Friday, July 24, 2026
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Jio प्राइम मेंबर्स को बड़ी राहत, शर्तों के साथ जारी रहेंगी फ्री सर्विस

नई दिल्ली। रिलायंस जियो की प्राइम मेंबर्स को लेकर जारी असमंजस की स्थिति पर कंपनी ने तस्वीर साफ कर दी है। कंपनी ने कहा है कि मौजूदा जियो प्राइम मेंबर के लिए अगले एक साल तक यह सब्सक्रिप्शन जारी रहेगा। अहम बात ये है कि इसके लिए अलग से चार्ज नहीं लगेगा। जियो की प्राइम मेंबरशिप की डेट 31 मार्च को समाप्त हो रही थी।

क्‍या कहा कंपनी ने
रिलायंस जियो की ओर से जारी बयान के मुताबिक जिन यूजर ने Jio प्राइम मेंबरशिप के लिए 31 मार्च 2018 या उससे पहले ही सब्सक्राइब किया है, उन्हें कंपनी की ओर से बिना किसी एक्‍स्‍ट्रा चार्ज के प्राइम सर्विस मिलती रहेगी। लेकिन इसके साथ कुछ शर्तें भी हैं।

क्‍या हैं शर्तें
कंपनी ने बताया है कि अगले एक साल तक के लिए फ्री मेंबरशिप के लिए मौजूदा कस्‍टमर्स को दोबारा से एक्‍टिव कराना होगा। इसके लिए प्राइम मेंबर को जियो ऐप पर विजिट करना होगा। मायजियो ऐप में जाने के बाद 12 महीने की कॉम्प्लीमेंट्री मेंबरशिप का ऑप्‍शन आएगा। इस ऑप्‍शन में अपनी रुचि जाहिर करनी होगी। इसके बाद आपकी जियो प्राइम सब्सक्रिप्शन जारी रहेगी। यह ऑफर सीमित समय के लिए है। यह सीमित समय कब तक है, इस बारे में कंपनी ने कोई जानकारी नहीं दी है।

नॉन प्राइम मेंबर को क्‍या करना होगा
अगर आपने अभी तक जियो प्राइम मेंबरशिप नहीं ली है, तो यह मेंबरशिप 99 रुपए में मिलेगी। एक तरह से देखा जाए तो नए जियो प्राइम मेंबर को भी कोई नुकसान नहीं होने वाला।

रिचार्ज पैक पर क्‍या होगा असर
जियो प्राइम सब्सक्रिप्शन के तहत, पहले की तरह यूजर को सस्ते दाम में रिचार्ज पैक और जियो ऐप्स का फ्री सब्सक्रिप्शन मिलता रहेगा। कंपनी ने इस संबंध में कोई नया एलान नहीं किया है। कंपनी का कहना है कि वह आने वाले समय में यूजर को और सुविधाएं मुहैया कराएगी।

ICICI फ्रॉड : CBI ने दीपक कोचर के खिलाफ बिठाई जांच, धूत रडार पर

नई दिल्ली।  केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने आईसीआईसीआई बैंक की एमडी चंदा कोचर के पति दीपक कोचर और वीडियोकॉन ग्रुप के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत के खिलाफ प्रेलिमिनेरी इंक्वायरी शुरू कर दी है। सीबीआई आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वीडियोकॉन ग्रुप को दिए गए 3,250 करोड़ रुपए के लोन में हुए कथित लेनदेन की जांच कर रही है। दरअसल इस मामले में बैंक की सीईओ चंदा कोचर पर हितों के टकराव के आरोप लगे हैं।

एनपीए घोषित हो चुका है 2810 करोड़ रुपए
आईसीआईसीआई बैंक ने वीडियोकॉन ग्रुप को 3,250 करोड़ रुपए का लोन वर्ष 2012 में दिया था, जिसमें से 2,810 करोड़ रुपए नहीं लौटाए गए। बैंक ने वर्ष 2017 में इसे एनपीए घोषित कर दिया था।

आईसीआईसीआई बैंक ने इस मामले में अपनी एमडी चंदा कोचर का बचाव करते हुए कहा था कि उनका बैंक 20 बैंकों के कंसोर्टियम का हिस्सा भर था। इस कंसोर्टियम ने वीडियोकॉन ग्रुप को 40 हजार करोड़ रुपए का लोन दिया था। आईसीआईसीआई बैंक के बोर्ड ने कोच्चर में पूरा भरोसा जताया, वहीं उनके करीबी सूत्रों ने कहा कि रेग्युलेटरी क्वेरीज का 2016 संतोषजनक जवाब दे दिया गया था और जब वीडियोकॉन को लोन दिया गया था तो कोई हितों का टकराव सामने नहीं आया।

