Monday, July 27, 2026
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आर्थिक आंकड़े, वैश्विक संकेतों और रुपए की चाल से तय होगी बाजार की दिशा

नई दिल्ली। विदेशी संस्थागत निवेशकों तथा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लिवाली तथा भारतीय मुद्रा के सात माह के उच्चतम स्तर पर पहुंचने से मजबूत हुई निवेश धारणा के दम पर घरेलू शेयर बाजार ने बीते सप्ताह तेज छलांग लगाई।

आलोच्य सप्ताह में शेयर बाजार में लगातार चौथे सप्ताह तेजी दर्ज की गई। इस दौरान बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1,352.89 अंक यानी 3.69 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त के साथ 38,024.32 अंक पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 391.45 अंक यानी 3.55 प्रतिशत की तेजी के साथ 11,426.85 अंक पर बंद हुआ।

आलोच्य सप्ताह के दौरान दिग्गज कंपनियों की तरह छोटी और मंझोली कंपनियों पर भी निवेशक मेहरबान रहे। बीएसई का मिडकैप 367.31 अंक यानी 2.48 प्रतिशत की तेजी के साथ 15,171.52 अंक पर और स्मॉलकैप 308.12 अंक यानी 2.12 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त के साथ 14,837.18 अंक पर बंद हुआ।

सात माह के उच्चतम स्तर पर पहुंचा विदेशी मुद्रा भंडार
आगामी सप्ताह में भी शेयर बाजार पर डॉलर की तुलना में रुपए की स्थिति पर निवेशकों की नजर रहेगी। बीते सप्ताह रुपया और देश का विदेशी मुद्रा भंडार शुक्रवार को सात माह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

अगले सप्ताह मंगलवार को चालू खाता घाटे के आंकड़े जारी होने हैं, जिसका असर शेयर बाजार पर रहेगा। बीते सप्ताह जारी हुए व्यापार घाटे के आंकड़े भी निवेश धारणा को प्रभावित करेंगे। व्यापार घाटा 17 माह के निचले स्तर पर आया है, जिससे निवेशकों को राहत मिली है।

राजनीतिक समीकरणों का भी ध्यान रखेंगे निवेशक
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का असर भी शेयर बाजार पर रहेगा। कच्चे तेल में गत सप्ताह तेजी दर्ज की गई है। इसके अलावा ब्रेग्जिट को लेकर जारी उथलपुथल, अगले सप्ताह जारी होने वाले जापान के आर्थिक आंकड़े और 19-20 मार्च को होने वाले अमेरिका की फेडरल रिजर्व की बैठक पर भी निवेशकों ही नजर रहेगी।

निवेशक इसके साथ ही आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बदलते राजनीतिक समीकरणों पर भी अपना ध्यान रखेंगे। विश्लेषकों के मुताबिक, अगली बार भी नरेंद्र मोदी की सरकार के सत्ता में वापस आने की अधिक संभावना को देखते हुए विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी घरेलू शेयर बाजार में बढ़ गई है और इसी वजह से इसमें लगातार चौथे सप्ताह तेजी रही है।

खुशखबरी: अब तत्काल टिकट एक दिन पहले भी करा सकेंगे बुक

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नई दिल्ली। होली पर यदि आप घर जाने की सोच रहे हैं और रिजर्वेशन नहीं मिल पा रहा है तो निराश मत होईए। आपकी सुविधा के लिए भारतीय रेलवे (Indian Railway) ने होली से पहले तत्काल टिकट (Tatkal Ticket) बुकिंग में बदलाव किया है। इससे यात्रियों को तत्काल टिकट बुक कराना आसान हो जाएगा।

IRCTC के मुताबिक ट्रेन के चलने की जगह से सफर के दिन को छोड़कर तत्काल टिकट बुकिंग की एडवांस रिजर्वेशन पीरियड को दो दिनों से घटाकर एक दिन किया जा रहा है। अब ट्रेन के प्रस्थान करने की तारीख से एक दिन पहले तत्काल ट्रेन टिकट बुक किया जा सकता है।

