Friday, July 24, 2026
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1 अप्रैल से बदल जाएगी कंपनियों की अकाउंटिंग, नए स्टैंडर्ड नोटिफाई

नई दिल्ली। कंपनियों के लिए 1 अप्रैल से अपनी अकाउंटिंग में खासा बदलाव करना होगा और उन्हें ज्यादा डिटेल के साथ अपने रेवेन्यू के बारे में बताना होगा। सरकार द्वारा गुरुवार को नोटिफाई किए गए नए इंडियन अकाउंटिंग स्टैंडर्ड (आईएनडी एएस) 115 में इससे जुड़े कई प्रावधान किए गए हैं।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक आईएनडी एएस से रेवेन्यू की ज्यादा पारदर्शी अकाउंटिंग में मदद मिलेगी और इसका टेक्नोलॉजी, रियल एस्टेट और टेलिकॉम सहित विभिन्न सेक्टर्स में काम कर रही कंपनियों पर असर पड़ेगा।

फाइनेंशियल स्टेटमेंट में देनी होगी ज्यादा डिटेल
मिनिस्ट्री के नोटिफिकेशन के मुताबिक नए अकाउंटिंग स्टैंडर्ड का उद्देश्य इन सिद्धांतों को स्थापित करना है कि एक एंटिटी को अपने फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में कस्टमर के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट से मिलने वाले रेवेन्यू और कैश फ्लो के नेचर, अमाउंट, टाइमिंग और अनिश्चितता के बारे में उपयोगी जानकारी देनी चाहिए।

अनुमानित आय का देना होगा ब्योरा
इसमें कहा गया कि स्टैंडर्ड में एंटिटी के लिए ‘कस्टमर्स को गुड्स या सर्विसेज को ट्रांसफर किए जाने से उस अमाउंट का वर्णन करने जिससे इन गुड्स या सर्विसेज के एक्सचेंज से उससे होने वाली अनुमानित आय जाहिर हो’ को अनिवार्य किया गया है।

एक बार इनके लागू होने के बाद दो अन्य स्टैंडर्ड आईएनडी एएस 18 और 11 वापस ले लिए जाएंगे, जो रेवेन्यू और कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रैक्ट्स से संबंधित हैं। अग्रणी कंसल्टैंसी ईवाई इंडिया ने कहा कि आईएनडी एएस 115 का एंटिटीज पर असर खासा व्यापक होगा और रेवेन्यू के संबंध में खासा बदलाव देखने को मिल सकता है।

सटीक और पारदर्शी होगी अकाउंटिंग
आईसीएआई पूर्व प्रेसिडेंट मनोज फडणीस ने कहा कि नए अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स से ‘ज्यादा सटीक और पारदर्शी अकाउंटिंग’ में मदद मिलेगी। हालांकि उन्होंने कहा कि कंपनियों को अगले फाइनेंशियल ईयर के पहले क्वार्टर में स्टैंडर्ड को लागू करने में खासी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

इन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा होगा असर
ईवाई इंडिया के नेशनल लीडर और पार्टनर (फाइनेंशियल अकाउंटिंग एडवाइजरी सर्विसेज) संदीप खेतान ने कहा कि आईएनडी एएस 115 से विशेषकर ईपीसी, टेक्नोलॉजी, माइनिंग व मेटल, रियल एस्टेट, टेलिकॉम और ई-कॉमर्स जैसे सेक्टर्स की कंपनियों के रेवेन्यू में खासा बदलाव होने जा रहा है।

वोल्वो एक्ससी 60 बनी वर्ल्ड कार ऑफ द ईयर

सुरक्षा के लिहाज से देखें तो यूरो एनसीएपी की रेटिंग में इसे पिछले साल दुनिया की सबसे सेफ कार बताया गया था। भारत में इसको 2017 में लॉन्च किया गया। तब इसकी नई दिल्ली में एक्स शोरूम कीमत 55.90 लाख रुपए रखी गई थी।
वोल्वो एक्ससी 60- एसयूवी को वर्ल्ड कार आॅफ द ईयर 2018 चुना गया है। इस गाड़ी में क्या है ऐसा खास कि इसे मिला यह अवॉर्ड, आइए जानते हैं…