सेबी ने भी शुरू की जांच
आईसीआईसीआई बैंक पर मार्केट रेग्युलेटर सेबी की भी नजर है। सेबी ने किसी भी संभावित डिसक्लोजर और कॉरपोरेट गवर्नैंस से संबंधित खामियों के मामले में जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही आईसीआईसीआई बैंक और कुछ सरकारी बैंकों सहित लेंडर्स ग्रुप से लोन लेने में ‘लेनदेन’ के आरोपों के कारण वीडियोकॉन और इंडस्ट्रीज और उसके प्रमोटर भी सेबी के रडार पर आ गए हैं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मार्केट रेग्युलेटर ने प्राइवेट सेक्टर के बैंक द्वारा बीते कुछ साल के दौरान किए गए कई डिसक्लोजर्स को लेकर प्राथमिक जांच भी शुरू कर दी गई है। वहीं स्टॉक एक्सचेंज 2012 में हुई डीलिंग के संबंध में हाल में मीडिया में आईं रिपोर्ट्स को लेकर अतिरिक्त क्लैरिफिकेशन भी मांग सकते हैं।
1.18 लाख करोड़ रुपए के मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से आईसीआईसीआई बैंक देश का चौथा वैल्युएबल बैंक है और उसके शेयर बेंचमार्क स्टॉक मार्केट इंडेक्स सेंसेक्स में शामिल हैं।

कोचर के सपोर्ट में आया बैंक का बोर्ड
आईसीआईसीआई बैंक के चेयरमैन एमके शर्मा ने हाल में कहा था कि बोर्ड लोन के इंटरनल प्रॉसेस का रिव्यू कर चुकी है। लोन सीधे वीडियोकॉन ग्रुप को डिस्बर्स नहीं किया गया था, बल्कि यह एक एस्क्रो पूल अकाउंट में भेजा गया था। वीडियोकॉन ग्रुप को सैंक्शन होने वाले शेयर 10 फीसदी से भी कम हैं।

उनका कहना है कि चंदा कोचर वीडियोकॉन को कर्ज दिए जाने के मामले में सिर्फ इवैल्युएटिंग के लिए क्रेडिट पैनल में थीं। वह क्रेडिट पैनल की हेड नहीं थीं। इससे पहले बैंक ने कहा, ‘बोर्ड इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि किसी लेनदेन/मिलीभगत/हितों के टकराव का कोई सवाल ही नहीं उठता, जैसा कई अटकलबाजी में आरोप लगाए गए हैं। बोर्ड का बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर पर पूरा भरोसा है।’

20 बैंकों के कंसोर्टियम ने दिया लोन
आईसीआईसीआई बैंक के अनुसार 2012 में 20 बैंकों के कंसोर्टियम ने नियमों के मुताबिक विडियोकॉन ग्रुप को 40 हजार करोड़ रुपए का लोन देने का फैसला किया था। जिसमें से ICICI बैंक ने भी 3250 करोड़ रुपए का लोन दिया। बैंक ने यह लोन उसी तरह की नियम और शर्तों पर दिया है जिस तरह के नियम शर्तों पर समूह के दूसरे बैंकों ने दिया है, ऐसे में वीडियोकॉन ग्रुप को विशेष लाभ दिए जाने की संभावना ही नहीं उठती।

चंदा कोचर पर उठे थे ये सवाल
-इससे पहले एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि वीडियोकॉन ग्रुप को आईसीआईसीआई बैंक ने 3250 करोड़ रुपए का लोन दिया था। यह लोन पूरा नहीं चुकाया गया। बाद में वीडियोकॉन की मदद से बनी एक कंपनी आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की अगुअाई वाले ट्रस्ट के नाम कर दी गई।
-रिपोर्ट में दावा किया गया है, ‘‘वीडियोकॉन ग्रुप की पांच कंपनियों को अप्रैल 2012 ने 3250 करोड़ रुपए का लोन दिया गया था। ग्रुप ने इस लोन में से 86% यानी 2810 करोड़ रुपए नहीं चुकाए। इसके बाद लोन को 2017 में एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग असेट्स) घोषित कर दिया गया।’’
-दिसंबर 2008 में वीडियोकॉन ग्रुप के मालिक वेणुगोपाल धूत ने चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के साथ मिलकर एक कंपनी न्यूपावर रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड बनाई। इसमें कोचर के परिवार और धूत की हिस्सेदारी 50-50 फीसदी की थी। दीपक कोचर को इस कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया।
-जनवरी 2009 में धूत ने इस कंपनी में डायरेक्टर का पद छोड़ दिया। उन्होंने ढाई लाख रुपए में अपने 24,999 शेयर्स भी न्यूपावर में ट्रांसफर कर दिए।
-आरोप हैं कि 2010 से 2012 के बीच धूत की कंपनी ने कोचर की कंपनी को लोन दिया। आखिर में 94.99 फीसदी होल्डिंग वाले शेयर महज 9 लाख रुपए में चंदा कोचर के पति की अगुआई वाली कंपनी को मिल गए।