कन्फर्म तत्काल टिकट कैंसिल पर रिफंड नहीं
आईआरसीटीसी में एक PNR से अधिकतम चार यात्रियों के लिए तत्काल टिकट बुक किया जा सकता है। तत्‍काल टिकट अगर कन्‍फर्म है तो इस टिकट को कैंसिल कराने पर आपको कोई रिफंड नहीं मिलेगा। हालांकि, अगर यह तत्‍काल टिकट वेटिंग में है तो टिकट कैंसिल कराने पर रेलवे कुछ अमाउंट काटकर बाकी का पैसा आपको वापस कर देती है।

शीर्ष 10 में से 8 कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 1.4 लाख करोड़ बढ़ा

नयी दिल्ली। सेंसेक्स की शीर्ष दस कंपनियों में से आठ का बाजार पूंजीकरण (एम-कैप) पिछले सप्ताह कुल 1,42,643.2 करोड़ रुपये बढ़ा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक के बाजार पूंजीकरण में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले सप्ताह सेंसेक्स 1,352.89 अंक यानी 3.68 प्रतिशत बढ़कर शुक्रवार को 38,024.32 अंक पर बंद हुआ था।

इस दौरान, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, एचडीएफसी, इंफोसिस, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक का बाजार पूंजीकरण बढ़ा है जबकि हिंदुस्तान यूनिलीवर और आईटीसी का बाजार पूंजीकरण घटा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण 35,500.21 करोड़ रुपये बढ़कर 8,38,355.65 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

एचडीएफसी बैंक का एम-कैप 33,724.93 करोड़ रुपये बढ़कर 6,12,846.54 करोड़ रुपये और कोटक महिंद्रा बैंक का पूंजीकरण 16,676.22 करोड़ रुपये बढ़कर 2,52,871.75 करोड़ रुपये हो गया।

आईसीआईसीआई बैंक का बाजार पूंजीकरण 16,487.42 करोड़ रुपये चढ़कर 2,54,995.66 करोड़ रुपये, एचडीएफसी का 16,084.35 करोड़ बढ़कर 3,40,171.21 करोड़ रुपये, एसबीआई का 14,680.99 करोड़ रुपये चढ़कर 2,65,685.69 करोड़ रुपये जबकि टाटा कंसल्टेंसी का बाजार पूंजीकरण 6,716.77 करोड़ रुपये की बढ़त के साथ 7,65,561.53 करोड़ रुपये हो गया।

इंफोसिस का एम-कैप 2,772.32 करोड़ रुपये बढ़कर 3,14,060.64 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं, दूसरी ओर आईटीसी का बाजार पूंजीकरण 1,347.76 करोड़ रुपये गिरकर 3,56,481.45 करोड़ रुपये और हिंदुस्तान यूनिलीवर का एम-कैप 508.7 करोड़ रुपये घटकर 3,67,702 करोड़ रुपये रह गया।

बाजार पूंजीकरण के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर रही। इसके बाद क्रमश: टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी, एचडीएफसी, इंफोसिस, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक का स्थान रहा।

Realme ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में दर्ज कराया नाम

नई दिल्ली। चाइनीज स्मार्टफोन ब्रैंड रियलमी ने गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया। दिल्ली में एक इवेंट के दौरान कंपनी ने ‘लार्जेस्ट मोबाइल फोन संटेंस’ बनाकर गिनीज वर्ल्ड रेकॉर्ड टाइटल में अपना नाम जोड़ा। इसके लिए कंपनी ने 1024 रियलमी 3 रेडिएंट ब्लू डिवाइस की श्रृंखला बनाकर कंपनी के स्लोगन ‘प्राउड टु बी यंग’ को प्रदर्शित किया। इस दौरान करीब 500 रियलमी फैन्स मौजूद थे।

दिल्ली में एक इवेंट में कंपनी कंपनी ने अपनी पहली ‘रियलमी होली पार्टी’ ऑर्गनाइज की। इस मौके पर रियलमी इंडिया के CEO माधव सेठ ने कहा ‘रियलमी के कस्टमर्स और फैन्स ही हमारे असली ब्रैंड ऐंबैसडर हैं। आज ये रेकॉर्ड बनाने के लिए मैं रियलमी के फैंस का आभार जताना चाहता हूं। 1024 टेक्नॉलजी की दुनिया में एक पॉप्युलर नंबर है। इसीलिए हमने यह नंबर चुना। हम एक प्रॉडक्ट ड्रिवेन कंपनी के तौर पर खुद को पेश करना चाहते हैं।’