इस कार को न्यूयॉर्क आॅटो शो में यह अवॉर्ड दिया गया है। इसने फाइनल राउंड में पहुंची रेंज रोवर वेलार और माज्दा सीएक्स 5 को पछाड़ दिया। पिछले साल जैगवार एफ पेस को यह अवॉर्ड मिला था। Volvo XC60 को कंपनी ने एसपीए प्लैटफॉर्म पर बनाया है।

इसका ज्यादातर डिजाइन एक्ससी90 एसयूवी से लिया गया है। फ्रंट में कंपनी का सिग्नेचर फ्रंट मल्टी स्लैट ग्रिल है जो कि एलईडी हेडलैम्प्स से लैस है। इस गाड़ी के पिछले हिस्से की बात करे तो इसमें वर्टिकल स्टाइल वाली एलईडी टेल लाइट्स दी गई हैं।

इसके साथ ही रूफ माउंटेड स्पॉइलर और चंकी रियर बंपर देखने को मिलेगा जो कि ड्यूल एग्जॉस्ट पाइप्स से लैस है। इंटीरियर में फ्रंट सीट के लिए मसाज फंक्शन दिया गया है। ब्लाइंड स्पॉट असिस्ट, अडैप्टिव क्रूज कंट्रोल, आॅटोनॉमस ब्रेकिंग सिस्टम, सेमी आॅटोमैटिक पार्किंग आदि फीचर्स हैं जो कि ड्राइवर की मदद करते हैं।

ग्लोबली, यह एसयूवी पेट्रोल और डीजल फ्यूल आॅप्शंस के साथ आतीि है। भारत में इसका केवल एक ही वेरिएंट है। इसमें 2.0 लीटर, 4 सिलिंडर, ट्विन टर्बोचार्ज्ड डीजल इंजन दिया गया है। यह इंजन 233 बीएचपी का पावर और 480 न्यूटन मीटर का टॉर्क जेनरेट करता है।

यह इंजन 8 स्पीड गियरट्रॉनिक आॅटोमैटिक ट्रांसमिशन से लैस है। सुरक्षा के लिहाज से देखें तो यूरो एनसीएपी की रेटिंग में इसे पिछले साल दुनिया की सबसे सेफ कार बताया गया था। भारत में इसको 2017 में लॉन्च किया गया। तब इसकी नई दिल्ली में एक्स शोरूम कीमत 55.90 लाख रुपए रखी गई थी।

भारत में इस गाड़ी का मुकाबला मुख्य रूप से आउडी क्यू5, मर्सेडीज बेंज जीएलसी और बीएमडब्ल्यू एक्स3 आदि कारों से होता है।

एक लाख के बजट में टॉप 5 बाइक्स, देखिए वीडियो

भारतीय टू वीलर्स मार्केट में एक से बढ़कर एक बाइक्स हैं। अगर आप भी बाइक को लेकर क्रेजी हैं और अफोर्डबल कैटिगरी में दमदार इंजन वाली बाइक चाहते हैं तो हम आपके लिए कुछ बाइक्स लाए हैं। देखें…

होंडा सीबी हॉर्नेट 160आर- होंडा ने अपनी नई सीबी हॉर्नेट 160आर को भारत में लॉन्च कर दिया है। इसका स्टाइल पुराने मॉडल जैसा ही है। इसमें एलईडी हेडलाइट है। पूरी तरह डिजिटल कंसोल वाली इस बाइक में 162.7 सीसी का एयर कूल्ड इंजन दिया गया है।

यह इंजन 14.9 हॉर्सपावर की ताकत और 14.5 न्यूटन मीटर टॉर्क जेनरेट करता है। इंजन को 5 स्पीड गियरबॉक्स से लैस किय गया है। 160सीसी सेगमेंट में होंडा की पहली बाइक है जिसमें एबीएस है। कीमत Rs 84,675 (STD), Rs 89,175 (CBS), Rs 90,175 (ABS STD), Rs 92,675 (ABS DLX)