टोयोटा यारिस: भारत में लॉन्च होगी यह प्रीमियम सिडैन, देखिए वीडियो

टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने हाल ही आॅटो एक्सपो में अपनी नई कार, यारिस को पेश किया था। इसको भारत में 24 अप्रैल को लॉन्च किया जाना है। आइए, लॉन्च से पहले ही आपको बताते हैं इस कार से जुड़ी अहम बातें…
यह एक प्रीमियम सिडैन है। इसकी आॅफिशल बुकिंग्स 22 अप्रैल से ओपन हो जाएंगी।

हालांकि, नई दिल्ली में कुछ डीलर्स ने इसकी बुकिंग शुरू कर दी है। आइए जानते हैं इसके बारे में…इस कार को भारत में 18 मई को लॉन्च किया जाना है। यह इंटरनैशनल मार्केट में पहले से ही Yaris Ativ और Vios नामों से बिक रही है। लुक्स के मामले में यह काफी बोल्ड डिजाइन वाली कार लगती है। इसमें प्रॉजेक्टर हेडलैम्प्स हैं जो कि एलईडी लाइट्स, एलईडी डीआरएल्स से लैस हैं। इसमें 15 इंच के अलॉय वील्ज दिए गए हैं।

कैबिन के भीतर देखें तो दो कलर टोन देखने को मिलता है। इसमें बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम है जो कि ऐपल कारप्ले और ऐंड्रॉयड आॅटो को सपॉर्ट करता है। कैबिकन में आॅटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल और डिजिटल ड्राइवर इंफॉर्मेशन डिस्प्ले भी है जो कि स्टीयरिंग माउंटेड कंट्रोल्स से लैस है।

मार्केट में इस कार को 1.2 लीटर ड्यूल वीवीटी-आई पेट्रोल इंजन और 1.3 लीटर ड्यूल वीवीटी-आई पेट्रोल इंजन के आॅप्शंस के साथ बेचा जाता है। भारत में इसे 1.5 लीटर पेट्रोल इंजन के साथ बेचा जाएगा। इस इंजन को 6 स्पीड मैन्युअल ट्रांसमिशन से लैस किया जाएगा।

सुरक्षा के लिहाज से देखें तो टोयोटा यारिस में सात एयरबैग्स, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम, फ्रंट और रियर पार्किंग सेंसर्स, हिल स्टाट असिस्ट, पावर सीट्स आदि फीचर्स दिए जाएंगे। भारत में लॉन्चिंग के बाद इसका मुकाबला मारुति सुजुकी सियाज और ह्यूंदै वरना आदि कारों से होगा। इसकी कीमत 9 लाख रुपए के आसपास रहने की उम्मीद है।

छात्रों को परीक्षा केंद्र पर ही मिलेगा ब्लैक बॉल पेन

कोटा। देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम जेईई मेन्स में आठ दिन रह गए हैं। जेईई मेन्स के स्कोर के आधार पर स्टूडेंट्स को एनआईटी, ट्रिपलआईटी और सेंट्रल फंडेड टेक्निकल संस्थानों में दाखिला मिलेगा। मेन्स के लिए स्टूडेंट्स को पैन ले जाने की जरूरत नहीं होगी। सेंटर पर ही ब्लैक बॉल पैन सीबीएसई की ओर से उपलब्ध करवाया जाएगा।

रिपोर्टिंग सुबह सात बजे शुरू हो जाएगी। 9:30 बजे के बाद किसी को भी एंट्री नहीं दी जाएगी। सुबह 9:20 बजे बुकलेट का वितरण होगा। 9:25 बजे स्टूडेंट्स बुकलेट ओपन कर पाएंगे। एग्जाम 9:30 बजे से 12:30 बजे तक होगा। दूसरा पेपर बी आर्क के लिए दोपहर दो से पांच बजे तक होगा। ये पेपर ऑफलाइन मोड में होंगे।

