नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों में ईपीएफओ ने पीएफ से जुड़े नियमों में कई बड़े बदलाव किए हैं। अगर आपकी सैलरी से हर महीने पीएफ कटता है, तो ये बदलाव सीधे आप पर असर डालेंगे। नया ईपीएफओ पोर्टल, एक राष्ट्रीय डेटाबेस, क्लेम करने का नया सिस्टम, ब्याज मिलने का बदला तरीका और नई ईपीएफ स्कीम 2026, आखिर इन सबका मतलब क्या है?
क्या अब पीएफ निकालना पहले से आसान हो जाएगा? नौकरी बदलने पर क्या अब भी पुराने ईपीएफओ ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ेंगे? इमरजेंसी में कितने पैसे निकाल सकेंगे? और क्या अब पीएफ का ब्याज भी जल्दी मिलेगा? आइए जानते हैं।
पहले ईपीएफओ के हर क्षेत्रीय कार्यालय का अपना अलग डेटाबेस होता था। अब ईपीएफओ ने सेंट्रलाइज्ड आईटी इनेबल्ड सर्विसेज (CITES) प्रोजेक्ट के तहत अपने सभी सदस्यों का डेटा एक ही राष्ट्रीय डेटाबेस में स्थानांतरित कर दिया है। यानी अब अलग-अलग क्षेत्रीय कार्यालयों में अलग-अलग डेटाबेस रखने की व्यवस्था खत्म हो गई है। इससे किसी भी अधिकृत ईपीएफओ कार्यालय से सेवाएं मिल सकेंगी।
नए ईपीएफओ पोर्टल पर सुविधाएं
नए ईपीएफओ सदस्य पोर्टल पर लॉगिन करते ही एक ही जगह पर सदस्यता से जुड़ी पूरी जानकारी मिलेगी। इसमें पीएफ बैलेंस, क्लेम की स्थिति, पेंशन योग्य सेवा का रिकॉर्ड और अब तक मिले सभी लाभ दिखाई देंगे। पहले यह जानकारी अलग-अलग सिस्टम में बंटी हुई रहती थी।
क्लेम करने से पहले ही पता चल जाएगी गलती
अब किसी भी पीएफ क्लेम को प्रोसेस करने से पहले उसका स्वतः सत्यापन (प्री-वैलिडेशन) होगा। अगर आवेदन में कोई कमी या गलती होगी, तो उसकी जानकारी पहले ही एसएमएस और पोर्टल के माध्यम से दे दी जाएगी। इससे क्लेम रिजेक्ट होने की संभावना कम होगी और पहली बार में ही क्लेम मंजूर होने की संभावना बढ़ेगी।
अब पहले से पता होगा कितना पैसा निकाल सकते हैं
पहले कई सदस्य यह नहीं जानते थे कि अलग-अलग श्रेणियों में वे कितनी राशि निकाल सकते हैं। ऐसे में तय सीमा से अधिक राशि का आवेदन करने पर क्लेम खारिज हो जाता था। अब पोर्टल पर यह भी दिखाई देगा कि किस श्रेणी में कितनी राशि निकाली जा सकती है। इससे सदस्य सही राशि के लिए आवेदन कर सकेंगे।
क्लेम का होगा खुद निपटारा
पूरी तरह केवाईसी से जुड़े और सत्यापित पांच लाख रुपये तक के एडवांस क्लेम अब ऑटो सेटलमेंट के जरिए निपटाए जाएंगे। पहले यह सीमा 1 लाख रुपये थी, जिसे बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया गया है।
ऑनलाइन ही सदस्य से जानकारी मांगेगा
अगर क्लेम की जांच के दौरान किसी अतिरिक्त जानकारी या स्पष्टीकरण की जरूरत होगी, तो ईपीएफओ ऑनलाइन ही सदस्य से जानकारी मांगेगा। सदस्य भी ऑनलाइन जवाब दे सकेंगे। इससे ईपीएफओ कार्यालय के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे और क्लेम का निपटारा तेजी से होगा। अब क्लेम का भुगतान केंद्रीय भुगतान प्रणाली के जरिए किया जाएगा। क्लेम मंजूर होने वाले दिन ही पैसा सीधे सदस्य के बैंक खाते में भेज दिया जाएगा।
पीएफ निकासी के नियम में बदलाव
अब पीएफ से पैसे निकालने के नियम भी आसान कर दिए गए हैं। पहले आंशिक निकासी के लिए 13 अलग-अलग नियम थे, लेकिन अब इन्हें सिर्फ तीन श्रेणियों में बांटा गया है।
- पहली श्रेणी है ‘आवश्यक जरूरतें’, इसमें बीमारी, पढ़ाई और शादी जैसी जरूरतें शामिल हैं।
- दूसरी श्रेणी है ‘आवास संबंधी जरूरतें’, इसके तहत घर खरीदना, घर बनाना, जमीन खरीदना, होम लोन चुकाना और घर की मरम्मत या रेनोवेशन जैसे कामों के लिए पीएफ से पैसे निकाले जा सकते हैं।
- तीसरी श्रेणी है ‘विशेष परिस्थितियां’, इसमें वे हालात शामिल हैं, जो पहली दो श्रेणियों में नहीं आते।
हालांकि, एक बात का ध्यान रखना जरूरी है। अब भी पीएफ का पूरा पैसा कभी भी नहीं निकाला जा सकता। नई व्यवस्था के तहत खाते में कम से कम 25 प्रतिशत राशि रखना जरूरी होगा। यानी अगर आपके पीएफ खाते में 1 लाख रुपये जमा हैं, तो सामान्य स्थिति में कम से कम 25 हजार रुपये खाते में रहेंगे। बाकी तय नियमों के अनुसार निकाले जा सकेंगे।
अगर इलाज के लिए पैसे चाहिए, तो सदस्य अपने या परिवार के किसी सदस्य के इलाज के लिए 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद पीएफ से राशि निकाल सकता है। वहीं, अगर पढ़ाई के लिए पैसे चाहिए, तो अपनी या परिवार के किसी सदस्य की शिक्षा के लिए 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद निकासी की जा सकती है। इसके लिए सदस्य अपने पूरे कार्यकाल में अधिकतम 10 बार पैसे निकाल सकता है।
इसी तरह, अपनी या परिवार के किसी सदस्य की शादी के लिए भी 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद पीएफ से राशि निकाली जा सकती है। शादी के लिए पूरे कार्यकाल में अधिकतम पांच बार निकासी की अनुमति होगी।
नौकरी बदलते ही अपने आप ट्रांसफर होगा पीएफ
अब आधार से जुड़े यूएएन वाले पीएफ खाते नौकरी बदलने पर स्वतः ट्रांसफर हो जाएंगे। इसके लिए अलग से आवेदन करने या पुराने और नए नियोक्ता की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही पहले सदस्य केवल उसी क्षेत्रीय कार्यालय से सहायता ले सकते थे, जहां उनका पीएफ खाता था। अब देश के किसी भी ईपीएफओ कार्यालय से सहायता और जानकारी ली जा सकेगी।
पेंशनर्स को भी मिलेगा फायदा
कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के पेंशनधारक अब किसी भी ईपीएफओ कार्यालय में सेवाएं ले सकेंगे और जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकेंगे। साथ ही केंद्रीय पेंशन भुगतान प्रणाली के तहत किसी भी क्षेत्रीय कार्यालय से मंजूर हुई पेंशन देश के किसी भी बैंक खाते में भेजी जा सकेगी।