बजाज अवेंजर 220-बजाज की यह क्रूजर एक लाख रुपए से कम कीमत में आपको मिल सकती है। इसमें एलईडी डीआरएल्स हैं। 2005 में बाइक का पहला मॉडल लॉन्च किया गया था। उसके बाद से अब तक यह लोगों की पसंद बनी हुई है। बजाज अवेंजर 220 क्रूजर और स्ट्रीट दो विकल्प में मौजूद है। दोनों में 220 सीसी का सिंगल सिलिंडर इंजन है, जो 19.03 हॉर्सपावर की ताकत और 17.5 एनएम का टॉर्क जेनरेट करता है। इसमें अभी एबीएस की कमी खटकती है। कीमत: Rs 94,464 (एक्स शोरूम)

टीवीएस अपाचे आरटीआर 200 4वी
टीवीएस अपाचे आरटीआर 200 4वी में 197.75 सीसी का सिंगल सिलिंडर एयर और आॅइल कूल्ड इंजन दिया गया है। यह इंजन 4 वॉल्व के साथ आता है। इसके कार्ब्युरेटेड वर्जन में इंजन 20.5 हॉर्सपावर की ताकत और 18.1 न्यूटन मीटर टॉर्क जेनरेट करता है। कीमत: 95,185 रुपए

बजाज पल्सर 200एनएस
यह लिस्ट में बजाज की दूसरी बाइक है। इसमें 199.5 सीसी का सिंगल सिलिंडर, लिक्विड कूल्ड इंजन लगा है। यह इंजन 23.5 हार्सपावर की ताकत और 18.3 न्यूटन मीटर टॉर्क जेनरेट करता है। इसकी शुरुआती एक्स शोरूम कीमत 98,714 रुपए है।

सुजुकी जिक्सर एसएफ
इस बाइक में सुजुकी ने 154.9 सीसी इंजन दिया गया है। यह इंजन 14.8 हॉर्सपावर की ताकत और 14 न्यूटन मीटर टॉर्क जेनरेट करता है। इसकी शुरुआती एक्स शोरूम कीमत 96,386 रुपए है।

आयकर विभाग ने सार्वजिनक किये बड़े डिफॉल्टर्स के नाम

490 करोड़ रुपये की टैक्स देनदारी बकाया

नई दिल्ली। आयकर विभाग ने गुरुवार को पैन इंडिया एक सूची जारी की है। इनमें डिफॉल्ट करने वाले 24 व्यक्ति और कंपनियां है जिन पर टैक्स के रूप में 490 करोड़ रुपये की देनकारी बनती है। लेकिन ये या तो पकड़ से बाहर हैं या फिर इन्होंने बकाया के भुगतान के लिए अपर्याप्त परिसंपत्ति का हवाला दिया है।

विभाग ने एक नेम एंड शेम डिफॉल्टर्स पॉलिसी के तहत तमाम अखबारों में एक विज्ञापन जारी किया है। इसका शीर्षक है लिस्ट ऑफ डिफॉल्टर्स ऑफ इनकम टैक्स एंड कॉरपोरेट टैक्स है। दिल्ली के इनकम टैक्स के प्रिंसिपल डायरेक्टर जनरल के नोडल ऑफिस ने नोटिस जारी किया है, इसमें सभी डिफॉल्टर्स से तुरंत प्रभाव से कर अदा करने के लिए कहा है।

सार्वजिनक घोषणा में कंपनी या इंडिविज्युल की पहचान, कंपनी के डायरेक्टर्स व पार्टनर्स के नाम, कंपनी के इनकॉरपोरेशन की तारीख या फिर इंडिविज्युल के केस में जन्म तिथि, उनके पर्मानेंट एकाउंट नंबर (पैन) या टैक्स डिडक्शन एकाउंट नंबर (टैन), उनका आखिरी सूचना के मुताबिक पता और बिजनेस प्रोफाइल, डिफॉल्ट की गई राशि, आंकलन वर्ष और संबंधित अधिकार क्षेत्र का IT प्राधिकरण के संबंध में जानकारी दी गई है।