 सेंटर में घड़ी ले जाने पर पाबंदी
हर केंद्र के कमरों में घड़ी लगी होगी, इसलिए स्टूडेंट्स घड़ी बांध कर नहीं पा आएंगे। किसी भी तरह की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी अलाउ नहीं होगी। सेंटर में एंट्री से पहले मेटल डिटेक्टर से चैकिंग होगी। ई एडमिट कार्ड जेईई मेन्स की वेबसाइट पर जारी कर दिए गए हैं। स्टूडेंट्स को सलाह दी गई है कि वह एग्जाम से एक दिन पहले सभी निर्देशों को फिर से पढ़ लें।

सहायकों की मांग के लिए दो दिन पहले करनी होगी रिपोर्टिंग : निशक्तजनों की कुछ कैटेगरी में सहायक उपलब्ध करवाए जाएंगे। इसके लिए निशक्तजन को दो दिन पहले सेंटर जाकर वहां के हैड से मिलना होगा। 11वीं क्लास के साइंस मैथ्स स्ट्रीम के स्टूडेंट को सहायक बनाया जाएगा। वहीं सभी निशक्तजनों को पेपर सॉल्व करने के लिए एक घंटे का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।

5 साल से पहले स्टूडेंट्स की यूनिफॉर्म नहीं बदल सकेंगे प्राइवेट स्कूल

दुकान विशेष से कॉपी-किताब खरीदने का दबाव भी अभिभावकों पर नहीं डाल सकेंगे

बीकानेर। राजस्थान में प्राइवेट स्कूलों में किताबें, यूनिफॉर्म और जूते-टाई की खरीद सहित फीस निर्धारण को लेकर राज्य सरकार ने पिछले साल दिशा-निर्देश जारी किए थे। मगर अधिकांश स्कूलों की ओर से इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशक नथमल डिडेल ने प्राइवेट स्कूल संचालकों पर लगाम लगाने के लिए दो अलग-अलग आदेश जारी किए है। यदि संबंधित स्कूल की ओर से इन नियमों की सख्ती से पालना नहीं हुई तो संबंधित स्कूल की मान्यता समाप्ति की जाएगी।

निर्देश के मुताबिक स्टूडेंट्स की यूनिफॉर्म में प्राइवेट स्कूल पांच साल तक बदलाव नहीं कर सकेंगे। वहीं दुकान विशेष से कॉफी-किताब खरीदने का दबाव भी अभिभावकों पर नहीं डाल सकेंगे। किताबों के अलावा प्राइवेट स्कूलों की ओर से निर्धारित यूनिफॉर्म, टाई, जूते, कॉपियां आदि स्टूडेंट्स एवं अभिभावक खुले बाजार से खरीदने के लिए स्वतंत्र होंगे।

इसके अलावा किसी भी शिक्षण सामग्री पर स्कूल अपना नाम अंकित नहीं कर सकेंगे। वहीं स्कूल परिसर में भी पुस्तकों एवं अन्य सामग्री के विक्रय पर पाबंदी रहेगी। निजी स्कूल संचालकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्र-छात्राओं के लिए अनुशंसित की जाने वाली किताबें, ड्रेस और अन्य सामग्री कम से कम तीन  विक्रेताओं के पास उपलब्ध हो।

अभिभावकों की ओर से सूची मांगने पर उन्हें उपलब्ध करानी होगी
निजी स्कूल एनसीआरटी एवं राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड तथा निजी प्रकाशकों के पाठ्यक्रम के मुताबिक प्रकाशित पुस्तकों का चयन स्टूडेंट्स के लिए कर सकेंगे। मगर उनके लिए अनिवार्य होगा कि शिक्षण सत्र शुरू होने से एक माह पहले पुस्तकों की सूची, लेखक-प्रकाशक का नाम और मूल्य के साथ अपने स्कूल के सूचना पट्ट एवं वेबसाइट पर इसे अपलोड करें। अभिभावकों की ओर से सूची मांगने पर उन्हें उपलब्ध करानी होगी।

नियम विरुद्ध फीस बढ़ोतरी पर कार्रवाई
नियमों के विरुद्ध फीस में बढ़ोतरी करने पर प्राइवेट स्कूल के खिलाफ मान्यता समाप्ति की कार्रवाई की जाएगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने इस संबंध में समस्त डीईओ को निर्देश जारी किए हंै। जिसमें बताया गया है कि वर्ष 2016 में राजस्थान विद्यालय (फीस का विनियमन) अधिनियम,2016 और वर्ष 2017 में राजस्थान विद्यालय (फीस का विनियमन) नियम, 2017 लागू किया गया है।

