कोटा। मानसून की पहली अच्छी बारिश ने 1100 करोड़ रुपए की लागत से बनी मुकंदरा चेचट टनल के निर्माण की गुणवत्ता और ड्रेनेज व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश के बाद टनल के अंदर कई जगह 2 से 3 फीट तक पानी भर गया।
दीवारों से लगातार पानी रिसने के कारण टनल के भीतर पानी की धार गिरती दिखाई दी। हालात ऐसे बने कि टनल के आसपास यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई और गोपालपुरा की तरफ जाने वाला रास्ता ट्रैफिक के लिए खोलकर रखा गया।
जांच में सामने आया कि टनल में बारिश के पानी की निकासी के लिए बनाया गया ड्रेनेज सिस्टम अपेक्षित क्षमता से कम है। पानी की आवक ज्यादा होने पर ड्रेनेज सिस्टम उसे तेजी से बाहर नहीं निकाल सका। इसके साथ ही पंपिंग व्यवस्था भी दबाव में आ गई। यही वजह रही कि बारिश रुकने के बाद भी टनल में पानी जम रहा।
सीपेज के लिए बनाए गए हैं टैंक: एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संदीप अग्रवाल ने बताया कि टनल में सीपेज आ गया था। सीपेज को निर्माण के दौरान 2023 में ही आइडेंटिफाई किया गया था। यह देश में बनी अन्य टनलों में आम बात है. सीपेज के पानी के लिए अंडरग्राउंड में टैंक बनाए गए हैं। पूरा सिस्टम सीपेज के पानी को टैंक तक पहुंचाने के लिए बनाया गया है।
टैंकों में पानी एकत्रित होता है और यहां से पंप के जरिए बाहर निकाल दिया जाता है। टनल में पानी की आवक बढ़ गई थी, जबकि पंपिंग क्षमता कम थी. इसे पहले ही जांच लिया गया था और पंपिंग क्षमता बढ़ाने का निर्णय लिया गया था।
इसमें समय लगेगा, लेकिन सीपेज का पानी लगातार बढ़ रहा था, इसलिए टनल में पानी आया। टनल के स्ट्रक्चर को सीपेज के पानी से कोई नुकसान नहीं है और किसी तरह का खतरा भी नहीं है। एनएचएआई ने टनल एक्सपर्ट्स की सलाह पर अत्याधुनिक टनल तैयार की है।
टनल में पानी भरने की वजह को लेकर NHAI ने सफाई दी है। प्रोजेक्ट डायरेक्टर संदीप अग्रवाल ने मीडिया को बताया है, बारिश सामान्य से काफी ज्यादा होने के कारण पहाड़ियों से सीपेज के जरिए पानी टनल के अंदर आया। मौजूदा पंपिंग सिस्टम इतनी मात्रा में पानी बाहर निकालने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ।
अब NHAI ने पानी निकासी की क्षमता बढ़ाने का फैसला किया है। टनल की दोनों ट्यूब में करीब 30 पंप लगे हुए हैं। इनमें 10 से 25 हॉर्स पावर क्षमता वाले पंप शामिल हैं। कुछ पंपों की क्षमता बढ़ाकर 35 हॉर्स पावर तक की जाएगी, ताकि तेज बारिश के दौरान अंदर आने वाले पानी को तेजी से बाहर निकाला जा सके।

