी स्थिति में मोदी सरकार के सामने दो ही रास्ते हैं। ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के 29 जनवरी के नोट के मुताबिक मोदी सरकार या तो एक्साइज ड्यूटी में कटौती का रास्ता अपना सकती है या ईंधन की कीमतों पर फिर से नियंत्रण लागू कर सकती है।

इसके भी दो खतरे हैं। नोट के मुताबिक अगर एक्साइज ड्यूटी घटाई गई तो इसका असर राज्यों के वित्त पर पड़ेगा और अगर कीमत नियंत्रित की गई तो पेट्रोलियम कंपनियों की सेहत खराब होगी। उधर, विपक्ष पहले ही ईंधन की बढ़ती कीमतों को मुद्दा बना चुका है।

सार्वजिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों आईओसी, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने 1 नवंबर के 14 दिसंबर के बीच भी कीमतों में संशोधन नहीं किया। इस दौरान गुजरात और हिमाचल में विधानसभा चुनाव हुए। बीजेपी को दोनों राज्यों में जीत मिली। कीमतें कम होने की बजाय इस दौरान बढ़ी हीं। इस दौरान डीजल करीब एक फीसदी महंगा हुआ।

केआर चोकसे शेयर्स ऐंड सिक्यॉरिटीज प्राइवेट लिमिटेड के ऐनालिस्ट वैभव चौधरी के मुताबिक वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रहीं हैं। इसके बावजूद वह भारत में ईंधन की कीमतों में और इजाफे की उम्मीद नहीं कर रहे हैं। उनके मुताबिक संभवतः सरकार एक बार फिर कीमतों को नियंत्रित कर सकती है। पिछले छह महीनों में कच्चे तेल की कीमतों के ग्लोबल बेंचमार्क में करीब 31 फीसदी का इजाफा हुआ है। 24 जनवरी को यह तीन साल के अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा था।

बजट से पहले बाजार में गिरावट, लाल निशान में खुले सेंसेक्स और निफ्टी

नई दिल्ली। 1 फरवरी को आनेवाले केंद्रीय बजट से पहले बुधवार को शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला। 36,000 का आंकड़ा छूने के बाद सेंसेक्स पहली बार इसके नीचे खुला। इसमें 82 अंकों की गिरावट आई और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का यह सूचकांक 35,951 पर खुला जबकि निफ्टी गिरावट के बावजूद 11,000 का आंकड़े पर कायम रहने में कामयाब रहा। इसमें 31 अंकों की गिरावट आई और नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का यह सूचकांक 11018 अंकों पर खुला।

बुधवार को शुरुआती कारोबार में 413 शेयरों ने तेजी पकड़ी तो 639 शेयर टूटते दिखे जबकि 140 शेयरों की कीमतें स्थिर थीं। इस दौरान भारती एयरटेल, टाटा स्टील और इंडियन ऑइल के शेयरों की कीमतें सबसे ज्यादा उछलीं जबकि हिंदुस्तान यूनिलिवर, डॉ. रेड्डीज लेबरेटरजी और इंडियाबुल्स हाउजिंग जैसे शेयर सबसे ज्यादा टूटे।

बुधवार को भी मिडकैप्स शेयरों में गिरावट बरकरार रही। बाजार खुलने के बाद निफ्टी मिडकैप में करीब 0.40 प्रतिशत की गिरावट के साथ ट्रेडिंग हो रही थी। बहरहाल, 9:49 बजे सेंसेक्स 48.69 अंक टूटकर 35,985 और निफ्टी 12.55 पॉइंट्स की गिरावट के साथ 11,037 पर ट्रेड कर रहे थे।