बावजूद इसके 10 से 15 फीसदी स्कूलों में फीस कमेटी का गठन नहीं हुआ है। शिक्षा निदेशक ने पिछले दस साल की फीस का तुलनात्मक अध्ययन कर फीस कमेटी की ओर से प्रस्तावित फीस का अनुमोदन करने के निर्देश दिए हैं। अनियमित फीस वृद्धि करने वाले स्कूलों की तत्काल जांच कर मान्यता समाप्ति की रिपोर्ट मांगी गई है।

देश का पहला डेटा सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर जयपुर में बनेगा

जयपुर। इंटरनेट यूजर्स का पर्सनल डेटा चोरी किए जाने को लेकर देश में बड़ी बहस छिड़ी हुई है। भाजपा और कांग्रेस एक दूसरे पर मोबाइल एप्स के जरिए डेटा चोरी कर उनका चुनावी इस्तेमाल करने के आरोप लगा रहे हैं। प्रदेश में सरकार भामाशाह प्लेटफार्म के जरिए अपनी हर योजना को डिजिटलाइज कर रही है।

विभागों में करीब 200 इंटरनेट एप्लीकेशंस में हर रोज 15 से 18 लाख ट्रांजेक्शन हो रहे हैं। इन ट्रांजेक्शन में यूजर्स के डेटा को चोरी होने से रोकने और सेंधमारी से बचाने अब जयपुर में देश का पहला डेटा सिक्योरिटी सेंटर तैयार किया जा रहा है जो अगले तीन महीने में पूरी तरह काम करना शुरू कर देगा।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 2017-18 के बजट में इसकी घोषणा की थी। सिक्योरिटी सेंटर के साथ सबसे बड़ा डेटा सेंटर भी बनाया जा रहा है। सरकार के डेटा को सुरक्षित रखने का जिम्मा संभाल रहे सूचना प्रौद्योगिकी विभाग(डीओआईटी) के प्रमुख सचिव अखिल अरोड़ा के अनुसार डेटा सेंटर गूगल और फेसबुक के डेटा सेंटर के समान आधुनिक होगा।

मौजूदा समय में प्रदेश में सरकारी विभागों में होने वाले ट्रांजेक्शन से करीब 3.5 पेटा बाइट डेटा जनरेट हो रहा है। नए डेटा सेंटर की क्षमता 600 रेक्स की होगी जो अगले एक दशक तक प्रदेश के डेटा स्टोरेज की जरूरत पूरी कर सकेगा। डेटा सिक्योरिटी को लेकर प्रदेश में 2015 में इंफॉरमेशन सिक्योरिटी पॉलिसी जारी की जा चुकी है।

इस पॉलिसी के मुताबिक डेटा सुरक्षित रखने के लिए फोर लेयर सिक्युरिटी है। अरोड़ा का कहना है कि डेटा लीक का सबसे ज्यादा खतरा थर्ड पार्टी एक्सेस पर होता है लेकिन प्रदेश में डेटा सिक्योरिटी पॉलिसी के मुताबिक सरकारी विभागों से इकट्ठा होने वाले डेटा का थर्ड पार्टी एक्सेस नहीं है।

यह सारा डेटा डीओआईटी के डेटा सेंटर में स्टोर किया जाता है। इस डेटा सेंटर को फोर लेयर सिक्योरिटी दी गई है। इसके जरिए ट्रांजेक्शन प्वाइंट से सर्वर और इसके बाद यूजर तक पहुंचने वाली जानकारी को सुरक्षित रखा जाता है।

एंड प्वाॅइंट सिक्योरिटी
डेटा लीक होने का पहला प्वाइंट वहां होता है जहां से ट्रांजेक्शन किया जा रहा है। सरकार की स्पष्ट गाइडलाइन है कि जिस डिवाइस से ट्रांजेक्शन हो रहा है वह एनक्रिप्टेड फार्म में ही होगा। मसलन आप किसी खाता नंबर से बिल भुगतान करते हैं तो इस ट्रांजेक्शन की डिटेल सर्वर तक जाती है। इस दौरान आपके खाते की जानकारी कोडवर्ड में बदल दी जाती है जो सर्वर पर जाकर डिकोड होती है।

फिजिकल सिक्योरिटी
सर्वर की सुरक्षा के लिए फिजिकल सिक्युरिटी का बंदोबस्त किया गया है। डेटा सेंटर पूरी तरह सीसीटीवी की निगरानी में है। सेंटर में प्रवेश के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन होता है। इसमें संबंधित व्यक्ति का एक्सेस लिमिट तय होता है कि वह सेंटर में कहां तक जा सकता है। इसके बाद बैंक की चेस्ट ब्रांच की तरह लोहे का बड़ा दरवाजा रहता है।