रियलमी 3 स्पेसिफिकेशंस
रियलमी 3 में मीडियाटेक का हीलियो पी70 एआई प्रोसेसर दिया गया है। इस प्रोसेसर की खास बात है कि यह फोन के परफॉर्मेंस के काफी फास्ट बना देता है जिससे इस फोन पर मल्टीटास्किंग और गेमिंग का एक्सपीरियंस बढ़ जाता है।

एआई पावर्ड होने के कारण यह प्रोसेसर बैटरी को भी फोन की जरूरत के हिसाब से अडजस्ट कर लेता है और बैटरी की भी परफॉर्मेंस इंप्रूव होती है। ऑपरेटिंग सिस्टम की बात करें तो इसमें ऐंड्रॉयड 9 पाई पर बेस्ड ColorOS 6 दिया गया है।

रियलमी 3 के रियर में अपर्चर f/1.8 के साथ 13 मेगापिक्सल + 2 मेगापिक्सल का ड्यूल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। फोन के फ्रंट में 13 मेगापिक्सल का एआई सेल्फी कैमरा दिया गया है। यह सेल्फी कैमरा एआई ब्यूटी और फेस अनलॉक फीचर के साथ आता है।

रियलमी 3 को 3जीबी रैम+32जीबी इंटरनल स्टोरेज और 4जीबी रैम+64जीबी के इंटरनल स्टोरेज वेरियंट में पेश किया गया है। इसमें 4,230 mAh की हेवी ड्यूटी बैटरी का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि यह फोन क्विक चार्जिंग सपॉर्ट के साथ नहीं आता है।

Google Maps पर पैदल चलने वालों के लिए आने वाला है नया फीचर

नई दिल्ली। Google अपने यूजर्स के लिए एक नई सर्विस की टेस्टिंग कर रहा है। इस सर्विस के आने के बाद से पैदल चलने वाले लोगों को काफी सहूलियत होगी। खबर है कि गूगल अपने मैप्स में AR (augmented reality) बेस्ड नैविगेशन उपलब्ध कराने की कोशिश में लगा है। गूगल मैप्स का यह नया फीचर कुछ डिवाइसेज पर आ भी चुका है।

गूगल मैप्स में आए इस फीचर की मदद से सड़क पर पैदल चलने वाले लोगों को रास्ता ढूंढने में आसानी होगी। यह फीचर यूजर्स के स्मार्टफोन का कैमरा इस्तेमाल करेगा। कैमरे से ली जा रही तस्वीरों के ऊपर यह फीचर बड़े साइज के डिजिटल ऐरो दिखाते हुए यूजर्स को उनके डेस्टिनेशन तक पहुंचाएगा।

ऐप्स पर दिखने वाले डिजिटल ऐरो कैमरे से ली जा रही रियल वर्ल्ड तस्वीरों के ऊपर दिखेंगे। ऐसे में इसका इस्तेमाल करना काफी आसान और रोचक होगा। रियल टाइम इमेज दिखाने के साथ ही यह फीचर आपको डायरेक्शन के बारे में अलर्ट भी करता रहेगा।

गूगल की इस नई नैविगेशन सेवा से पैदल चलने वालें लोगों को बार-बार रास्ता पूछने की समस्या से छुटकारा मिलने की उम्मीद है। इस फीचर को गूगल मैप्स में मौजूद ‘Walking’ मोड पर जाकर ऐक्सेस किया जा सकेगा। फीचर का इस्तेमाल करने वाले एक यूजर ने ट्विटर पर इसका विडियो भी शेयर किया है।

AR का इस्तेमाल करते हुए मैप्स का यह फीचर जीपीएस और विजुअल पोजिशनिंग सर्विस के साथ मिलकर काम करता है। दावा किया जा रहा है कि इस फीचर का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के गलत दिशा में जाने की संभावना ना के बराबर है। हालांकि माना जा रहा है कि शहरी माहौल में इसकी ऐक्युरेसी में थोड़ी कमी आ सकती है।