ये डिफॉल्ट करने वाली कंपनियां फूड प्रोसेसिंग, बुलियन ट्रेडिंग, सॉफ्टवेयर, रियल एस्टेट, ब्रूअरीज और इनगोट आदि जैसे बिजनेस सेक्टर्स से हैं। 86.27 करोड़ रुपये का सबसे ज्यादा टैक्स बकाया दिल्ली की स्टॉक गुरु, इंडिया और उसके साझेदार लोकेश्वर देव कंपनी पर है। नोटिस में बताया गया है कि असेसी पकड़ से बाहर हैं और उनके पास आयकर भुगतान के लिए अपर्याप्त परिसंपत्ति हैं।

CBSE पेपर लीक: दिल्ली के कोचिंग सेंटरों पर छापे, छात्रों ने किया प्रदर्शन

नई दिल्ली। सीबीएसई के 10वीं के गणित और 12वीं के अर्थशास्त्र का पेपर लीक होने और फिर से परीक्षा कराए जाने को लेकर स्टूडेंट्स और पैरंट्स में आक्रोश है। दिल्ली में गुरुवार को वे जंतर-मंतर पर जुटे और सीबीएसई के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया। वहीं पुलिस ने दोषियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस को शक है कि पेपर लीक के पीछे दिल्ली के कोचिंग सेंटरों का हाथ हो सकता है। गुरुवार दोपहर द्वारका, रोहिणी, राजेंद्र नगर में कोचिंग सेटरों पर छापे भी मारे गए। इस मामले के मास्टरमाइंड बताए जा रहे विद्या कोचिंग सेंटर के मालिक विक्की को हिरासत में लिया गया है। क्राइम ब्रांच ने सीबीएसई से जानकारी भी मांगी है।

उधर, सरकार भी इस मामले पर सफाई देने के लिए सामने आई है। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि पेपर लीक की घटना दुखद है। वह छात्रों और उनके परिजनों की परेशानी को समझते हैं। उन्होंने कहा कि वह खुद भी एक पैरंट हैं। इस घटना से वह भी सो नहीं पाए हैं। पेपर लीक की घटना में शामिल किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस जल्द ही उन्हें गिरफ्तार करेगी।

बता दें कि बुधवार को पेपर लीक की खबरों के बाद सीबीएसई ने फिर से परीक्षा कराने की घोषणा की थी। पेपर लीक केस में सीबीएसई अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों और पैरंट्स का कहना है कि या तो सभी विषयों की परीक्षा फिर से होनी चाहिए या फिर किसी भी विषय की नहीं।

पैरंट्स का कहना है कि परीक्षा के लिए बच्चों के ऊपर मनोवैज्ञानिक दबाव होता है। जिन बच्चों ने पूरी मेहनत और ईमानदारी से अपनी परीक्षा दी उन्हें भी फिर से परीक्षा के तनाव से गुजरना होगा।

 दोषियों को सजा देने का भरोसा
सीबीएसई की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही इन लोगों को पकड़ लिया जाएगा। दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी कहा है कि भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो इसके लिए लीक प्रूफ प्रणाली विकसित की जाएगी।

बता दें कि पेपर लीक और फिर से परीक्षा कराने को लेकर सीबीएसई की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पीएम मोदी ने भी पेपर लीक को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है और फोन पर मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जवाड़ेकर से बात की।

बता दें कि इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि पेपर लीक करने वालों ने सोमवार शाम को 12वीं अर्थशास्त्र की हाथ से लिखी हुई आंसर शीट सीबीएसई ऐकडमिक यूनिट को ही भिजवा दिया। आपको बता दें कि 12वीं अर्थशास्त्र की परीक्षा मंगलवार को थी। ऐसे में सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब एक दिन पहले ही सीबीएसई दफ्तर को लीक पेपर मिला तो परीक्षा होने से पहले ही क्यों नहीं कैंसल कर दी गई।

