Crude Oil: कच्चे तेल की कीमतें मई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार

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नई दिल्ली। Crude Oil Price: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल की कीमतें मई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं। शुक्रवार सुबह कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड का सितंबर वायदा भाव 100.40 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड 91.78 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। हालांकि दोनों में हल्की गिरावट थी, लेकिन कीमतें अब भी कई महीनों के ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।

तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य तनाव है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। इसके बाद यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में तेल टैंकरों पर हमले किए। इससे उस समुद्री रास्ते पर खतरा बढ़ गया है, जिसका इस्तेमाल सऊदी अरब समेत कई देश तेल निर्यात के लिए करते हैं।

कुछ समय पहले अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम की खबर से तेल की कीमतें नीचे आ गई थीं। लेकिन अब बातचीत की उम्मीद कमजोर पड़ गई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा है कि ईरान का नेतृत्व अभी समझौते के लिए तैयार नहीं है।

ब्याज दरों पर असर
अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती टाल सकते हैं। इससे होम लोन, कार लोन और दूसरे कर्ज महंगे बने रह सकते हैं।

ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक ने लगातार चार बैठकों में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। वहीं अमेरिका के फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श ने हाल ही में कहा था कि महंगाई को फिर से बढ़ने नहीं दिया जाएगा और कीमतों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

भारत पर असर
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अगर ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के आसपास या उससे ऊपर बना रहता है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही आयात बिल बढ़ने, रुपये पर दबाव आने और महंगाई बढ़ने का जोखिम भी बढ़ जाएगा। निवेशकों की नजर अब पश्चिम एशिया की स्थिति और तेल की आगे की चाल पर रहेगी।