इस फीचर को डिवेलप करने के साथ ही गूगल ने यूजर्स की सुरक्षा का भी ध्यान रखा है। यही कारण है कि वॉइस नोटिफिकेशन के जरिए यह अपने यूजर्स को फोन नीचे रखकर रोड पर ध्यान देने के लिए कहता है। रियल टाइम इमेज दिखने की वजह से कई यूजर्स फोन पर ही देखना प्रेफर करते हैं जो कि खतरनाक हो सकता है।

गूगल ने इस फीचर की टेस्टिंग पिछले महीने शुरू की है। फिलहाल इसे लोकल गाइड्स प्रोग्राम के हाई लेवल मेंबर्स को उपलब्ध कराया जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि लोकल गाइड्स द्वारा टेस्टिंग के बाद इसे आम यूजर्स के लिए रोलआउट कर दिया जाएगा। लोकल गाइड्स वे यूजर्स होते हैं जो गूगल मैप्स पर फोटो और रिव्यू पोस्ट को लेकर काफी सक्रिय रहते हैं।

शादी में उतार-चढ़ाव आते हैं, रिश्ते निभाना सीखें: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। देश की अदालतें कई बार पारिवारिक विवाद निपटाने के लिए बहुत व्यावहारिक सलाह भी देती हैं। अमेरिका में रहनेवाले दंपती की बच्चों की कस्टडी के लिए कानूनी लड़ाई का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने दंपती से आपसी समझौते से मामले को निपटाने की सलाह देते हुए कहा कि वैवाहिक जीवन के उतार-चढ़ाव को निभाने की क्षमता पैदा करनी चाहिए।

कोर्ट ने अमेरिकी ग्रीन कार्ड धारक महिला को बच्चों के साथ वापस अमेरिका लौटने का निर्देश देते हुए कहा कि अगर वह ऐसा नहीं करती हैं तो यूएस मिशन बच्चों को अपने संरक्षण में ले लेगा। जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस अजय रस्तोगी ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा, ‘पति-पत्नी हर रिश्ते में होनेवाले तात्कालिक झगड़ों से बाहर निकल जाते हैं, न कि त्वरित भावनाओं के ज्वार में आकर इसे और बढ़ाते हैं।

पैरंट्स सिर्फ बच्चों के केयरटेकर नहीं होते हैं, लेकिन बच्चों की सामाजिकता के विकास, भावनात्मकता, समझ-बूझ और शारीरिक देखभाल का भी महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। इसके लिए पैरंट्स को आपसी सहयोग के जरिए खुशहाल घर बनाने की कोशिश करनी चाहिए।’

NRI महिला को बच्चों के साथ अमेरिका लौटने का निर्देश
बेंच अमेरिका में रहनेवाले एनआरआई कपल के तलाक के बाद बच्चों की कस्टडी मामले की सुनवाई कर रहा था। कोर्ट ने महिला को दोनों बच्चों के साथ अमेरिका लौटने का निर्देश दिया। दोनों ही अमेरिकी नागरिक हैं, लेकिन तलाक विवाद के बाद महिला बच्चों को लेकर भारत आ गई थीं।

कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘तलाक और कस्टडी का संघर्ष दलदल में फंसने की तरह है। मासूम बच्चे इस संघर्ष से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं और इसे देखना दर्दनाक अनुभव है। बच्चे पैरंट्स की होनेवाली कानूनी और मनौवैज्ञानिक लड़ाई में बुरी तरह फंस जाते हैं।’

इस केस में अमेरिका में रहनेवाले पति-पत्नी दोनों ग्रीन कार्ड होल्डर्स हैं। अपने 7 साल के बेटे और 5 साल की बेटी की कस्टडी का विवाद 2016 से चल रहा है। अमेरिका में कोर्ट में मामला दायर रहने के दौरान ही महिला अपने बच्चों के साथ भारत लौट आई थी। 2017 में भारत लौटने के बाद से महिला ने अमेरिका जाने से इनकार कर दिया था।