ई-वे बिल जॉब वर्कर को भी बनाना होगा, स्पष्टीकरण जारी

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नई दिल्ली। देश भर में ई-वे बिल 1 अप्रैल से लागू होने वाला है। ऐसे में ई-वे बिल के काउंटडाउन में दो दिन बचे हैं। सरकार ने ई-वे बिल सिस्टम आसानी से चले इसके लिए दस नए स्पष्टीकरण कारोबारियों के लिए जारी किए हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि रजिस्टर्ड जॉब वर्कर को ई-वे बिल बनवाना होगा। रेलवे, एयर या जहाज के जरिए गुड्स ट्रांसपोर्ट करने पर रजिस्टर्ड सप्लायर को ही ई-वे बिल बनाना होगा।

सरकार ने जारी किए 10 नए स्पष्टीकरण
1 अगर प्रोडक्ट का ट्रांसपोर्टेशन जॉब वर्क के लिए किया जा रहा है, तो उस केस में सप्लायर या रजिस्टर्ड जॉब वर्कर को ई-वे बिल जेनरेट करना होगा।

2 रेलवे, एयर या जहाज के जरिए गुड्स ट्रांसपोर्ट करने पर रजिस्टर्ड सप्लायर या रेसिपिंट ही ई-वे बिल जेनरेट करेगा। इस केस में ट्रांसपोर्टर ई-वे बिल जेनरेट नहीं करेगा। गुड्स की डिलीवरी के समय ई-बिल होना जरूरी होगा।

3 देश भर में इंटर स्टेट ई-वे बिल यानी एक राज्य से दूसरे राज्य में स्टॉक भेजने या मंगाने के लिए इंटर स्टेट ई-वे बिल 1 अप्रैल 2018 से लागू होग। इससे पहले तक ई-वे बिल अपनी इच्छा से बनवा सकते हैं।

4 कारोबारी को ई-वे बिल की वेबसाइट https://ewaybillgst.gov.in पर जाकर रजिस्टर करना होगा। वह अपने जीएसटीआईएन नंबर से रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इसके लिए उन्हें 1 अप्रैल 2018 का इंतजार करने की जरूरत नहीं है।

5 ई-वे बिल तभी बनवाने की जरूरत है जब गुड्स की वैल्यू टैक्स मिलाकर 50 हजार रुपए से ज्यादा है। इसमें जीएसटी में टैक्स छूट के दायरे में आने वाले प्रोडक्ट और जिन प्रोडक्ट को ई-वे बिल बनवाने से छूट मिली है उनके लिए ई-वे बिल नहीं बनाना होगा। वह 50 हजार रुपए की गिनती में भी शामिल नहीं होंगे।

6 अगर ट्रांसपोर्ट किए जाने वाले गुड्स की कीमत 50 हजार रुपए से कम है तो ई-वे बिल नहीं बनाना होगा। अगर एक व्हीकल में अगर एक से ज्यादा ट्रेडर्स के गुड्स जा रहे हैं और हर एक के कन्साइनमेंट की वैल्यू 50 हजार रुपए से कम है लेकिन उनके कन्साइनमेंट की वैल्यू 50 रुपए से अधिक भी है तो भी ई-वे बिल बनवाने की जरूरत नहीं होगी।

7 सप्लायर ट्रांसपोर्टर, कुरियर एजेंसी और ई-कॉमर्स ऑपरेटर को पार्ट-A सप्लायर की तरफ से भरने के लिए ऑथराइज्ड कर सकता है।

8 अगर सप्लायर के बिजनेस का प्रिंसिपल प्लेस और ट्रांसपोटर्स के बिजनेस प्लेस के बीच की दूरी 50 किलोमीटर से कम है तो ई-वे बिल का पार्ट-B भरने की जरूरत नहीं होगी। सिर्फ ई-वे बिल का पार्ट-A भरना होगा।

9 ई-वे बिल जेनरेट करने पर उसे रिजेक्ट और अक्सेप्ट करने के लिए 72 घंटे का समय मिलेगा।

10 ई-वे बिल की एक दिन की वैलिडिटी 100 किलोमीटर तक के लिए होगी। दूरी में 100 किलोमीटर बढ़ने पर एक दिन ई-वे बिल की टाइम वैलिडिटी में बढ़ता जाएगा। 

