हल्दी की फसल को नुकसान की आशंका से कीमतों में और मंदे की संभावना नहीं

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नई दिल्ली। Turmeric Price: वायदा बाजार में हल्दी की कीमतों में गत सप्ताह सुधार रहा। मगर लोकल एवं निर्यातक मांग कम रही। उल्लेखनीय है कि चालू सीजन के दौरान उत्पादक केन्द्रों पर पानी की कमी के कारण फसल की स्थिति अच्छी नहीं मानी जा रही है।

निजामाबाद लाइन को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में बिजाई की गई फसल को नुकसान की आशंका व्यक्त की जा रही है क्योंकि बिजाई के पश्चात पौधों को आवश्यकतानुसार पानी नहीं मिल रहा है जिस कारण से पौधे सूखने लगे हैं।

हालांकि बिजाई समय हल्दी के दाम ऊंचे होने के कारण देश में इस वर्ष बिजाई क्षेत्रफल 25/30 प्रतिशत तक बढ़ने के समाचार है। लेकिन प्रतिकूल मौसम के चलते उत्पादन आशानुरूप नहीं आएगा ऐसा व्यापारियों का मानना है।

गत वर्ष भी देश में हल्दी की बिजाई का क्षेत्रफल 30/35 प्रतिशत बढ़ा था लेकिन प्रतिकूल मौसम के चलते उत्पादन प्रभावित रहा और वर्ष 2026 के दौरान देश में हल्दी का उत्पादन 80/85 लाख बोरी तक ही सिमट गया। जबकि वर्ष 2025 में उत्पादन 90/95 लाख बोरी का माना गया था।

उत्पादक केन्द्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार निजामाबाद लाइन पर अभी तक फसल की स्थिति अच्छी है लेकिन बिजाई के पश्चात पानी की कमी के चलते इरोड लाइन के अलावा महाराष्ट्र के सांगली, नांदेड, बसमत, हिंगोली, लाइन पर फसल को नुकसान की आशंका व्यक्त की जा रही है।

आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में भी बारिश की कमी रही है। सूत्रों का कहना है कि ट्यूबवैल सिंचित क्षेत्रों में फसल अच्छी आएगी मगर वर्षा आधारित क्षेत्रों में फसल को अवश्य ही नुकसान रहेगा।

चालू सीजन के दौरान हल्दी के दाम रिकॉर्ड स्तर पर बोले गए क्योंकि उत्पादन कम रहने के अलावा स्टॉक भी कम रह जाने के कारण हाजिर में माल की सप्लाई प्रभावित रही। जिस कारण अगस्त माह के दौरान हल्दी के दामों ने रिकॉर्ड स्तर छू लिया और दिल्ली बाजार में हल्दी सिंगल पॉलिश गट्ठा का भाव 194/195 रुपए बन गया था।

रिकॉर्ड भाव बनने के पश्चात मंडियों में मुनाफावसूली बिकवाली का दबाव देखा गया साथ ही ऊंचे भावों पर मांग भी प्रभावित रही जिस कारण से सितम्बर माह में भाव धीरे-धीरे घटने शुरू हो गए और गत सप्ताह दिल्ली बाजार में भाव घटकर 185/186 रुपए पर आ गए है। मगर चालू सप्ताह के दौरान भाव फिर बढ़कर 187/188 रुपए होगा।

आवक: उत्पादक केन्द्रों पर स्टॉक कम रह जाने के कारण मंडियों में आवक काफी कम रही गई है। इरोड मंडी में हल्दी की दैनिक आवक 1500/2000 बोरी की रही जबकि निजामाबाद में आवक 400/500 बोरी की रही। वारंगल एवं दुगीराला में आवक 200/300 बोरी की रही। सूत्रों का मानना है कि महाराष्ट्र की मंडियों में आवक कम रही।

तेजी-मंदी का पूर्वानुमान: सूत्रों का मानना है कि खपत की तुलना में स्टॉक कम रह जाने के कारण आगामी दिनों में हल्दी के भाव एक बार फिर बढ़ सकते हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों पर हल्दी का स्टॉक 35/40 लाख बोरी के आसपास माना जा रहा है। जोकि नई फसल आने तक पर्याप्त नहीं है। नई फसल की आवक फरवरी माह में शुरू होने के अनुमान है।

निर्यात: मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2026-27 के प्रथम तिमाही में हल्दी का निर्यात मात्रात्मक रूप में 8 प्रतिशत अधिक हुआ है और निर्यात भाव अधिक मिलने के कारण आय में 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार अप्रैल-जून- 2026 में हल्दी का निर्यात 51987 टन का किया गया और निर्यात से प्राप्त आय 875.70 करोड़ की रही। जबकि अप्रैल-जून- 2025 में निर्यात 47950 टन का किया गया था और प्राप्त आय 727 करोड़ की रही थी वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के दौरान हल्दी का कुल निर्यात 175896 टन का किया गया और निर्यात से प्राप्त आय 2885.39 करोड़ की रही।