IDBI Bank के निजीकरण के विरोध में 30 मार्च को भूख हड़ताल करेंगे कर्मचारी

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से आईडीबीआई बैंक को प्राइवेट बैंक का दर्जा देने के बाद बैंक के कर्मचारी इसके खिलाफ हो गए हैं। आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों ने वेतन और सेवा की सुरक्षा के साथ दूसरे राष्ट्रीयकृत बैंक में शिफ्ट करने की मांग की है।

बैंक का निजीकरण करने के विरोध में दी ऑल इंडिया आईडीबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIIDBIOA) ने एक दिवसीय भूख हड़ताल का ऐलान किया है। AIIDBIOA के सचिव एवी विट्ठल की ओर से बैंकिंग सचिव राजीव कुमार, रीजनल लेबर कमिश्नर (सेंट्रल) और चीफ लेबर कमिश्नर (सेंट्रल) को भेजे गए पत्र में 30 मार्च को भूख हड़ताल करने की बात कही गई है।

इस पत्र में विट्ठल ने RBI की ओर से बैंक को री-कैटिराइज करने पर चिंता जताई गई है। पत्र में AIIDBIOA ने सरकार, बैंक और एसोसिएशन के बीच एक एमओयू साइन करने की मांग की गई है। यह एमओयू बैंक में काम कर रहे मौजूद कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति तक सेवा शर्तों और सुविधाओं को लेकर होगा।

ये भी हैं कर्मचारियों की मांगें
पत्र में कर्मचारियों ने ट्रांसफर को लेकर आने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए IDBI Bank के बीच AIIDBIOA एक द्विपक्षीय समझौता करने की मांग रखी है। साथ ही एसोसिएशन ने तेजी से बढ़ते नॉन परफॉर्मिंग एसेट (NPA) और विशाल बट्टे खाते को देखते हुए जवाबदेही तय करने की मांग रखी है।

आपको बता दें कि दिसंबर 2018 तक बैंक का एनपीए बढ़कर 29.67 फीसदी तक पहुंच गया है। चालू वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में बैंक का बैड लोन के रूप में 4185.48 करोड़ रुपए बकाया चल रहा है।

इसलिए मिला प्राइवेट बैंक का दर्जा
दरअसल भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की ओर से IDBI बैंक में 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के कारण RBI ने इसका निजी क्षेत्र के बैंक की श्रेणी में रख दिया है। LIC की ओर से IDBI बैंक में 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की प्रक्रिया जनवरी में पूरी हुई है। RBI ने 21 जनवरी 2019 से IDBI बैंक को निजी क्षेत्र के बैंक का दर्जा दिया है।

इसके अलावा खराब परफॉर्मेंस के कारण IDBI बैंक को RBI ने तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई यानी prompt corrective action (PCA) के फ्रेमवर्क में डाल दिया है। इस कारण बैंक पर नए कर्ज देने, नई शाखा खोलने, वेतन में बढ़ोतरी न करने जैसे प्रतिबंध लग गए हैं।

भारत में जनवरी से मार्च के बीच विदेशी निवेश दो साल के पीक पर

मुंबई। इस साल जनवरी से मार्च के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) दो साल के बाद तिमाही आधार पर सबसे अधिक निवेश करने की तरफ बढ़ रहे हैं। बीजेपी के नेतृत्व में केंद्र में अगली सरकार बनने की उम्मीद पर उन्होंने इधर भारत में निवेश बढ़ाया है। अमेरिका में ब्याज दरों में अनुमान से कम बढ़ोतरी के कारण इमर्जिंग मार्केट्स में भी विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है और इसका फायदा भी भारत को मिल रहा है।

भारत में अधिकतर विदेशी निवेश एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) के रास्ते हो रहा है। इस निवेश को टिकाऊ नहीं माना जाता, लेकिन स्टॉक एक्सचेंज पर विदेशी निवेशकों इधर बल्क डील भी कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स ने बताया कि एक्टिव मनी भी भारतीय बाजार में आ रही है। उनका कहना है कि लोकसभा चुनाव तक के दो महीने के दौरान विदेशी निवेशकों की तरफ से यहां और पैसा आ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो सेंसेक्स और निफ्टी नए शिखर पर पहुंच सकते हैं।