SBI ने FD रेट्स 0.25 प्रतिशत तक बढ़ाए, लोन भी महंगा होगा

मुंबई। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) रेट्स में अचानक 0.10-0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी करके सबको हैरान कर दिया है। माना जा रहा है कि इकॉनमिक रिकवरी के बीच लोन की मांग बढ़ने के चलते उसने यह कदम उठाया है। एसबीआई के एफडी के रेट्स में बढ़ोतरी करने का मतलब यह भी है कि आगे चलकर लोन और महंगा हो सकता है।

देश की बैंकिंग इंडस्ट्री के 25 प्रतिशत हिस्से पर एसबीआई का कब्जा है। अब वह 2 से 10 साल के डिपॉजिट पर 6.6 से 6.75 प्रतिशत का ब्याज ऑफर करेगा। नई दरों को बुधवार से ही लागू कर दिया गया है। तीन महीने से अधिक समय में एसबीआई की यह डिपॉजिट रेट्स में चौथी बढ़ोतरी है।

बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर पी के गुप्ता ने कहा, ‘ब्याज दरों में गिरावट का दौर खत्म हो गया है और शायद इसमें बढ़ोतरी होने लगी है। हालांकि, अभी यह उस लेवल पर नहीं पहुंचा है, जिससे कर्ज महंगा करना पड़े। रेट कट की उम्मीद खत्म हो गई है। हम अपनी दरों में मार्केट रेट के हिसाब से बदलाव कर रहे हैं।’

गुप्ता के बयान से होम लोन बॉरोअर्स को रिजर्व बैंक की 5 अप्रैल की मॉनिटरी पॉलिसी मीटिंग से पहले राहत मिल सकती है। माना जा रहा है कि आरबीआई इस मीटिंग में ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा। एसबीआई ने इससे पहले 28 फरवरी को रिटेल और होलसेल डिपॉजिट रेट्स में 0.10-0.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी।

इसके बाद 1 मार्च को उसने मार्जिनल कॉस्ट बेस्ड लेंडिंग रेट्स (MCLR) में 0.10-0.25 प्रतिशत का इजाफा किया था। बैंक ने एक साल के लिए MCLR रेट को 7.95 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.15 प्रतिशत कर दिया था।

ब्याज दरों में बढ़ोतरी का पहला संकेत तब मिला था, जब बैंकों ने बल्क डिपॉजिट रेट्स में बढ़ोतरी शुरू की थी। एसबीआई ने सबसे पहले यह कदम उठाया था। उसने 1 करोड़ रुपये से अधिक के डिपॉजिट पर एक साल के लिए ब्याज दर बढ़ाकर 6.25 पर्सेंट कर दी थी।

यह बढ़ोतरी दिसंबर 2017 से जनवरी 2018 के बीच की गई थी। इसके बाद एचडीएफसी बैंक, ऐक्सिस बैंक, यस बैंक, इंडसइंड बैंक सबने एक साल के MCLR रेट्स में इजाफा किया था। एक सरकारी बैंक के अधिकारी ने बताया कि एसबीआई मार्केट लीडर है। इसलिए दूसरे बैंक उसे देखकर फैसला करते हैं।

शेयर-मुद्रा बाजार में आज और कल अवकाश : बंबई स्‍टॉक एक्‍सचेंज, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज, विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार और मुद्रा बाजार गुरुवार को महावीर जयंती और शुक्रवार को गुड फ्राइडे के अवसर पर बंद रहेंगे।

कोटा में किशोरसागर पर नाइट क्राफ्ट बाजार शुरू

कोटा। राजस्थान दिवस की शृंखला में शहर में किशोर सागर तालाब की पाल पर बुधवार को तीन दिवसीय नाइट क्रॉफ्ट बाजार का शुभारंभ हुआ। यहां प्रदेश भर से क्राफ्ट से लेकर अन्य फूड आयटम, रेडीमेड की स्टाॅल्स लगे। इनमें अजमेर का हस्तशिल्प, सराहनपुर का फर्नीचर, जयपुर का बंधेज गोटा पत्ती वर्क के कुर्तियां से लेकर धनिया, अंग्रेजी बबूल के शहद, भोपाल, उज्जैन, अजमेर सहित कानपुर से भी अपने प्रोडक्ट को लेकर स्वयंसेवी समूह पहुंचे।