नेटवर्क सिक्योरिटी
नेटवर्क सिक्योरिटी के लिए एक्सेस कंट्रोल है। इसमें नेटवर्क के जरिए कोई व्यक्ति आपके डेटा को एक्सेस नहीं कर सके इसके लिए एक्सेस कंट्रोल और फायरवाल काम करते हैं। इसके अलावा चौथे चरण में नेटवर्क से भी डेटा एनक्रिप्शन किया जाता है। इसमें यह सुनिश्चित किया जाता है कि वही व्यक्ति डेटा एक्सिस कर सके जो इसके लिए अधिकृत है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को वन टाइम पासवर्ड भी दिया जाता है।

आरएसजीएल शीघ्र ही सेना की मैस और 2800 घरों में गैस सप्लाई करेगी

कोटा। कोटा स्थित सेना की टाउनशिप में डीआरएस सिस्टम स्थापित किया जाएगा, जो कि सेना की मैस और 2800 घरों में गैस सप्लाई होगी। कोटा समेत प्रदेश के औद्योगिक ग्रोथ के साथ-साथ प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार सृजन के लिए यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी। यह जानकारी शुक्रवार को एक पत्रकार वार्ता में कम्पनी के अधिकारियों ने दी। 

राजस्थान स्टेट गैस लिमिटेड (आरएसजीएल) के प्रबंध निदेशक रवि अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की घोषणा के अंतर्गत आरएसजीएल ने अपनी पहली परियोजना दिल्ली से जयपुर तक सीएनजी कोरिडोर परियोजना को समय से पूर्व जून 2016 में पूरा कर लिया।

दूसरी परियोजना नीमराणा के पास स्थित गिलोत को गैस सप्लाई करने के लिए जो कि सिरामिक इंडस्ट्री की गुणवत्ता के लिए बहुत जरूरी है, उसका 15 नवंबर 2017 को राज्य मंत्री सुरेंद्र पाल सिंह टीटी द्वारा उद्घाटन किया गया। तीसरा अब जब मुख्यमंत्री द्वारा जन-जन को गैस, घरेलू, व्यवसायिक, कॉमर्शियल, इंडस्ट्रियल व ऑटोमेटिक के लिए चार सालों के लिए डिटेल्ड प्लानिंग एंड एज्युकेशन फिलोसिपी तैयार हो रही है। उसी समय बारां रोड स्थित कंचनजंगा सोसायटी के कुछ लोग स्वीकृति के बावजूद भी सरकार के महत्वाकांक्षी परियोजना को रोक दिया है।

आरएसजीएल के चीफ मैनेजर (परियोजना) रामकल्याण मीणा ने बताया कि आरएसजीएल ने यहां सभी कॉमर्शियल, इंडस्ट्रियल और घरेलू ग्राहकों का ब्ल्यू प्रिंट कोटा के मास्टर प्लान के साथ लिंक कर दिया है और सरकार के फेसिलिटेट्स और आमजन के सहयोग से कोटा देश का मॉडल स्मार्ट सिटी के रूप में अग्रसित हो रहा है।

भ्रांतियों में नहीं पड़ें –मीणा ने बताया कि कंचनजंगा सोसायटी परिसर में कंपनी द्वारा स्थापित की गई स्किड के विरोध के जवाब में बताया कि देश के कई शहरों में स्थापित इन स्किड्स में कभी भी किसी भी तरह का कोई हादसा सामने नहीं आया है। इसलिए कंचनजंगा सोसायटी के लोगों के मन में फैल रही गलत भ्रांतियों को दूर करने की अपील करते हुए कंपनी प्रबंधन द्वारा यह भरोसा दिलाया कि कंचनजंगा सोसायटी के लोगों को डरने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले लोगों को बड़े शहरों में लगे अपार्टमेंट एवं व्यवासायिक प्रतिष्ठानों से गैस प्लांटों के बारे में जानकारी करनी चाहिए, ताकि उनके मन में फैल रही भ्रांतियां स्वत:ही दूर हो सके।

चार साल में घर-घर पहुंचाएंगे पीएनजी गैस : आरएसजीएल के अनुसार कंपनी के शुरुआती चरण में कोचिंग नगरी के तीन हजार घरों में पाइप लाइन के माध्यम से गैस सप्लाई की जाएगी। इसके बाद आगामी चार सालों में कंपनी का उद्देश्य शहर के प्रत्येक घर, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों, औद्योगिक संस्थानों समेत अन्य कारखानों को पाइप लाइन के माध्यम से गैस उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