एफपीआई ने जनवरी के बाद से अब तक 30,500 करोड़ रुपये भारत में लगाए हैं। यह जनवरी-मार्च 2017 के 44,200 करोड़ के बाद सबसे अधिक विदेशी निवेश है। डोएचे इक्विटीज इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और हेड प्रतीक गुप्ता ने कहा, ‘इस साल एशिया के दूसरे देशों की तुलना में भारतीय शेयर बाजार का रिटर्न कम रहा था और इधर बीजेपी के फिर से केंद्र की सत्ता में आने की संभावना बढ़ी है। इन वजहों से भारतीय बाजार में तेजी आई है।

उधर, अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी रुकने का फायदा कई देशों के शेयर बाजार को हुआ है। इस वजह से इमर्जिंग मार्केट्स में विदेशी निवेश बढ़ रहा है।’ गुप्ता ने यह भी बताया कि पुलवामा में आतंकवादी घटना के बाद भारत के पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर हवाई हमले के बाद सबसे पहले एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स ने भारत में निवेश बढ़ाना शुरू किया था। गुप्ता ने कहा कि उसके बाद बड़ी बल्क डील के जरिये काफी विदेशी रकम भारतीय बाजार में आई है।

सेंसेक्स और निफ्टी हाल ही में 6 महीने के शिखर पर पहुंचे थे। इस साल इनमें डॉलर टर्म में 4.8 पर्सेंट की तेजी आई है, जबकि चीन और हॉन्गकॉन्ग के शेयर बाजार में इस दौरान 7-24 पर्सेंट की उछाल दिखी है। MSCI इंडिया इंडेक्स इस साल अब तक 4.2 पर्सेंट चढ़ा है और MSCI EM इंडेक्स में इस बीच 8.9 पर्सेंट की उछाल दिखी है।

अगले साल से भारत की सड़कों पर दौड़ेंगी Tesla की कारें

नई दिल्ली। दिग्गज इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी Tesla की कारें जल्द ही भारत की सड़कों पर भी दौड़ती दिखाई देंगी। टेस्ला के सीईओ Elon Musk ने कहा है कि इस साल या अगले साल तक कंपनी निश्चित रूप से भारत में एंट्री कर लेगी। हालांकि, करीब 10 महीने पहले उन्होंने टेस्ला की भारत में एंट्री को लेकर हो रही देरी के लिए यहां की पॉलिसी को दोषी ठहराया था।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार देश में टेस्ला को फैक्ट्री शुरू करने के लिए लुभा रही है। हालांकि, मस्क ने मई 2018 के ट्विटर पोस्ट में ‘कुछ चुनौतीपूर्ण सरकारी नियमों’ को बाधा के रूप में इंगित किया था। एक साल पहले उन्होंने स्थानीय सुविधा के निर्माण तक इंपोर्ट पेनल्टी और अन्य प्रतिबंधों पर अस्थायी छूट की मांग की थी। अब उन्होंने कहा है, ‘इस साल वहां (भारत) होंगे, अगर ऐसा नहीं हुआ तो अगले साल निश्चत रूप से होंगे।’

इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनियों के लिए भारत तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है। हालांकि, जनसंख्या के मामले में चीन के लगभग बराबर वाला भारत इलेक्ट्रिक गाड़ियों के इस्तेमाल में उससे काफी पीछे है। ब्लूमबर्ग एनईएफ के डेटा के मुताबिक, चीन के 1.35 मिलियन यानी 13.50 लाख की तुलना में भारत में सिर्फ 6000 पैसेंजर इलेक्ट्रिक वीइकल सड़कों पर हैं।

बता दें कि टेस्ला अमेरिका की इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी है। यह हाई परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स इलेक्ट्रिक कारें बनाने के लिए जानी जाती है। भारत में इसकी कारें 35 लाख से 55 लाख रुपये के बीच में आने वाली हैं। इलेक्ट्रिक कारों के अलावा कंपनी एनर्जी सेक्टर में भी काम करती है।