कलेक्टर रोहित गुप्ता ने कहा कि शहर के नागरिकों को दस्तकारी एवं लघु उद्योग के उत्पाद यहां उचित दरों पर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि राजस्थान की गौरवशाली परम्परा के साथ-साथ यहां के स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए उत्पादों की गुणवत्ता लोगों को आकर्षित करती है।

जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक वाईएन माथुर ने बताया कि 30 मार्च तक शहरवासियों के लिए यह बाजार शाम 4 से रात्रि 10 बजे तक खुला रहेगा। इस मौके पर जिला उद्योग अधिकारी हरिमोहन शर्मा, सहायक पर्यटन अधिकारी संदीप श्रीवास्तव उपस्थित रहे।

वहीं, 30 मार्च को सूचना केंद्र सभागार में प्रदेश एवं जिले के विकास के साथ-साथ राजस्थान की विशेषताओं को प्रदर्शित करने वाली गौरवगाथा, किले, झील और अन्य विशेषताओं को प्रदर्शित किया जाएगा। कलेक्टर रोहित गुप्ता ने बताया कि 30 मार्च सुबह 11 बजे सूचना केंद्र के सभागार में विकास प्रदर्शनी का शुभारंभ होगा।

देशभर के 85 लोक कलाकार देंगे प्रस्तुतियां :राजस्थान दिवस पर सांस्कृतिक संध्या में 30 मार्च को देशभर के विभिन्न अंचलों के 85 कलाकार लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी। सहायक पर्यटन अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के 85 लोक कलाकारों का दल 30 मार्च शाम 7 बजे बारहदारी किशोर सागर की पाल पर प्रस्तुति देंगे।

इसमें महाराष्ट्र से लावणी एवं पोवाडा लोक नृत्य में एक दर्जन, गोवा से समई देखणी लोकनृत्य में 15 कलाकार, गुजरात से मेवासी नृत्य में 21 कलाकारों का दल प्रस्तुतियां देगा। भपंग, मयूर, भवई और कालबेलिया लोकनृत्य की प्रस्तुतियां होंगी।

मुकेश अंबानी, सुनील मित्तल को छोड़नी पड़ेगी CMD पोस्ट, सेबी का फैसला

नई दिल्ली। मार्केट रेग्युलेटर सेबी के एक फैसले का असर बीएसई के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स की 30 में से 10 कंपनियों पर पड़ेगा। इस फैसले की वजह से देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंस्ट्रीज के मुकेश अंबानी और भारती एयरटेल के सुनील मित्तल, विप्रो के अजीम प्रेमजी सहित 10 लोगों को अपना सीएमडी पद छोड़ना होगा।

नए नियम के तहत अप्रैल 2020 से ये लोग केवल एक पद अपने पास रख सकेंगे। इसका मतलब यह है कि ये लोग चेयरमैन और एमडी में से एक पद को ही अपने पास रख सकेंगे।

यह है फैसला
दरअसल, मार्केट रेग्‍युलेटर सेबी ने कोटक समिति की उस सिफारिश को मंजूरी दे दी है, जिसमें एमडी या CEO के अलावा चेयरमैन के पद अलग-अलग करने की बात कही गई थी। इसका मतलब है कि इन कंपनियों में कोई एक व्यक्ति सीएमडी नहीं होगा।

यह फैसला मार्केट कैप के लिहाज से टॉप 500 कंपनियों पर लागू होगा। इसके अलावा कंपनी के बोर्ड में इंडिविजुअल डायरेक्टर्स की हिस्सेदारी घटाकर 8 फीसदी कर दी गई है, जो फिलहाल 10 फीसदी है।