आरएसजीएल के डीजीएम एसडी बर्मा ने बताया कि कंचनजंगा सोसायटी और आरएसजीएल के बीच नगर विकास न्यास के सचिव की मौजूदगी में कंपनी द्वारा सोसायटी को प्रत्येक माह 7 हजार रुपए जगह का किराया एवं 8 आठ हजार रुपए प्रतिमाह सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर देने की सहमति हुई थी।  जिसके बावजूद सोसायटी के कुछ लोगों ने गलतफहमी के कारण विरोध करना शुरू कर दिया, जिससे गैस सप्लाई बाधित हो गई। 

देश की महत्वपूर्ण गैस परियोजनाओं की इंजीनियरिंग, डिजायनिंग व निर्माण करने वाली मेकोन कंपनी का दावा है कि गैस वितरण सिस्टम (डीआरएस) सिस्टम पूर्णतया सेफ है। मेकोन जो कि गैस कंसल्टेंसी की उच्चतम कंसल्टेंसी सर्विसेज है। मेकोन के उप महाप्रबंधक ए.के.सिल ने पत्रकार वार्ता में बताया कि देश के दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, बड़ोदरा, पुणे व लखनऊ जैसे बड़े शहरों के आवासीय एवं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में इस तरह के पीएनजी गैस वितरण स्किड स्थापित हैं।

इन स्किड्स से वहां के लोग कई सालों से घरेलू व व्यवसायिक गैस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। सिल ने लखनऊ स्थित एलडीको सोसायटी के फोटोग्राफ दिखाते हुए बताया कि इस तरह का डीआरएस सिस्टम देश के विभिन्न-विभिन्न भागों के अलावा एलडीको सोसायटी में भी पिछले 6 वर्षों से ऑपरेट हो रहा है। इस हवाले में स्थानीय सोसायटी का पत्र जिसमें जारी किया गया है, जिसमें यह बताया गया कि वहां के लोग इस सिस्टम से बहुत खुश है और यह पूर्णतया सुरक्षित है।

650 रुपये सस्ता हुआ सोना, चांदी के दाम भी धड़ाम

नई दिल्ली। मौजूदा उच्च स्तर पर स्थानीय आभूषण विक्रेताओं और फुटकर कारोबारियों की मांग में कमी आने से दिल्ली सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोने की कीमत 650 रुपये की गिरावट के साथ 31,300 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गई।

सिक्का निर्माताओं और औद्योगिक इकाइयों का उठाव कम होने से चांदी भी 600 रुपये घटकर 39,150 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई।प्रति किलोग्राम रह गई। राष्ट्रीय राजधानी में 99.9 प्रतिशत और 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 650 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 31,300 रुपये और 31,150 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया।

हालांकि, आठ ग्राम वाली गिन्नी 24,800 रुपये प्रति इकाई के पूर्वस्तर पर बनी रही। इसी प्रकार चांदी तैयार 600 रुपये घटकर 39,150 रुपये प्रति किलोग्राम और चांदी साप्ताहिक डिलीवरी 660 रुपये घटकर 38,320 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई।

हालांकि, चांदी सिक्कों के भाव लिवाल और बिकवाल क्रमश: 74,000 रुपये और 75,000 रुपये प्रति सैकड़ा पर स्थिर बने रहे। बाजार सूत्रों ने कहा कि घरेलू हाजिर बाजार में आभूषण विक्रेताओं और फुटकर कारोबारियों की कमजोर मांग के कारण सोने की कीमतों में गिरावट आई।

कोटा सर्राफा
चांदी 39000 रुपये प्रति किलोग्राम।
केटबरी 31300 रुपये प्रति दस ग्राम, 36500 सोना रुपये प्रति तोला।
शुद्ध 31450 रुपये प्रति दस ग्राम, 36680 सोना रुपये प्रति तोला।

पेपर लीक: CBSE 12 वीं की अर्थशास्त्र की परीक्षा 25 अप्रैल को

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं की अर्थशास्त्र की परीक्षा की तिथि का ऐलान कर दिया गया है। एचआरडी मंत्रालय के सचिव (स्कूल शिक्षा) अनिल स्वरूप ने बताया कि अर्थशास्त्र की दोबारा परीक्षा 25 अप्रैल को होगी।

हालांकि 10वीं के गणित की दोबारा परीक्षा को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। स्वरूप ने बताया कि अभी जांच चल रही है और अगले 15 दिनों में यह फैसला होगा कि 10वीं के गणित की परीक्षा दोबारा कराने की जरूरत है या नहीं। अगर दोबारा परीक्षा करानी पड़ी तो सिर्फ दिल्ली और हरियाणा में होंगी और उसे जुलाई में कराया जाएगा।

