फेडरल रिजर्व में रघुराम राजन समेत तीन दिग्गज भारतीयों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

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वाशिंगटन। अमेरिका में पिछले कई सालों से जारी उच्च मुद्रास्फीति (महंगाई) से निपटने और अपनी आर्थिक नीतियों को नए सिरे से सुधारने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक ‘फेडरल रिजर्व’ ने तीन भारतीयों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।

फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श ने सेंट्रल बैंक की पांच नई टास्क फोर्स में आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन, दिल्ली में जन्मे भारतीय-अमेरिकी अर्थशास्त्री राज चेट्टी और भारतीय मूल की माइक्रोसॉफ्ट की सीनियर एग्जीक्यूटिव आशा शर्मा को शामिल किया है।

फेडरल रिजर्व के नए अध्यक्ष केविन वॉर्श ने जो पांच स्पेशल टास्क फोर्स (कमेटियां) बनाई है, उनमें दुनिया के कई दिग्गज शामिल हैं, जैसे बैंक ऑफ इंग्लैंड के पूर्व गवर्नर मर्विन किंग, वॉलमार्ट के पूर्व सीईओ डग मैकमिलन और नोबेल पुरस्कार विजेता थॉमस सार्जेंट।

इस फैसले पर फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श ने कहा, “मुझे गर्व है कि दुनिया के सबसे बेहतरीन एक्सपर्ट्स हमारी संस्था के प्रदर्शन को सुधारने के लिए साथ काम करने को तैयार हुए हैं. हमारा लक्ष्य साफ है कि फेडरल रिजर्व इस मुश्किल समय में अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए सबसे मजबूत स्थिति में रहे।”

राज चेट्टी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में भारतीय-अमेरिकी लोक अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं। वह शिकागो विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री केविन मर्फी के साथ मिलकर डेटा टास्क फोर्स का सह-नेतृत्व करेंगे। यह समूह फेडरल रिजर्व के नीतिगत निर्णयों को प्रभावित करने वाले वास्तविक आर्थिक संकेतों की गुणवत्ता और समयबद्धता में सुधार लाने पर ध्यान केंद्रित करेगा।

भारतीय मूल की आशा शर्मा को इस साल माइक्रोसॉफ्ट के गेमिंग और Xbox का CEO नियुक्त किया गया था। वे वेंचर कैपिटलिस्ट मार्क एंड्रीसेन और स्टैनफोर्ड के अर्थशास्त्री चार्ल्स आई. जोन्स के साथ मिलकर ‘उत्पादकता और रोजगार’ (Productivity and Employment) कमेटी में काम करेंगी।

केविन वॉर्श ने कहा, “मैंने 15 ऐसे लोगों से संपर्क किया जिन्हें मैं जानता हूं और जिन पर मुझे भरोसा है, जिनके विचार विविध हैं। यह पारदर्शिता और नए विचारों की दिशा में एक कदम है। हमारा उद्देश्य मौद्रिक नीति के संचालन में बेहतर निर्णय लेना और उच्च मुद्रास्फीति के इन वर्षों को पीछे छोड़ना है, यह टीम संचार, बैलेंस शीट नीति, आर्थिक आंकड़ों का उपयोग, उत्पादकता और रोजगार, और मुद्रास्फीति ढांचा की जांच करेगी।”