इनको छोड़नी होगी कुर्सी
इस फैसले के लागू होने के बाद सेंसेक्स की 10 कंपनियों के सीएमडी को अपना कोई एक पद छोड़ना होगा। इनमें मुकेश अंबानी के अलावा, सुनील मित्तल, पवन मुंजाल शामिल हैं। अभी ये लोग चेयरमैन और एमडी की भूमिका एक साथ निभा रहे हैं।

कब से लागू होगी सिफारिश
सरकार के अधीन आने वाली सेबी की मंजूरी के बाद भी यह सिफारिश अभी दो साल बाद यानी अप्रैल 2020 से लागू होगी। यह फैसला उन टॉप 500 कंपनियों पर लागू होगा जिनकी मार्केट वैल्‍यू सबसे अधिक होगी।

बेसिक सैलरी पर नहीं चलेगी कंपनियों की चालाकी, बढ़ेगा पीएफ का पैसा

नई दिल्‍ली। अब कंपनियां आपकी सैलरी को अलाउंसेज में बांट कर बेसिक सैलरी कम रखने की चालाकी नहीं कर पाएंगी। इससे आपके पीएफ अकाउंट में ज्‍यादा पैसा जाएगा। वेसिक सैलरी पर कंपनियों की चालाकी पर अंकुश लगाने के लिए कर्मचारी भविष्‍य निधि ने वेज की परिभाषा तय करने का फैसला किया है।

इसके तहत अगर बेसिक सैलरी का 50 फीसदी से अधिक अलाउंस रखा जाता है तो इसे भी बेसिक सैलरी का हिस्‍सा माना जाएगा और कंपनी को भी इस पर भी पीएफ काटना होगा। सीबीटी की अप्रैल में होने वाली बैठक में रखा जाएगा प्रस्‍ताव वेज की परिभाषा तय करने की जरूरत क्‍यों पड़ी

मौजूदा समय में ईपीएफ एक्‍ट में वेज की परिभाषा तय नहीं है। इसकी वजह से एम्‍पलॉयर और असेसिंग अथॉरिटी वेज की व्‍याख्‍या अलग अलग तरह से करते हैं। इसके अलावा ईपीएफओ के अधिकारी भी वेज के मुद्दे पर अलग अलग स्‍टैंड लेते हैं।

ईपीएफओ को ऐसी शिकायतें मिल रहीं हैं कि एम्‍पलॉयर बेसिक सैलरी प्‍लस डियरनेस अलाउंस 10 से 30 फीसदी तक दिखाते हैं बाकी सैलरी तमाम अलाउंस जैसे परफार्मेंस अलाउंस, एंटरटेनमेंट अलाउंस, कन्‍वेंस अलाउंस और पर्सनल अलाउंस में बांट देते हैं।

इम्‍पलाई का कम कटता है पीएफ
इम्‍पलाई की बेसिक वेज और डियरनेस अलाउंस कम रहने से उसकी इन हैंड सैलरी तो बढ़ जाती है लेकिन उसका पीएफ कंट्रीब्‍यूशन कम हो जाता है। इससे उसके पीएफ अकाउंट में कम पैसा जाता है। इस तरह से रिटायरमेंट के समय उसके पीएफ फंड में उतना पैसा नहीं होगा जितना उसको रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों को पूरा करने के लिए चाहिए।

नहीं पूरा हो रहा है सोशल सिक्‍योरिटी कवर मुहैया कराने का मकसद
ईपीएफओ के एक वरिष्‍ठ अधिकारी का कहना है कि कंपनियां वेज की तय परिभाषा तय न होने का फायदा उठा कर सैलरी को तमाम अलाउंस में बांट देती हैं। इम्‍पलाई की बेसिक सैलरी कम रखी जाती है। इससे इम्‍पलाई का पीएफ कम कटता है। ऐसे में ईपीएफ एक्‍ट के तहत इम्‍पलाई को सोशल सिक्‍योरिटी कवर मुहैया कराने का मकसद पूरा नहीं हो पाता है। इसकी वजह से इम्‍पलाई की पेंशन भी कम बनती है।