सीबीएसई पेपर लीक की खबर के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश है। जगह-जगह छात्र और अभिभावक प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, सीबीएसई ने पेपर लीक के आरोपी विक्की को गिरफ्तार कर लिया है।

विक्की दिल्ली में एक कोचिंग इंस्टिट्यूट चलाता है। आरोपियों को पकड़ने के लिए एसआईटी जहां ताबड़तोड़ छापे मार रही है, वहीं सीबीएसई अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है।

हर मि‍नट बुक हो रही है मारुति‍ की नई Swift कार

नई दि‍ल्‍ली। मारुति‍ सुजुकी इंडि‍या की तीसरी जेनरेशन स्‍वि‍फ्ट लॉन्‍च होने के बाद से ही नए रि‍कॉर्ड बना रही है। 10 हफ्ते पहले मार्केट में आई स्‍विफ्ट की टोटल बुकिंग 1 लाख यूनि‍ट्स पर पहुंच गई है। इस लि‍हाज से हर मि‍नट औसतन एक स्‍वि‍फ्ट की बुकिंग की जा रही है जोकि‍ अपने आप एक रि‍कॉर्ड है।

इस रि‍कॉर्ड ने केवल दूसरी कंपनि‍यों को टक्‍कर नहीं दी है बल्‍कि‍ नंबर्स के मामले में यह अपनी की कंपनी के दूसरे ब्रांड्स से भी आगे नि‍कल गई है। नई स्‍वि‍फ्ट ने इस आंकड़ों के साथ ही कंपनी की बेस्‍ट सेलिंग कारों जैसे नई डीजायर और बलेनो को भी पीछे छोड़ दि‍या है।

3 से 4 माह है स्‍वि‍फ्ट की वेटिंग
बीते माह ऑटो एक्‍सपो में लॉन्‍च हुई स्‍वि‍फ्ट के वि‍भि‍न्‍न वेरि‍एंट्स के लि‍ए वेटिंग पीरि‍यड पहले ही 3 से 4 माह तक पहुंच गया है। मारुति सुजुकी के सीनि‍यर एक्‍जीक्‍यूटि‍व डायरेक्‍टर (मार्केटिंग एंड सेल्‍स) आर. एस. कलसी ने कहा कि‍ हमारे कुछ बेस्‍ट सेर्ल्‍स – नई डीजायर और बलेनो ने बेहद अच्‍छा परफॉर्मेंस दि‍या है लेकि‍न वह भी इस लैंडमार्क (1 लाख बुकिंग) को लॉन्‍च होने के इतने कम समय में हासि‍ल नहीं कर पाए हैं।

33 फीसदी बुकिंग टॉप वेरि‍एंट के लि‍ए
पहली बार कार खरीदने वालों के लि‍ए स्‍वि‍फ्ट के टॉप वेरि‍एंट के 33 फीसदी मॉडल्‍स की बुकिंग हुई है, जोकि‍ ऑटो गि‍यर शि‍फ्ट टेक्‍नोलॉजी का ऑफर देती है। कंपनी ने कहा है कि‍ इससे आज के दौर में कार चलाने वालों की सबसे बड़ी चिंता दूर हुई है। नई स्‍वि‍फ्ट बेहतर एक्‍सलरेशन परफॉर्मेंस, ज्‍यादा जगह और ज्‍यादा कम्‍फर्टेबल ड्राइविंग एक्‍सपीरि‍यंस देती है।

स्‍वि‍फ्ट की हर जेनरेशन रही पॉपुलर
स्‍वि‍फ्ट को सबसे पहले भारत में साल 2005 में लॉन्‍च कि‍या गया था। पहली जेनरेशन स्‍वि‍फ्ट ने देश में प्रीमि‍यम हैचबैक सेगमेंट को खड़ा कि‍या। पहली जेनरेशन को मई 2005 से जून 2011 तक बेचा गया। इस दौरान कंपनी ने स्‍वि‍फ्ट की 6,06,004 यूनि‍ट्स को बेचा।

इसके बाद, कंपनी ने स्‍वि‍फ्ट के सेकंड जेनरेशन को जुलाई 2011 में लॉन्‍च कि‍या। सेकंड जेनरेशन को दि‍संबर 2017 तक 11.9 लाख यूनि‍ट्स को बेचा, जोकि‍ पहले जेनरेशन से करीब दोगुना है। यह कंपनी की टॉप परफॉर्मिंग कार में से एक है और देश में बि‍कने वाली टॉप 5 कारों में इसका नाम रहता है।